NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
भारतीय करोड़पतियों की संखया में 20 प्रतिशत इजाफा, जबकि 67 करोड़ भारतीयों की आय मात्र 1 प्रतिशत बढ़ी
कुछ हद तक भारतीयों की बढ़ती संपत्ति पर आवर्ती रिपोर्ट देश में गरीबी बढ़ाने के डरावने तथ्य को छुपाती है।
सुबोध वर्मा
21 Jun 2018
Translated by महेश कुमार
wealth

इस साल जारी दो अलग-अलग रिपोर्ट आधुनिक भारत की त्रासदी पर का जबरदस्त पर्दाफाश करती है। एक रपट कहती हैं कि 2017 में, डॉलर सामान बनने वाले करोड़पति की संख्या में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जैसा कि उनकी अर्जित संपत्ति से तय हुआ है। 'डॉलर करोड़पति' वे व्यक्ति हैं जिनकी संपत्ति दस लाख डॉलर से अधिक है। इस साल की शुरुआत में जारी की गई दूसरी रिपोर्ट में कहा गया है कि 2016-17 में उत्पन्न धन का करीब 73 प्रतिशत हिस्सा सबसे अमीर एक प्रतिशत के पास तक चला गया, जबकि 67 करोड़ भारतीयों ने जो देश की आबादी का आधा हिस्सा है, ने अपनी संपत्ति में बहुत ही कम मात्र एक प्रतिशत की वृद्धि देखी।
 
तथ्य यह है कि दो अलग-अलग रिपोर्ट हैं - अमीरों की एक और गरीबों की एक – ये रपट भारत में गहरे विभाजन का खुलासा करती है। लेकिन इसे एक तरफ रखते हैं और देखते हैं कि इस रहस्योद्घाटन का क्या अर्थ है।
 
करोड़पति रिपोर्ट वैश्विक वित्तीय फर्मों द्वारा दी गई समान डेटा की लड़ी की रिपोर्टों की एक श्रृंखला का हिस्सा है, यह नवीनतम फ्रांसीसी फर्म कैपेगिनी ने तैयार की है। वे इक्विटी और रियल एस्टेट स्वामित्व की कीमतों से डॉलर करोड़पति की गणना करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2016 में भारत में 2,19, 000 करोड़पति थे जो 2017 में 2,63,000 हो गए। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि बाजार पूंजीकरण (स्वामित्व वाले शेयरों का बाजार मूल्य) 50 प्रतिशत तक बढ़ गया और रियल्टी की कीमतों में 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे उनकी संपत्ति बढ़ गई। इन कारकों से उत्साहित, और निरंतर उच्च आय के साथ, इन करोड़पति के स्वामित्व वाली कुल संपत्ति 2017 में  1 ख़राब डॉलर पार कर गई।
2017 के लिए एक स्विस निवेश बैंक, क्रेडिट सुइस द्वारा तैयार एक और रिपोर्ट में पता चला है कि भारत में लगभग 73 प्रतिशत संपत्ति आबादी के सबसे अमीर 10 प्रतिशत के स्वामित्व में है। इस ब्रैकेट के भीतर, भारतीयों का शीर्ष 1 प्रतिशत देश की संपत्ति का चौंकाने वाला 45 प्रतिशत का  स्वामित्व रखते थे।


ये सभी रिपोर्ट संपत्ति के बारे में बात करती हैं, यानी ये संपत्तियां स्वामित्व वाली हैं। यह सोचना संभव है - जैसा कि कुछ लोग सपने देखने वाले मानते हैं - कि धन की असमानता को बढ़ती आय से दूर किया जा सकता है। अमीरों की संपत्ति की कहानी एक रूढ़िवादी रवैया है जो भारत के लिए अरबों को गुणा करता है।


अनजाने में, ऊपर दी गई ऑक्सफैम रिपोर्ट समेत अन्य रिपोर्टों से पता चलता है कि वर्तमान आय में भी भारी  असमानता है। 2016-17 में अर्जित आय का 73 प्रतिशत कब्ज़ा करने वाला सबसे अमीर तबके के एक प्रतिशत का मतलब है कि उनकी संपत्ति 20, 913 अरब रुपये बढ़ी है। यह राशि 2017-18 में केंद्र सरकार के कुल बजट के बराबर है।


यदि आप कई वर्षों के आय डेटा देखते हैं तो वह बहुत ही चौकानें वाले खुलासे की प्रवृत्ति बताती है और विश्लेषण से पता चला है कि उदारीकरण की शुरुआत के बाद, आय की असमानता काफी बढ़ी है। 1988 और 2011 के बीच, सबसे गरीब 10 प्रतिशत भारतीयों की आय प्रति वर्ष 1 प्रतिशत बढ़ी है, जबकि सबसे अमीर 10 प्रतिशत की आय प्रति वर्ष 25 प्रतिशत बढ़ी है।


विश्व असमानता लैब में थॉमस पिक्टेटी और उनके सहयोगियों ने दिखाया है कि 1980 में राष्ट्रीय आय के लगभग 36 प्रतिशत हिस्सेदारी से, शीर्ष 10 प्रतिशत ने 2014 तक अपने हिस्से में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की है। 2000 से, यह वृद्धि तेज़ी से हो रही है। शीर्ष 10 प्रतिशत के भीतर, शीर्ष 1 प्रतिशत पूंजीपति  उदारीकरण युग में भी तेजी बड़ी ऊँची दर पर अपनी आय बढ़ा रहे हैं और धन के बड़े हिस्से को संगृहीत कर कर रहे हैं।


