NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बीजेपी सरकार की 'वैदिक शिक्षा बोर्ड' गठन करने की योजना
हालांकि संस्कृत और वेदों को अध्ययन के क्षेत्र के रूप में बढ़ावा देने में कोई समस्या नहीं है और बाद में सतत रोज़गार की उम्मीद हैI आधुनिक धर्मनिरपेक्ष और वैज्ञानिक शिक्षा के साथ इन्हें समान करने की अति उत्साही परियोजना काफी संदेहास्पद है।
अधिराज नायर
11 Jul 2018
javdekar
Image Courtesy: Indian Express

वैदिक शिक्षा बोर्ड की स्थापना और संस्कृत (सभी तर्कों के ख़िलाफ़) को प्रोत्साहित करने की चर्चा इस साल फिर हुई। ये सरकार वेद विद्यालयों से कक्षा10वीं और कक्षा 12वीं के समकक्ष वेद भूषण और वेद विभूषण योग्यता प्राप्त छात्रों को उच्च शिक्षा और रोज़गार के अवसर प्रदान करना चाह रही है। इकॉनोमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़ ये प्रतिक्रिया उज्जैन स्थित महर्षि संदीपनी राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान (एमएसआरवीवीपी) के प्रस्ताव में आई है।

इसके अलावा न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के अनुसार वेद विद्यालयों के संस्कृत के विद्यार्थियों को जल्द ही नेशनल इस्टिच्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग(एनआईओएस) से मान्यता मिलेगी। 6,000 से अधिक वेद विद्यालयों से पहले बैच को अक्टूबर 2018 की परीक्षा में उपस्थित होने की उम्मीद है।

हालांकि संस्कृत और वेदों को अध्ययन के क्षेत्र के रूप में बढ़ावा देने में कोई समस्या नहीं है, और बाद में सतत रोज़गार की उम्मीद है, आधुनिक धर्मनिरपेक्ष और वैज्ञानिक शिक्षा के साथ इन्हें एक समान करने की अति उत्साही परियोजना काफी संदेहास्पद है। इसे न केवल भारतीयों पर ब्रिटिश द्वारा लागू किए गए "विदेशी" शिक्षा प्रणाली को हमारी सभ्यता की पुरातनता में विकसित ज्ञान प्रणाली के साथ बदलने के प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए। इसके बजाय इसे वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर सीधे हमले के रूप में भी देखा जाना चाहिए जो छात्रों में आलोचनात्मक पड़ताल, तर्कसंगतता और वैज्ञानिक मनोवृति को बढ़ावा देता है। इसके अलावा यह 2014 से पहले भाजपा शासित राज्यों में और राष्ट्रीय स्तर पर 2014 के बाद स्कूलों के पाठ्यक्रम में होने वाले बदलावों के साथ भारत में स्कूल शिक्षा प्रणाली को भगवाकरण करने का प्रयास भी है।

योग गुरु बाबा रामदेव ने इससे पहले संस्कृत स्कूलों और कॉलेजों के साथ-साथ वेद विद्यालयों को बढ़ावा देने के लिए एक निजी वैदिक शिक्षा बोर्ड का गठन करने का सुझाव दिया था, लेकिन इस आधार पर एचआरडी मंत्रालय ने इसे ख़ारिज कर दिया था कि इस तरह के बोर्ड की मंज़ूरी से अन्य ग़ैर मान्यताप्राप्त स्कूल बोर्डों से इसी तरह के अनुरोध प्राप्त होंगे।

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ सूत्रों ने कहा कि सीबीएसई की तर्ज पर वैदिक शिक्षा बोर्ड शुरू करने का निर्णय संस्कृत विशेषज्ञों और गुरुकुल और वेद पाठशालाओं के प्रतिनिधियों की सिफारिश पर आधारित है जिन्होंने स्वामी गोविंददेव गिरि की अध्यक्षता में इस साल 17 जनवरी को बेंगलुरू में मिले थें। एचआरडी मंत्री स्मृति ईरानी के सलाहकार (भाषा) चामु कृष्ण शास्त्री भी इस बैठक में शामिल हुए थें।

02 मई 2016 की पीआईबी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक़:

"दूसरे संस्कृत आयोग का गठन 10 जनवरी 2014 को किया गया था ... [और] एक साल के भीतर अपनी सिफारिशें सौंपने को कहा गया लेकिन इसे जमा नहीं कर सका... और इस आयोग की अवधि 9-1-2015 को समाप्त हो गई। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 18-11-2015 को एन गोपालस्वामी ( चांसलर, राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, तिरुपति) की अध्यक्षता में संस्कृत के विकास के लिए दीर्घकालिक विचार और रोड मैप का सुझाव देने के लिए एक समिति गठित की थी। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट फरवरी 2016 में इस मंत्रालय को सौंपी।"

