NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
विज्ञान
अंतरराष्ट्रीय
चीन का अंतरिक्ष मिशन : चंद्रमा से नमूना लेकर पृथ्वी पर वापस, गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाएगा उपग्रह
23 नवंबर को लॉन्च हुआ चीन का ये चंद्रमा मिशन Chang’e 5 लगभग एक महीने से ख़बरों में है।
संदीपन तालुकदार
15 Dec 2020
चीन का अंतरिक्ष मिशन
Image Courtesy: AP

23 नवंबर को चीन का चंद्र मिशन Chang’e 5 लॉन्च हुआ जो लगभग एक महीने से खबरों में है। चंद्रमा की सतह से चट्टान और धूल के नमूने एकत्र करने का यह मिशन पिछले 40 वर्षों में पहला था। और यह अब तक सफल रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, ये अंतरिक्ष यान चंद्रमा की सतह से एकत्र किए गए मॉन्स रुम्कर नामक 2 किलोग्राम चट्टान के नमूने के साथ पृथ्वी पर वापस आ रहा है। 13 दिसंबर को इस अंतरिक्ष यान ने अपनी तीन दिनों की यात्रा शुरू कर दी है।

Chang’e 5 मिशन ने जानकारी प्राप्त कर लिया है और यह एक मील का पत्थर बन गया जब इसने रोबोट के माध्यम से चंद्रमा की सतह में ड्रिल किया और नमूना एकत्र किया। पिछले उदाहरणों में चंद्र मिशनों का ऐसा रोबोटिक ऑपरेशन दिखाई नहीं दे रहा था। अंतिम चंद्र नमूना संग्रहण मिशन जो सफल साबित हुआ वह था वर्ष 1976 में 'सोवियत रूस का लूना 24'।

चीन ने चंद्रमा के नमूनों का विश्लेषण करने के लिए प्रयोगशालाओं का निर्माण किया है। इसे पहले एकत्र किए गए नमूनों की तुलना में अरबों साल नया माना जाता है और सौर प्रणाली के उद्भव में नई खोज की उम्मीद की जाती है।

Chang’e 5 मिशन के बीच एक अन्य चीनी अंतरिक्ष मिशन ध्यान आकर्षित किया है। चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज (सीएएस) के चीन के राष्ट्रीय अंतरिक्ष विज्ञान केंद्र (एनएसएससी) ने सिचुआन प्रांत में स्थित जीचांग सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से अंतरिक्ष में तकनीक से लैस अन्य मिशन जीईसीएएम (ग्रैविटेशनल वेव हाई ईनर्जी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक काउंटरपार्ट ऑल स्काई मॉनिटर) को लॉन्च किया। इसे 10 दिसंबर को लॉन्च किया गया था। जीईसीएएम प्रणाली को अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण तरंगों की उत्पत्ति का पता लगाने के उद्देश्य से लॉन्च किया गया है। ऐसा करने के लिए इस सिस्टम को गामा किरण के विस्फोट का पता लगाने के लिए प्रोग्राम किया गया है जो कि अत्यधिक सघन वस्तुओं जैसे न्यूट्रॉन सितारों के विलय से निकलता है। ये खगोलीय गतिविधियां गुरुत्वाकर्षण तरंगें भी उत्पन्न करती हैं।

जीईसीएएम प्रणाली में दो उपग्रह हैं जिनमें से प्रत्येक की ऊंचाई 130 सेंटीमीटर और वजन 150 किलोग्राम है। ये दोनों उपग्रह अब 600 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे हैं और पृथ्वी के विपरीत दिशा में स्थित हैं।

वर्ष 2017 में वैज्ञानिक उस घटना से उत्पन्न आकाशीय रोशनी देख सके जब न्यूट्रॉन सितारों की एक जोड़ी का विलय हुआ था। फिर, ब्लैक होल और न्यूट्रॉन स्टार का विलय भी ऐसी रोशनी और गुरुत्वाकर्षण तरंगों को उत्पन्न करने के लिए किया गया। लेकिन क्या दो ब्लैक होल विलय ऐसी रोशनी पैदा कर सकते हैं जो अभी भी एक बिना उत्तर वाला प्रश्न है।

