NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
समाज
भारत
राजनीति
बुलंदशहर मामला: गिरफ़्तार नसीर पूछ रहा है- "ये जूते मैंने बनाए हैं क्या?"
‘अंधेर नगरी’ की तर्ज पर बुलंदशहर में सड़क पर जूते बेचते हुए दुकानदार को गिरफ़्तार कर लिया गया। आरोप है कि जूतों के सोल पर 'ठाकुर' लिखा हुआ था। मामले की एफ़आईआर दक्षिणपंथी संगठन के एक शख़्स ने की थी।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
06 Jan 2021
बुलंदशहर

बुलंदशहर में सड़क पर जूते बेचने वाले एक दुकानदार को 5 जनवरी मंगलवार को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया। जूते बेचने वाले शख़्स नसीर पर आरोप है कि उनकी दुकान के जूतों की सोल पर ब्रांड का नाम 'ठाकुर' लिखा हुआ है। एनडीटीवी की एक ख़बर के मुताबिक़ इस मामले की एफ़आईआर एक दक्षिणपंथी संगठन के विशाल चौहान ने की है, जिसके बाद पुलिस ने नसीर को गिरफ़्तार किया है। 

इस पूरे मामले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चल रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि दुकानदार नसीर कह रहे हैं कि, "ये जूते मैंने बनाए हैं क्या?" वीडियो में एक और शख़्स है जिसकी शक्ल दिखाई नहीं दे रही है, उसका कहना है, "तो तू ये बेच क्यों रहा है?"

 

‘Law enforcement’ , @Uppolice style . Nasir, a roadside shoe seller is in the custody of @bulandshahrpol , booked under serious IPC sections for selling shoes with brand name ‘Thakur’, after FIR by a right wing leader who seems to have interpreted this as a casteist slur.... pic.twitter.com/QHmq1nDo7u

— Alok Pandey (@alok_pandey) January 5, 2021

शिकायतकर्ता विशाल चौहान इलाक़े के एक दक्षिणपंथी संगठन के नेता हैं। उनकी आपत्ति यह है जूतों के सोल के नीचे 'ठाकुर' लिखा होना, जाति का अपमान है। पुलिस द्वारा दायर की गई एफ़आईआर में नसीर ने कथित तौर धार्मिक भावना आहत की है। एफ़आईआर में एक अज्ञात जूता बनाने वाली कंपनी को भी नामित किया गया है।

एफ़आईआर के अनुसार शिकायतकर्ता नसीर की दुकान पर पहुंचे और देखा कि जूतों के सोल के नीचे 'ठाकुर' लिखा हुआ है, आपत्ति करने पर नसीर ने उन्हें गालियां देनी शुरू कर दीं। हालांकि वीडियो में देखा जा सकता है कि नसीर बात कर रहे हैं, और गाली या मारपीट का सबूत नहीं मिला है।

"जूते मैंने बनाए हैं क्या?"

नसीर के सवाल 'ये जूते मैंने बनाए हैं क्या' पर ग़ौर करने की ज़रूरत है। नसीर की जो दुकान है, वो दरअसल एक दुकान भी नहीं है, बल्कि सड़क पर रखे कुछ जूते हैं जिन्हें वह बेचते हैं। ऐसी दुकानों को 'फड़' कहा जाता है। ऐसे 'फड़' शहरों में आमतौर पर देखे जाते हैं, जहाँ दुकानों के मुक़ाबले सस्ते दामों पर सामान मिलते हैं। यहाँ मिलने वाले जूते लोकल होते हैं, और कोई प्रतिष्ठित ब्रांड के नहीं होते। मगर फिर भी यह फड़ लगाने वाले दुकानदार इन जूतों को बना ही नहीं सकते, वो इसे किसी बड़ी दुकान या किसी लोकल फ़ैक्टरी से ही लेकर आते हैं।

'ठाकुर' ब्रांड : जातीय गाली या जातीय उच्चता?

शिकायतकर्ता की आपत्ति है कि 'ठाकुर' लिखे जूते बेचने से उनकी धार्मिक/ जातीय भावनाएँ आहत हुई हैं। मगर ग़ौर ध्यान देने वाली बात है कि किसी चीज़ पर जाति का नाम लिखा रहना जातीय हीनता का सवाल है, या फिर जातीय उच्चता का? 28 दिसम्बर को उत्तर प्रदेश के ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने एक नोटिस जारी कर कहा कि अब से प्रदेश में जाति का नाम लिखी गाड़ियाँ सीज़ कर ली जाएंगी। उत्तर प्रदेश परिवहन ने कहा कि लोग जातीय उच्चता दिखाने के लिए गाड़ियों पर इस तरह जाति के नाम लिख कर चलते हैं।

