NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिंदू और दुर्गा ने इतिहास रचा, सबरीमाला मंदिर में प्रवेश कर पूजा-अर्चना की
केरल से लेकर देशभर के प्रगतिशील वर्ग ने बिंदू और कनक दुर्गा के प्रयास और साहस की प्रशंसा की है। लैंगिक बराबरी को लेकर मंगलवार को केरल की 35 लाख से ज्यादा महिलाओं ने मानव श्रृंखला भी बनाई थी।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
02 Jan 2019
सांकेतिक तस्वीर

केरल की दो महिलाओं द्वारा सबरीमाला मंदिर में प्रार्थना व दर्शन करने का दावा करने के बाद बुधवार को 'शुद्धिकरण' के नाम पर मंदिर बंद कर दिया गया है। ये महिलाएं उसी आयु वर्ग की हैं, जिस पर अब तक प्रतिबंध लगा हुआ था। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने 10-50 आयु वर्ग की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश करने पर लगी रोक को हटा दिया है, लेकिन इसके बावजूद कुछ संगठनों द्वारा न्यायालय के इस फैसले का विरोध किया जा रहा है। 

केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने इसकी पुष्टि की है। 

उन्होंने तिरुवनंतपुरम में कहा, "हां, यह सच है, महिलाओं ने मंदिर में दर्शन किए हैं।"

यह खबर फैलते ही, मुख्य पुजारी और मंदिर तंत्री ने एक बैठक की और पंडालम शाही परिवार के साथ बातचीत भी की और मंदिर को बंद करने का फैसला किया।

तंत्री कंतारारु राजीवेरु ने कहा कि मंदिर को 'शुद्धिकरण' के लिए बंद कर दिया गया है और बाद में फिर से खोला जाएगा।

बिंदू और कनक दुर्गा नाम की दो महिलाओं ने कहा कि उन्होंने तड़के 3.30 बजे मंदिर में दर्शन किए।

इससे पहले, 24 दिसंबर को दोनों ने दर्शन करने की कोशिश की थी, लेकिन 10 साल की लड़की से लेकर 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश करने का विरोध करने वाले पुरुष भक्तों ने दोनों को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया था। 

फोन पर मीडिया से बातचीत में बिंदू ने कहा कि वह दुर्गा के साथ देर रात करीब 1.30 बजे पंबा आधार शिविर पहुंची और कुछ पुलिस अधिकारियों के साथ सादे कपड़ों में मंदिर मार्ग पर ऊपर गई। 

बिंदू ने कहा, "सरकार ने हमें हर तरह की मदद का आश्वासन दिया था। हम आधार शिविर और मंदिर मार्ग पहुंचे और तड़के 3.30 बजे दर्शन किए।"

उन्होंने कहा कि दोनों पुलिस संरक्षण में मंदिर से लौटी। 

बिंदू ने कहा, "अब हम पंबा से गुजर चुके हैं और वापस जा रहे हैं और हमारे पास पुलिस सुरक्षा है। हमें कोई समस्या नहीं हुई। कुछ छिटपुट विरोध हुए, लेकिन और कोई दिक्कत नहीं हुई।" 

मंदिर तंत्री परिवार के एक सदस्य राहुल ईश्वर ने कहा कि अगर परंपरा का उल्लंघन हुआ है, तो फिर "शुद्धिकरण अनुष्ठान किया जाएगा।"

उन्होंने कहा, "अगर दोनों ने दर्शन किए हैं तो खुद के साथ ही छलावा किया है। अगर ऐसा हुआ है, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह केरल सरकार के एक संगठित प्रयास के अलावा और कुछ नहीं है।" 

आपको बता दें कि 28 सितंबर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी। लेकिन कट्टरवादी हिंदू समूहों द्वारा लगातार इस फैसले का विरोध किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह फैसला धार्मिक परंपरा के खिलाफ है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हमारी संस्कृति में महिला का स्थान आदरणीय है। यहां महिलाओं को देवी की तरह पूजा जाता है और मंदिर में प्रवेश से रोका जा रहा है। यह स्वीकार्य नहीं है।

