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चिन्मयानंद प्रकरण : बीजेपी किसे बचा रही है, बेटी को या अपने आरोपी नेताओं को?
चिन्मयानंद मामले में जाँच दल की भूमिका पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसके अलवा जेल में उनसे मिलने गए बीजेपी नेताओ की निंदा हो रही है। बताया जा रहा है कि कुछ विधायकों ने जेल जाकर चिन्मयानंद से मुलाक़ात की है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
24 Sep 2019
chinmayanand case
Image courtesy: Top Indi News

"बलात्कार के मामलों में केवल एक प्रतिशत पीड़ित पक्ष अभियुक्त के विरुद्ध मुक़दमा दर्ज कराता है। बलात्कार जैसे जघन्य अपराध के 99 प्रतिशत मामलों में पीड़ित पक्ष मुक़दमा दर्ज ही नहीं कराता है। केवल एक प्रतिशत दर्ज होने वाले मामलों में भी अधिकतर अभियुक्त बिना किसी सज़ा के बरी हो जाते हैं।"

वरिष्ठ अधिवक्ता रेनु मिश्रा कहती हैं कि बलात्कार के मामलों में आँकड़े चौंकाने वाले हैं। बलात्कार की शिकार 100 में से सर्फ़ एक पड़िता अपने विरुद्ध हुए अत्याचार का मुक़दमा दर्ज करती है। इस एक प्रतिशत में भी सज़ा सिर्फ़ 28 प्रतिशत अपराधियों को सज़ा होती है। बाक़ी 72 प्रतिशत कमज़ोर होने के कारण रिहा हो जाते हैं। अधिवक्ता रेनू मिश्रा के अनुसार जाँच दल अक्सर अभियुक्त के ख़िलाफ़ मुक़दमा कमज़ोर कर देते हैं, जिसका फ़ायदा सीधे अपराधी को मिलता है और ज़्यादातर अपराधी बिना किसी सज़ा के छूट जाते हैं।

रेनू मिश्रा सामाजिक संस्था आली की भी निदेशक हैं। उनको इसी बात की आशंका चिन्मयानंद प्रकरण में भी है। क्यूँकि पीड़िता के बयान के बावजूद चिन्मयानंद पर बलात्कार का मुक़दमा नहीं लिखा गया है।

क़ानून की जानकर रेनू मिश्रा कहती हैं कि वह देख रही है कि चिन्मयानंद प्रकरण में भी जाँच दल मुक़दमा कमज़ोर करने की कोशिश कर रहा है। चिन्मयानंद पर मुक़दमा धारा 376 (2) में दर्ज होना चाहिए था। जबकि मुक़दमे में धारा 376 (C) लगाई गई है। अगर 376 (2) के तहत मुक़दमा हुआ तो अभियुक्त को 10 वर्ष की सज़ा तक हो सकती है। 376 (C) में केवल 05 वर्ष की सज़ा होती है।

इसे भी पढ़ें : चिन्मयानंद प्रकरण : एसआईटी ने जानबूझकर कमज़ोर किया मुकदमा?

उन्होंने कहा कि चिन्मयानंद प्रकरण में एसआईटी ने सुप्रीम कोर्ट की दी गई हिदायत को भी नज़रंदाज़ किया है। रेनू मिश्रा ने सवाल किया है जब 8 सितम्बर, 2019 को पीड़िता का बयान हो गया था, तो पीड़िता की तुरंत मेडिकल जाँच क्यूँ नहीं हुई? इसके अलावा पीड़िता के बयान के बाद अभियुक्त चिन्मयानंद को उसी समय गिरफ़्तार क्यूँ नहीं किया गया? सामाजिक न्याय के लिए वकालत करने वाली रेनू मिश्रा कहती हैं कि बलात्कार के आरोपी को मृत्युदंड देने की बात करने का कोई अर्थ नहीं है, जब तक आरोपियों को सत्ता का संरक्षण मिलता रहेगा और कमज़ोर मुक़दमे लिखे जाते रहेंगे।

चिन्मयानंद मामले में जाँच दल की भूमिका पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसके अलवा जेल में उनसे मिलने गए बीजेपी नेताओ की निंदा हो रही है। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की वरिष्ठ सदस्य मधु गर्ग का कहना है कि जेल में बंद बलात्कार के अभियुक्तों से बीजेपी नेताओं का मिलने जाना, यह सिद्ध करता है कि बीजेपी सरकार महिला उत्पीड़न को लेकर गम्भीर नहीं है। उन्होंने कहा बलात्कार के अभियुक्त कुलदीप सिंह सेंगर से जेल में मिलने बीजेपी के सांसद साक्षी महाराज गए थे और आरोप है कि सत्तारुढ़ दल के विधायक, आरोपी चिन्मयानंद से मिलने जेल गए हैं।

