NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
ब्रिटेन की कोर्ट ने जूलियन असांज के अमेरिका प्रत्यर्पण की अनुमति दी
लंदन स्थित वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने जूलियन असांज के अमेरिका प्रत्यर्पण का आदेश देने वाले फ़ैसले पर मुहर लगा दी है। अब अंतिम फ़ैसला गृह सचिव प्रीति पटेल लेंगी, जो सत्ताधारी कंज़र्वेटिव पार्टी से ताल्लुक रखती हैं।
पीपल्स डिस्पैच
21 Apr 2022
Assange
कोर्ट द्वारा जूलियन असांज के प्रत्यर्पण के आदेश के खिलाफ़ उनके समर्थक 20 अप्रैल को इकट्ठा हुए। फोटो: सारा विवाक्कुआ।

अब जब जूलियन असांज की प्रत्यर्पण प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, तब इसका नतीज़ा एक राजनीतिक फ़ैसले पर निर्भर हो गया है। 20 अप्रैल, बुधवार को लंदन में वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने एक आदेश जारी असांज की अमेरिका प्रत्यर्पित करने की अपील को अनुमति दे दी है। प्रत्यर्पण का अंतिम फ़ैसला अब ब्रिटेन की गृह सचिव प्रीति पटेल के पाले में है।

असांज की वकीलों की टीम के पास अब 18 मई तक का समय है, जब वे प्रत्यर्पण की अपील के खिलाफ़ गृह सचिव के कार्यालय में आवेदन दाख़िल कर सकेंगे। गृह विभाग के कार्यालय से फ़ैसला आने के बाद उसके खिलाफ़ भी एक अपील लगाई जा सकती है। यह अपील विधि के बिंदुओं के आधार पर लगाई जा सकती है, जिनके बारे में पहले न्यायालयों ने विचार ना किया हो। 

पटेल के फ़ैसले लेने की प्रक्रिया, न्यायालयों के फ़ैसले लेने की तरह नहीं होगी, बल्कि पटेल के फ़ैसले का आधार पूरी तरह सरकार की मनमर्जी पर निर्भर करेगा। चूंकि प्रीति पटेल, बोरिस जॉनसन की कैबिनेट का हिस्सा हैं, इसलिए उनके फ़ैसले की प्रक्रिया में राजनीतिक पहलू का प्रभाव पड़ेगा।

बुधवार को लंदन के बेलमार्श स्थित उच्च सुरक्षा वाले जेल परिसर से असांज ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए हिस्सा लिया, इस जेल में बिना आरोपों के असांज पिछले तीन साल से बंद हैं। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट का यह आदेश, दिसंबर 2021 में लंदन हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को लागू करने की पृष्ठभूमि में आया है। लंदन हाईकोर्ट के तत्कालीन आदेश में, इसी कोर्ट द्वारा दिए गए पुराने आदेश को पलटते हुए, अमेरिका की प्रत्यर्पण अपील को मंजूरी दी गई थी।

अगर असांज का प्रत्यर्पण हो जाता है, तो उन्हें 18 आरोपों में एक संघीय ज्यूरी के सामने सुनवाई में पेश होना होगा। इन 18 अरोपों में से 17 आरोप, कुख्यात जासूसी अधिनियम के तहत हैं, जिनमें कुलमिलाकर 175 साल की सजा का प्रबंध है।

अमेरिका में यह कार्रवाई डोनाल्ड ट्रंप की सरकार के अंतर्गत शुरू हुई थी, जो जो बाइडेन के प्रशासन में भी जारी है। इसका आधार उन गुप्त दस्तावेज़ों का प्रकाशन है, जिनसे अफ़गानिस्तान और इराक़ में अमेरिका के युद्ध अपराधों और दूसरे अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन का खुलासा हुआ था।

अमेरिकी सरकार का कहना है कि असांज ने गैरकानूनी तरीके से व्हिसिल ब्लोअर चेल्सिया मैनिंग के साथ साजिश रचकर दस्तावेज़ों तक पहुंच बनाई, इस आरोप के बारे में असांज और उनके वकीलों का कहना है कि यह बिना किसी सबूत के लगाए गए हैं। प्रत्यर्पण के दौरान सामने आई चीजों से भी पता चला है कि अमेरिकी कार्रवाई का एक हिस्सा गलत गवाहियों और लंदन में इक्वाडोर के दूतावास में असांज के रहने के दौरान उनकी जासूसी पर आधारित था। 

इस कार्रवाई की तीखी राजनीतिक प्रवृत्ति और अमेरिकी एजेंसियों द्वारा एक दशक तक की गई जासूसी की मानवाधिकार समूहों और नागरिक स्वतंत्रता के पक्षकारों ने जमकर आलोचना की है और इसे प्रेस की आज़ादी पर हमला बताया है। असांज के समर्थकों ने लगातार यह मांग रखी है कि अमेरिका और ब्रिटिश सरकार उनके खिलाफ़ मुक़दमे को वापस लें और उन्हें रिहा करें।

