NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
चीरूडीह गोलीकांड : हाईकोर्ट ने जगायी पीड़ितों में न्याय की आस!
झारखंड के बड़कागाँव में जबरन ज़मीन अधिग्रहण के विरोध पर किसानों को मिली थी लाठी–गोली।
अनिल अंशुमन
17 Feb 2019
पीड़ित परिवार
फोटो : साभार

इसी 11 फरवरी को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार द्वारा जज के सामने ये स्वीकार करना कि बड़कागाँव के चीरूडीह गोलीकांड के चारों मृतक पुलिस की गोली से मारे गए हैं, एआईपीएफ व पीयूसीएल समेत कई जांच टीमों के निष्कर्ष को सच साबित करता है। जबकि अबतक पुलिस द्वारा दर्ज़ सरकारी रिपोर्ट में इस सच को सिरे से खारिज कर कहा गया था कि ये सभी उपद्रवियों की गोली से ही मरे हैं। इस गोलीकांड के पीड़ित परिवारों की ओर से दायर अपील पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने 2018 के 4 जुलाई को ही आदेश दिया था कि चीरूडीह गोलीकांड में NTPC के जीएम , बड़कागाँव के पुलिस एएसपी और मौके पर तैनात सीईओ समेत 25 अधिकारियों पर हत्या का मामला दर्ज़ किया जाये। जिसने उन सभी शोकसंतप्त परिवारों में न्याय की आस जगा दी जिनके निर्दोष बच्चे पुलिस की गोलियों का निशाना बने थे।

1 अक्टूबर, 2016 को झारखंड के हजारीबाग ज़िला स्थित बड़कागाँव प्रखण्ड का चीरूडीह गाँव उस समय सुर्खियों में आया था जब वहाँ जबरन ज़मीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे स्थानीय किसानों पर पुलिस ने गोली चला दी थी। इसमें चार निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। किसान अपनी बहुफ़सली ज़मीनों पर एनटीपीसी की कोल परियोजना शुरू किए जाने का विरोध कर रहे थे। इसी के तहत स्थानीय विधायिका के नेतृत्व में कोयला खनन स्थल के पास पिछले कई दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से ‘कफन सत्याग्रह’ के माध्यम से विरोध धरना दे रहे थे।

badkaaganw  4.jpg

(गोलीकांड में मारे गए छात्र अभिषेक राय का लाइब्रेरी कार्ड)

1 अक्टूबर को आधी रात के बाद करीब तीन बजे ही सैकड़ों पुलिस जवानों द्वारा धरनास्थल पर सो रहे निहत्थे किसानों पर लठियाँ बरसाते हुए वहाँ तोड़फोड़ शुरू कर दी गई। आंदोलनकारी किसान महिलाओं के साथ वहीं सो रहीं महिला विधायक का बाल पकड़कर खींचते हुए ले जाने का कड़ा विरोध करने पर पुलिस ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जिसमें सुबह सुबह ट्यूशन पढ़ने जा रहे 10वीं के छात्र पावन महतो, 17 वर्षीय अभिषेक राय और रंजन कुमार समेत शौच के लिए जा रहे 32 वर्षीय माहताब आलम गोली लगने से वहीं मारे गए। ग्रामीणों के विरोध में घायल हुए दंडाधिकारी सीईओ को तो आनन फानन हेलीकॉप्टर से ले जाया गया लेकिन पुलिसिया लाठी–गोली से घायल हुए दर्जनों महिला-पुरुष किसानों को देखने वाला कोई नहीं था।

