NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
विज्ञान
भारत
राजनीति
सबसे पहले टीका बनाने की होड़ हो सकती है ख़तरनाक, वैज्ञानिकों ने चेताया, सतर्क रहने को कहा
वैज्ञानिकों ने शनिवार को कहा कि इसे उच्च प्राथमिकता देने और महीनों, यहां तक वर्षों तक चलने वाली प्रक्रिया में जल्दबाज़ी बरतने के बीच एक संतुलन बनाना अनिवार्य है।
भाषा
04 Jul 2020
vaccines

नयी दिल्ली : भारतीय कोविड-19 टीका कार्यक्रम में अचानक रूचि बढ़ी है लेकिन अनेक वैज्ञानिकों ने शनिवार को कहा कि इसे उच्च प्राथमिकता देने और महीनों, यहां तक वर्षों तक चलने वाली प्रक्रिया में जल्दबाजी बरतने के बीच एक संतुलन बनाना अनिवार्य है एवं टीका विकसित होने में कई महीना यहां तक सालों लग सकते हैं। वैज्ञानिकों की यह सलाह आईसीएमआर द्वारा अगले महीने टीके के उत्पादन की शुरुआत करने की घोषणा के एक दिन बाद आई है।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने शुक्रवार को कोविड-19 के खिलाफ दुनिया का पहला टीका 15 अगस्त तक बाजार में उतारने की घोषणा की जिसे लेकर उम्मीद के साथ आशंकाए भी हैं। इसी दिन गुजरात की कंपनी ज़ायडस कैडिला ने घोषणा की कि उसे भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) से उसके संभावित टीके को इंसानों पर चिकित्सीय परीक्षण की अनुमति मिल गई है।

विषाणु रोग विशेषज्ञ और वेलकम न्यास/ डीबीटी इंडिया अलायंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शाहिद जमील ने कहा, ‘‘अगर चीजें दोषमुक्त तरीके से की जा जाए तो टीके का परीक्षण खासतौर पर प्रतिरक्षाजनत्व और प्रभाव जांचने के लिए चार हफ्ते में यह संभव नहीं है।’’

उल्लेखनीय है कि जमील का संगठन जैव चिकित्सा विज्ञान और स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए वित्तीय मदद मुहैया कराता है।

एंटीजन जैसे विकसित नये तत्व की इंसान और जानवर के शरीर में प्रतिरोधक प्रणाली को सक्रिय करने की क्षमता को प्रतिरक्षाजनत्व कहा जाता है।

विषाणु वैज्ञानिक उपासना राय ने कहा कोरोनो वायरस के खिलाफ टीका लांच की प्रक्रिया को गति देना या जल्द लांच करने का वादा करना प्रशंसा के योग्य है, लेकिन यह सवाल महत्वपूर्ण है कि क्या ‘हम बहुत ज्यादा जल्दबाजी कर रहे हैं’।

सीआईएसआर-आईआईसीबी कोलकाता में वरिष्ठ वैज्ञानिक रे ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमें सावधानी से आगे बढ़ना चाहिए। इस परियोजना को उच्च प्राथमिकता देना नितांत आवश्यक है। हालांकि, अतिरिक्त दबाव जरूरी नहीं कि जनता के लिए सकारात्मक उत्पाद दे।’’

उल्लेखनीय है देश की शीर्ष चिकित्सा अनुसंधान निकाय आसीएमआर ने कहा कि 12 क्लिनिकल परीक्षण स्थालों पर देश में विकसित टीका कोवाक्सिन का परीक्षण होगा। इस संभावित टीके का विकास हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक और राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान, पुणे ने मिलकर किया है।

आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने 12 स्थानों के प्रधान अन्वेषकों को लिखे पत्र में कहा, ‘‘सभी क्लिनिकल परीक्षणों के पूरा होने के बाद 15 अगस्त तक सार्वजनिक स्वास्थ्य उपयोग के लिए टीका लांच करने का लक्ष्य रखा गया है।’’

पत्र के लहजे और जल्दबाजी के संकेत से कुछ वैज्ञानिक चिंतित हैं। उन्होंने पत्र में निर्धारित समयसीमा पर सवाल उठाया है और टीके के विकास प्रक्रिया को छोटा नहीं करने की सलाह दी।

विषाणु रोग विशेषज्ञ सत्यजीत रथ ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘आईसीएमआर के पत्र का लहजा और सामग्री उत्पाद के विकास की प्रक्रिया और तकनीकी रूप से व्यावहरिकता के आधार पर अनुचित है।’’

उन्होंने कहा कि टीका का विकास बहु चरणीय प्रक्रिया है। पहले चरण में छोटे स्तर पर परीक्षण होता है जिसमें बहुत कम संख्या में प्रतिभागी होते एवं यह आकलन किया जाता है कि क्या टीका इंसानों के लिए सुरक्षित है या नहीं।

