NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बीएचयू में हिंसा के चलते छात्रों को हॉस्टल खाली करने के लिए कहा गया
जहां एक तरफ पुरुष छात्रों को हॉस्टल खाली करने के लिए कहा गया है, महिला छात्रों को कड़ी निगरानी में रखा गया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
26 Sep 2018
BHU

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में अराजकता थमने का नाम नहीं ले रहीI कैंपस में हिंसा और आगज़नी के चलते प्रशासन ने अब कक्षाओं को अनिश्चितकाल तक स्थगित करने का निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय के छात्रों ने न्यूज़क्लिक को बताया कि हालात और खराब होने के डर से प्रशासन कक्षाओं को आगे भी बंद रख सकता है। 

विश्वविद्यालय में 24 सितम्बर से ही माहौल ख़राब हैI जब महिला छात्रों द्वारा किये जा रहे एक कार्यक्रम पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (एबीवीपी) के छात्रों ने कथित तौर पर हमला किया। 23 सितम्बर के बाद इस मामले में छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज़ की गयी। इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन का रवैया शर्मनाक रहा क्योंकि जब महिला छात्रों को पीटा जा रहा था तो वे मूक दर्शक बन खड़े रहे। इस मामले से विश्वविद्यालय अभी उबर भी नहीं पाया था कि हिंसा का एक दौर शुरू हो गया। कैंपस में मौजूद सुंदरलाल अस्पताल में रहने वाले मेडिकल के छात्रों और विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच झड़प हो गयी। 

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए बीएचयू की छात्रा अवंतिका तिवारी ने कहा कि "आर्ट्स के छात्रों और वहाँ रहने वाले डॉक्टरों के बीच झड़प तब शुरू हुई जब आर्ट्स के किसी छात्र के भाई को बिस्तर नहीं दिया गया। एक छोटी से बहस जल्द ही दो गुटों के हिंसक टकराव में तब्दील हो गयी।" इस वजह से 24 सितम्बर की पूरी रात से 25 सितम्बर की सुबह तक हालात ख़राब रहे।

एक और छात्र आकाश पांडेय ने कहा कि, "लगातार पत्थरबाज़ी हुई, कुछ छात्रों ने कॉन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट की इमारत को गुस्से में जला दिया, प्रशासन ने पहले लाठीचार्ज कर इसे दबाने की कोशिश लेकिन बाद में हालत पर काबू पाने के लिए पैरामिलिटरी फ़ोर्स को बुलाया गया।"

कैंपस में हालात गंभीर बने हुए हैं और छात्र डर के माहौल में जी रहे हैं, अवंतिका ने कहा कि, "हमें डर है कि कभी भी कुछ भी हो सकता है।" जहाँ एक तरह लड़कों के हॉस्टल खाली करवा दिया गया, वहीं महिला हॉस्टल की भारी निगरानी रखी जा रही है और महिलाओं को बाहर नहीं जाने दिया जा रहा। एक पुरुष छात्र ने न्यूज़क्लिक से कहा कि, "हमें ज़बरदस्ती बाहर निकाला गया, जिसने भी इसका विरोध किया उसे पीटा गया।"

कैंपस पर लगातार हो रही हिंसा से काफी लोगों को लग रहा है कि यह महिला सुरक्षा के मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए एबीवीपी और प्रशासन की एक चाल है। एक छात्र ने कहा कि, "हमें लगता है कि यह सब कुछ जानबूझकर करवाया जा रहा है, हम सब को यही लगता है किबिस्तर न मिलने जैसी छोटी सी बात पर इतने बड़े स्तर पर हिंसा हुई?"

छात्र ने कहा कि, "जब भी विश्वविद्यालय में शांतिप्रिय विरोध प्रदर्शन होते हैं, प्रशासन डरा हुआ महसूस करता है और छात्रों पर दमन करता हैI इस बार प्रशासन सब कुछ बंद कर लोगों को कैंपस से निकाल रहा है।"

न्यूज़क्लिक ने प्रशासन और पब्लिक रिलेशंस ऑफिसर (पीआरओ) से इस मुद्दे पर बात करने का प्रयास किया लेकिन दोनों ने ही कुछ भी कहने से मना कर दिया। विश्वविद्यालय में अराजकता बढ़ने से पढ़ाई के माहौल खराब होता है और छात्रों को यह भी नहीं पता कि पढ़ाई फिर से कब शुरू होगी। साथ ही त्योहारों के आने से छात्रों को यह भी डर है कि इस सब के बीच महिलाओं के मुद्दों को दबा दिया जायेगा। 

