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अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका
अमेरिका: क्या दांते राइट की हत्या पुलिस बजट को कम करने की वज़ह बनेगी?
कितने अश्वेतों की पुलिस द्वारा हत्या के बाद राजनीतिज्ञों को समझ में आएगा कि खर्चीले सुधार हमेशा सही नहीं होते?
सोनाली कोल्हटकर
19 Apr 2021
amc

जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के मामले में मिनेपोलिस में चल रही डेरेक चाउविन की सुनवाई के 3 हफ़्ते हो चुके हैं। इस बीच ब्रुकलिन सेंटर के उपमहानगरीय इलाके में एक श्वेत पुलिस अधिकारी ने दांते राइट नाम के अश्वेत की हत्या कर दी। यह घटना इसका प्रतीक है कि कैसे कानून लागू करने की प्रक्रिया ने अश्वेत अमेरिकियों के साथ नस्लीय युद्ध छेड़ रखा है, जबकि पूरे देश का ध्यान इसी मुद्दे पर है। 26 साल का अनुभव रखने वाली अधिकारी किंबरले पॉटर का कहना है कि वे टीज़र गन निकालना चाहती थीं, लेकिन गलती से उन्होंने फायर गन निकाल ली। इसके बाद उन्होंने कार में अपनी गर्लफ्रेंड के साथ बैठे राइट पर एक गोली चला दी। 

बहुत सारे अश्वेत अमेरिकियों की तरह, राइट को भी पुलिस से करने में डर लगता था। राइट की परामर्शदाता जोनाथन मेसन के मुताबिक़, "उसे डर था कि पुलिस उसके साथ वही व्यवहार करेगी, जैसा असल में हुआ।" एटॉर्नी बेंजामिन क्रम्प ने पुलिस की हिंसा का शिकार बने अनगिनत परिवारों के मुक़दमे लड़े हैं। उन्होंने कहा, "हम श्वेत लोगों के साथ ऐसी घटनाएं होते नहीं देखते, जो लगातार वंचित अल्पसंख्यकों के युवाओं के साथ होती हैं।"

पुलिस का अश्वेत डर उसके पूर्वाग्रहों में छुपा हुआ है। 'स्टेनफोर्ड ओपन पुलिसिंग प्रोजेक्ट' ने पुलिस द्वारा लोगों को रोके जाने की 10 करोड़ घटनाओं का अध्ययन किया और पाया कि अधिकारी आमतौर पर अश्वेत चालकों को श्वेत चालकों की तुलना में ज़्यादा रोकते हैं। अश्वेत और हिस्पैनिक चालकों की श्वेत चालकों की तुलना में तलाशी भी ज़्यादा ली जाती है। इसके अलावा अश्वेतों और हिस्पैनिक लोगों की तलाशी लेने के लिए पुलिस को थोड़ा-बहुत शक ही काफ़ी होता है। अध्ययन के मुताबिक़ यह "भेदभाव के सबूत" हैं।

राइट की मां के मुताबिक़, उसके रोके जाने में कुछ हिस्सा इस तथ्य का भी था कि राइट की कार में 'पीछे की तस्वीर दिखाने वाले शीशे' में एक एयर फ्रेशनर टंगा हुआ था। यह ऊटपटांग वज़ह उन कई सारी पागलपन भरी वज़हों में शामिल हैं, जिनके चलते पुलिस को अश्वेत अमेरिकियों पर शक हो जाता है। मिनेसोटा द्वारा जारी की गई ACLU ने एक वक्तव्य जारी किया, जिसके मुताबिक़, "इस बात की संभावना है कि यहां पुलिस ने यहां एयर फ्रेशनर को रोकने की वज़ह बनाया, यह वह चीज है जिसके आधार पर अक्सर अश्वेत लोगों को निशाना बनाया जाता है।"

हम यह वाल स्ट्रीट जर्नल पर छोड़ देते हैं कि वो जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ़ फैसला देने में सावधानी की बात कहे और दूसरी तरफ प्रदर्शनकारियों पर "गोलीबारी को हिंसा के लिए बहाने" के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाए। यह अख़बार शायद ही कभी अमेरिका में पुलिस द्वारा की जाने वाली अनगिनत नस्लीय हत्याओं पर नाराज़गी जताता है।

