NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बारामूला की रातें : वो ख़त लिखे जा रहे हैं जिनको भेजना मुमकिन ही नहीं है!
जम्मू-कश्मीर में घेराबंदी पारिवारिक संबंधों और निजी जीवन पर भारी असर डाल रही है।
दानिश बिन नबी
20 Sep 2019
Translated by महेश कुमार
cartoon click

कश्मीर में लगाई गई पाबंदी को एक महीने से अधिक का समय हो गया है, जिसकी वजह से जीवन का हर पहलू प्रभावित हुआ है। अर्थव्यवस्था बिखर गई है, कॉलेज और विश्वविद्यालय बंद हैं, कश्मीर से बाहर पढ़ रहे अपने बच्चों से माता-पिता पूरी तरह से कट गए हैं और बच्चे घाटी तक में अपने परिवारों से बात नहीं कर पा रहे हैं। एक मेडिकल इमरजेंसी जैसी स्थिति भी है, जिसका संकेत अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों से मिलता है, और जिससे दिल्ली में बैठी राजनीतिक सत्ता इनकार कर रही है।

इस निराशा भरी स्थिति में, समाज का एक ऐसा वर्ग भी है जो अपने को बहुत ही अकेला और उदास महसूस कर रहा है, और वे हैं कश्मीर के युवा। जिसमें विवाहित, बॉयफ़्रेंड-गर्लफ्रेंड, जिनकी सगाई हो गयी है या फिर जिनकी इस दौरान सगाई या शादी होने वाली थी, अगर 5 अगस्त को होने वाली घटना नहीं हुई होती। उस दिन, यानी 5 अगस्त को सुरक्षा के नाम पर कश्मीर की तालाबंदी कर दी गई जिसने घाटी के भीतर और देश और जम्मू-कश्मीर के बीच संचार को पूरी तरह समाप्त कर दिया था। 

संचार पर लगी पाबंदी के दौरान कश्मीर में रह रहे माता-पिता ने जब भी अपने बच्चों के साथ संपर्क करने का भरसक प्रयास किया, वह अक्सर व्यर्थ होता, इसी तरह युवा लोग भी अपने प्रियजनों तक पहुंचने के लिए काफ़ी कोशिश करते रहे हैं। उन युवाओं की कहानी जिन्हें आपस में संवाद करने में मुश्किल हो रही है उनके लिए यह वक़्त अब एक पुनर्जागरण की तरह है: एसएमएस की जगह पत्र-लेखन की कला अब वापस आ रही है, क्योंकि राज्य के आदेश पर फ़ोन कॉल और व्हाट्सएप को ख़ारिज कर दिया गया है। कलाम से ख़त लिखने का पुराना तरीक़ा वापस आ गया है, और इन ख़तों के ज़रिये सभी युगल उम्मीद जता रहे हैं कि उनका प्यार बरक़रार रहेगा।

उत्तरी कश्मीर में मौजूद बारामूला के हर्रिस बताते हैं, "4 अगस्त से 22 अगस्त तक, मुझे उसकी कोई ख़बर नहीं थी। मैं दो बार उसके घर गया लेकिन उससे मिल नहीं पाया। अंत में, मैंने उसके एक क़रीबी दोस्त से संपर्क किया, जो उसके घर के पास रहती है। 21 अगस्त को हर्रिस और सना की शादी होने वाली थी, लेकिन संचार पर पाबंदी और अनिश्चितता और निराशा के उस माहौल के चलते शादी टाल दी गई थी, जो माहौल 5 अगस्त से  जम्मू-कश्मीर की विशेष दर्जे को अचानक निरस्त करने घाटी में पैदा हो गया था।

हर्रिस सना तक केवल एक बार पहुंच सका, और वह भी उसकी दोस्त के माध्यम से, जिसने सना को सूचित किया कि वह उसके घर के बाहर उसका इंतज़ार कर रहा है। यह मीटिंग इस मायने में जोखिम से भरी थी, क्योंकि कश्मीर का पितृसत्तात्मक समाज आमतौर पर मंगेतर बने युगल को बिना किसी की रह्नुमाई में मिलने की इजाज़त नहीं देता है। इसलिए, पिछले कुछ हफ़्तों में, हर्रिस ने सना के लिए कई पत्र लिखे, लेकिन यहाँ इसमें एक मोड़ है। जब तक यहां पाबंदी और आने जाने पर रोक लगी है, इन लिखे पत्रों को भेजने का कोई साधन मौजूद नहीं है। हर्रिस ने बताया, “जब हम उसके निवास के बाहर कुछ मिनटों के लिए मिले, तो केवल एक चीज़ थी जिसका हमने आदान-प्रदान किया, और वे थे हमारे द्वारा लिखे गए ख़त। न उसने कुछ कहा और ना मैंने। हमारी आंखें ही एक दूसरे से बात करती रहीं।”