जीईसीएएम प्रणाली में स्थापित दो उपग्रह अब पूरे आकाश की निगरानी कर सकते हैं जो कि गामा किरण के विस्फोट के स्रोत का पता लगाने के लिए उन्हें योग्य बनाएगा। अंतरिक्ष में स्थापित करने के चीन के इस मिशन से पहले नासा का फर्मी गामा रे स्पेस टेलिस्कोप और नील गेहरेल्स स्वीफ्ट ऑब्जर्वेट्री जैसे अन्य गामा रे ऑब्जर्वेट्री मौजूद हैं। लेकिन, ये दोनों आकाश का आंशिक दृश्य पाने के चलते अपनी क्षमताओं में सीमित हैं और कभी-कभी पृथ्वी द्वारा अवरुद्ध कर दिए जाते हैं। जीईसीएएम सिस्टम के मुख्य अन्वेषक तथा एस्ट्रोफिजिसिस्ट जियॉन्ग शाओलिन कहते हैं, “स्विफ्ट और फर्मी को लंबा तथा उच्च ऊर्जा गामा किरण विस्फोट को ग्रहण करने के लिए उपयुक्त किया गया है जो कि विशाल सितारों के गिरने से निकलता है। जीईसीएएम का ऑब्जर्वेशनल ईनर्जी रेंज 6 किलोइलेक्ट्रॉनवोल्ट तक फैली हुई है जो स्विफ्ट और फर्मी से कम है और जिसका गुरुत्वाकर्षण तरंगों से जुड़े मृदु गामा किरणों के विस्फोट का पता लगाने में लाभ मिल सकता है।”

इसके अलावा, नासा का केंद्र भी पुराना है। स्विफ्ट को वर्ष 2004 में लॉन्च किया गया था और 2 साल की अवधि तक जब स्विफ्ट 2008 से कक्षा में था तो इसके पांच से दस साल तक सेवा देने की उम्मीद थी। इस मामले में चीन की जीईसीएएम प्रणाली को कुछ उत्साहजनक माना जाता है। जियॉन्ग और उनकी टीम ने वर्ष 2016 में जीईसीएएम का प्रस्ताव रखा। इस साल यूएसए के गुरुत्वाकर्षण तरंग के अनुसंधानकर्ता ब्लैक होल विलय की ऐतिहासिक खोज कर सके।

ये पर्याप्त नहीं हैं; चीन के पास निकट भविष्य में लॉन्च करने के लिए अन्य मिशन हैं। जियॉन्ग और उनकी टीम को चार अन्य अंतरिक्ष अभियानों के लिए पांच साल की योजना के लिए 4 बिलियन-युआन (लगभग 610 मिलियन अमेरिकी डॉलर) की धनराशि मिली है। जीईसीएएम के अलावा, एनएसएससी अब आइंस्टीन जांच विकसित कर रहा है जिसका उद्देश्य ब्रह्मांडीय घटनाओं से निकलने वाली कम ऊर्जा वाली एक्स किरणों का पता लगाने के लिए आकाश की निगरानी करना है; एडवांस्ड स्पेस बेस्ड सोलर ऑब्जर्वेट्री विकसित करना है जिसका उद्देश्य यूरोपियन स्पेस एजेंसी के संयुक्त प्रोजेक्ट के साथ सौर किरण की खोज करना है। यूरोपियन एजेंसी का प्रोजेक्ट सोलर विंड मैग्नेटोस्फेयर लोनोस्फेयर लिंक एक्प्लोरर है जिसका उद्देश्य पृथ्वी के मैग्नेटोस्फेयर की तस्वीर लेना है।