स्वतंत्र अश्वेत पत्रकार, जैसे किंग देमेत्रियस पेंडलेटन, चाउविन की सुनवाई और फ्लॉयड की हत्या के खिलाफ़ एक साल से हो रहे प्रदर्शनों पर नज़र बनाए हुए हैं। उनका इस स्थिति को लेकर पूरी तरह दूसरा विचार है। एक इंटरव्यू में पेंडलेटन ने मुझसे कहा कि फ्लॉयड की हत्या "सार्वजनिक लिंचिंग की तरह" थी, फिर दांते राइट की उसी ढंग से हत्या स्थानीय लोगों के लिए भीतर तक हिला देने वाली थी। पेंडलेटन उसी समुदाय से आते हैं, जो मिनेपोलिस में पुलिस हिंसा से गंभीर तरीके से ग्रस्त है। यह लोग नियमित तौर पर पुलिस के उत्पीड़न का शिकार बने परिवारों और इस उत्पीड़न के खिलाफ़ संघर्ष करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं को मंच देते हैं।
पेंडलेटन ने कहा कि राज्य द्वारा हिंसा की स्थिति में युवा लोगों से शांत रहने की उम्मीद रखना बेमानी है। राइट की हत्या के बाद मिनेपोलिस और ब्रुकलिन सेंटर में हुए बड़े प्रदर्शनों में नाराज़ लोगों ने पुलिस से टकराव मोल लिया और कई गिरफ़्तारियां हुईं। पेंडलेटन कहते हैं, "यह लोग अपने युवा दोस्तों की पुलिस द्वारा हत्या देख-देखकर थक चुके हैं। यह लोग जानते हैं कि कुछ होने वाला नहीं है, क्योंकि कभी कुछ हुआ ही नहीं है।" यह वही कहानी है कि जब प्रदर्शनकारी पुलिस की हत्याओं का विरोध करते हैं, तो ज़्यादा ध्यान राज्य द्वारा हुई हिंसा के बजाए इस लोगों की नाराज़गी पर होता है। पेंडलेटन, डॉ मार्टिन लूथ किंग जूनियर के शब्दों को उद्धरित करते हुए कहते हैं, "जिनकी सुनवाई नहीं होती, दंगा उनकी भाषा है।" पेंडलेटन के मुताबिक़ अफ्रीकी-अमेरिकी लोगों के पास शांति प्रदान करने वाले चिकित्सक जैसे लोग नहीं होते। उन्हें बस अपने दुख से निपटना होता है।
जैसे वाल स्ट्रीट जर्नल की टिप्पणी पुलिस द्वारा की गई हत्याओं पर चुप्पी साधकर प्रदर्शनकारियों पर केंद्रित है, वैसे ही बाइडेन की शांति बनाए रखने की अपील है। राइट की हत्या के बाद राष्ट्रपति ने कहा, "लूटमार करने या हिंसा को कोई भी वज़ह न्यायोचित नहीं ठहरा सकती।" राष्ट्रपति यहां पुलिस द्वारा की गई असली हिंसा की बात नहीं कर रहे थे, बल्कि प्रदर्शनकारियों द्वारा संभावित हिंसा की चर्चा कर रहे थे। 

अगर शांति की आवाज़ें, न्याय की आवाज़ों से ज़्यादा मजबूत होंगी, तो इसका मतलब है कि अमेरिका का अश्वेत लोगों को संदेश साफ़ है- चुप रहो और मरते रहो। कांग्रेस की महिला सदस्य राशिदा त्लाईब (D-MI) यहां ज़्यादा सही थीं, उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, राइट की हत्या "सरकार द्वारा पोषित हत्या" है और "हमारे देश में पुलिस व्यवस्था में नस्लवाद अंतर्निहित है।"


अहम बता यह रही कि त्लाईब ने यहां अश्वेत लोगों के खिलाफ़ राज्य की हिंसा का समाधान भी बताया, उन्होंने लिखा, "अब ना पुलिसिंग, ना कैद और ना सैन्यकरण होगा। इसे सुधारा नहीं जा सकता।" यहां त्लाईब ब्लैक लाइव्स मैटर के सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा "पुलिस का वित्त ख़त्म करने" की अपील को आगे बढ़ाया जा रहा था। इसका आधार वह विचार है, जिसमें कहा जा रहा है कि शहर के पैसे को कानून लागू करने पर ख़र्च करने के बजाए सीधे सामुदायिक सेवाओं पर खर्च करना चाहिए। पारंपरिक, यहां तक कि उदारवादियों का पुलिस हिंसा की समस्या में समाधान पुलिस पर और भी ज़्यादा पैसा खर्च करना रहा है। पिछले साल ब्लैक लाइव्स मैटर के प्रदर्शन में पुलिस बजट को कम करने की मांग रखी गई थी, इसके बावजूद समुदायों की सीधी मदद करने वाली शहर सेवा की तुलना में पुलिस सेवा के लोगों के वेतन को बढ़ा दिया गया। हिंसा को रोकने के लिए जिन पुलिस सुधारों की बात कही गई थी, उनके तहत सिर्फ़ अधिकारियों के शरीर पर लगने वाले कैमरों की संख्या को ही बढ़ाया गया। 


