NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार: एक और आश्रयगृह पर उठे गंभीर सवाल
पटना के आसरा आश्रयगृह में दो महिलाओं की मृत्यु हुई, बिना पुलिस को जानकारी दिए उनका पोस्टमार्टम और एक महिला का दहासंस्कार भी कर दिया गयाI
मुकुंद झा
14 Aug 2018
bihar
Image Courtesy: प्रभात खबर

बिहार में पिछले एक माह रोज़ एक नए आश्रयगृह में यौनउत्पीड़न, यौन हिंसा, बलात्कार, हिंसा और अन्य गड़बड़ीयाँ समाने आ रही हैंI इसी क्रम में बिहार के एक और आश्रयगृह को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, वहाँ भी लापरवाही की ख़बरें सामने आ रही हैंI

पटना के राजीवनगर के चंद्रविहार इलाके में स्थित एक आश्रयगृह में रहने वाली दो महिलाओं की  शुक्रवार रात संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतकों की पहचान 17 साल की पूनम और 40 साल की बबली के रूप में की गयी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार डीएम कुमार रवि ने कहा कि दोनों मृत्यु बीमारी की वजह से हुई। दोनों महिला डायरिया व बुखार से पीड़ित थीं। उनके इलाज में लापरवाही हुई है।

इसे भी पढ़े : बिहार: बालिका सुधारगृह में मासूम बच्चियों से सालों से हो रहा था बलात्कार!

यह एक गंभीर सवाल है कि बिना पुलिस की जानकारी के दोनों मृतक महिलाओं का पोस्टमार्टम कर दिया जाता है और एक का आनफानन में अंतिम संस्कार भी कर दिया जाता हैI इस मामले में पुलिस ने आसरा आश्रयगृह  की संचालिका मनीषा दयाल के साथ ही, उनके साथी NGO अनुमय ह्यूमन रिसोर्सेज फाउंडेशन के सचिव चिरंतन कुमार को रविवार को ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया थाI कल उनकी कोर्ट में पेशी हुई और उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया हैI

इस मामले में एक के बाद एक ट्वीट करते हुए बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव कई गंभीर प्रश्न उठाए हैं, उन्होंने बिहार सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा हैI तेजस्वी ने कहा कि 2 युवतियों की संदिग्ध हालात में मौत हुई और बिना पुलिस को जानकारी दिए पोस्टमॉर्टम कर दिया गयाI अब जाँच की नौटंकी करने वाले पटना के डीएम और एसएसपी पहले कहाँ थेI पुलिस को खबर भी नहीं हुई, उसमें से  एक का दाह संस्कार भी कर दिया गयाI आगे लिखते है कि “पटना आश्रय गृह एक संगठित सेक्स रैकेट का अड्डा लग रहा हैI पड़ोसी कह रहे हैं कि बेसहारा लड़कियों के पास रातभर बड़ी-बड़ी गाड़ियाँ आती थींI रात भर शेल्टर होम से लड़कियों के रोने और चीखने की अवाजें आती थीं”I

 

पटना शेल्टर होम एक संगठित सेक्स रैकेट का अड्डा लग रहा है।पड़ोसी कह रहे है बेसहारा लड़कियों के पास रातभर बड़ी-बड़ी गाड़ियाँ आती थी।

2 युवतियों की संदिग्ध हालात में मौत हुई है।बिना पुलिस को जानकारी दिए पोस्ट्मॉर्टम हुआ।

अब DM/SSP वहाँ घंटो जाँच की नौटंकी कर रहे है, पहले कहाँ थे?

— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) August 13, 2018

इसे भी पढ़े ; बिहार: एक और नाबालिग का बलात्कार और निर्मम हत्या 

नीतीश के सुशासन पर गंभीर प्रश्न चिन्ह?

यहाँ गंभीर प्रश्न यह उठता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नाक के नीचे, मुख्यमंत्री आवास से बस थोड़ी  ही  दूर पर स्थित पटना के आसरा गृह में दो युवतियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई।

बिहार के पिछले विधानसभा चुनाव में एक नारा बहुत ही ज़ोर से गूंज रहा था की “बिहार में बहार है, फिर से नीतीश कुमार है”I आजकल यहाँ एक दूसरा नारा सुनाई दे रहा है “बिहार में रोज़ हो रहे बलात्कार है, फिर भी चुप है नीतीश कुमार”I ये नीतीश जी के सुशासन के दावों की पोल खोलता हैI

विपक्ष यह कह रहा हैं कि नीतीश जी कुर्सी के लालच में पना राजधर्म भूल गए हैI क्या अब उनकी  अंतरात्मा उनको कचोट नहीं रही? उन्होंने महागठबंधन को ये कहते हुए छोड़ा था कि उनके लिए राजद के साथ कानून व्यवस्था को ठीक से चला पाना मुश्किल हो रहा हैंI लेकिन हम देख रहे हैं कि जब से बिहार में नई सरकार आई है, तब से बिहार में हर तरह के अपराधों में वृद्धि हुई हैI इसका वे कोई भी उत्तर क्यों नहीं देते? उनकी ये आपराधिक चुप्पी मार कर बैठे है और बिहार में रोज़ बहन-बेटियों को दरिंदगी से नोचा जा रहा है लेकिन फिर भी सुशासन बाबू चुप हैंI”

