NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
चुनाव 2019; पहले 3 चरणों का विश्लेषण : एनडीए के 134 सीटों से घटकर सीधे 66 सीटों पर पहुंचने की संभावना
पिछले तीन चरणों में 303 सीटों के लिए मतदान पूरा हो चुका है और सत्ता-विरोधी गठजोड़ नए गठबंधनों के साथ सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के लिए इस दर्ज़ गिरावट का कारण बनने की संभावना है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
29 Apr 2019
Translated by महेश कुमार
सांकेतिक तस्वीर

पिछले पांच वर्षों में नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ उमड़े असंतोष की मजबूत भावना, विपक्षी दलों के बीच नए गठबंधन और कुछ सहयोगियों के टूटने से भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को भारी नुकसान होने की संभावना बन गई है। पिछले तीन चरणों में जिन 303 सीटों के लिए मतदान समाप्त हो चुका है, उसमें एनडीए की 2014 में 134 सीटें थी जो अब घटकर 66 के आंकडे पर आने की संभावना बन गयी है, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सीटें जो पिछले समय 49 थी से बढ़कर 137 तक जाने की संभावना बन गई है।

ये अनुमान निम्नलिखित पर आधारित हैं: पिछले विधानसभा चुनाव परिणामों में जो वोट मिले (पश्चिम बंगाल को छोड़कर, यहां 2014 के आम चुनाव परिणामों का इस्तेमाल किया गया है) उन संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों को इसके लिए विश्लेषित किया गया है जिसमें; वर्तमान गठबंधन; और राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी से दूर होते वोट और स्विंग को राज्य में प्रतिद्वंद्वी दलों के प्रति बढ़ते असंतोष/समर्थन के संतुलन के रूप में पेश किया गया है। सामान्य तौर पर, केंद्र में मोदी सरकार के खिलाफ असंतोष को स्थानीय कारकों के आधार पर विभिन्न डिग्री की स्विंग के रूप में पेश किया गया है। विश्लेषण और प्रक्षेपण न्यूजक्लिक की डेटा एनालिटिक्स टीम द्वारा किया गया है।

MAP1.jpg

MAP2.jpg

नीचे दी गई तालिका में, 2014 में विपक्षी दलों का बिखराव दूसरों की बड़ी सूची से स्पष्ट है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि उनमें से कई दल पिछले पांच वर्षों में एनडीए के साथ रहे थे, लेकिन अब उन्होंने सत्तारूढ़ गठबंधन से नाता तोड़ लिया है। ऐसे दलों के उदाहरण के लिए आंध्र की तेलुगु देशम पार्टी और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के अलावा विभिन्न क्षेत्रीय या यहाँ तक कि उप-क्षेत्रीय दल मौजूद हैं। पूर्वोत्तर में कई दल स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रहे है, हालांकि वे पहले एनडीए का हिस्सा थे।

TABLE1.jpg

TABLE2.jpg

भाजपा को कड़ी टक्कर देने वाले सबसे बड़े नए गठबंधन का सबसे बड़ा परिणाम उत्तर प्रदेश में सामने आ रहा है, जहाँ सत्तारूढ़ भाजपा को समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के गठबन्धन के द्वारा पराजित किया जा रहा है। 2014 में, भाजपा ने यहां तीन चरणों में हुए मतदान की 26 में से 25 सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार इसके सिर्फ पांच सीटों तक सिमटने की संभावना बन गई है।

एनडीए को एक और बड़ी हार का इंतजार तमिलनाडु से है, जहां अन्नाद्रमुक ने पिछले चुनावों में जीत हासिल की थी और बाद में एनडीए को समर्थन दिया था, लेकिन इस बार डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन (जिसमें कांग्रेस और वाम दलों के अलावा अन्य भी शामिल हैं) को महत्वपूर्ण जीत मिल रही है। इसमें डीएमके गठबंधन को 38 में से 28 सीटें मिलने की संभावना बन गयी है और एक सीट पर चुनाव स्थगित हो गया है।

