NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
भारत
राजनीति
चिन्मयानंद प्रकरण : बीजेपी किसे बचा रही है, बेटी को या अपने आरोपी नेताओं को?
चिन्मयानंद मामले में जाँच दल की भूमिका पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसके अलवा जेल में उनसे मिलने गए बीजेपी नेताओ की निंदा हो रही है। बताया जा रहा है कि कुछ विधायकों ने जेल जाकर चिन्मयानंद से मुलाक़ात की है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
24 Sep 2019
chinmayanand case
Image courtesy: Top Indi News

"बलात्कार के मामलों में केवल एक प्रतिशत पीड़ित पक्ष अभियुक्त के विरुद्ध मुक़दमा दर्ज कराता है। बलात्कार जैसे जघन्य अपराध के 99 प्रतिशत मामलों में पीड़ित पक्ष मुक़दमा दर्ज ही नहीं कराता है। केवल एक प्रतिशत दर्ज होने वाले मामलों में भी अधिकतर अभियुक्त बिना किसी सज़ा के बरी हो जाते हैं।"

वरिष्ठ अधिवक्ता रेनु मिश्रा कहती हैं कि बलात्कार के मामलों में आँकड़े चौंकाने वाले हैं। बलात्कार की शिकार 100 में से सर्फ़ एक पड़िता अपने विरुद्ध हुए अत्याचार का मुक़दमा दर्ज करती है। इस एक प्रतिशत में भी सज़ा सिर्फ़ 28 प्रतिशत अपराधियों को सज़ा होती है। बाक़ी 72 प्रतिशत कमज़ोर होने के कारण रिहा हो जाते हैं। अधिवक्ता रेनू मिश्रा के अनुसार जाँच दल अक्सर अभियुक्त के ख़िलाफ़ मुक़दमा कमज़ोर कर देते हैं, जिसका फ़ायदा सीधे अपराधी को मिलता है और ज़्यादातर अपराधी बिना किसी सज़ा के छूट जाते हैं।

रेनू मिश्रा सामाजिक संस्था आली की भी निदेशक हैं। उनको इसी बात की आशंका चिन्मयानंद प्रकरण में भी है। क्यूँकि पीड़िता के बयान के बावजूद चिन्मयानंद पर बलात्कार का मुक़दमा नहीं लिखा गया है।

क़ानून की जानकर रेनू मिश्रा कहती हैं कि वह देख रही है कि चिन्मयानंद प्रकरण में भी जाँच दल मुक़दमा कमज़ोर करने की कोशिश कर रहा है। चिन्मयानंद पर मुक़दमा धारा 376 (2) में दर्ज होना चाहिए था। जबकि मुक़दमे में धारा 376 (C) लगाई गई है। अगर 376 (2) के तहत मुक़दमा हुआ तो अभियुक्त को 10 वर्ष की सज़ा तक हो सकती है। 376 (C) में केवल 05 वर्ष की सज़ा होती है।

इसे भी पढ़ें : चिन्मयानंद प्रकरण : एसआईटी ने जानबूझकर कमज़ोर किया मुकदमा?

उन्होंने कहा कि चिन्मयानंद प्रकरण में एसआईटी ने सुप्रीम कोर्ट की दी गई हिदायत को भी नज़रंदाज़ किया है। रेनू मिश्रा ने सवाल किया है जब 8 सितम्बर, 2019 को पीड़िता का बयान हो गया था, तो पीड़िता की तुरंत मेडिकल जाँच क्यूँ नहीं हुई? इसके अलावा पीड़िता के बयान के बाद अभियुक्त चिन्मयानंद को उसी समय गिरफ़्तार क्यूँ नहीं किया गया? सामाजिक न्याय के लिए वकालत करने वाली रेनू मिश्रा कहती हैं कि बलात्कार के आरोपी को मृत्युदंड देने की बात करने का कोई अर्थ नहीं है, जब तक आरोपियों को सत्ता का संरक्षण मिलता रहेगा और कमज़ोर मुक़दमे लिखे जाते रहेंगे।

