केंद्र सरकार की नीतियों मसलन श्रम सुधार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और निजीकरण के खिलाफ आज केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और विभिन्न क्षेत्रों में उनसे संबद्ध कर्मचारी यूनियनों ने आज देशव्यापी हड़ताल बुलाई है। यूनियनों की 12 सूत्रीय मांगों में न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बैनर तले देश के250 से ज्यादा किसान संगठन भी भारत बंद में शामिल हैं।
देशव्यापी हड़ताल
केंद्र सरकार की नीतियों मसलन श्रम सुधार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और निजीकरण के खिलाफ आज केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और विभिन्न क्षेत्रों में उनसे संबद्ध कर्मचारी यूनियनों ने आज देशव्यापी हड़ताल बुलाई है। यूनियनों की 12 सूत्रीय मांगों में न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध भारतीय मजदूर संघ हड़ताल में शामिल नहीं है, जबकि मजदूरों के साथ कंधा से कंधा मिलाते हुए अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बैनर तले देश के250 से ज्यादा किसान संगठन भी भारत बंद में शामिल हैं। किसानों-मजदूरों के साथ एकजुटता दिखाते हुए वामपंथी दलों और उनसे जुड़े छात्र, युवा व महिला संगठनों के लोग बड़ी संख्या में आज सड़कों पर उतरें हैं।
जिस समय इस आंदोलन की रणनीति बनी थी तब इसके केंद्र में मुख्य रूप से केंद्र सरकार की मजदूर व किसान विरोधी नीतियां थीं। लेकिन इसी बीच सीएए और एनआरसी, छात्रों का दमन, उनकी फीस वृद्धि का मुद्दा और 5 जनवरी को जेएनयू पर हमला सबकुछ इसमें शामिल हो गया है। अब ये सभी मुद्दे आज के आंदोलन का हिस्सा हैं।