NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
भारत-पाक तनाव बढ़ने से कश्मीर में दहशत का माहौल
देशों के बीच बढ़ती शत्रुता आम कश्मीरियों पर भारी पड़ रही है, क्योंकि आला अधिकारी लोगों के बीच दहशत की भावना को कम करने में विफल हो रहे हैं।


सुहैल भट्ट
26 Feb 2019
Translated by महेश कुमार
जम्मू-कश्मीर
Image Courtesy: GNS

(यह आलेख   आज मंगलवार को भारत की कार्रवाई से पहले लिखा गया था लेकिन इसमें भारत की ओर से हुई कार्रवाई के स्पष्ट संकेत मिलते हैं। सीमा पर तनाव बढ़ गया है। पढ़िए कश्मीर और कश्मीरियों की हालत को बयान करता ये आलेख।) 

पिछले दो दिनों से कश्मीर के लोगों की लोग रातों की नींद हराम हो रही हैं, क्योंकि विमान और हेलीकॉप्टरों की लगातार आवाजाही से निकलने वाली आवाजें उन्हें चिंतित कर रही है। किसी को भी इस आवाजाही के वास्तविक उद्देश्य का पता नहीं है, जबकि भारतीय वायु सेना (IAF) के अधिकारी इसे एक "नियमित अभ्यास" बता रहे हैं। हालांकि, पुलवामा आत्मघाती हमले के बाद भारतीय और पाकिस्तानी सरकारों के स्वर में बढ़ रही लगातार कड़वाहट और पाकिस्तान के खिलाफ बदला लेने के लिए हमला करने के दबाव की वजह से लोगों को डर लगा है।

पिछले हफ्ते कम से कम 40 अर्धसैनिक जवानों को मारने वाले एक आत्मघाती कार बम हमले के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि पाकिस्तान "हमले की भारी कीमत चुकाएगा", और यह कि कश्मीर में स्थिति के लिए "सेना को निपटने के लिए खुली छूट दी जाएगी"। इसके जवाब में पाकिस्तान ने शुक्रवार को कहा कि वह भारत की ओर से किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब देगा।

देशों के बीच बढ़ती शत्रुता आम कश्मीरियों पर भारी पड़ रही है, क्योंकि आला अधिकारी लोगों में दहशत की बढ़ती भावना को कम करने में विफल हो रहे हैं। “हम कल रात सोए नहीं हैं, और हम नहीं जानते कि क्या हम कल ज़िंदा जागेंगे या नही। लोग आवाजाही से बच रहे हैं, और आवश्यक वस्तुओं को जमा कर रहे हैं : यह एक प्रलय का दिन है। क्या कोई बता सकता है कि यहां क्या हो रहा है?” नौकरशाह से राजनेता बने शाह फैसल ने शनिवार को ट्वीट कर पूछा।

शुक्रवार को हिजबुल मुजाहिदीन की राजनीतिक शाखा जमात-ए-इस्लामी के नेताओं की सामूहिक गिरफ्तारी की खबर से लोग जाग गए। इसके प्रमुख अब्दुल हमीद फैयाज सहित कम से कम 150 सदस्यों को रात भर की छापेमारी के दौरान गिरफ्तार कर लिया गया। यह सब आत्मघाती हमले के जवाब में किया गया था, और संविधान के अनुच्छेद 35-ए की वैधता पर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के पहले ऐसा किया गया। जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक को भी शुक्रवार देर रात उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया गया।

व्हाट्सएप ग्रुप सहित सोशल मीडिया पर लगाए गए कयासों ने स्थिति और खराब कर दी है। जल्द ही, केंद्र ने घाटी में अर्धसैनिक बलों की 100 अतिरिक्त कंपनियों को भेज दिया, जिनकी जरूरत अलगाववादी नेताओं पर भारी कार्रवाई करने के लिए थी।

गृह मंत्रालय (एमएचए) ने अर्धसैनिक बलों की 100 कंपनियों (लगभग 10,000 सैनिकों) की अतिरिक्त तैनाती का आदेश दिया है। इसमें सीआरपीएफ की 45 कंपनियां, बीएसएफ की 35 और एसएसबी और आईटीबीपी की 10 कंपनियां शामिल हैं। आधिकारिक तौर पर, कोई भी इतने बड़े पैमाने पर तैनाती के लिए कारण प्रदान करने में सक्षम नहीं है।