चिन्मयानंद मामले में जाँच दल की भूमिका पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसके अलवा जेल में उनसे मिलने गए बीजेपी नेताओ की निंदा हो रही है। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की वरिष्ठ सदस्य मधु गर्ग का कहना है कि जेल में बंद बलात्कार के अभियुक्तों से बीजेपी नेताओं का मिलने जाना, यह सिद्ध करता है कि बीजेपी सरकार महिला उत्पीड़न को लेकर गम्भीर नहीं है। उन्होंने कहा बलात्कार के अभियुक्त कुलदीप सिंह सेंगर से जेल में मिलने बीजेपी के सांसद साक्षी महाराज गए थे और आरोप है कि सत्तारुढ़ दल के विधायक, आरोपी चिन्मयानंद से मिलने जेल गए हैं।

सूत्रों से प्राप्त समाचार के अनुसार रविवार सुबह ददरौल विधायक मानवेंद्र सिंह ने और तिलहर के विधायक रोशन लान वर्मा ने जेल जाकर चिन्मयानंद से मुलाक़ात की है। दोनों विधायक रविवार को दिन, में क़रीब 3 बजे, शाहजहाँपुर जेल पहुँचे थे और चिन्मयानंद से मुलाक़ात की।
मधु गर्ग ने कहा कि महिला संगठन पूरे प्रकरण पर नज़र रखे हुए है। अगर पीड़िता के साथ अन्याय होता दिखा तो पूरे प्रदेश में आंदोलन होगा।
महिला अधिकारों के लिए सक्रिय रहने वाली ताहिरा हसन कहती हैं कि जस्टिस वर्मा कमेटी को चिन्मयानंद प्रकरण में नज़रअंदाज़ किया गया है।उन्होंने कहा कि आरोपी पूर्व मंत्री को उस वक़्त गिरफ़्तार किया गया जब पीड़िता ने आत्मदह की धमकी दी। उन्होंने कहा कि बीजेपी का नारा “बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ” मात्र एक चुनावी जुमला था, बीजेपी सरकार बेटी को छोड़कर अपनी पार्टी के रसूख़दरों नेताओ को बचा रही है।

महिला संगठनों का आरोप है कि प्रशासन में बैठे अधिकारी प्रारम्भ से ही पीड़िता पर दबाव बनाकर चिन्मयानंद को बचाने की कोशिश कर रहे थे। वरिष्ठ समाजिक कार्यकर्ता और महिला फेडरेशन की सचिव आशा मिश्रा का आरोप है की चिन्मयानंद प्रकरण में पीड़िता पर अधिकारी यह कह कर दबाव बना रहे थे कि अभियुक्त के सम्बंध आरएसएस प्रमुख और उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री से हैं। आशा मिश्रा ने सेंगर और चिन्मयानंद को निशना बनाते हुए कहा की बीजेपी में सफ़ेदपोश से लेकर भगवाधारी तक महिलाओं के विरुद्ध जघन्य अपराधों में शामिल हैं।

साझी दुनिया की सचिव रूपरेखा वर्मा ने कहा कि पुलिस वही कर रही है जो उसको सत्ता में बैठे हुए लोग उससे करने को कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बलात्कार जैसे अपराधों की एफ़आईआर तक करना पीड़ितों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति रूपरेखा कहती हैं कि अगर चिन्मयानंद प्रकरण में सत्ता पक्ष द्वारा अभियुक्त को बचाया गया तो महिला संगठन एक साथ मिलकर बड़े क़दम उठाएंगे।

इसके अलावा फिरौती के आरोप में गिरफ्तारी से बचने के लिए पीड़ित छात्रा की स्टे की मांग को अदालत ने सोमवार को नामंजूर कर दिया है। धारा 164 के तहत दोबारा कलमबंद बयान दर्ज करवाने की छात्रा की मांग को भी अदालत ने ठुकरा दिया है। अदालत के अनुसार छात्रा को गिरफ्तारी पर रोक के लिए दूसरी कोर्ट में अर्जी देनी होगी।

इसे पढ़ें :  चिन्मयानंद मामले में पीड़िता की गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इलाहाबाद हाईकोर्ट का इनकार