संक्षेप में, करोड़पतियों की वृद्धि सिर्फ पिरामिड का शीर्ष है जिसका विशाल आधार, गरीबी और वंचितता पर आधारित है और वह तेज़ी से लगातार बढ़ रहा है। इसके कारणों को खोजने में ज्यादा मुश्किल नहीं है। औद्योगिक और कृषि दोनों मजदूरी में कमी, भूमिहीनता में वृद्धि, संबंधों की अनौपचारिकता में वृद्धि, सरकार द्वारा कटौती और गरीबों को जानबूझकर निचोड़ना से है। सार्वजनिक निवेश और सामाजिक कल्याण पर खर्च, सामाजिक सुरक्षा की कमी और वैश्विक बाजारों के साथ विनाशकारी एकीकरण कुछ प्रमुख कारक हैं जिनसे यह स्थिति उत्पन्न हुयी है। बीजेपी के नेतृत्व वाली मोदी सरकार पिछले चार वर्षों में ऐसी नीतियों को तीव्रता से लागू होते देखा गया है जिसके परिणामस्वरूप असमानता में और वृद्धि हुई है।


इसलिए, अगली बार जब आप भारत के बढ़ते करोड़पति या अरबपति की जश्न को मीडिया की बड़ी हैडलाइन में देखें, तो गहरी सांस लें और अन्य 90 प्रतिशत के बिगड़ते हालत पर विचार करें जिनकी पीठ 'हाई नेट वर्थ इंडियंस' खड़े हैं।

wealth inequality
income inequality
Billionaire
Indian billionaire

Related Stories

महामारी के दौर में बंपर कमाई करती रहीं फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां

महंगाई 17 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर, लगातार तीसरे महीने पार हुई RBI की ऊपरी सीमा

महाशय आप गलत हैं! सुधार का मतलब केवल प्राइवेटाइजेशन नहीं होता!

जब तक ग़रीबों की जेब में पैसा नहीं पहुंचेगा, अर्थव्यवस्था पटरी पर नहीं आएगी!

क्या 2014 के बाद चंद लोगों के इशारे पर नाचने लगी है भारत की अर्थव्यवस्था और राजनीति?

निजीकरण से बढ़ती है ग़रीबी, अमीर होते और अमीर

सूट-बूट वालों को फ़ायदा ही फ़ायदा

भारत के अरबपतियों के पास कुल बजट से ज्यादा पैसा

कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती : ज़रूरत के विपरीत किया गया फ़ैसला!

मोदी के शासन में, अमीर ज़्यादा अमीर और गरीब ज़्यादा गरीब हो रहे हैं


बाकी खबरें

  • private
    अजय कुमार
    विश्लेषण: नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन या भाजपा के दानकर्ताओं के लिए पैसा कमाने का ज़रिया
    25 Aug 2021
    सरकार का काम बिजनेस करना नहीं है। भारत जैसे गरीब मुल्क में सरकार की तरफ से इस्तेमाल होने वाला यह सबसे ज्यादा जनविरोधी वाक्य है। बिजनेस करने के तौर-तरीकों की वजह से मुट्ठी भर लोग ही आगे बढ़ रहे हैं,…
  • pharma
    रिचा चिंतन
    बड़ी फार्मा कंपनियों का असली चेहरा: अधिकतम आय, न्यूनतम ज़वाबदेही
    25 Aug 2021
    महामारी ने एक बार फिर पूंजीवाद का असली चेहरा सबके सामने ला दिया है, जहां मुनाफ़ा ही मुख्य प्रेरक होता है और बढ़ती असमानता की कोई फिक्र नहीं की जाती।
  • सार्वजानिक उपक्रम निजी हाथों में: मोदी सरकार की स्कीम का फायदा सिर्फ "मित्रों" को?
    न्यूज़क्लिक टीम
    सार्वजानिक उपक्रम निजी हाथों में: मोदी सरकार की स्कीम का फायदा सिर्फ "मित्रों" को?
    25 Aug 2021
    मोदी सरकार ने सार्वजनिक उपक्रम की इकाइयों को निजी हाथों में सौंपने का फैसला किया है और कहा है के इसके जरिये 6 लाख करोड़ की उगाही करेंगे। राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर मोदी सरकार पर करारा हमला बोला है।…
  • सोनिया यादव
    यूपी: सिस्टम के हाथों लाचार, एक और पीड़िता की गई जान!
    25 Aug 2021
    सांसद अतुल राय मामले में पीड़िता और उसके साथी ने सुप्रीम कोर्ट के बाहर पुलिस से लेकर जज तक कई बड़े लोगों पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि सभी की मिलीभगत से दोनों पर फ़र्ज़ी मुक़दमे…
  • forest fire
    पीपल्स डिस्पैच
    अल्जीरिया की मोरक्को के साथ राजनयिक संबंध समाप्त करने की घोषणा
    25 Aug 2021
    पश्चिमी सहारा सहित इन दोनों देशों के बीच कई ऐतिहासिक और हालिया मुद्दों पर बढ़ते तनाव और मतभेदों के बीच यह फैसला लिया गया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License