NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
विज्ञान
चीन के वैज्ञानिकों ने कोरोनावायरस की दो नस्लों को खोज निकाला
इन दो नस्लों का नाम S टाइप और L टाइप है। दोनों के फैलाव की दर अलग-अलग है।
संदीपन तालुकदार
07 Mar 2020
coronavirus
Image Courtesy: New Scientist

चीन की अलग-अलग यूनिवर्सिटीज़ के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक साझा अध्ययन में पता चला है कि नोवेल कोरोनावायरस दो तरह की नस्लों में पाया जा सकता है। दोनों की जेनेटिक बनावट भी अलग है। इस अध्ययन का नेतृत्व ज़ियाओलु तांग कर रहे थे। तीन मार्च को नेशनल साइंस रिव्यू में इस अध्ययन में सामने आए तथ्य प्रकाशित हुए हैं।

103 मरीज़ों से इकट्ठा किए गए नमूनों की जांच से पता चला है कि SARS- CoV-2, S और L, दो नस्लों में पाया जाता है। S नस्ल थोड़ी कोमल और कम (करीब 30 फ़ीसदी) पाई जाने वाली होती है। वहीं L नस्ल ज्यादा विषैला है और अधिक मात्रा (70 फ़ीसदी) में पाया जाता है। यह S किस्म की नस्ल, जो पुरानी है, उससे ज़्यादा तेजी से भी फैलता है। इसका मतलब यह हुआ कि L किस्म की नस्ल विकसित होकर सामने आई है।

दिलचस्प है कि L नस्ल, चीन के वुहान में फैले शुरूआती संक्रमण में ज़्यादा पाई जाती थी। लेकिन इस साल जनवरी के बाद इसकी मात्रा गिरने लगी। इसका मतलब हुआ कि इंसानी दखल ने इस प्रजाति पर चुनिंदा दबाव डाला। लेकिन S नस्ल के संबंध में ऐसा नहीं हो पाया और इसकी मात्रा शुरूआत की तुलना में बढ़ी है।

ग़ौर करने वाली बात है कि चीन में संक्रमण दर लगातार कम हो रही है। मरीजों के ठीक होने की दर भी बढ़ रही है। इसकी एक संभावना  वायरल स्ट्रेन में L नस्ल की कमी हो सकती है। चीन द्वारा वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए जो आक्रामक तरीके अपनाए गए, इससे ज़्यादा जहरीली नस्ल पर दबाव बना।

वायरस में लगातार परिवर्तन होता है। SARS-CoV -2 जैसे वायरस के मामले में तो ऐसा ख़ासतौर पर होता है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति की श्वांस नली में अपना फैलाव करता है। इस प्रक्रिया के दौरान श्वासनली के भीतर यह वायरस खुद की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी भी करता है। जब भी यह बढ़ोत्तरी होती है, तो साथ में परिवर्तन (म्यूटेशन) भी होता है।

लंदन में इंपीरियल कॉलेज के एरिक वोल्ज ने बताया, ''यह तथ्य है कि कोरोनावायरस की दो नस्लें हैं। जब वायरस किसी नए शरीर में जाते हैं तो उनमें परिवर्तन होना बहुत सामान्य है।''

तांग और उनके सहयोगियों ने जिन दो अलग जेनेटिक प्रकारों की खोज की है, उनपर कोई सवाल नहीं है।  यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के इयान जोन्स कहते हैं, ‘सभी तरह के व्यवहारिक तरीकों से देखा जाए तो वायरस अब भी वही है, जो इसके पैदा होने के वक्त था।इस बात के कोई संकेत नहीं हैं कि यह आगे और ख़तरनाक होगा।’ दोनों नई नस्लों के बीच बिलकुल थोड़ा ही अंतर है। जोन्स का कहना है कि उन्हें अलग-अलग नस्ल नहीं माना जा सकता।

एक दूसरा तथ्य अध्ययन में शामिल कम संख्या के नमूनों  का भी है। अभी तक 166 से ज़्यादा नतीज़े इकट्ठे किए गए हैं। ऐसा भी संभव है कि नोवेल कोरोनावायरस की कई दूसरी नस्लें भी मौजूद हों।