केरल से लेकर देशभर के प्रगतिशील वर्ग ने बिंदू और कनक दुर्गा के प्रयास और साहस की प्रशंसा की है। लैंगिक बराबरी को लेकर कल मंगलवार को केरल की 35 लाख से ज्यादा महिलाओं ने मानव श्रृंखला भी बनाई थी। इतनी बड़ी तादाद में ये महिलाएं राष्ट्रीय राजमार्ग पर कंधा से कंधा मिलाकर खड़ी हुई। यकसारगोड़ के उत्तरी छोर से तिरुवनंतपुरम के दक्षिणी छोर तक ये मानव श्रृंखला करीब 620 किलोमीटर लंबी थी।

(इनपुट आईएएनएस)

Sabrimala Temple
sabrimala temple issue
Women Rights
Gender Equality
Kerala
kerala government
Pinarayi Vijayan

Related Stories

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

विशेष: क्यों प्रासंगिक हैं आज राजा राममोहन रॉय

केरल उप-चुनाव: एलडीएफ़ की नज़र 100वीं सीट पर, यूडीएफ़ के लिए चुनौती 

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

केरल: RSS और PFI की दुश्मनी के चलते पिछले 6 महीने में 5 लोगों ने गंवाई जान

सांप्रदायिक ताकतों से लड़ने के लिए आंबेडकर के संघर्षों से प्रेरणा लें : विजयन

सीपीआईएम पार्टी कांग्रेस में स्टालिन ने कहा, 'एंटी फ़ेडरल दृष्टिकोण का विरोध करने के लिए दक्षिणी राज्यों का साथ आना ज़रूरी'

बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?

सीताराम येचुरी फिर से चुने गए माकपा के महासचिव

भारतीय कैंपस के होस्टलों में ट्रांसजेंडर छात्रों के लिए अब भी जगह नहीं


बाकी खबरें

  • श्याम मीरा सिंह
    यूक्रेन में फंसे बच्चों के नाम पर PM कर रहे चुनावी प्रचार, वरुण गांधी बोले- हर आपदा में ‘अवसर’ नहीं खोजना चाहिए
    28 Feb 2022
    एक तरफ़ प्रधानमंत्री चुनावी रैलियों में यूक्रेन में फंसे कुछ सौ बच्चों को रेस्क्यू करने के नाम पर वोट मांग रहे हैं। दूसरी तरफ़ यूक्रेन में अभी हज़ारों बच्चे फंसे हैं और सरकार से मदद की गुहार लगा रहे…
  • karnataka
    शुभम शर्मा
    हिजाब को गलत क्यों मानते हैं हिंदुत्व और पितृसत्ता? 
    28 Feb 2022
    यह विडम्बना ही है कि हिजाब का विरोध हिंदुत्ववादी ताकतों की ओर से होता है, जो खुद हर तरह की सामाजिक रूढ़ियों और संकीर्णता से चिपकी रहती हैं।
  • Chiraigaon
    विजय विनीत
    बनारस की जंग—चिरईगांव का रंज : चुनाव में कहां गुम हो गया किसानों-बाग़बानों की आय दोगुना करने का भाजपाई एजेंडा!
    28 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के बनारस में चिरईगांव के बाग़बानों का जो रंज पांच दशक पहले था, वही आज भी है। सिर्फ चुनाव के समय ही इनका हाल-चाल लेने नेता आते हैं या फिर आम-अमरूद से लकदक बगीचों में फल खाने। आमदनी दोगुना…
  • pop and putin
    एम. के. भद्रकुमार
    पोप, पुतिन और संकटग्रस्त यूक्रेन
    28 Feb 2022
    भू-राजनीति को लेकर फ़्रांसिस की दिलचस्पी, रूसी विदेश नीति के प्रति उनकी सहानुभूति और पश्चिम की उनकी आलोचना को देखते हुए रूसी दूतावास का उनका यह दौरा एक ग़ैरमामूली प्रतीक बन जाता है।
  • MANIPUR
    शशि शेखर
    मुद्दा: महिला सशक्तिकरण मॉडल की पोल खोलता मणिपुर विधानसभा चुनाव
    28 Feb 2022
    मणिपुर की महिलाएं अपने परिवार के सामाजिक-आर्थिक शक्ति की धुरी रही हैं। खेती-किसानी से ले कर अन्य आर्थिक गतिविधियों तक में वे अपने परिवार के पुरुष सदस्य से कहीं आगे नज़र आती हैं, लेकिन राजनीति में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License