NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
चुनावों में बीजेपी को डुबो सकती है युवाओं के बीच बढ़ती बेरोजगारी
आने वाले हफ्तों में जिन तीन बीजेपी शासित राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं वहां युवाओं के बीच बेरोजगारी की दर 26 फीसदी से 55 फीसदी तक हो गई है।
सुबोध वर्मा
14 Nov 2018
UNEMPLOYMENT

20 से 29 साल के आयु वर्ग के युवाओं के बीच बढ़ती भयंकर और व्यापक बेरोजगारी छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में बीजेपी के दोबरा से सत्ता में आने की संभावनाओं को गंभीर रूप से बिगाड़ सकती है। मई-अगस्त 2018 में सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) की सांख्यिकीय प्रोफ़ाइल के आंकड़ों के मुताबिक 20-29 साल के युवा समूह में छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी की दर 26 फीसदी है, मध्य प्रदेश में 30 फीसदी और राजस्थान में यह चौंकाने वाली 55 प्रतिशत की दर पर है।

स्नातकों के बीच बेरोजगारी का आलम यह है कि - छत्तीसगढ़ में 14 प्रतिशत से अधिक स्नातक नौकरियों के बिना हैं, इसी तरह के आंकड़े मध्य प्रदेश में 8 प्रतिशत और राजस्थान में 21 प्रतिशत हैं।

UNEMPLOYMENT RATE.jpg

सीएमआईई सभी राज्यों में सर्वेक्षण करता है, इस सर्वेक्षण में 15 साल या उससे अधिक आयु के 5,22,000 युवाओं वाले लगभग 1,73,000 परिवारों का नमूना शामिल है। ऊपर दिए गए आंकड़े बेरोजगार व्यक्तियों के हिस्से को संदर्भित करते हैं, लेकिन वे कुल श्रम बल में योगदान देने के इच्छुक हैं। इसमें सक्रिय रूप से काम की तलाश करने वाले लोग शामिल हैं और वो लोग भी शामिल हैं जो इच्छुक हैं, लेकिन सक्रिय रूप काम की तलाश नहीं कर रहे हैं।

महिलाओं के बीच भी बेरोजगारी का स्तर तीनों राज्यों में बहुत अधिक है, छत्तीसगढ़ में 8 प्रतिशत से लेकर मध्य प्रदेश में 17 और राजस्थान में 53 प्रतिशत तक है।

हाल के सर्वेक्षण इस बात की पुष्टि करते हैं कि सभी राज्यों में मतदाताओं के दिमाग में बेरोजगारी बड़ा मुद्दा बना हुआ है। लोकनीति-सीएसडीएस के चुनाव पूर्व किए गए सर्वेक्षण के अनुसार जो 8 नवंबर को प्रकाशित हुआ था, नौकरियों की कमी सभी तीन राज्यों के सर्वेक्षित किए लोगों ने बड़ी समस्या बताया है। दूसरा सबसे बड़ा आर्थिक मुद्दा - मूल्य वृद्धि का था। इन दो मुद्दों पर एक साथ बात करने के बाद पाया गया, कि मध्य प्रदेश में 41 प्रतिशत, राजस्थान में 43 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ में 40 प्रतिशत लोगों के सामने ये सबसे बड़े मुद्दे हैं।

इससे पहले, मई 2018 में, लोकनीति-सीएसडीएस द्वारा किए गए ‘देश का मूड’ नामक सर्वेक्षण में भी पाया गया था कि 57 प्रतिशत लोगों ने कहा था कि क्षेत्र में नौकरियां ढूंढना मुश्किल हो गया है। असंतुष्ट लोगों का यह हिस्सा पहले के सर्वेक्षणों में अभी से अधिक था। फिर से, नौकरियों की कमी और गरीबी को लोगों ने पहली सबसे बड़ी समस्याओं के रूप में पहचाना।

इस स्थिति में, और निरंतर नौकरियों के बढ़ते संकट से यह आश्चर्य की बात नहीं है कि इस खेद भरी स्थिति के लिए लोग संबंधित राज्यों में बीजेपी सरकार को - और केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार को दोषी ठहराएं। यह विशेष रूप से इसलिए भी है क्योंकि केंद्र में मोदी की अगुआई वाली सरकार और तीन राज्यों में उनके सहयोगियों ने नौकरियों का वादा कर पिछले चुनाव जीते थे। 2014 के चुनाव अभियान के दौरान हर साल 1 करोड़ नौकरियों के मोदी के प्रसिद्ध वादे को याद रखें?