फिर भी जेनेटिक अंतर वाली नस्लों की खोज इसके वैक्सीन बनाने की दिशा में जरूरी है। इस अध्ययन से वायरस के विकास के बारे में अहम जानकारी मिली है। कितनी भी सवाल उठाए जाएं, पर यह सच है कि वाकई यह दो नस्लें मौजूद हैं। अध्ययन दोनों की मौजूदगी के बारे में पुख़्ता सबूत देता है। अध्ययन कहता है कि  कोरोनावायरस का दो नस्लों में विकास, दो SNP (अलग-अलग बिंदुओं पर जेनेटिक विकास) के ज़रिए दिखाई देता है। जो इन नस्लों में संबंध को पूरी तरह पुख़्ता भी करते हैं।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

Chinese Scientists May Have Found Two Strains of Coronavirus

SARS-CoV-2
Coronavirus strains
S type and L type Strains of Novel Coronavirus
Viral Evolution
Xiaolu Tang
Chinese Scientists found Two Strains of Coronavirus

Related Stories

कोविड: प्रोटीन आधारित वैक्सीन से पैदा हुई नई उम्मीद

ओमिक्रोन के नए संस्करण का पता चला, यह टीके की सुरक्षा को दे सकता है मात

SARS-CoV-2 के क़रीबी वायरस लाओस में पाए गए

कोरोना के बदलते हुए चेहरे कितने खतरनाक? 

कोविड-19: वायरस में उत्परिवर्तन क्षमता मौजूदा टीकों से बचाव में सक्षम है

कोविड-19: हालिया अध्ययन के मुताबिक वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा स्मृति आठ महीनों तक कायम रहती है

कार्टून क्लिक: नए स्ट्रेन के लिए नए साल में कोई नया टास्क साहेब!

उत्तरी गोलार्ध में सर्दी की दस्तक के साथ ही क्या कोविड-19 के मामले बढ़ सकते हैं?

कोविड-19: जब खंडन-मंडन की कला विज्ञान का विकल्प बन जाए

मनुष्यों में पक्षियों और पशुओं से वायरस कैसे फैलता है?


बाकी खबरें

  • COVID, MSMEs and Union Budget 2022-23
    आत्मन शाह
    कोविड, एमएसएमई क्षेत्र और केंद्रीय बजट 2022-23
    07 Feb 2022
    बजट में एमएसएमई क्षेत्र के लिए घोषित अधिकांश योजनायें आपूर्ति पक्ष को ध्यान में रखते हुए की गई हैं। हालाँकि, इसके बजाय हमें मौजूदा संकट से निपटने के लिए मांग-पक्ष वाली नीतिगत कर्रवाइयों की कहीं अधिक…
  • congress
    रवि शंकर दुबे
    सिद्धू की ‘बग़ावत’ पर चन्नी के 111 दिन हावी... अब कांग्रेस को कितना मिलेगा 'गुरु’ का साथ!
    07 Feb 2022
    राहुल गांधी ने अपने कहे मुताबिक पंजाब कांग्रेस के लिए मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित कर दिया है, हालांकि लंबे वक्त से बग़ावत किए बैठे सिद्धू भी सरेंडर करते नज़र आए और हर फ़ैसले में राहुल गांधी का साथ…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    मोदी की पहली रैली cancel! विपक्ष का करारा हमला!
    07 Feb 2022
    वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा आज प्रधानमंत्री मोदी की रद्द हुई रैली पर बात कर रहे हैं। वहीं रैली रद्द होने पर जयंत चौधरी ने कहा है कि भाजपा को हार का डर सता रहा है।
  • राजेश टम्टा
    मुकुंद झा
    उत्तराखंड चुनाव 2022 : अल्मोड़ा की पहचान रहा ताम्र उद्योग पतन की ओर, कारीगर परेशान!
    07 Feb 2022
    कभी उत्तराखंड ही नहीं देश का गौरव रहे तांबा कारीगर आज अपने गुज़र-बसर के लिए मजबूर हो गए हैं। वर्तमान विधानसभा चुनाव में हर दल इस उद्योग को अल्मोड़ा की संस्कृति से जोड़ रहा है और उसे राज्य का गौरव बता…
  • patna
    सोनिया यादव
    बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर कांड से लेकर गायघाट शेल्टर होम तक दिखती सिस्टम की 'लापरवाही'
    07 Feb 2022
    बीते सालों में मुज़फ़्फ़रपुर, पटना, मधुबनी समेत तमाम दूसरे शेल्टर होम से लड़कियों के भागने और रहस्यमयी परिस्थितियों में गायब होने तक की खबरें सामने आईं, लेकिन शासन-प्रशासन इस सब के बाद भी कभी इस…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License