सगाई वाले युगलों की तरह, विवाहित जोड़ों को भी अपने जीवन साथियों से संपर्क करना मुश्किल हो रहा है। कश्मीर के एक एक्जीक्यूटिव ताहिर मसूद ने बताया, “मैं सिंगापुर की यात्रा करने जा रहा हूँ। मेरी पत्नी को नहीं पता है कि मैं सिंगापुर की यात्रा के लिए जा रहा हूं। मैंने अपनी पत्नी के लिए अपने वीडियो से भरा एक पेन-ड्राइव भेजा है।” 

मसूद ने अपने दफ़्तर का काम निबटाने के लिए कश्मीर से 17 अगस्त को रवानगी ली थी और वे काम ख़त्म कर 25 अगस्त तक घर वापस लौटने वाले थे। मसूद ने बताया, "लेकिन मुझे अचानक एक ज़रूरी बैठक के लिए सिंगापुर जाना पड़ा और घर में इसकी सूचना देने के लिए कोई फ़ोन काम नहीं कर रहा था। इसलिए, मैंने इसके एवज़ में वीडियो बना कर पत्नी को भेजने का बेहतर तरीक़ा सोचा।” जब मसूद दिल्ली में थे, जहाँ उनकी कंपनी का दफ़्तर है, उन्होंने सोपोर, जहाँ उनकी पत्नी अपने बाक़ी परिवार के साथ रहती हैं, में अपना वीडियो भेजने के लिए घाटी जाने वाले अन्य यात्रियों की मदद ली।

सरकार ने जम्मू-कश्मीर में चरणबद्ध तरीक़े से संचार के लिए केवल लैंडलाइन को बहाल किया है। जबकि घाटी और बाहर की दुनिया के बीच लगभग 15 दिनों तक कोई संबंध नहीं था, मोबाइल कनेक्टिविटी को बहाल करने में तो और भी अधिक समय लग रहा है। हालांकि जम्मू-कश्मीर के अन्य हिस्सों में, जो अब एक नव उद्‍घाटित केंद्र शासित प्रदेश है, वहां सेलुलर फ़ोन कनेक्शन का आनंद लिया जा रहा है, यह पाबंदी केवल कश्मीर घाटी क्षेत्र में जारी है।

ऐसा माना जा रहा है कि नई दिल्ली द्वारा मुस्लिम बहुल राज्य जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को रद्द करने के बाद से घाटी में सैंकड़ों शादियां रद्द कर दी गई हैं। दक्षिण कश्मीर के बिजबेहारा की निगीना ने बताया, “मेरा होने वाला पति, समीर, दिल्ली में है। कश्मीर में संचार पर लगी पाबंदी के बाद से हमने आपस में बात नहीं की है।”' वे 5 अगस्त से अपने मंगेतर के साथ संपर्क करने की कोशिश कर रही हैं।

घाटी में लैंडलाइन फ़ोन इस हद तक बंद पड़े रहते हैं, कि निगीना के मंगेतर ने इस नम्बर को अपने मोबाइल पर दर्ज करने की ज़रूरत ही महसूस नही की, न ही उस नंबर कहीं लिखा और न ही याद किया था, ऐसी स्थिति भारत के किसी भी कोने में नहीं है। इसलिए, हालांकि उसके परिवार के लैंडलाइन कनेक्शन को काफ़ी देर बाद बहाल किया गया है, फिर भी वह उस तक नहीं पहुंच सकी है। निगीना कहती हैं, "हमने कभी भी लैंडलाइन नंबरों का आदान-प्रदान नहीं किया क्योंकि हम दोनों के पास जियो सेलुलर नेटवर्क था।" अब, वह लोगों से अनुरोध कर रही हैं कि उनका लैंडलाइन नंबर उनके मंगेतर तक पहुंचा दें। निगीना और समीर, जो अनंतनाग के हैं, सितंबर में शादी करने वाले थे। हालांकि, उनकी शादी को अब अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया है।