दिलचस्प बात यह है कि नक्शे और तालिका में दर्ज़, ‘अन्य’ के रूप में सूचीबद्ध कई पार्टियों के चुनाव के बाद के परिदृश्य में एनडीए से नाता तोड़ने की संभावना है। इसमें यूपी का गठबंधन, जिसे अब तक 21 सीटें मिलने का अनुमान है और आंध्र प्रदेश में टीडीपी को आठ सीटों का अनुमान है शामिल है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को नौ में से सिर्फ एक सीट मिल रही है जिसके लिए अब चुनाव हुए हैं। बाद के चरणों में, शेष 33 सीटों के इस पार्टी की ओर अधिक झुकाव की उम्मीद है और मौजूदा रुख के अनुसार है, यह भी एनडीए के विरोध में खड़ी होगी।

पिछले पाँच वर्षों में विशेष रूप से किसानों के संकट को दूर करने, नौकरियों के मोर्चे पर, अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए, राष्ट्रवाद और सुरक्षा के सिंथेटिक संस्करण का उपयोग करने और भ्रष्टाचार और काले धन पर अंकुश लगाने और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी मोदी-नीत भाजपा के प्रयास की बड़ी विफलता के संकेत देते हैं। इसकी अधिक संभावना है कि मतदान के आगामी चरण (अभी भी चार चरणों में जाने बाकी हैं) यही प्रवृत्ति जारी रहेगी। इसके आधार पर कहा जा सकता है कि  एनडीए के बहुमत पाने की बहुत कम संभावना है और एनडीए लोकसभा में 272 के बहुमत के निशान से बहुत दूर जाकर रुकेगा।

[डेटा विश्लेषण पीयूष शर्मा और मैपिंग ग्लेनिसा परेरा द्वारा ]

2019 आम चुनाव
General elections2019
2019 Lok Sabha elections
NDA
UPA
BJP
Narendra modi
Amit Shah
Congress
Gathbandhan
mahagathbandhan
left parties

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • SFI PROTEST
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    SFI ने किया चक्का जाम, अब होगी "सड़क पर कक्षा": एसएफआई
    09 Feb 2022
    दिल्ली विश्वविद्यालय को फिर से खोलने के लिए SFI ने प्रदर्शन किया, इस दौरान छात्रों ने ऑनलाइन कक्षाओं का विरोध किया। साथ ही सड़क पर कक्षा लगाकर प्रशासन को चुनौत दी।
  • PTI
    समीना खान
    चुनावी घोषणापत्र: न जनता गंभीरता से लेती है, न राजनीतिक पार्टियां
    09 Feb 2022
    घोषणापत्र सत्ताधारी पार्टी का प्रश्नपत्र होता है और सत्ताकाल उसका परीक्षाकाल। इस दस्तावेज़ के ज़रिए पार्टी अपनी ओर से जनता को दी जाने वाली सुविधाओं का जिक्र करती है और जनता उनके आधार पर चुनाव करती है।…
  • हर्षवर्धन
    जन्मदिन विशेष : क्रांतिकारी शिव वर्मा की कहानी
    09 Feb 2022
    शिव वर्मा के माध्यम से ही आज हम भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, सुखदेव, राजगुरु, भगवती चरण वोहरा, जतिन दास और महाबीर सिंह आदि की कमानियों से परिचित हुए हैं। यह लेख उस लेखक की एक छोटी सी कहानी है जिसके बारे…
  • budget
    संतोष वर्मा, अनिशा अनुस्तूपा
    ग्रामीण विकास का बजट क्या उम्मीदों पर खरा उतरेगा?
    09 Feb 2022
    कोविड-19 महामारी से पैदा हुए ग्रामीण संकट को कम करने के लिए ख़र्च में वृद्धि होनी चाहिए थी, लेकिन महामारी के बाद के बजट में प्रचलित प्रवृत्ति इस अपेक्षा के मामले में खरा नहीं उतरती है
  • Election
    एम.ओबैद
    यूपी चुनावः प्रचार और भाषणों में स्थानीय मुद्दों को नहीं मिल रही जगह, भाजपा वोटर भी नाराज़
    09 Feb 2022
    ऐसे बहुत से स्थानीय मुद्दे हैं जिनको लेकर लोग नाराज हैं इनमें चाहे रोजगार की कमी का मामला हो, उद्योग की अनदेखी करने का या सड़क, बिजली, पानी, महिला सुरक्षा, शिक्षा का मामला हो। इन मुद्दों पर चर्चा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License