सरकार की ओर से जारी कई आदेश लोगों की आशंकाओं को बढ़ा रहे हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को जेके मेडिकल आपूर्ति निगम से आवश्यक चिकित्सा आपूर्ति और सर्जिकल आइटम इकट्ठा करने के लिए निर्देशित किया गया है, श्रीनगर में सरकारी मेडिकल कॉलेज ने अपने संकाय सदस्यों की सर्दियों की छुट्टी रद्द कर दी हैं, और उन्हें सोमवार को काम करने के लिए सकारात्मक रुप से रिपोर्ट करने के लिए निर्देशित किया है, और तेल कंपनियां को "लोगों के लिए सीमित कोटा" और "सेना के लिए सुविधा पूर्वक कोटा" उपलब्ध करने के लिए  चौबीसों घंटे तैयार रहने के लिए निर्देशित किया गया है। आदेशों ने लोगों को तकलीफ में डाल दिया, जो आवश्यक आपूर्ति के लिए राशन खरीदने के लिए दुकानों में पहुंचे थे। पेट्रोल स्टेशनों के बाहर भी लंबी कतारें देखी गईं।

 “कोई नहीं जानता कि क्या हो रहा है। मैं पिछले दो दिनों से नहीं सोया हूं। मैंने अपने नौकरशाह दोस्त को फोन कर स्थिति के बारे में पूछताछ की, लेकिन वह भी इस कारण से अनजान था। ऐसा लगता है कि कुछ बड़ा होने वाला है, ”मोहम्मद आरिफ, एक स्थानीय निवासी ने कहा।

जैसे-जैसे दोनो देश के दूसरे के खिलाफ आग उगल रहे हैं, घाटी के कुछ लोगों ने कहा कि वे "कश्मीर समस्या" का समाधान चाहते हैं, भले ही इसके लिए "दो परमाणु शक्तियों के बीच युद्ध" ही क्यों न हो जाए। शोपियां के रहने वाले बासित अहमद वानी ने कहा, "हम रोज़मर्रा के खून-खराबे, हिंसा और अपमान से तंग आ चुके हैं। बेहतर है कि इसे एक बार सुलझा लिया जाए। युद्ध में अगर 90 प्रतिशत भी मर जाएँ तो क्या शेष 10 प्रतिशत तो शांति से रहेंगे।”

पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने एक ट्वीट में केंद्रीय मंत्री को इस समय घाटी में व्याप्त आतंक की व्याप्त भावना के बारे में लिखा, और लोगों को आश्वस्त करने वाले बयान और कदमों उठाने के  बारे में  सरकार से अनुरोध किया। उन्होंने यह भी ट्वीट किया: “घाटी में लोग, विशेष रूप से शहर और कस्बे, लोग सब यही कह रहे हैं या एक संकेत के रूप में कर रहे हैं कि जल्द ही कुछ घटने वाला है। लोग भोजन और ईंधन जमा कर रहे हैं। ”

गिरफ्तारी पर कटाक्ष करते हुए, बीजेपी के सहयोगी, सज्जाद लोन, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता ने कहा कि अतीत में इस तरह की घटनाओं का कोई नतीजा नहीं निकला है।उन्होंने ट्वीट किया "सरकार शायद (एसआईसी) गिरफ्तारी के अभियान में निकली हुयी लगता है। बस सावधानी के लिए एक ही शब्द है। 1990 में भी बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुईं थी। नेताओं को जोधपुर और देश की कई जेलों में ठूंस दिया गया था। इससे हालात बिगड़ गए  थे। यह एक आजमाया हुआ कारनामा है और विफल मॉडल है। कृपया इससे दूर रहें। यह काम नहीं करेगा। हालात ओर  खराब हो जाएंगे।"

पूर्व जम्मू-कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती ने भी इस कार्रवाई की आलोचना की। महबूबा ने कहा “पिछले 24 घंटों में, हुर्रियत नेताओं और जमात संगठन के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। ऐसी मनमानी चाल को समझने में विफल है जो केवल जम्मू-कश्मीर में मामलों को ओर उलझाएगी। किस कानूनी आधार के तहत उनकी गिरफ्तारी जायज है? आप किसी व्यक्ति को तो कैद कर सकते हैं लेकिन उसके विचारों को कैद नही सकते हैं।” मॉडरेट हुर्रियत कांफ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने भी जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक की नजरबंदी की निंदा की और जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर के नेतृत्व पर धर-पकड़  करने  पर लिए जोर देते हुए कहा कि बल क इस्तेमाल और धमकाने से स्थिति और खराब होगी।