इसमें आगे उल्लेख किया गया कि सरकार "तीन संस्कृत डीम्ड यूनिवर्सिटी राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान (आरएसकेएस), नई दिल्ली, राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ (आरएसवी), तिरुपति, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ (एसएलबीएसआरएसवी), नई दिल्ली और एक स्वायत्त निकाय जैसे महर्षि संदीपनी राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान (एमएसआरवीवीपी), उज्जैन को फंडिंग कर संस्कृत भाषा, साहित्य और दुर्लभ शास्त्रों को विकसित करने,रक्षा, प्रसार, संरक्षण और विकास करने के लिए सभी तरह के क़दम उठा रही है।"

23 मार्च 2018 की एक अन्य पीआईबी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, "[गोपालस्वामी] समिति ने i) स्कूल शिक्षा, ii) उच्च शिक्षा, iii) स्कूल स्तर पर पारंपरिक शिक्षा, iv) कॉलेज स्तर पर पारंपरिक शिक्षा, v) वेद विद्या के लिएसिफारिशें, vi) वेद विद्या के संरक्षण, प्रचार और देखरेख, vii) वेद विद्या के विकास के लिए योजनाएं, viii) संस्कृत के विकास के लिए योजनाएं, ix) संस्कृत के विकास क़ायम रखने के लिए अष्टदाशी (अठारह परियोजनाएं)की सिफारिशें की थीं।"

इसमें आगे कहा गया है कि इस मंत्रालय ने मंत्रालय के मौजूदा नीति ढांचे के भीतर लागू करने योग्य सिफारिशों को लागू करने के लिए और इस मामले को देखने के लिए "सभी ब्यूरो/ संबंधित संगठनों के प्रमुखों को इन सिफारिशों को भेजा है। इसके अलावा नई शिक्षा नीति की तैयारी के लिए डॉ के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है जिसे 31-03-2018 तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।

भारत की 'पश्चिमीकृत' शिक्षा प्रणाली लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और अन्य दक्षिणपंथी संगठनों के लिए एक बड़ी मुसीबत रही है। उनके अनुसार प्राचीन वैदिक काल की 'गुरुकुल' व्यवस्था का पुनरुद्धार ज़रूरी है। उसके लिए 19वीं शताब्दी में लॉर्ड मैकॉले द्वारा शुरू की गई 'पश्चिमीकृत' शिक्षा प्रणाली भारतीय लोगों के नैतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक दिवालियापन के मुख्य कारणों में से एक है। हालांकि यह व्यापक रूप से स्वीकार किया गया है कि भारतीयों को निम्न स्तर की सरकारी नौकरियों में भर्ती करने के लिए पश्चिमी शिक्षा की आवश्यकता और भारतीय विषयों को साम्राज्य के प्रति अधिक आज्ञाकारी और सर्वसम्मत बनाने के क्रम में पश्चिमी मूल्यों के साथ इन लोगों की भारतीयता को प्रतिस्थापित करने के लिए मैकॉले ने औपनिवेशिक भारत में अंग्रेज़ी शिक्षा की शुरुआत की। हालांकि, यह बढ़ा चढ़ा कर नहीं बताया जा सकता है कि एक धर्मनिरपेक्ष (ग़ैर-धार्मिक) और आधुनिक (उस समय के संदर्भ में) शिक्षा प्रणाली शुरू करने से भारत के लोगों को मिला एक्सपोजर कितना महत्वपूर्ण था। न ही यह अस्वीकार किया जा सकता है कि शिक्षा प्राप्त करने में ब्राह्मण और अन्य उच्च जाति के लोगों के एकाधिकार को समाज के ऐतिहासिक रूप से वंचित वर्गों - दलितों, आदिवासियों, महिलाओं आदि को शिक्षा के क्षेत्र में शामिल करने से नज़रअंदाज़ किया गया था।

औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए उच्च जाति के लोगों के इस एकाधिकार का क्या कारण था? यह वही था जो आरएसएस और दक्षिणपंथी संगठन दशकों से विशेष 'गुरुकुल' प्रणाली की वकालत करते रहे थे। हालांकि पिछली कुछ सरकार विभिन्न परिमाण में इस मामले में सहानुभूति रखती थी। मोदी सरकार ने संबंधित वर्गों की निंदा और विरोध के बावजूद इस 'युग' में वापस जाने की लगातार कोशिश की है।