बड़कागाँव प्रखण्ड के चीरूडीह समेत कई गांवों के किसान पिछले कई वर्षों से इस पूरे इलाके में एनटीपीसी के प्रस्तावित “ पकरी–बरवाडीह कोल परियोजना” का निरंतर विरोध कर रहें हैं क्योंकि इस परियोजना से उजड़ने वाले 52 से भी आधिक गांवों की एक बड़ी आबादी के जीवन यापन की वैकल्पिक व्यवस्था की कहीं कोई चर्चा नहीं है। इसीलिए व्यापक किसान कोयला खनन के लिए अपनी बहुफ़सली ज़मीनें देना ही नहीं चाहते हैं लेकिन कंपनी चंद किसानों को अंधेरे में रखकर औने पौने दामों पर कुछ ज़मीन लेकर यह दुष्प्रचारित करवा रही है कि – स्थानीय किसान तो ज़मीन दे रहें हैं लेकिन बाहरी तत्व आकर इन्हें भड़का रहें हैं। वहीं किसानों का एक हिस्सा सरकार के ‘भूमि अधिग्रहण 2013’ कानून को लागू करने की मांग कर रहा है। जिसे अनसुना कर कंपनी स्थानीय ज़िला प्रशासन और पुलिस बल के जरिये किसानों कि ज़मीनें जबरन लेने पर आमादा रही। 24 जुलाई 2013 में किसानों के विरोध कुचलने के लिए कंपनी ने पुलिस फायरिंग कराकर एक किसान की जान ले ली थी। 16 मई 2016 को जबरन खनन का विरोध कर रहे दर्जनों गांवों में सैकड़ों पुलिस ने लोगों के घरों में घुस घुसकर पिता और घरों में तोड़फोड़ की थी।

ज्ञात हो कि केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के शासन काल में जब इस परियोजना की घोषणा की गयी थी तो लोगों को यही उम्मीद बंधी थी कि उनके ‘अच्छे दिन’  आएंगे। लेकिन जब कंपनी ने स्थानीय राज नेताओं व दलालों के जरिये किसानों से औने पौने दाम पर जबरन ज़मीन लेना शुरू किया तब असलियत सामने आई। यही वजह थी कि केंद्र में भाजपा के दुबारा सत्तासीन होते ही उसने अपनी प्रदेश की सरकार की पुलिसिया ताकत से इस इलाके के किसानों की ज़मीनें छीनने की प्रक्रिया शुरू कर 17 सितंबर से खनन कार्य चालू कर दिया गया। 28 सितंबर 2016 को खुद प्रधानमंत्री कार्यालय से भी इस परियोजना में मुआवज़े देने और कार्य प्रगति की रिपोर्ट मांगते हुए हर हाल में काम पूरा करने का निर्देश दिया गया था । इसीलिए ऊपर के आदेश से ही 1 अक्टूबर, 2018 को जब स्थानीय विधायक के नेतृत्व में चीरूडीह में किसान धरना दे रहे थे तो सुनियोजित दमन चक्र चलाया गया।

चीरूडीह गोलीकांड पर जहां पुलिस ने किसानों के शांतिपूर्ण विरोध को हिंसक बताकर आत्मरक्षार्थ गोली चलाने का मामला दर्ज़ किया वहीं गोलीकांड के शिकार लोगों के परिजनों द्वारा दायर केस को पुलिस व स्थानीय प्रशासन ने दर्ज़ होने ही नहीं दिया। बाद में जब इनकी ओर से हाईकोर्ट में अपील दायर हुई और कोर्ट ने संज्ञान लेकर आदेश दिया तो कांड के डेढ़ बरस बाद जाकर बड़कागांव थाना को केस लेना पड़ा।

चीरूडीह गोलीकांड का पूरे राज्य में व्यापक विरोध हुआ और कई सामाजिक जनसंगठनों व मानवाधिकार संगठनों समेत राज्य के सभी वामपंथी और विपक्षी दलों ने राज्यव्यापी प्रतिवाद अभियान चलाये। कई जांच टीमों ने घटनास्थल व क्षेत्र का दौरा कर ज़मीनी हक़ीक़त की रिपोर्ट जारी कर यहाँ के विस्थापितों के इंसाफ की मांग उठाई। लेकिन केंद्र व राज्य की सरकारों ने इसे नकार कर कंपनी व प्रशासन के सारे कृत्य को सही बताते हुए जबरन ज़मीन छीने जाने का विरोध कर रहे किसानों को ही कसूरवार ठहराया। अब जबकि हाईकोर्ट ने गंभीरता से संज्ञान लिया है... क्षेत्र को किसानों को न्याय की आस बंधने लगी है।