महिला छात्रों ने यह भी बताया कि 23 सितम्बर को हुई हिंसा के ज़िम्मेदार एबीवीपी के लोग एफआईआर होने के बावजूद आराम से कैंपस में घूम रहे हैं और वह हाल ही में एक सेमीनार में भी गए। हाल ही कुलपति के पास 23 तारीख की घटना की शिकायत करते हुए महिला छात्रों ने एक खत है जिसमें 100 दस्तखत हैं, लेकिन इस हिंसा के चलते उस मामले की जांच पर भी विराम लग गया है। 

BHU
students protest
voilence against women
ABVP

Related Stories

कार्टून क्लिक: उनकी ‘शाखा’, उनके ‘पौधे’

अलीगढ़ : कॉलेज में नमाज़ पढ़ने वाले शिक्षक को 1 महीने की छुट्टी पर भेजा, प्रिंसिपल ने कहा, "ऐसी गतिविधि बर्दाश्त नहीं"

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

लखनऊ विश्वविद्यालय: दलित प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ मुक़दमा, हमलावरों पर कोई कार्रवाई नहीं!

लखनऊ विश्वविद्यालय में एबीवीपी का हंगामा: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत चंदन का घेराव, धमकी

इफ़्तार को मुद्दा बनाने वाले बीएचयू को क्यों बनाना चाहते हैं सांप्रदायिकता की फैक्ट्री?

BHU : बनारस का शिवकुमार अब नहीं लौट पाएगा, लंका पुलिस ने कबूला कि वह तलाब में डूबकर मर गया

भारत में छात्र और युवा गंभीर राजकीय दमन का सामना कर रहे हैं 

बीएचयू: लाइब्रेरी के लिए छात्राओं का संघर्ष तेज़, ‘कर्फ्यू टाइमिंग’ हटाने की मांग

बलात्कार को लेकर राजनेताओं में संवेदनशीलता कब नज़र आएगी?


बाकी खबरें

  • लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव: पश्चिम से चली बदलाव की हवा के पूर्वांचल में आंधी में तब्दील होने के आसार
    02 Mar 2022
    वैसे तो हर इलाके की और हर फेज के चुनाव की अपनी विशिष्ठतायें हैं, लेकिन सच यह है कि इस चुनाव में-किसानों की तबाही, बेरोजगारी, महंगाई, सामाजिक न्याय, बुलडोजर राज का आतंक- कुछ ऐसे कॉमन मुद्दे उभर गए हैं…
  • election
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव 2022 : सामाजिक ध्रुवीकरण, जातीय विभाजन और नज़रअंदाज़ होते मुद्दे
    01 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश के चुनावों में सामाजिक ध्रुवीकरण और जातीय विभाजन के नाम पर वोट मांगने की ज़ोरदार कोशिश की गई वहीँ दूसरी तरफ जनता के बुनियादी मुद्दे नज़रअंदाज़ किए गए. आखिर किन मुद्दों पर जनता ने डाला है…
  • modi
    विजय विनीत
    बनारस की जंग: क्या टूट रहा पीएम मोदी का जादू!
    01 Mar 2022
    "बनारस और इस शहर की तहजीब बुद्ध, कबीर, रैदास, और तुलसीदास की सोच पर खड़ी हुई है। भाजपा के लोग उसे मज़हब के संकीर्ण दायरों में बांधने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके चलते पीएम का जादू बेअसर होता जा रहा है।"
  • SWIFT
    आशुतोष पाण्डेय
    स्विफ्ट भुगतान प्रणाली वास्तव में क्या है?
    01 Mar 2022
    रूस को वैश्विक भुगतान प्रणाली से अलग नहीं करने के लिए यूरोपीय संघ की आलोचना की गई थी। लेकिन अमेरिका और ब्रिटेन के साथ,  इस ब्लॉक ने अब यूक्रेन में रूस के युद्ध के आलोक में यह कठोर कदम उठाने का फैसला…
  • strike
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हिमाचल सरकार ने कर्मचारियों के धरना-प्रदर्शन, घेराव और हड़ताल पर लगाई रोक, विपक्ष ने बताया तानाशाही फ़ैसला
    01 Mar 2022
    इस चेतावनी के अनुसार जिस दिन कर्मचारी धरना प्रदर्शन करेंगे, उस दिन का उनका वेतन काटने के निर्देश दिए गए हैं। कानून का उल्लंघन करने पर तो उसी दिन संबंधित कर्मचारी को सस्पेंड कर दिया जाएगा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License