NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बुलीबाई ऐप मामला: स्वतंत्र आवाज़ों को बनाया जा रहा है निशाना
संगठित तौर से उन मुस्लिम महिलाओं को निशाना बनाया गया है जो राजनीति और पत्रकारिता आदि में सक्रिय हैं और समय-समय पर सरकार की नीतियों के विरुद्ध आवाज़ उठाती हैं।
असद रिज़वी
03 Jan 2022
Enough is Enough
प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार

देश में लगातार अल्पसंख्यक मुस्लिम समाज के ख़िलाफ़ नफ़रत का माहौल बनाया जा रहा है। हरिद्वार में हुई तथाकथित “धर्म संसद” में नरसंहार की धमकी के बाद अब इंटरनेट पर “मुस्लिम महिलाओं” की “बोली” लगाने का मामला सामने आया है।

इंटरनेट पर “गिटहब” (github) नाम के प्लेटफार्म पर “बुलीबाई” (bullibai.github.i) ऐप बना कर, सैकड़ों मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरों को नीलामी के लिये पोस्ट किया गया है। पीड़ित महिलाएँ और महिला संगठन इसको “दक्षिणपंथी संगठनों” द्वारा मुसलमानों के ख़िलाफ़ पैदा किये गये नफ़रत के माहौल का नतीजा मानते हैं।

संगठित तौर से उन मुस्लिम महिलाओं को निशाना बनाया गया है जो राजनीति और पत्रकारिता आदि में सक्रिय है और समय-समय पर सरकार की नीतियों के विरुद्ध आवाज़ उठाती हैं।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, इस से पहले 2021 में भी इसी तरह का एक मामला सुल्ली बाई ऐप (Sulli Bai app) पर 'सुल्ली डील्स' (Sulli Deals) सामने आया था। लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा इसके विरुद्ध कोई ठोस क़दम नहीं उठाया गया।

इस बार भी पीड़ित महिलाओं ने पुलिस में एफ़आईआर दर्ज कराई है और पहले भी कराई थी। लेकिन सरकार द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न पहले हुई थी और न अब होती दिख रही है। पहले मात्र औपचारिकता के तौर पर एक पत्र गिटहब को भेजा गया था। जिसका क्या हुआ, कुछ मालूम नहीं। इस बार शिवसेना की संसद प्रियंका चतुर्वेदी द्वारा मामला उठाये जाने के बाद केंद्रीय मंत्री  संचार, इलेक्ट्रा निक्सा एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ट्विटर पर बताया कि “GitHub ने आज सुबह इसके यूजर को ब्लॉक करने की पुष्टि की है. CERT और पुलिस प्रशासन आगे की कार्रवाई कर रहे हैं.”

हालाँकि इस मामले की चर्चा सारी दुनिया में हो रही है, लेकिन सरकार या सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी द्वारा अभी तक इस पर कोई दूसरी प्रतिक्रिया नहीं है। कांग्रेस ने भी सरकार की ख़ामोशी पर सवाल उठाये हैं। पार्टी की महासचिव प्रियंका गाँधी कहती हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस तरह के लोगों पर एक्शन न लेना आपकी सरकार की “महिला विरोधी विचारधारा” को दर्शाता है।

पीड़ित महिलाओं का कहना है कि “भगवा विचारधारा” वाले देश का नाम सारी दुनिया में ख़राब कर रहे हैं। “बुलीबाई” पर अपना नाम देख कर पत्रकार कविश अज़ीज़ “लेनिन” कहती हैं, दक्षिणपंथी अपनी नफ़रत की राजनीति में देश की छवि ख़राब कर रहे हैं। न्यूज़क्लिक से बात करते हुए उन्होंने कहा कि “इस तरह की बातों से मैं नहीं डरती हूँ, जब भी सरकार कुछ ग़लत करेगी, मैं उसका विरोध करूँगी।”

कांग्रेसी नेता सदफ़ जाफ़र का नाम भी ऐप में है और उनका कहना है कि सरकार की ख़ामोशी से देश में “नफ़रत का माहौल बढ़ रहा है। सदफ़ जाफ़र कहती हैं कि “मुझको अपना नाम देखकर दुःख तो हुआ, लेकिन इस से बड़े दुःख की बात यह है कि, अपने बेटे की तलाश में भटक रही एक ज़ईफ़ “माँ” की बोली लगाई जा रही है”।

महिला संगठनों का कहना है कि सरकार इतने गंभीर मामले पर ख़ामोश रह कर अल्पसंख्यक व महिला विरोधी ताक़तों को नफ़रत पैदा करने में प्रोत्साहित कर रही है। महिला अधिकारों के लिये मुखर, वामपंथी नेता सुभाषनी अली मानती है कि “महिलाओं की नीलामी” के विषय में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को संज्ञान लेना चाहिए है। सुभाषनी अली मानती है, “देश में वैसे ही महिला हिंसा के मामले बहुत अधिक हैं, और अब ऐप के ज़रिये मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरें इंटरनेट ओर डालना “महिला विरोधी” हिंसा को और बढ़ावा देगा”।

