NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
चुनाव 2019: पाँच चरणों के बाद, एनडीए को 2014 के मुक़ाबले आधी सीटें
पिछले विधानसभा चुनावों के लिए पड़े मतों और राज्य-आधारित रुझानों का विश्लेषण कराने से जो संकेत मिले हैं उनके मुताबिक़ बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार हार की ओर बढ़ रही है, अभी तक 424 सीटों पर हुए मतदान में से सिर्फ़ 124 सीटें उनके पाले में जाती नज़र आ रही हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
08 May 2019
Translated by महेश कुमार
चुनाव 2019: पाँच चरणों के बाद, एनडीए को 2014 के मुक़ाबले आधी सीटें
सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य: Latestly.in

6 मई को 51 सीटों पर मतदान पूरे होने के साथ, लोगों ने कुल 424 लोक सभा की सीटों पर मतदान पूरा कर लिया है। न्यूज़क्लिक की डेटा एनालिटिक्स टीम ने पिछले विधानसभा चुनाव परिणामों का विश्लेषण किया है और राज्य-वार रुझानों को मद्देनज़र रखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) पराजय की तरफ़ बढ़ रहा है क्योंकि 2014 के चुनाव में उसे मिली 251 सीटों के मुक़ाबले अभी तक केवल 124 सीटें ही मिलने का अनुमान है। कांग्रेस के संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) नेतृत्व इस बार नाटकीय रूप से पिछली बार मिली 55 सीट से बढ़कर 169 सीटों पर पहुँच गया है।

इन दो गठबंधनों के अलावा, कई अन्य दल या क्षेत्रीय गठबंधन जो एनडीए के ख़िलाफ़ गठबंधन कर रहे हैं, अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद उनके द्वारा यूपीए का समर्थन करने की संभावना है, उन्हें भी अपनी सीटें बढ़ने का अनुमान है। इस तरह के गठबंधन में सबसे मज़बूत प्रदर्शन उत्तर प्रदेश के गठबन्धन का प्रतीत होता है जो 2014 के मुक़ाबले अपनी सीटों को मात्र चार से बढ़ाकर 37 कर देगा। यूपी की 80 सीटों में से अभी 27 पर चुनाव होने बाक़ी हैं और गठबंधन की सीटों में और इज़ाफ़ा होने की संभावना है। भाजपा और उसके सहयोगियों ने पिछली बार यहाँ से 80 में से 73 सीटें जीती थीं।

mahesh 2.jpg

mahesh3.jpg

mahesh 4.jpg

एनडीए में शिवसेना, जेडीयू, टीडीपी और विभिन्न छोटे दल शामिल हैं। यूपीए में एनसीपी, आरजेडी, जेडीएस और विभिन्न छोटे दल शामिल हैं। (स्रोत: चुनाव आयोग असेंबली/लोक सभा परिणामों से अनुमान)

अन्य राज्य जिनमें बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए को हार का सामना करना पड़ रहा है, उनमें तमिलनाडु भी शामिल है, जहाँ उसके मौजूदा गठबंधन सहयोगी एआईएडीएमके को उसके प्रतिद्वंद्वी डीएमके गठबंधन (जो यूपीए का हिस्सा है) से लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है, 39 में से 38 सीटों पर मतदान पूरा हो चुका है, एक सीट के लिए मतदान स्थगित किया गया है।

मतदान के अंतिम दो चरणों में, महत्वपूर्ण रूप से भाजपा/राजग के गढ़ मध्यप्रदेश - 13 सीटों, झारखंड - सात सीटों और राजस्थान की सभी 25 सीटों पर चुनाव होने हैं। हालांकि, इन अनुमानों से संकेत मिलता है कि भाजपा को इन राज्यों में भी काफी नुक़सान होने की संभावना है, अब तक जिसमें भाजपा के राजस्थान में 12 सीटें, झारखंड में 6 और मप्र में चार सीटें खोने का अनुमान है।

इन पाँचों चरणों में वामपंथी दलों की संख्या 10 से बढ़कर 19 होने की संभावना है। सीटों में बढ़त बनाने वाली अन्य पार्टियाँ, वाईएसआर कांग्रेस (वाईएसआरसीपी) आंध्र प्रदेश और तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) पश्चिम बंगाल है, जहाँ भाजपा भी अपनी बढ़त बना सकती है।
इन अनुमानों में किसानों के संकट, बेरोज़गारी, मज़दूरी में वृद्धि की कमी, औद्योगिक मंदी, भ्रष्टाचार में वृद्धि और सत्तारूढ़ भाजपा (आरएसएस) की सांप्रदायिक विचारधारा जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों के साथ मोदी सरकार के ख़िलाफ़ असंतोष को भी आधार बनाया गया साथ ही अल्पसंख्यकों और दलितों/आदिवासियों की सरकार द्वारा की गई घेराबंदी, इन वंचित वर्गों के ख़िलाफ़ हिंसा को बढ़ावा देना आदि और इस सबके ख़िलाफ़ जनता में ग़ुस्सा भी इन अनुमानों में शामिल है। मोदी सरकार के ख़िलाफ़ इन बढ़ते रुझानों ने विपक्षी दलों द्वारा चलायी जा रही राज्य सरकार के ख़िलाफ़ असंतोष को भी बेअसर कर दिया है। 