उन्होंने कहा कि दूसरे चरण में सैकड़ों लोग हिस्सा लेते हैं और इस चरण में संभावित टीके के प्रभाव का आकलन किया जाता है।

उन्होंने कहा कि अंतिम चरण में हजारों लोगों को शामिल किया जाता है और देखा जाता है कि निर्धारित समय में क्या टीका प्रभावी है या नहीं और यह कई महीनों तक चलता है।

रे ने कहा कि टीके को विभिन्न चिकित्सकीय चरणों को पूरा करने में कम से कम 12 से 18 महीने का समय लगता है।

उन्होंने कहा, ‘‘आज से 15 अगस्त में कंपनी के पास टीके के विकास के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के लिए मात्र एक महीने का समय है।’’

रे ने कहा, ‘‘कैसे इतनी छोटी से अवधि निर्धारित की जा सकती है? कहा से यह सबूत मिला कि इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए यह अवधि पर्याप्त है? संभावित टीके की सुरक्षा और प्रभाव का क्या जो किसी भी दवा के विकसित करने का मौलिक चरण है? क्या प्री-क्लिनिकल अध्ययन भी पूरा किया गया? बहुत जल्दबाजी करने से खतरा पैदा हो सकता है।’’

उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण चरणों को छोड़ना या तो खतरनाक हो सकता है या उत्पाद की गुणवत्ता खराब हो सकती है।

रे ने कहा, ‘‘ हमें मानकों और गुणवत्ता से समझौता नहीं करना चाहिए। हमें सबसे पहले टीका लांच करने की जरूरत नहीं है बल्कि हमें मेड इन इंडिया टीका बनाने की जरूरत है जिसपर पूरी दुनिया भरोसा कर सके।’’

इस बीच, आधिकारिक सूत्रों ने बताया, ‘‘ डीसीजीआई वीजी सोमानी ने जायडस कैडिला हेल्थ केयर लिमिटेड द्वारा तैयार संभावित टीके को जानवरों पर सफल परीक्षण करने के बाद इंसानों पर पहले और दूसरे चरण के क्लीनिकल परीक्षण की मंजूरी बृहस्पतिवार को दे दी।’’

दिल्ली स्थित राष्ट्रीय प्रतिराक्षा विज्ञान संस्थान के रथ ने कहा, ‘‘ मुझे प्रसन्नता है कि स्थानीय स्तर पर विकसित संभावित टीके दुनिया के अन्य हिस्सों की तरह ही प्रगति कर रहे हैं और यह सार्स-कोव-2 टीके में ही नहीं बल्कि डीएनए आधारित सार्स कोव-2 टीके के क्षेत्र में भी हो रहा है। मैं नतीजों की ओर देख रहा हूं।’’

अशोक विश्वविद्यालय में भौतिक शास्त्र और जीव विज्ञान में प्रोफेसर गौतम आई मेनन ने कहा कि जायडस कैडिला के संभावित टीका जानवरों पर किए गए परीक्षण में सुरक्षित और प्रभावी रहा जिसके आधार पर अगले चरण में इनसानों पर परीक्षण करने की अनुमति दी गई है।

मेनन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ यह मानक प्रक्रिया है, यह मानव परीक्षण है और इसमें समय लगता है एवं परीक्षण की अनुमति मिलना महत्वपूर्ण हैं।’’

एक अन्य घटनाक्रम में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने ट्रिब्यून अखबार को बताया कि ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित टीका इस साल के अंत तक बाजार में आ जाएगा।

उन्होंने कहा कि चाडओक्स1 एनकोव-19 को सामान्य विषाणु चाडओक्स1 से बनाया गया है जो समान्य तौर पर चिम्पैंजी में जुकाम के लिए जिम्मेदार एडनोवायरस का कमजोर संस्करण है। इसमें आनुवंशिकी बदलाव किए गए जिससे इंसानों में इसका प्रजनन नामुमिकन हैं।

रथ ने कहा, ‘‘ मेरा मानना है कि चाडओक्स1 एक संभावित टीका ब्राजील में क्लिनिकल परीक्षण के तीसरे चरण में प्रवेश कर चुका है और इस साल के अंत में भरोसेमंद नतीजे दे सकता है।

टीका विकसित करने की प्रक्रिया तेज की जा रही है, ताकि मोदी स्वतंत्रता दिवस पर घोषणा कर सकें: माकपा

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) महासचिव सीताराम येचुरी ने शनिवार को आरोप लगाया कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) कोरोना वायरस का टीका बनाने की प्रक्रिया तेज करने की कोशिश कर रही है, ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वतंत्रता दिवस पर इसके संबंध में घोषणा कर सकें।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान ‘‘आदेश के अनुसार’’ नहीं किया जा सकता।

