NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
चुनाव 2019: तीसरे चरण में भी नहीं रुका एनडीए का पतन
विधानसभा/लोकसभा चुनाव के अनुमानों से संकेत मिलता है कि मोदी सरकार की नीतियों से उमड़े असंतोष के कारण तीसरे चरण के मतदान में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए बड़े पैमाने पर हार रही है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
24 Apr 2019
Translated by महेश कुमार
चुनाव 2019: तीसरे चरण में भी नहीं रुका एनडीए का पतन

भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के लिए पहले दो चरणों के मतदान में हुए नुक़सान को जोड़ दें तो 23 अप्रैल को हुए तीसरे चरण के मतदान में सत्तारूढ़ मोर्चे का नीचे जाना जारी है जो 14 राज्यों में दिखाई दे रहा है। इस चरण में 117 सीटें थी, जो पश्चिम बंगाल और यूपी में छुटपुट हिंसा से प्रभावित हुईं, और जम्मू-कश्मीर की अनंतनाग सीट (आंशिक रूप से मतदान) में कम मतदान हुआ, लेकिन उसके अलावा ये चरण शांतिपूर्ण रहा। त्रिपुरा पूर्व भी दूसरे चरण से स्थगित होने के बाद इस चरण में चुनाव में गया था।

सात-चरण के मतदान के इस दौर का अनुमानित परिणाम यह है कि 117 सीटों में से, एनडीए की सीटें 2014 में 67 से घटकर इस बार मात्र 29 रह जाएंगी। कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) अपनी सीटों को बढ़ाते हुए पर्याप्त लाभ अर्जित करेगा। यह 2014 में 26 के मुक़ाबले 57 सीट हासिल करेगा। अन्य महत्वपूर्ण लाभार्थियों में केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा और उत्तर प्रदेश में बीएसपी-एसपी-आरएलडी गठबन्धन शामिल है।

1st Map.jpg

2nd Map.jpg

3 Phase 3 Chart.jpg

4  3rd phase.jpg
 
इन अनुमानों को प्रत्येक राज्य में हाल में हुए विधानसभा चुनाव परिणामों के आधार पर लगाया गया है, राज्य के विभिन्न राजनैतिक कारकों को ध्यान में रखते हुए और राज्यों में नए गठबंधनों के आधार पर सत्ताधारी पार्टी से परे जा रही स्विंग भी इसका बड़ा आधार बना है - जैसे कि यूपी में बहुजन समाज पार्टी-समाजवादी पार्टी -राष्ट्रीय लोकदल गठबन्धन, 2017 के आख़िरी विधानसभा चुनाव के बाद बना है।

बिहार में, 2014 के आम चुनाव के अनुमानों को आधार बनाया गया है क्योंकि 2015 के विधानसभा चुनावों में लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले जनता दल (यूनाइटेड) (जेडी-यू) के साथ गठबंधन किया था, लेकिन तब नीतीश कुमार महागठबंधन से बाहर चले गए और अपने पूर्व सहयोगी भाजपा के साथ फिर से जुड़ गए। चूंकि बिहार में 2015 के विधानसभा चुनाव परिणामों ने दोनों दलों के संयुक्त वोटों का प्रतिनिधित्व किया था जो अब विरोधी पक्ष बन गए हैं, इसलिए दोनों दलों के वोटों को अलग करना असंभव है। इसलिए, 2014 के लोकसभा परिणाम एकमात्र विकल्प हैं जब हर कोई अलग-अलग लड़ रहा था।

विभिन्न राज्य परिणामों के लिए जो स्विंग इस्तेमाल की गई वह इस प्रकार हैं: असम (5%); बिहार (8%); छत्तीसगढ़ (3%); गोवा (2%); गुजरात (2.5%); जम्मू और कश्मीर (2%); कर्नाटक (2%); केरल (0%); महाराष्ट्र (5%); ओडिशा (5%); यूपी (3%); पश्चिम बंगाल (5%); दादरा और नगर हवेली (3%); दमन और दीव (3%); और त्रिपुरा (5%)।