इस आश्रयगृह को एक NGO अनुमय ह्यूमन रिसोर्सेज फाउंडेशन द्वारा चलाया जाता हैI आसरा नाम के इस आश्रयगृह  की संचालिका मनीषा दयाल ने महज़ दो साल में बेइंतिहा कामयाबी पाई और ज़मीन से आसमाँ तक सफर तय किया। कई लोग बताते हैं कि मनीषा एक एनजीओ में काम करती थीं, फिर मनीषा ने वहाँ से नौकरी छोड़कर अपनी संस्था बनायी और तेज़ी से राजनीतिक गलियारे में अपनी पहचान बनाईI

मनीषा दयाल

उनके बिहार के कई बड़े–बड़े राजनेताओं और अधिकारियों के साथ अच्छे सम्बंध थेI  उनके फेसबुक पर बिहार के कई बड़े नेताओं और अधिकारियों के साथ तसवीरें थीं, जो सोशल मिडिया पर वायरल हो रही हैंI अब उनका  फेसबुक अकाउंट बंद हो गयाI

देश में हो रहे कुकर्मो पर मोदी की चुप्पी लोगों को अब चुभ रही हैं-

देश भर के अलग–अलग भाजपा शासित राज्यों से आश्रय गृह से बलात्कार, दुर्व्यवहार और लापरवाही की घटनाएँ सामने आ रही हैंI चाहे वो बिहार मुज़फ्फरपुर बालिका गृह का कुकर्म हो, यूपी के देवरिया बालिका गृह में हुआ कुकर्म या फिर भाजपा शासित मध्य प्रदेश में मूक-बधिर बालिकाओं के आश्रय गृह में कुकर्म की बात हो, किसी पर भी को देश के इतिहास में सबसे  साहसिक और मज़बूत प्रधानमन्त्री मोदी जी की चुप्पी, अब देश के लोगों को खल रही हैI ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा बुलंद करने वाले पीएम मोदी तीन बड़े सूबों में बेटियों के साथ हुई इन भयावह घटनाओं पर चुप रहें, तो चुप्पी अखरती हैI

 

Bihar
Nitish Kumar
Bihar Shelter Home Rape case
BJP

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 


बाकी खबरें

  • Uddhav Thackeray
    सोनिया यादव
    लचर पुलिस व्यवस्था और जजों की कमी के बीच कितना कारगर है 'महाराष्ट्र का शक्ति बिल’?
    24 Dec 2021
    न्याय बहुत देर से हो तो भी न्याय नहीं रहता लेकिन तुरत-फुरत, जल्दबाज़ी में कर दिया जाए तो भी कई सवाल खड़े होते हैं। और सबसे ज़रूरी सवाल यह कि क्या फांसी जैसी सज़ा से वाक़ई पीड़त महिलाओं को इंसाफ़ मिल…
  • jammu and kashmir
    अशोक कुमार पाण्डेय
    जम्मू-कश्मीर : परिसीमन को लोकतंत्र के ख़िलाफ़ हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है बीजेपी
    24 Dec 2021
    बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर श्रीनगर में हिंदू मुख्यमंत्री बनवाने का जुनून सवार है। इसके लिए केंद्र सरकार कश्मीर घाटी व दूसरी जगह के लोगों को, ख़ुद के द्वारा पहुंचाए जा रहे दर्द को नज़रअंदाज़…
  • modi biden
    मोनिका क्रूज़
    2021 : चीन के ख़िलाफ़ अमेरिका की युद्ध की धमकियों का साल
    24 Dec 2021
    जो बाइडेन प्रशासन लगातार युद्ध की धमकी देने, निराधार आरोपों और चीन के विरुद्ध बहु-देशीय दृष्टिकोण बनाने के संकल्प को पूरा करने के साथ नए शीत युद्ध को गरमाए रखना जारी रखे हुए है।
  • unemployment
    रूबी सरकार
    लोगों का हक़ छीनने वालों पर कार्रवाई करने का दम भरने वाले मुख्यमंत्री ख़ुद ही छीन रहे बेरोज़गारों का हक़!
    24 Dec 2021
    इंटरमीडिएट, ग्रेजुएशन, एमबीए करने के बाद भी मध्यप्रदेश के आईटीआई में शिक्षक सिर्फ 7200 रुपये प्रति महीने में काम करने के लिए मजबूर हैं, राज्य सरकार की ओर से राहत देने की बात भी हवाबाज़ी ही साबित हुई…
  • modi yogi
    लाल बहादुर सिंह
    चुनाव 2022: अब यूपी में केवल 'फ़ाउल प्ले' का सहारा!
    24 Dec 2021
    ध्रुवीकरण और कृपा बाँटने का कार्ड फेल होने के बाद आसन्न पराजय को टालने के लिए, अब सहारा केवल फ़ाउल प्ले का बचा है। ऐन चुनाव के समय बिना किसी बहस के जिस तरह निर्वाचन कार्ड को आधार से जोड़ने का कानून बना…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License