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में, बीजेपी लगातार तीन बार से सत्ता में रही है, और इस तथ्य से बच नहीं सकती कि उसे काफी लम्बे समय तक नीति निर्धारित करने का मौका नही मिला है। निजी क्षेत्र को प्राकृतिक संसाधनों को सौंपना, परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के माध्यम से लोगों का विस्थापन करना, सरकारी खर्च में कटौती आदि ने नौकरी के विकास में स्थिरता पैदा की है। राजस्थान में, भाजपा पिछले पांच वर्षों से अस्तित्व में है, लेकिन निजीकरण, श्रम कानून सुधार, ठेकाकरण, सेवाओं की आउटसोर्सिंग, सरकारी खर्च में कटौती इत्यादि के समान नव उदारवादी एजेंडा को आक्रामक रूप से लागू किया गया है जिससे आसमान को छूने वाली बेरोजगारी पैदा हुई है।

युवाओं विशेष रूप से शिक्षित युवाओं के बीच गंभीर बेरोज़गारी की स्थिति है, जो बीजेपी की चुनावी  संभावनाओं को विशेष रूप से चोट पहुंचा रही है क्योंकि यह तबका पांच साल पहले मोदी और बीजेपी के सबसे ज्यादा नज़दीक था। उनके वादे को मध्य वर्ग ने मुगली घुट्टी समझ कर पी लिया था, जिन्हे भ्रम था कि  वैश्वीकरण और उदारीकरण ही विकास और समृद्धि का मार्ग है।

इन नीतियों को पांच वर्ष में इतनी बड़ी गड़बड़ी और आक्रामकता के साथ लागू किया गया कि कांग्रेस स्वयं भी इस रफ्तार से अपने शासन में लागू नहीं कर सकी थी, इसने सभी भ्रमों को तोड़ दिया है। बेशक, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी भाजपा के खिलाफ वोट देंगे, लेकिन एक बड़ा तबका भगवा पार्टी से दूर चला जाएगा जिसका उसे गंभीर नुकसान होगा।

unemployment
UNEMPLOYMENT IN INDIA
madhya pradesh elections
rajasthan Assembly elections
Chhattisgarh elections 2018
Modi government
youth issues

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

आख़िर फ़ायदे में चल रही कंपनियां भी क्यों बेचना चाहती है सरकार?

मोदी@8: भाजपा की 'कल्याण' और 'सेवा' की बात

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

'KG से लेकर PG तक फ़्री पढ़ाई' : विद्यार्थियों और शिक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं की सभा में उठी मांग

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश


बाकी खबरें

  • workers
    तारिक अनवर
    यूपी चुनाव: धीमी मौत मर रहा है भगवान कृष्ण को संवारने-सजाने वाला मथुरा-वृंदावन का उद्योग
    07 Feb 2022
    हिंदुत्व की उच्च डेसिबल की राजनीति हिंदू और मुस्लिम समुदायों से आने वाले कारीगरों, व्यापारियों और निर्माताओं की आजीविका को बचाने में विफल रही है।
  • yogi and amit shah
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: भाजपा को चुनावों में भगवान और मुसलमान का ही सहारा
    07 Feb 2022
    ख़बरों की इस भाग दौड़ में ख़बरों का मर्म छूट जाता है। इस हफ़्ते की कुछ ख़ास ख़बरें लेकर आए हैं अनिल जैन, जिसमें राम जी की जाति से लेकर केजरीवाल का मोदी मॉडल तक शामिल है। 
  • Lata Mangeshkar
    नम्रता जोशी
    लता मंगेशकर की उपलब्धियों का भला कभी कोई विदाई गीत बन सकता है?
    07 Feb 2022
    संगीत और फ़िल्म निर्माण में स्वर्ण युग के सबसे बड़े नुमाइंदों में से एक लता मंगेशकर का निधन असल में वक़्त के उस बेरहम और अटूट सिलसिले का एक दुखद संकेत है, जो अपने जीवन काल में ही किंवदंती बन चुके…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में एक महीने बाद कोरोना के एक लाख से कम नए मामले सामने आए  
    07 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 83,876 नए मामले सामने आए हैं। देश में अब एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 2.62 फ़ीसदी यानी 11 लाख 8 हज़ार 938 हो गयी है।
  • MGNREGA
    डॉ. राजू पाण्डेय
    बजट 2022: गांव और किसान के प्रति सरकार की खटकने वाली अनदेखी
    07 Feb 2022
    कोविड-19 के इस भयानक दौर में यह आशा की जा रही थी कि सरकार न केवल मनरेगा को ज्यादा मजबूती देगी, बल्कि शहरी इलाकों के लिए भी कोई ऐसी ही योजना लाई जाएगी। विगत वित्तीय वर्ष के संशोधित आकलन की तुलना में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License