आईसीएमआर ने कोविड-19 का स्वदेशी टीका चिकित्सकीय उपयोग के लिए 15 अगस्त तक उपलब्ध कराने के मकसद से चुनिंदा चिकित्सकीय संस्थाओं और अस्पतालों से कहा है कि वे भारत बॉयोटेक के सहयोग से विकसित किए जा रहे संभावित टीके ‘कोवैक्सीन’ को परीक्षण के लिए मंजूरी देने की प्रक्रिया तेज करें।

येचुरी ने ट्वीट किया, ‘‘टीका वैश्विक महामारी के लिए सबसे निर्णायक समाधान होगा। विश्व ऐसे सुरक्षित टीके का इंतजार कर रहा है, जिसकी दुनियाभर में पहुंच हो।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन... वैज्ञानिक अनुसंधान आदेश के हिसाब से नहीं किया जा सकता। स्वास्थ्य एवं सुरक्षा नियमों संबंधी सभी नियमों को दरकिनार कर कोविड-19 के उपचार के लिए स्वदेशी टीका विकसित करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है, ताकि प्रधानमंत्री मोदी स्वतंत्रता दिवस पर इसकी घोषणा कर सकें। इसकी मानव जीवन को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।’’

येचुरी ने आईसीएमआर पर ‘‘संस्थाओं से अपने अनुसार काम कराने के लिए धमकियों का इस्तेमाल’’ करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि हैदराबाद में निम्स जैसे कुछ संस्थान राज्य सरकार के संस्थान हैं।

येचुरी ने कहा, ‘‘क्या तेलंगाना सरकार ने अनुमति दी।’’

परीक्षणों के संबंध में कई सवाल पूछते हुए येचुरी ने कहा, ‘‘इस परीक्षण में कितने लोगों पर अध्ययन किया जाएगा? क्या 14 अगस्त तक पहले, दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षण पूरे कर लिए जाएंगे और उनका विश्लेषण पूरा कर लिया जाएगा। स्वतंत्र डेटा सुरक्षा निगरानी समिति (डीएसएमसी) के सदस्य कौन हैं? कुछ गंभीर सवालों के जवाब दिए जाने की आवश्यकता है।’’

उन्होंने सवाल किया कि भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) द्वारा टीके के सुरक्षित होने और उसके प्रभावी होने के सबूत का आकलन न किए जाने के बावजूद आईसीएमआर टीका उपलब्ध कराने की तिथि कैसे तय कर सकती है।

येचुरी ने कहा, ‘‘एक निजी कंपनी की ओर से विकसित किए जा रहे टीके के परीक्षण के लिए आक्रामकता के साथ दबाव बनाने में आईसीएमआर की क्या जवाबदेही है?’’

Coronavirus
COVID-19
corona vaccine
Indian Council of Medical Research
ICMR
Narendra modi

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • mamta banerjee
    भाषा
    तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल में चारों नगर निगमों में भारी जीत हासिल की
    15 Feb 2022
    तृणमूल कांग्रेस ने बिधाननगर, चंदरनगर और आसनसोल नगरनिगमों पर अपना कब्जा बरकरार रखा है तथा सिलीगुड़ी में माकपा से सत्ता छीन ली।
  • hijab
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    हिजाब विवादः समाज सुधार बनाम सांप्रदायिकता
    15 Feb 2022
    ब्रिटेन में सिखों को पगड़ी पहनने की आज़ादी दी गई है और अब औरतें भी उसी तरह हिजाब पहनने की आज़ादी मांग रही हैं। फ्रांस में बुरके पर जो पाबंदी लगाई गई उसके बाद वहां महिलाएं (मुस्लिम) मुख्यधारा से गायब…
  • water shortage
    शिरीष खरे
    जलसंकट की ओर बढ़ते पंजाब में, पानी क्यों नहीं है चुनावी मुद्दा?
    15 Feb 2022
    इन दिनों पंजाब में विधानसभा चुनाव प्रचार चल रहा है, वहीं, तीन करोड़ आबादी वाला पंजाब जल संकट में है, जिसे सुरक्षित और पीने योग्य पेयजल पर ध्यान देने की सख्त जरूरत है। इसके बावजूद, पंजाब चुनाव में…
  • education budget
    डॉ. राजू पाण्डेय
    शिक्षा बजट पर खर्च की ज़मीनी हक़ीक़त क्या है? 
    15 Feb 2022
    एक ही सरकार द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे बजट एक श्रृंखला का हिस्सा होते हैं इनके माध्यम से उस सरकार के विजन और विकास की प्राथमिकताओं का ज्ञान होता है। किसी बजट को आइसोलेशन में देखना उचित नहीं है। 
  • milk
    न्यूज़क्लिक टीम
    राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ खिलवाड़ क्यों ?
    14 Feb 2022
    इस ख़ास पेशकश में परंजॉय गुहा ठाकुरता बात कर रहे हैं मनु कौशिक से राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड से सम्बंधित कानूनों में होने वाले बदलावों के बारे में
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License