सूत्रों से प्राप्त समाचार के अनुसार रविवार सुबह ददरौल विधायक मानवेंद्र सिंह ने और तिलहर के विधायक रोशन लान वर्मा ने जेल जाकर चिन्मयानंद से मुलाक़ात की है। दोनों विधायक रविवार को दिन, में क़रीब 3 बजे, शाहजहाँपुर जेल पहुँचे थे और चिन्मयानंद से मुलाक़ात की।
मधु गर्ग ने कहा कि महिला संगठन पूरे प्रकरण पर नज़र रखे हुए है। अगर पीड़िता के साथ अन्याय होता दिखा तो पूरे प्रदेश में आंदोलन होगा।
महिला अधिकारों के लिए सक्रिय रहने वाली ताहिरा हसन कहती हैं कि जस्टिस वर्मा कमेटी को चिन्मयानंद प्रकरण में नज़रअंदाज़ किया गया है।उन्होंने कहा कि आरोपी पूर्व मंत्री को उस वक़्त गिरफ़्तार किया गया जब पीड़िता ने आत्मदह की धमकी दी। उन्होंने कहा कि बीजेपी का नारा “बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ” मात्र एक चुनावी जुमला था, बीजेपी सरकार बेटी को छोड़कर अपनी पार्टी के रसूख़दरों नेताओ को बचा रही है।

महिला संगठनों का आरोप है कि प्रशासन में बैठे अधिकारी प्रारम्भ से ही पीड़िता पर दबाव बनाकर चिन्मयानंद को बचाने की कोशिश कर रहे थे। वरिष्ठ समाजिक कार्यकर्ता और महिला फेडरेशन की सचिव आशा मिश्रा का आरोप है की चिन्मयानंद प्रकरण में पीड़िता पर अधिकारी यह कह कर दबाव बना रहे थे कि अभियुक्त के सम्बंध आरएसएस प्रमुख और उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री से हैं। आशा मिश्रा ने सेंगर और चिन्मयानंद को निशना बनाते हुए कहा की बीजेपी में सफ़ेदपोश से लेकर भगवाधारी तक महिलाओं के विरुद्ध जघन्य अपराधों में शामिल हैं।

साझी दुनिया की सचिव रूपरेखा वर्मा ने कहा कि पुलिस वही कर रही है जो उसको सत्ता में बैठे हुए लोग उससे करने को कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बलात्कार जैसे अपराधों की एफ़आईआर तक करना पीड़ितों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति रूपरेखा कहती हैं कि अगर चिन्मयानंद प्रकरण में सत्ता पक्ष द्वारा अभियुक्त को बचाया गया तो महिला संगठन एक साथ मिलकर बड़े क़दम उठाएंगे।

इसके अलावा फिरौती के आरोप में गिरफ्तारी से बचने के लिए पीड़ित छात्रा की स्टे की मांग को अदालत ने सोमवार को नामंजूर कर दिया है। धारा 164 के तहत दोबारा कलमबंद बयान दर्ज करवाने की छात्रा की मांग को भी अदालत ने ठुकरा दिया है। अदालत के अनुसार छात्रा को गिरफ्तारी पर रोक के लिए दूसरी कोर्ट में अर्जी देनी होगी।

इसे पढ़ें :  चिन्मयानंद मामले में पीड़िता की गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इलाहाबाद हाईकोर्ट का इनकार

बता दें कि शाहजहांपुर की छात्रा के साथ बलात्कार के अभियुक्त पूर्व मंत्री चिन्मयानंद सोमवार को सुबह राजधानी लखनऊ के संजय गांधी पीजीआई में इलाज के लिए लाए गए थे। एसजीपीजीआई के वरिष्ठ डॉ. प्रो० अमित अग्रवाल के मुताबिक, हार्ट में ब्लॉकेज की दिक्कत की शिकायत को लेकर चिन्मयानंद को कार्डियक आइसीयू में 11:45 बजे भर्ती किया गया था। शाम करीब सवा चार बजे के क़रीब उनकी एंजियोग्राफी हुई, उनके हार्ट में किसी भी तरह का ब्‍लॉकेज नहीं निकला है।

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