बता दें कि शाहजहांपुर की छात्रा के साथ बलात्कार के अभियुक्त पूर्व मंत्री चिन्मयानंद सोमवार को सुबह राजधानी लखनऊ के संजय गांधी पीजीआई में इलाज के लिए लाए गए थे। एसजीपीजीआई के वरिष्ठ डॉ. प्रो० अमित अग्रवाल के मुताबिक, हार्ट में ब्लॉकेज की दिक्कत की शिकायत को लेकर चिन्मयानंद को कार्डियक आइसीयू में 11:45 बजे भर्ती किया गया था। शाम करीब सवा चार बजे के क़रीब उनकी एंजियोग्राफी हुई, उनके हार्ट में किसी भी तरह का ब्‍लॉकेज नहीं निकला है।

Swami Chinmayananda
Chinmayanand Rape Case
BJP
rape case
crimes against women
violence against women

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट : डाडा जलालपुर में अभी भी तनाव, कई मुस्लिम परिवारों ने किया पलायन

हिमाचल प्रदेश के ऊना में 'धर्म संसद', यति नरसिंहानंद सहित हरिद्वार धर्म संसद के मुख्य आरोपी शामिल 

बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?

ग़ाज़ीपुर; मस्जिद पर भगवा झंडा लहराने का मामला: एक नाबालिग गिरफ़्तार, मुस्लिम समाज में डर

लखीमपुर हिंसा:आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने के लिए एसआईटी की रिपोर्ट पर न्यायालय ने उप्र सरकार से मांगा जवाब

टीएमसी नेताओं ने माना कि रामपुरहाट की घटना ने पार्टी को दाग़दार बना दिया है


बाकी खबरें

  • 21-year-old Muslim youth hanged himself from one and a half feet high tap
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    डेढ़ फ़ीट ऊंचे नल से फांसी लगाई 21 साल के मुस्लिम युवक ने : उत्तर प्रदेश पुलिस का दावा
    11 Nov 2021
    उत्तर प्रदेश के कासगंज में पुलिस हिरासत में 21 साल के अल्ताफ़ की मौत हो गई। पुलिस का कहना है कि अल्ताफ़ ने शौचालय के नल से लटक कर फांसी लगा ली। मृतक के पिता का सीधा आरोप है कि उनके बेटे की हत्या हुई है…
  • UAPA
    अजय कुमार
    UAPA: भारत में कानून के राज को तोड़ने का सबसे धारदार हथियार
    11 Nov 2021
    अगर सरकार चाहें तो UAPA कानून के ज़रिये महज़ आरोप लगाकर लोगों को सालों साल जेल में रख सकती है, जानिए कैसे? 
  • ASHA Workers
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी: शाहजहांपुर में प्रदर्शनकारी आशा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पीटा, यूनियन ने दी टीकाकरण अभियान के बहिष्कार की धमकी
    11 Nov 2021
    पुलिस के बयान के उलट आशा कार्यकर्ताओं का कहना था कि उन्हें उस समय हिरासत में लिया गया, जब वे उस रैली की ओर मार्च कर रही थीं, जहां मुख्यमंत्री सभा को सम्बोधित कर रहे थे और मुख्यमंत्री के दौरे के पूरा…
  • कितने जायज़ हैं फिल्म 'जय भीम' पर उठते सवाल
    न्यूज़क्लिक टीम
    कितने जायज़ हैं फिल्म 'जय भीम' पर उठते सवाल
    10 Nov 2021
    फिल्म निर्देशक टी जे ज्ञानवेल और सूर्या-ज्योतिका द्वारा निर्मित तमिल फिल्म 'जय भीम' की प्रोफेशनल और आर्थिक कामयाबी पर किसी को संदेह नहीं। यह फिल्म लोकप्रियता के रिकार्ड बना रही है. तमिल से लेकर…
  • पेक्सलोविड: Covid-19 के ख़िलाफ़ एक और दवाई और इसके मायने
    पेक्सलोविड: Covid-19 के ख़िलाफ़ एक और दवाई और इसके मायने
    10 Nov 2021
    आज हम डॉ. सत्यजीत के साथ फाइजर की एंटीवायरल दवा पेक्सलोविड के बारे में चर्चा करेंगे, यह भी समझने की कोशिश करेंगे कि कैसे यह Covid-19 ख़िलाफ़ एक सार्थक विकल्प हो सकता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License