जिन राज्यों में बीजेपी की भारी हार का अनुमान है उनमें गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और यूपी शामिल हैं।
एक सबसे बड़ा कारक जिसे इन चुनावों में माना जा रहा है वह है रोज़गार, किसानों की आय, श्रमिकों की मज़दूरी, भ्रष्टाचार, जीएसटी, विमुद्रीकरण, सांप्रदायिक संघर्ष और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की भावना, और 'राष्ट्रीय सुरक्षा' की मंशा सहित मोदी सरकार के विभिन्न मामलों में रहे ख़राब प्रदर्शन शामिल है। संतुलन बनाने के लिए, मतदाताओं के दिमाग़ में इन विचारों के परस्पर संबंध और अपनी राज्य सरकारों से संबंधित उनके अपने अनुभवों को भी ध्यान में रखा गया है। इन संतुलनों को लागू करते हुए विभिन्न स्विंग को लक्षित किया गया है। ग्राउंड रिपोर्ट से पता चलता है कि बेरोज़गारी और किसानों के ऋण/आय बहुत बड़े मुद्दे हैं जो मतदाताओं के दिमाग़ पर घर बनाए हुए हैं और इन मामलों में, मोदी सरकार से बड़ा अलगाव पैदा हुआ है।

यदि मामला ये है, तो यह आश्चर्य की बात नहीं है कि इन अनुमानों से साफ़ संकेत मिलता है कि मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए के चुनाव हारने की संभावना बढ़ गयी है क्योंकि आर्थिक संकट जैसे सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे जो कि अखिल भारतीय मुद्दे हैं और पहले तीन चरणों के इन रुझानों को देश में दूसरी जगहों में भी दोहराया जा सकता है।
[डाटा पीयूष शर्मा और मैप्स ग्लेनिसा परेरा द्वारा]

2019 elections
2019 general elections
2019 Lok Sabha elections
2019 Lok Sabha Polls
3rd phase elections
BJP Defeat
Gujarat
Maharashtra
Kerala
Bihar
Assam
karnataka
Uttar pradesh

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

कर्नाटक पाठ्यपुस्तक संशोधन और कुवेम्पु के अपमान के विरोध में लेखकों का इस्तीफ़ा

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही मस्जिद ईदगाह प्रकरण में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल


बाकी खबरें

  • Anganwadi workers
    रौनक छाबड़ा
    हरियाणा: हड़ताली आंगनवाड़ी कार्यकार्ताओं के आंदोलन में अब किसान और छात्र भी जुड़ेंगे 
    08 Mar 2022
    आने वाले दिनों में सभी महिला कार्यबलों से सम्बद्ध यूनियनों की आस ‘संयुक्त महापंचायत’ पर लगी हुई है; इस संबंध में 10 मार्च को रोहतक में एक बैठक आहूत की गई है।
  • refugee crisis
    एपी
    रूस-यूक्रेन युद्ध अपडेट: संयुक्त राष्ट्र ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद इसे यूरोप का सबसे बड़ा शरणार्थी संकट बताया 
    08 Mar 2022
    अमेरीका ने रूस से आयात होने वाले तेल पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानूनी मुहिम शुरू की, तो दूसरी तरफ जेलेंस्की ने रूस को चिकित्सा आपूर्ति मार्ग पर हुआ समझौता याद दिलाया।
  • राज कुमार
    गोवा चुनावः कौन जीतेगा चुनाव और किसकी बनेगी सरकार?
    08 Mar 2022
    इस बार भाजपा के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है क्योंकि तमाम विपक्षी दल भाजपा को हराने के लिए लड़े हैं और ये स्थिति कांग्रेस के पक्ष में जाती है।
  • privatization of railways
    सतीश भारतीय
    निजी ट्रेनें चलने से पहले पार्किंग और किराए में छूट जैसी समस्याएं बढ़ने लगी हैं!
    08 Mar 2022
    रेलवे का निजीकरण गरीब और मध्यम वर्ग की जेब पर वजन लादने जैसा है। क्योंकि यही वर्ग व्यवसाय और आवाजाही के लिए सबसे ज्यादा रेलवे पर आश्रित है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की घटकर 50 हज़ार से कम हुई
    08 Mar 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 3,993 नए मामले सामने आए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.12 फ़ीसदी यानी 49 हज़ार 948 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License