राइट के मामले में अधिकारी पॉटर के शरीर पर लगे कैमरे ने उनकी निर्दयी प्रतिक्रिया रोकने के लिए कुछ नहीं किया। इसने बस इतना दिखाया कि कैसे पॉटर ने हिंसा को अंजाम दिया, वैसे ही जैसे पुलिस अधिकारी हमेशा से देते आए हैं। फुटेज देखने के बाद पेंडलेटन ने कहा कि यह साफ़ था कि राइट को गिरफ़्तार करने की प्रक्रिया में शामिल अफ्रीकी अमेरिकी अधिकारी पहले स्थिति से निपट रहे थे, इसके बाद आप इस श्वेत महिला को आते देखते हैं, जिसने सीधे आकर राइट को पकड़ा।।। कुल मिलाकर उसने मामले को बढ़ा दिया।"

राइट को गोली मारने के बाद कुछ घंटों बाद ही ब्रुकलिन सेंटर के पुलिस प्रमुख टिम गैनन ने ऑफ़िसर पॉटर को संदेह का लाभ दे दिया। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि अधिकारी की मंशा टीज़र देने की थी, लेकिन इसके बजाए उसने मिस्टर राइट को एक गोली मार दी।" कानून लागू करने वाली एजेंसियां और उनके मित्र अक्सर पुलिस द्वारा किए गए गलत व्यवहार को उनकी नौकरी के दबाव से पैदा हुई गलतियां बताते रहे हैं, जिन्हें समझा जा सकता है। इसके बावजूद यह लोग, जल्दी बंदूक चलाना पसंद करने वाली पुलिस की हिंसा का शिकार पीड़ितों पर शांति के साथ व्यवहार ना करने का आरोप लगाते हैं।

राइट की हत्या के दो दिन बाद पॉटर और गैनन दोनों ने ही इस्तीफ़ा दे दिया। अपने इस्तीफ़े में पॉ़टर ने कहा, "यह समुदाय, विभाग और मेरे साथी अधिकारियों के हित में होगा कि मैं तत्काल इस्तीफ़ा दे दूं।" पुलिस द्वारा की गई बहुत सारी हत्याओं में कोई कार्रवाई नहीं होती, उसकी तुलना में पॉटर का इस्तीफ़ा न्याय की दिशा में कुछ प्रगति मानी जा सकती है, लेकिन यह कहीं से भी पर्याप्त नहीं है। राइट की रिश्तेदार न्येशा राइट ने एक प्रेस कॉ़न्फ्रेंस में कहा, "उन पर वैसे ही मुक़दमा चलाना चाहिए, जैसे यह लोग हम पर चलाते हैं।" अब पॉटर पर दूसरी डिग्री के मानववध का मामला दर्ज किया गया है। 

हाल में अब तक मिनेपोलिस इलाके में सिर्फ़ एक ही पुलिस अधिकारी को गोलीबारी के लिए अभियुक्त बनाए जाने के बाद दोषी ठहराया गया है और दस साल से ज़्यादा की सजा हुई है। एक अश्वेत, सोमाली अमेरिकी मोहम्मद नूर नाम के पुलिस अधिकारी ने गलती से जस्टिन रसज्कजिक नाम की एक श्वेत ऑस्ट्रेलियाई महिला को गोली मार दी थी, जिससे उसकी मौत हो गई थी। नूर की सुनवाई के दौरान पीड़ित से गहरी सहानुभूति रखी गई और पूरी घटना को त्रासदी बताया गया, जो सही भी था। पूर्व अधिकारी नूर ने अपने किए पर गहरा पछतावा जताया, उन्होंने कहा, "जबसे मैंने जस्टिन का जीवन छीना है, तबसे मैं इस बारे में विचार और प्रार्थना करता रहा हूं।" 

लेकिन इसके उलट, चाउविन और पॉटर ने उनका शिकार बने अश्वेत पीड़ितों के लिए कोई पछतावा नहीं दिखाया। अभी यह देखा जाना बाकी है कि क्या इन दोनों अधिकारियों को उनके कामों के लिए दोषी ठहराया जाता है या नहीं। इस बीच पुलिस हत्याएं करना जारी रखेगी और राजनीतिज्ञ शांति की अपील जारी रखेंगे, साथ ही पुलिस विभाग को 'सुधार' की आड़ में ज़्यादा पैसा देते रहेंगे।"

सोनाली कोल्हातकर "राइजिंग अप विद सोनाली" की निर्माता, प्रस्तोता और कार्यकारी निर्माता हैं। यह शो, फ्री स्पीच टीवी और पैसिफिका रेडियो स्टेशन पर प्रसारित होता है। सोनाली 'इंडिपेंडेंट मीडिया इंस्टीट्यूट' के प्रोजेक्ट 'इकॉनमी फॉर ऑल' की राइटिंग फैलो भी हैं।

इस लेख को इंडिपेंडेंट मीडिया इंस्टीट्यूट के प्रोजेक्ट इकॉनमी फॉर ऑल ने प्रकाशित  किया था।
इस लेख को मूल अंग्रेजी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

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