अपने नेताओं की गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए, जमात-ए-इस्लामिया ने शनिवार को एक बयान में कहा कि 22 फरवरी और 23 फरवरी की रात के दौरान, पुलिस और अन्य एजेंसियों ने सामूहिक गिरफ्तारी अभियान चलाया और घाटी में कई घरों पर छापे मारे, जिसमें संगठन के केंद्रीय और जिला स्तर के दर्जनों नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया, जिसमें इसके अमीर (प्रमुख) जमात अब्दुल हमीद फैयाज और वकील जाहिद अली (प्रवक्ता) शामिल हैं। बयान में कहा गया है, 'यह कदम क्षेत्र में अनिश्चितता के लिए रास्ता तैयार करने की एक अच्छी तरह से तैयार की गई साजिश है।' इसने आगे कहा कि छापे गड़बड़ और गलत हैं, क्योंकि वे ऐसे समय में हो रहे हैं जब सुप्रीम कोर्ट को संविधान के अनुच्छेद 35A के बारे में एक याचिका पर सुनवाई करनी है।

पुलिस सूत्रों ने हालांकि यह कहा कि राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर ये  गिरफ्तारी की गई हैं।

तमाम अटकलों और अनिश्चितताओं के बीच, कश्मीर के लोगों में दहशत बरकरार है और उनका सुझाव हैं कि दोनों देशों की सरकारें घाटी में रक्तपात के चक्र को समाप्त करने के लिए बातचीत की प्रक्रिया शुरू करें।

Kashmir
pulwama attack
Article 35A
Indian constitution
Indian army
India and Pakistan
Supreme Court
Jama
Yasin Malikt-e-Islami

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

कश्मीरी पंडितों के लिए पीएम जॉब पैकेज में कोई सुरक्षित आवास, पदोन्नति नहीं 

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?


बाकी खबरें

  • unity
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    विशेष: एक हमारी और एक उनकी मुल्क में हैं आवाज़ें दो
    26 Jan 2022
    गणतंत्र दिवस के मौके पर आइए सुनते हैं जावेद अख़्तर की नज़्म...जो हमें बता रही है कि किस तरह मुल्क में दो आवाज़ें हैं—एक जो प्यार सिखाती है, आगे बढ़ना सिखाती है और दूसरी जो नफ़रत बढ़ाती, एक-दूसरे को…
  • republic day
    शलिनी दीक्षित
    इस गणतंत्र दिवस पर, भारत यादों पर कपट की जीत को भी मनाएगा 
    26 Jan 2022
    एक भ्रमित और बेचैन राष्ट्र को झूठे आख्यानों के माध्यम से निर्मित किया जा रहा है, जबकि मध्यम वर्ग अतीत के गौरव को पुनर्जीवित करने की कहानियों में खोया हुआ है। 
  • Republic Day Parade
    एम.जी. देवसहायम
    गणतंत्र दिवस के सैन्यकरण से मज़बूत लोकतंत्र नहीं बनता
    26 Jan 2022
    अक्सर यह सवाल उठता है कि गणतंत्र दिवस का जश्न परेड द्वारा मनाया जाना चाहिए या झांकियों के जुलूस द्वारा। यहां हम दोनों की परिभाषाओं पर नज़र डाल रहे हैं।
  • inflation
    न्यूज़क्लिक टीम
    महंगाई-बेरोज़गारी को ख़त्म करने में क्या फ़ेल हुई मोदी सरकार?
    25 Jan 2022
    एक मीडिया हाउस ने #MoodOfTheNation सर्वे के नतीजों में बताया है कि देश की जनता बढ़ती महंगाई से परेशान है और 67% से ज़्यादा लोगों को घर चलाने में मुश्किल हो रही है। न्यूज़क्लिक के इस विडियो में जानिए…
  • bhasha singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    खोज ख़बरः देश के गणतंत्र को है किससे ख़तरा
    25 Jan 2022
    खोज ख़बर में देश के गणतंत्र पर मंडरा रहे ख़तरों के बारे में बात की वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने। संविधान के रखवालों और उसे ख़त्म करने वालों के बीच संघर्ष है ज़ारी। मुसलमानों के नरंसाहर की आशंका, उत्तर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License