महिलाएं इसको राजनीति से जोड़ कर भी देख रही हैं। स्वतंत्र पत्रकार शाहीरा नईम कहती हैं कि यह नफ़रत वह फैला रहे हैं, जिनके पास चुनाव में जनता को दिखने के लिये “विकास” का कोई कार्य नहीं है। शाहीरा नईम ने न्यूज़क्लिक से कहा “यह एक राजनीति का ख़ेल है, मुद्दों से भटकाने कि लिए, “मुस्लिम समाज” को जज़्बात में न आकर इसका जवाब चुनावों में देना चाहिए।

महिला फ़ेडरेशन मानती है कि “मुस्लिम महिलाओं” की तस्वीर को नीलामी के लिये इंटरनेट डालना “भगवा” संगठनों का काम है। संगठन की अध्यक्ष आशा मिश्रा का कहना है कि “भाजपा सरकार इस तरह की हरकतों पर कभी लग़ाम नहीं लगाने वाली है, क्यूँकि यह स्वयं उसके एजेंडा का ही हिस्सा है”। आशा मिश्रा ने कहा कि यह मामला न सिर्फ़ महिला विरोधी हिंसा और मुस्लिम समाज के ख़िलाफ़ नफ़रत को बढ़ावा देता है, बल्कि  अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी हमला है।

साइबर पुलिस (दक्षिण पूर्वी दिल्ली) ने पत्रकार इसमत आरा की शिकायत पर आईपीसी की 153A (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता का संप्रवर्तन और सौहार्द्र बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कार्य करना। 153B (राष्ट्रीय एकता के खिलाफ प्रभाव डालने वाले भाषण देना या लांछन लगाना।), 354A और 509 (शब्द, अंगविक्षेप या कार्य जो किसी स्त्री की लज्जा का अनादर करने के लिए आशयित है) के तहत मुक़दमा दर्ज किया है।

मुंबई “साइबर पुलिस” ने भी 'बुली बाई' ऐप बनाने वाले और इसे बढ़ावा देने वाले ट्विटर हैंडल के ख़िलाफ़  एक एफ़आईआर दर्ज की है। पुलिस सूत्रों ने मीडिया को बताया कि धारा 354-डी (महिलाओं का पीछा करना), 500 (मानहानि के लिए सजा) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की अन्य धाराओं के तहत यह मामला शनिवार को दर्ज किया गया।

(लेखक लखनऊ स्थित स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

Bullybai
Bullybai app case
Muslim women
minority
Muslim society
Github

Related Stories

शाहीन बाग से खरगोन : मुस्लिम महिलाओं का शांतिपूर्ण संघर्ष !

तलाक़शुदा मुस्लिम महिलाओं को भी है गुज़ारा भत्ता पाने का अधिकार 

मेरे मुसलमान होने की पीड़ा...!

शिक्षित मुस्लिम महिलाओं ने हिजाब फ़ैसले को “न्यायिक अतिक्रमण’ क़रार दिया है 

सद्भाव बनाए रखना मुसलमानों की जिम्मेदारी: असम CM

बिहारः भूमिहीनों को ज़मीन देने का मुद्दा सदन में उठा 

दबाये जाने की तमाम कोशिशों के बावजूद भारत का बहुलतावादी लोकतंत्र बचा रहेगा: ज़ोया हसन

हिजाब को गलत क्यों मानते हैं हिंदुत्व और पितृसत्ता? 

हिजाब पर बवाल के बहुआयामी निहितार्थ

मोदी जी, क्या आपने मुस्लिम महिलाओं से इसी सुरक्षा का वादा किया था?


बाकी खबरें

  • Antony Blinken
    एम. के. भद्रकुमार
    रूस को अमेरिकी जवाब देने में ब्लिंकन देरी कर रहे हैं
    21 Jan 2022
    रूस की सुरक्षा गारंटी देने की मांगों पर औपचारिक प्रतिक्रिया देने की समय सीमा नजदीक आने के साथ ही अमेरिकी कूटनीति तेज हो गई है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के क़रीब साढ़े तीन लाख नए मामले सामने आए
    21 Jan 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के साढ़े तीन लाख के क़रीब यानी 3,47,254 नए मामले सामने आए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 5.23 फ़ीसदी यानी 20 लाख 18 हज़ार 825 हो गयी है।
  • jute mill
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    बंगाल : जूट मिल बंद होने से क़रीब एक लाख मज़दूर होंगे प्रभावित
    21 Jan 2022
    नौ प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने केंद्रीय कपड़ा मंत्री पीयूष गोयल और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से हस्तक्षेप की मांग की है।
  • online education
    सतीश भारतीय
    ऑनलाइन शिक्षा में विभिन्न समस्याओं से जूझते विद्यार्थियों का बयान
    21 Jan 2022
    मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों और शिक्षकों की प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट ज्ञात हो रहा है कि इस वक्त ऑनलाइन शिक्षा एक औपचारिकता के रूप में विद्यमान है। सरकार ने धरातलीय हकीकत जाने बगैर ऑनलाइन शिक्षा कोरोना…
  • Ukraine
    न्यूज़क्लिक टीम
    पड़ताल दुनिया भर कीः यमन का ड्रोन हमला हो या यूक्रेन पर तनाव, कब्ज़ा और लालच है असल मकसद
    20 Jan 2022
    'पड़ताल दुनिया भर की' में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबु धाबी पर किये ड्रोन हमले की असल कहानी पर प्रकाश डाला न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License