Jharkhand
jharkhand high court
Jharkhand government
JHARKHAND POLICE
Raghubar Das
farmers protest
badkaganv
chirudhih

Related Stories

छोटे-मझोले किसानों पर लू की मार, प्रति क्विंटल गेंहू के लिए यूनियनों ने मांगा 500 रुपये बोनस

झारखंड: भाजपा काल में हुए भवन निर्माण घोटालों की ‘न्यायिक जांच’ कराएगी हेमंत सोरेन सरकार

झारखंड: बोर्ड एग्जाम की 70 कॉपी प्रतिदिन चेक करने का आदेश, अध्यापकों ने किया विरोध

झारखंड : हेमंत सरकार को गिराने की कोशिशों के ख़िलाफ़ वाम दलों ने BJP को दी चेतावनी

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

झारखंड की खान सचिव पूजा सिंघल जेल भेजी गयीं

लखीमपुर खीरी हत्याकांड: आशीष मिश्रा के साथियों की ज़मानत ख़ारिज, मंत्री टेनी के आचरण पर कोर्ट की तीखी टिप्पणी

युद्ध, खाद्यान्न और औपनिवेशीकरण

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

झारखंडः आईएएस पूजा सिंघल के ठिकानों पर छापेमारी दूसरे दिन भी जारी, क़रीबी सीए के घर से 19.31 करोड़ कैश बरामद


बाकी खबरें

  • भाषा
    दलित किशोर की पिटाई व पैर चटवाने का वीडियो आया सामने, आठ आरोपी गिरफ्तार
    19 Apr 2022
    पुलिस के अनुसार मामले में अनुसूचित जाति जनजाति अत्यातार निवारण अधिनियम (एससी-एसटी एक्ट), 147 (उपद्रव के दोष में दो वर्ष कारावास) 149 (विधिविरुद्ध जनसमूह के किसी सदस्य द्वारा किये गये अपराध में जनसमूह…
  • एम. के. भद्रकुमार
    मारियुपोल की जंग आख़िरी पड़ाव पर
    19 Apr 2022
    शनिवार को दोनेतस्क प्रशासन के प्रमुख डेनिस पुशिलिन ने खुले तौर पर अज़ोवस्तल में छिपे हुए नव-नाज़ी उग्रवादियों के "ख़ात्मे" का आह्वान किया।
  • भाषा
    अदालत ने ईसाई महिला, डीवाईएफआई के मुस्लिम नेता के अंतरधार्मिक विवाह में हस्तक्षेप से किया इनकार
    19 Apr 2022
    न्यायमूर्ति वी जी अरुण और न्यायमूर्ति सी एस सुधा की पीठ ने महिला, ज्योत्सना मैरी जोसेफ से बातचीत करने के बाद कहा, ‘‘उसने साफ-साफ कहा कि उसने (डीवाईएफआई नेता) शेजिन से अपनी मर्जी से विवाह करने का…
  • सत्यम् तिवारी
    रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट : डाडा जलालपुर में अभी भी तनाव, कई मुस्लिम परिवारों ने किया पलायन
    19 Apr 2022
    न्यूज़क्लिक ने डाडा जलालपुर गांव का दौरा किया, दोनों पक्षों से बात की और उनसे जानने की कोशिश की कि हनुमान जयंती की उस रात क्या हुआ था? और अब क्या हालात हैं?
  • मुकुंद झा, तारिक अनवर
    प्रत्यक्षदर्शियों की ज़ुबानी कैसे जहांगीरपुरी हनुमान जयंती जुलूस ने सांप्रदायिक रंग लिया
    19 Apr 2022
    प्राथमिकी में तलवार, बेसबॉल बैट और रिवॉल्‍वर, भड़काऊ गाने बजाने और नारे लगाने का ज़िक्र नहीं है। सूत्रों के अनुसार यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि तय मार्ग का पालन क्यों नहीं किया गया। और अब जब पुलिस…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License