'ठाकुर' लिखे जूतों के बारे में न्यूज़क्लिक ने जब पड़ताल की तो पता चला कि ठाकुर फ़ुटवेयर कंपनी के नाम से आगरा की एक कंपनी है, जिसके जूते अमेज़न, फ्लिपकार्ट जैसी वेबसाइट पर भी बेचे जाते हैं। इन जूतों पर भी हर जगह ब्रांड का नाम लिखा हुआ है, सोल पर लिखा है या नहीं इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती है। इसके आधार पर कहा जा सकता है कि जो जूते नसीर के फड़ पर बेचे जा रहे हैं, एक- उनमें लिखा जाति का नाम 'घमंड' और 'शान' की वजह से लिखा गया है, और दो- कि वह जूते ठाकुर फुटवेयर कंपनी की तर्ज पर बनाए गए डुप्लिकेट जूते हैं। ऐसे में नसीर की गिरफ़्तारी बेबुनियाद ही लगती है।

बुलंदशहर पुलिस ने ट्वीट कर कहा है, "इस प्रकरण में वर्तमान विधि व्यवस्था के अनुसार जो सुसंगत था वह कार्यवाही की है, यदि पुलिस कार्यवाही न करती तो बहुत से लोग उल्टी/भिन्न प्रतिक्रिया देते। अतः पुलिस ने नियम का पालन किया है। कृपया इसे इसी रूप में देखें।" पुलिस का 'उल्टी/भिन्न' प्रतिक्रिया से क्या मतलब है यह भी एक सवाल है। एक सवाल यह भी उठता है कि क्या एक मुसलमान शख़्स के ख़िलाफ़ किसी की भी शिकायत की तर्ज पर पुलिस बिना किसी जांच-सबूत के उसे गिरफ़्तार कर सकती है?

UP police
bulandshehar police
caste name
caste name shoes brand
attacks on muslims
Yogi govt
bajrang dal

Related Stories

हम भारत के लोगों की कहानी, नज़्मों की ज़ुबानी

जहांगीरपुरी हिंसा में अभी तक एकतरफ़ा कार्रवाई: 14 लोग गिरफ़्तार

इतवार की कविता : "वह मुसलमानों से डरता था..."

यूपी: आज़मगढ़ में पुलिस पर दलितों के घर तोड़ने, महिलाओं को प्रताड़ित करने का आरोप; परिवार घर छोड़ कर भागे

"जेल में पुलिस ने हमारे कपड़े उतरवा दिए और हमें रात-दिन टॉर्चर किया"

नागरिक सत्याग्रह पदयात्रियों से डरी पुलिस, गाजीपुर जिले से गिरफ्तार कर जेल में डाला

उत्तराखंड : अब देवी जागरण से तय होगी हिन्दुत्व की राजनीति !

योगी टिप्पणी मामले में पत्रकारों की गिरफ्तारी के विरोध में दिल्ली में प्रदर्शन

यूपी पुलिस द्वारा पत्रकार कनौजिया की गिरफ्तारी ग़ैर क़ानूनी क्यों है?

सीएम योगी पर टिप्पणी को लेकर पत्रकार प्रशांत कनौजिया गिरफ़्तार


बाकी खबरें

  • Ashok Gehlot and Sachin Pilot
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    राजस्थान: क्या एक हो गए हैं अशोक गहलोत और सचिन पायलट?
    22 Nov 2021
    नए मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों ही संतुष्ट नज़र आ रहे हैं और इसी से उम्मीद की जा रही है कि दोनों के बीच जारी अंदरूनी कलह फिलहाल शांत हो गई है।
  • Rajasthan: Rape accused along with friends attacked Dalit girl with knife
    एम.ओबैद
    राजस्थान: रेप के आरोपी ने दोस्तों के साथ मिलकर दलित लड़की पर चाकू से किया हमला
    22 Nov 2021
    अलवर में शुक्रवार की रात रेप करने वाले शख्स और उसके साथियों द्वारा कथित रूप से 20 वर्षीय दलित लड़की पर हमला किया गया। जिसमें उसकी आंख में गंभीर चोटें आईं। पीड़िता को जयपुर रेफर कर दिया गया है जहां…
  • Tribal Pride Week
    रूबी सरकार
    जनजातीय गौरव सप्ताह में करोड़ों खर्च, लेकिन आदिवासियों को क्या मिला!
    22 Nov 2021
    प्रदेश के आदिवासियों के लिए सवाल बरकरार है कि 52 करोड़, कुछ जानकारों के अनुसार 100 करोड़ सरकारी खर्च से इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर जो सम्मेलन किया गया, क्या वह भाजपा के एजेंडे का हिस्सा भर था? क्योंकि…
  • farmers
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    क़ानूनों की वापसी से मृत लोग वापस नहीं आएंगे- लखीमपुर हिंसा के पीड़ित परिवार
    22 Nov 2021
    बीजेपी को क़ानूनों की वापसी से राजनीतिक फ़ायदे का अनुमान है, जबकि मूल बात यह है कि राज्य मंत्री अजय मिश्रा अब भी खुलेआम घूम रहे हैं, जो आने वाले दिनों में सरकार और किसानों के बीच टकराव की वजह बन सकता…
  • South region leader
    पार्थ एस घोष
    अपने क्षेत्र में असफल हुए हैं दक्षिण एशियाई नेता
    22 Nov 2021
    क्षेत्रीय नेताओं के लिए शुरूआती बिंदु होना चाहिए कि, वे इस मूल वास्तविकता को आंतरिक करें कि दक्षिण एशिया दुनिया के सबसे असमान और संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में से एक है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License