(पीटीआई से इनपुट्स के साथ)

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें-

China’s Sophisticated Space Missions: Collecting Lunar Sample Back to Earth, Satellites to Trace Gravitational Waves

GECAM
Chinese Space Missions
Gammay Ray Bursts
Chang’e 5
Mons Rumker
Chinese Academy of Sciences
National Space Science Center
China

Related Stories

जलवायु शमन : रिसर्च ने बताया कि वृक्षारोपण मोनोकल्चर प्लांटेशन की तुलना में ज़्यादा फ़ायदेमंद

चीनी मिशन में इकट्ठा किये गये चंद्रमा के चट्टानों से शोध और नये निष्कर्षों को मिल रही रफ़्तार

क्या भारत कोरोना से जंग जीत सकता है ?

लक्षण नज़र आने से पहले ही फैल चुका होता है कोरोना वायरस : अध्ययन

क्या सच में कोरोना वायरस से लड़ने में भारत गंभीर है?  

कोरोना वायरस से जूझता चीन और सतर्क होती दुनिया

कोरोनावायरस : चीन में 41 लोगों की मौत,भारत में 11 लोगों को निगरानी में रखा गया

अमेरिका - चीन के बीच की टेक्नोलॉजिकल जंग


बाकी खबरें

  • tikoniya
    लाल बहादुर सिंह
    मोदी भारी राजनीतिक कीमत चुका कर ही अब अजय मिश्रा टेनी को मंत्री बनाये रख सकते हैं
    12 Oct 2021
    आज अंतिम अरदास के मौके पर पूरा देश लखीमपुर खीरी के शहीद किसानों को श्रद्धांजलि दे रहा है तथा घटनास्थल तिकोनिया में पूरे देश से आये किसानों का विराट संगम हो रहा है।
  • New Service Rules in Jammu and Kashmir
    डॉ राधा कुमार
    ज़ुल्म के दरवाज़े खोलते जम्मू-कश्मीर के नये सेवा नियम
    12 Oct 2021
    बर्ख़ास्त किये गये ज़्यादातर लोगों के ख़िलाफ़ जो आरोप क़ायम किये गये हैं, वे गंभीर हैं, लेकिन चूंकि आम लोगों के सामने इसे लेकर कोई सबूत नहीं रखा गया है, इसलिए यह साफ़ नहीं है कि इन आरोपों में दम है…
  • facebook
    प्रबीर पुरकायस्थ
    एक व्हिसलब्लोअर की जुबानी: फेसबुक का एल्गोरिद्म कैसे नफ़रती और ज़हरीली सामग्री को बढ़ावा देता है
    12 Oct 2021
    बेशक, यह सवाल पूछा जा सकता है कि जब फेसबुक के सिलसिले में ये सभी सवाल पहले भी उठाए जाते रहे हैं, तो इसमें नया क्या है। इस सब में बड़ी खबर यह है कि अब हमारे पास इसके सबूत हैं कि फेसबुक को इसकी पूरी…
  • Fb
    सोनाली कोल्हटकर
    समझिए कैसे फ़ेसबुक का मुनाफ़ा झूठ और नफ़रत पर आधारित है
    12 Oct 2021
    फ़ेसबुक की पूर्व कर्मचारी फ़्रांसेस हौगेन द्वारा किए गए खुलासों से पता चलता है कि दुनिया का सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अच्छी तरह जानता है कि उसके प्लेटफॉर्म का समाज पर किस तरह नकारात्मक प्रभाव…
  • attack on dalit
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    राजस्थान में दलित युवक की पीट-पीटकर हत्या, तमिलनाडु में चाकू से हमला कर ली जान
    12 Oct 2021
    दलित समाज के लोगों पर हमलों की घटना लगातार सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां राजस्थान के हुनुमानगढ़ जिले में दलित युवक जगदीश की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, वहीं तमिलनाडु के तंजावुर में दलित युवक प्रभाकरण की…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License