देश भर में चुनाव प्रक्रिया के बढ़ते चरण इस बात की तस्दीक़ कर रहे हैं या संकेत देते हैं कि एनडीए निरंतर पतन की तरफ़ बढ़ रहा है जोकि 23 मई को, सरकार बनाने के लिए अपर्याप्त संख्या होने की वजह से, सत्ता से बाहर हो जाएगा।

[पीयूष शर्मा द्वारा डेटा विश्लेषण और ग्लेनिसा परेरा द्वारा मानचित्रण किया गया है।]

Lok Sabha Elections
Seat Projection
Fifth Phase Elections
NDA Tally
Gathbandhan Tally
left parties
2019 general elections
elections 2019

Related Stories

उपचुनाव:  6 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में 23 जून को मतदान

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

दिल्ली: ''बुलडोज़र राजनीति'' के ख़िलाफ़ सड़क पर उतरे वाम दल और नागरिक समाज

कोलकाता : वामपंथी दलों ने जहांगीरपुरी में बुलडोज़र चलने और बढ़ती सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ निकाला मार्च

जहांगीरपुरी हिंसा: वाम दलों ने जारी की फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट

जहांगीरपुरी हिंसा: वाम दलों ने जारी की फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट, पुलिस की भूमिका पर सवाल

विज्ञापन में फ़ायदा पहुंचाने का एल्गोरिदम : फ़ेसबुक ने विपक्षियों की तुलना में "बीजेपी से लिए कम पैसे"  

फ़ेसबुक पर 23 अज्ञात विज्ञापनदाताओं ने बीजेपी को प्रोत्साहित करने के लिए जमा किये 5 करोड़ रुपये

बिहार पंचायत चुनाव : सत्ता विरोधी प्रत्याशियों पर चल रहा पुलिस प्रशासन का डंडा!

आंदोलन की ताकतें व वाम-लोकतांत्रिक शक्तियां ही भाजपा-विरोधी मोर्चेबन्दी को विश्वसनीय विकल्प बना सकती है, जाति-गठजोड़ नहीं


बाकी खबरें

  • Chhattisgarh
    रूबी सरकार
    छत्तीसगढ़: भूपेश सरकार से नाराज़ विस्थापित किसानों का सत्याग्रह, कांग्रेस-भाजपा दोनों से नहीं मिला न्याय
    16 Feb 2022
    ‘अपना हक़ लेके रहेंगे, अभी नहीं तो कभी नहीं’ नारे के साथ अन्नदाताओं का डेढ़ महीने से सत्याग्रह’ जारी है।
  • Bappi Lahiri
    आलोक शुक्ला
    बप्पी दा का जाना जैसे संगीत से सोने की चमक का जाना
    16 Feb 2022
    बप्पी लाहिड़ी भले ही खूब सारा सोना पहनने के कारण चर्चित रहे हैं पर सच ये भी है कि वे अपने हरफनमौला संगीत प्रतिभा के कारण संगीत में सोने की चमक जैसे थे जो आज उनके जाने से खत्म हो गई।
  • hum bharat ke log
    वसीम अकरम त्यागी
    हम भारत के लोग: समृद्धि ने बांटा मगर संकट ने किया एक
    16 Feb 2022
    जनवरी 2020 के बाद के कोरोना काल में मानवीय संवेदना और बंधुत्व की इन 5 मिसालों से आप “हम भारत के लोग” की परिभाषा को समझ पाएंगे, किस तरह सांप्रदायिक भाषणों पर ये मानवीय कहानियां भारी पड़ीं।
  • Hijab
    एजाज़ अशरफ़
    हिजाब के विलुप्त होने और असहमति के प्रतीक के रूप में फिर से उभरने की कहानी
    16 Feb 2022
    इस इस्लामिक स्कार्फ़ का कोई भी मतलब उतना स्थायी नहीं है, जितना कि इस लिहाज़ से कि महिलाओं को जब भी इसे पहनने या उतारने के लिए मजबूर किया जाता है, तब-तब वे भड़क उठती हैं।
  • health Department
    एम.ओबैद
    यूपी चुनाव: बीमार पड़ा है जालौन ज़िले का स्वास्थ्य विभाग
    16 Feb 2022
    "स्वास्थ्य सेवा की बात करें तो उत्तर प्रदेश में पिछले पांच सालों में सुधार के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ। प्रदेश के जालौन जिले की बात करें तो यहां के जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक पिछले चार साल से…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License