उच्च शिक्षा
मानव संसाधन विकास मंत्रालय
वैदिक शिक्षा

Related Stories

मौजूदा सरकार एक डरपोक सरकार है: छात्र नेता, पूजा शुक्ला

मणिपुर विश्वविद्दालय: राज्य सरकार ने कुलपती पर लगे आरोपों की जाँच की माँग की

मणिपुर विश्वविद्यालय: कुलपति के खिलाफ छात्र और शिक्षक भूख हड़ताल पर

आरक्षण खात्मे का षड्यंत्र: दलित-ओबीसी पर बड़ा प्रहार

विशेषज्ञों के मुताबिक उच्च शिक्षा आयोग संस्थानों की स्वायत्तता को प्रभावित करेगा

छात्र संगठनों ने कहा, वायवा वॉयस पर यूजीसी का पीछे हटना एक आंशिक जीत; पूर्ण रोलबैक तक लड़ना जारी रहेगा

छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपना आन्दोलन जारी रख सकते हैं : TISS की हड़ताल पर बॉम्बे हाई कोर्ट

दिल्ली में हज़ारों छात्रों और शिक्षकों ने उच्च शिक्षा को बचाने के लिए किया प्रदर्शन

निजीकरण, उच्च शिक्षा के व्यावसायिकरण के खिलाफ़, दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने सरकार कि नीतियों खिलाफ पांचदिवसीय हड़ताल शुरू की

तेरी, मेरी, सबकी बात (एपिसोड 6) - शिक्षा की बात


बाकी खबरें

  • कहीं आपकी भी यह समझ तो नहीं कि मुसलमानों की बढ़ती आबादी हिंदुओं को निगल जाएगी!
    अजय कुमार
    कहीं आपकी भी यह समझ तो नहीं कि मुसलमानों की बढ़ती आबादी हिंदुओं को निगल जाएगी!
    15 Jul 2021
    योगी सरकार की नई जनसंख्या नियंत्रण नीति का असली मकसद चुनावी राजनीति में ध्रुवीकरण के लिए हिंदू-मुस्लिम दीवार को और गहरा बनाना है।
  • मोदी की काशी यात्रा: बदहाल ‘विकास’ की हक़ीक़त परदे से ढांपने की कोशिश
    विजय विनीत
    मोदी की काशी यात्रा: बदहाल ‘विकास’ की हक़ीक़त परदे से ढांपने की कोशिश
    15 Jul 2021
    प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के समय नौकरशाही ने बनारस शहर के चेहरे पर चस्पा दाग़ को ढंकने के लिए पूरे शहर में जगह-जगह पैबंद लगा दिए। जितने भी खुले नाले थे, जिसकी बदबू और सड़ांध से समूचा शहर परेशान रहता…
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    खोरी गांव में घरों का तोड़े जाना जारी, राजद्रोह क़ानून पर मुख्य न्यायाधीश के अहम सवाल और अन्य ख़बरें
    15 Jul 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हम बात करेंगे खोरी गांव में जारी मकानों के गिराए जाने, राजद्रोह पर भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा उठाए सवाल और अन्य ख़बरों के बारे में।
  • भारत का संचालन किसके हाथ — शास्त्र/धर्मपुस्तकें या संविधान?
    सुभाष गाताडे
    भारत का संचालन किसके हाथ — शास्त्र/धर्मपुस्तकें या संविधान?
    15 Jul 2021
    विगत कुछ सालों के विभिन्न अदालतों के फैसलों की थोड़ी-सी बेतरतीब चर्चा करते हुए हम इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि अदालतों ने किस तरह समय-समय पर कानून की हिफाजत का काम किया है।
  • खोरी गांव : पुलिसिया दमन के बीच आज भी जारी रहा तोड़-फोड़, हरियाणा सरकार की पुनर्वास योजना हवा हवाई
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    खोरी गांव : पुलिसिया दमन के बीच आज भी जारी रहा तोड़-फोड़, हरियाणा सरकार की पुनर्वास योजना हवा हवाई
    15 Jul 2021
    फरीदाबाद खोरी गांव में लोग रोते रहे, चिल्लाते-बिलखते रहे किंतु प्रशासन एवं नगर निगम द्वारा चल रही तोड़फोड़ जारी रही। आज यानि गुरुवार को लगभग 1700 घरों को तोड़ दिया गया है। इसका विरोध कर रहे कुल 9 लोगों…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License