बुधवार को कोर्ट ने जब प्रत्यर्पण का आदेश पारित किया, तब वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट के बाहर बड़ी संख्या में असांज के समर्थक इकट्ठा हो गए और उनकी गिरफ़्तारी और सजा का विरोध किया। लेबर पार्टी के नेता और ब्रिटेन के पूर्व विपक्षी नेता जरमी कॉर्बिन ने कोर्ट के बाहर इकट्ठा भीड़ से कहा कि सचिव पटेल के पास "अब एक विकल्प होगा कि वे पत्रकारिता और लोकतंत्र के लिए खड़ी हों या आंतक के खिलाफ़ युद्ध के सच का खुलासा करने वाले को ताउम्र की जेल की तरफ ढकेल दें।

कोर्ट परिसर के बाहर मौजूद एमनेस्टी इंटरनेशनल के साइमन काउथर ने कहा, "अगर असांज का अमेरिका प्रत्यर्पण किया जाता है, तो दुनिया के सभी पत्रकारों को खुद की सुरक्षा देखनी होगी.....अगर उन्होंने कुछ ऐसा प्रकाशित किया, जिसे अमेरिका गुप्त दस्तावेज़ मानता है, तो उनके प्रत्यर्पण का ख़तरा होगा।"

समर्थकों और नागरिक अधिकार समूहों ने लगातार इस तथ्य की ओर ध्यान दिलाया है कि असांज का प्रत्यर्पण अमेरिका और ब्रिटेन के बीच हुई प्रत्यर्पण संधि का भी उल्लंघन करता है, जो राजनीतिक अपराधों के लिए किसी भी तरह के प्रत्यर्पण की मनाही करता है।

असांज की पत्नी और उनकी वकील स्टेला असांज ने कहा, "ब्रिटेन की कोई बाध्यता नहीं है कि वो जूलियन असांज का अमेरिका प्रत्यर्पण करे, बल्कि अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के चलते ब्रिटेन को उनका प्रत्यर्पण रोकने की जरूरत है। यह एक राजनीतिक मामला है। जूलियन असांज को रिहा किया जाए।

साभार : पीपल्स डिस्पैच

United kingdom
#DontExtraditeAssange
#DontExtraditeJulianAssange
Julian Assange
Priti Patel
wikileaks

Related Stories

ज़ोर पकड़ती  रिहाई की मांग के बीच जूलियन असांज नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित

पत्रकारिता एवं जन-आंदोलनों के पक्ष में विकीलीक्स का अतुलनीय योगदान 

वे उन्हें मार रहे हैं : असांज की 'स्लो डेथ' खसोगी की याद दिलाती है

जूलियन असांज का न्यायिक अपहरण

मानवाधिकार दिवस पर ब्रिटेन के कोर्ट ने जूलियन असांज के अमेरिका प्रत्यर्पण को मंज़ूरी दी

क्यों जूलियन असांज पर अमानवीय मुक़दमा हम सबके लिए अन्याय है

AUKUS पर हंगामा कोई शिक्षाप्रद नज़ारा नहीं है

असांजे मामले के एक प्रमुख गवाह ने झूठ बोलने की बात स्वीकार की

यूके में क्षेत्रीय चुनावों के बाद लेबर पार्टी नेतृत्व की वामपंथियों ने आलोचना की

दुनिया भर की: ‘किल द बिल’ के नारे के साथ ब्रिटेन में तेज़ हुआ पुलिस की निरंकुशता के ख़िलाफ़ विरोध


बाकी खबरें

  • yogi
    एम.ओबैद
    दलितों के ख़िलाफ़ हमले रोकने में नाकाम रही योगी सरकार
    15 Jan 2022
    पिछले साल जारी एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक देश भर में उत्तर प्रदेश में साल 2020 में दलितों के खिलाफ सबसे अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए गए। यहां 12,714 मामले (25.2 प्रतिशत) दर्ज किए गए थे।
  • tubnisia
    काथरिन स्काएर, तारक गुईज़ानी
    ट्यूनीशिया: पहली डिजिटल राजनीतिक सुझाव प्रक्रिया पर लोगों में मत-विभाजन
    15 Jan 2022
    नए संविधान पर लोगों से डिजिटल तरीके से राजनीतिक सुझाव बुलवाए गए हैं। यह ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति काएस सईद का राजनीतिक संकट से निकलने का रास्ता हो सकता है। लेकिन सईद की मंशा की तरह, इस ऑनलाइन सुझाव…
  • Turkey
    एम. के. भद्रकुमार
    क्या अमेरिका और यूरोप के करीब आ रहा है तुर्की?
    15 Jan 2022
    लेकिन, हक़ीक़त यह है कि पश्चिम तुर्की को तो स्वीकार कर सकता है, लेकिन क्या वे एर्दोगन को स्वीकार करेगा?
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,68,833 नए मामले, 402 मरीज़ों की मौत
    15 Jan 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 3.85 फ़ीसदी यानी 14 लाख 17 हज़ार 820 हो गयी है।
  • Lebanon
    पीपुल्स डिस्पैच
    लेबनान में ड्राइवरों और परिवहन कर्मचारियों को लेकर सरकारी उदासीनता के ख़िलाफ़ हड़ताल
    15 Jan 2022
    हड़ताली श्रमिकों ने कई प्रमुख राजमार्गों और सड़कों को अवरुद्ध कर दिया और सरकार से बढ़ती महंगाई के मद्देनज़र ईंधन और दूसरी वस्तुओं पर दी जा रही पिछली सब्सिडी को बहाल करने की मांग की।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License