हालात का दूसरा पहलू

जिस तरह से आम कश्मीरी इस पाबंदी से पीड़ित हैं, उसी तरह संकट ग्रस्त केंद्र शासित प्रदेश में ‘शांति’ सुनिश्चित करने के लिए तैनात किए गए सरकारी बल हैं, वे भी अपने परिवारों और घरों से कटे हुए हैं। श्रीनगर के बटमालू क्षेत्र में, जहाँ एक चेकपॉइंट है वहां राहगीरों को चेकिंग के लिए रोका जाता है, पंजाब के एक मध्यम आयु वर्ग के केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) के अधिकारी कहते हैं, “मैंने 5 अगस्त के बाद से पंजाब में अपने परिवार के साथ बात नहीं की है। फिर वे बताते हैं कि सीआरपीएफ़ में मौजूद पदानुक्रम के हिसाब से उच्च पद पर बैठे अफ़सरों का अपने सगे संबंधियो से संवाद कैसे होता है। इस दो-स्टार सीआरपीएफ़ अधिकारी ने बताया, “फ़ोन केवल ऊंचे ओहदे के अधिकारियों के पास ही होते है। मेरी दो बेटियाँ हैं। मुझे उनकी कोई ख़बर नहीं है। मेरे बूढ़े माता-पिता और एक पत्नी है। ऐसा लगता है कि उनसे बात किए उम्र बीत गई है। 

मैं अपनी पत्नी को याद नहीं करता। लेकिन मुझे अपनी बेटियों की बहुत याद आती है। काश मैं जल्द ही घर वापस लौट पाता। मैं अपनी बेटियों को बताना चाहता हूं कि उनके पिता उन्हें बहुत याद करते हैं।" 

जहाँ तक अपने परिवार से संपर्क करने का सवाल है, तो सुरक्षा बलों के ये सभी जवान भी उसी नाव में सवार हैं।

दानिश बिन नबी कश्मीर के पत्रकार हैं।

J&K clampdown
Communication Clampdown
Couples Separated during clampdown
Marriages Called off in Valley

Related Stories

जम्मू-कश्मीर: राज्य में लागू कड़े प्रतिबंधों के बीच जल्दबाज़ी में प्रशासन ने गिलानी का अंतिम संस्कार किया

दो महीने में 5,000 करोड़ रुपये का नुकसान : कश्मीर चैंबर


बाकी खबरें

  • Mohan Bhagwat
    अनिल जैन
    संघ से जुड़े संगठन अपने प्रमुख मोहन भागवत की ही बातों को क्यों नहीं मानते?
    17 Dec 2021
    संघ प्रमुख की बातों के विपरीत अल्पसंख्यकों और दलितों पर हमले की जो घटनाएं होती हैं उसकी औपचारिक निंदा भी कभी संघ की ओर से नहीं की जाती है। आख़िर क्यों?
  • manikpur
    सौरभ शर्मा
    यूपी चुनाव: बुंदेलखंड से पलायन जारी, सरकारी नौकरियों का वादा अधूरा
    17 Dec 2021
    बेहिसाब खराब मौसम ने इस क्षेत्र में कृषि को अव्यवहारिक या नुकसान का सौदा बना दिया है, जियाके कारण नौकरियों की तलाश में युवाओं का बड़ा हिस्सा इस क्षेत्र से पलायन कर रहा जो चुनाव में एक प्रमुख मुद्दा…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 7,447 नए मामले, ओमिक्रॉन से अब तक 87 लोग संक्रमित 
    17 Dec 2021
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 47 लाख 26 हज़ार 49 हो गयी है।
  • Hindutva
    अशोक कुमार पाण्डेय
    हिंदू दक्षिणपंथियों को यह पता होना चाहिए कि सावरकर ने कहा था "हिंदुत्व हिंदू धर्म नहीं है"
    17 Dec 2021
    उन्हें यह भी पता होना चाहिए कि जैसे ही सावरकर ने हिंदुओं को 'अपने आप में एक राष्ट्र' कहा था, तो वे जातीय-धार्मिक आधार पर दो राष्ट्रों के सिद्धांत का प्रतिपादन करने वाले पहले व्यक्ति बन गये थे।
  • bank strike
    न्यूज़क्लिक टीम
    निजीकरण के खिलाफ़ बैंक कर्मियों की देशव्यापी हड़ताल
    16 Dec 2021
    यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने दो सरकारी बैंकों के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ 16 दिसंबर से दो दिन की देशव्यापी हड़ताल पर है । इसके तहत देशभर में बैंक कर्मी सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License