NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
बजट 2019: सरकारी संस्थानों को निजी हाथों में देने की तैयारी!
वित्त मंत्री ने बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ उपक्रमों (सीपीएसई) में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 51 प्रतिशत से नीचे लाने पर विचार करेगी।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
05 Jul 2019
बजट 2019: सरकारी संस्थानों को निजी हाथों में देने की तैयारी!

जैसी आशंका थी कि सरकार कई सरकारी संस्थान निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है, उसी कड़ी में आज बजट में अहम प्रस्ताव दिया गया।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ उपक्रमों (सीपीएसई) में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 51 प्रतिशत से नीचे लाने पर विचार करेगी। इस पर मामला दर मामला विचार होगा।

वित्त वर्ष 2019-20 का बजट पेश करते हुए सीतारमण ने कहा कि सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों में 51 प्रतिशत तक हिस्सेदारी रखने की नीति में संशोधन करने का फैसला किया है। इनमें सरकारी संस्थान भी शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि चुनिंदा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों का विनिवेश सरकार की प्राथमिकता है। एयर इंडिया के विनिवेश का एक बार फिर प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा वित्तपोषण पर एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि एक बड़े कदम के तहत एनपीए ट्रस्ट को पीएफआरडीए से अलग किया जाएगा।

(भाषा के इनपुट के साथ)

Budget 2019
government institutions
Privatisation
BJP Govt
Narendra modi
Finance minister Nirmala Sitharaman

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

'KG से लेकर PG तक फ़्री पढ़ाई' : विद्यार्थियों और शिक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं की सभा में उठी मांग

नई शिक्षा नीति ‘वर्ण व्यवस्था की बहाली सुनिश्चित करती है' 

छत्तीसगढ़ : युद्धग्रस्त यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों ने अपने दु:खद अनुभव को याद किया

शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने वाले सैकड़ों शिक्षक सड़क पर प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?

इस साल और कठिन क्यों हो रही है उच्च शिक्षा की डगर?

मोदी जी! विकलांग को दिव्यांग नाम नहीं, शिक्षा का अधिकार चाहिए

कोविड: मोदी सरकार के दो पर्याय—आपराधिक लापरवाही और बदइंतज़ामी

प्रधानमंत्री की 'परीक्षा पर चर्चा' से उन बच्चों की परेशानियों का कोई जिक्र नहीं जो चाय बेचकर परीक्षा देते हैं!


बाकी खबरें

  • loksabha
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    संसद में चर्चा होना देशहित में- मोदी, लेकिन कृषि क़ानून निरस्त करने का बिल बिना चर्चा के ही पास!
    29 Nov 2021
    सरकार की कथनी-करनी का फ़र्क़ एक बार फिर तुरंत देश के सामने आ गया। आज सुबह संसद सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया से कहा कि संसद में चर्चा होना देशहित में है और सरकार हर सवाल का जवाब…
  • TN
    श्रुति एमडी
    तमिलनाडु इस सप्ताह: राज्य सरकार ने सस्ते दामों पर बेचे टमाटर, श्रमिकों ने किसानों के प्रति दिखाई एकजुटता 
    29 Nov 2021
    इस सप्ताह, तमिलनाडु ने 52,549 करोड़ रूपये की 82 औद्योगिक परियोजनाओं के लिए सभी क्षेत्रों के प्रमुख उद्योगपतियों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये। इसके साथ ही सरकार ने थूथुकड़ी, नागापट्टिनम और…
  • alok dhanwa
    अनिल अंशुमन
    ‘जनता का आदमी’ के नाम ‘जनकवि नागार्जुन स्मृति सम्मान’: नए तेवर के कवि आलोक धन्वा हुए सम्मानित
    29 Nov 2021
    यह सम्मान 2020 में ही दिल्ली में नागार्जुन जी के स्मृति दिवस पर दिया जाना था। लेकिन कोरोना महामारी के कारण यह संभव नहीं हो सका। इसलिए महामारी प्रकोप के कम होते ही यह सम्मान आलोक धन्वा के प्रिय शहर…
  • Assam
    संदीपन तालुकदार
    असम: नागांव ज़िले में स्वास्थ्य ढांचा उपलब्ध होने के बावजूद कोविड मरीज़ों को स्थानांतरित किया गया
    29 Nov 2021
    महामारी ने स्वास्थ्य सुविधा संकट की परतें खोलकर रख दी हैं और बताया कि कैसे एम्स की सुविधा होने पर नागांव बेहतर तरीक़े से महामारी का सामना कर सकता था।
  • Bahgul River
    तारिक़ अनवर
    यूपी के इस गाँव के लोग हर साल बांध बना कर तोड़ते हैं, जानिए क्यों?
    29 Nov 2021
    हालांकि सरकार ने पिछले साल एक स्थायी जलाशय बनाने के लिए 57.46 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की थी, लेकिन इस परियोजना को अभी तक अमल में नहीं लाया गया है और इस साल भी मिट्टी से बांध बनाने की प्रक्रिया…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License