NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
स्वास्थ्य
विज्ञान
भारत
अंतरराष्ट्रीय
कोविड-19 वैक्सीन: फाइजर के बाद मॉडरना ने भी कर लिया सफल परीक्षण, कोवाक्सिन का तीसरा चरण शुरू
नए वैक्सीन कैंडिडेट, जिसे mRNA-1273 के नाम से जाना जाता है ने कथित तौर पर अपने तृतीय चरण के क्लीनिकल परीक्षणों में एसएआरएस-सीओवी-2 के खिलाफ 94.5% प्रभावोत्पादकता दर्शाई है।
संदीपन तालुकदार
18 Nov 2020
c
फोटो साभार: बिज़नेस स्टैण्डर्ड 

इसी महीने के भीतर दो कैंडिडेट वैक्सीन को लेकर घोषणा की गई है कि कोविड-19 के खिलाफ ये प्रभावी रूप से कारगर साबित हुए हैं। फाइजर की घोषणा के बाद एक और अमेरिकी फार्मा दिग्गज कंपनी मॉडरना इंक. ने अपने कैंडिडेट वैक्सीन के 94% से भी अधिक असरकारक होने घोषणा की है। सोमवार (16 नवंबर) को की गई इस घोषणा में बताया गया है कि इसके mRNA-1273 नाम के वैक्सीन कैंडिडेट ने तीसरे चरण के अपने क्लीनिकल परीक्षण में 94.5% तक की प्रभावकारिता दर्शाई है।

मॉडरना के परीक्षण अध्ययन को सीओवीई-COVE नाम दिया गया है और इसके लिये अमेरिका में 30,000 से भी अधिक की संख्या में वालंटियर्स को पंजीकृत किया गया था। इस परीक्षण को एनआईएआईडी (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एलर्जी एंड इन्फेक्शियस डिजीज) और बीएआरडीए (बायोमेडिकल एडवांस्ड रिसर्च एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी) के संयुक्त तत्वाधान में संचालित किया गया था।

अंतरिम नतीजे में उन सभी वालंटियर्स के बीच में से कुल 95 मामले सामने आये हैं, जिनमें रोगसूचक कोविड-19 के लक्षण विकसित हुए थे। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन 95 मामलों में से 90 मामले प्लेसिबो समूह में पाए गए और सिर्फ पाँच ही मामले टीकाकरण ग्रुप में देखने को मिले। इसके अलावा 11 मामले गंभीर भी थे, लेकिन वे सभी प्लेसिबो ग्रुप से संबंधित थे।

वर्तमान में एसएआरएस-सीओवी-2 के खिलाफ दुनियाभर में विकसित किये जा रहे टीकों में 200 से भी अधिक की संख्या में वैक्सीन कैंडिडेट हैं, जो कि अपने आप में एक अभूतपूर्व प्रयास है। डब्ल्यूएचओ के मसौदा परिदृश्य में देखें तो इसकी नवीनतम रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से 48 अपने क्लीनीकल परीक्षण के चरण में हैं जबकि 164 पूर्व-क्लिनीकल मूल्याँकन के चरण में हैं।

आमतौर पर देखा गया है कि किसी भी वैक्सीन के बड़े पैमाने पर उपयोग के लिए बाजार में इसकी उपलब्धता से पहले उसे अपने क्लीनीकल मूल्याँकन में 15 वर्षों तक का वक्त लग सकता है। अभी तक के सबसे तेजी से विकसित किया गए वैक्सीन की बात करें तो वह कंठमाला (mums) के लिए तैयार किये गए वैक्सीन में देखने में आया था, जिसे 1960 के दशक के दौरान मूल्याँकन प्रक्रिया को संपन्न करने में चार वर्ष लग गये थे। यदि किसी वैक्सीन को मंजूरी मिल भी जाती है तो उसके बाद भी उसके सामने कई बाधाएं बनी रहती हैं, जैसे कि इसके उत्पादन और निर्माण में लागत और इसके पहले प्रयोग के लिए लक्षित समूह की पहचान करने इत्यादि में। इसके अलावा कुछ वैक्सीन को चौथे चरण से भी गुजरना पड़ सकता है, जहाँ इसे नियमित अध्ययन से गुजरना पड़ता है।

हालाँकि वर्तमान वैश्विक संकट के मद्देनजर कोविड-19 के खिलाफ विकसित किये जा रहे वैक्सीन की क्लीनीकल मूल्याँकन की प्रक्रिया को अविस्तीर्ण माध्यम से चलाया जा रहा है, और यही कारण है कि इसको लेकर कई सफल परीक्षणों और प्रभावकारिता की खबरें सुनने में आ रही हैं।

लेकिन कौन सा वैक्सीन कैंडिडेट अंततः सफल होगा इसके बारे में कुछ भी निश्चित तौर पर कह पाना जल्दबादी होगी, क्योंकि इसके भंडारण, वितरण और लागत को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। यहाँ पर उन शीर्ष पर चल रहे वैक्सीन कैंडिडेट्स पर नजर डालते हैं जिन्होंने अपने क्लीनीकल परीक्षणों में कुछ उत्साहजनक परिणाम दिखाए हैं-

कोवाक्सिन 

भारत की स्वदेशी वैक्सीन कैंडिडेट को भारत बायोटेक द्वारा विकसित किया जा रहा है, जो अपने क्लिनिकल परीक्षण के तृतीय चरण में प्रवेश कर चुकी है। भारत बायोटेक के अनुसार यह अपने तृतीय चरण में 26,000 वालंटियर्स को नियुक्त करेगा और आईसीएमआर के साथ साझेदारी में इसे सारे देशभर में आयोजित किया जाएगा।

किसी भी स्वदेशी वैक्सीन कैंडिडेट का यह पहले तृतीय चरण का परीक्षण होने जा रहा है और इसे ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया (डीसीजीआई) का अनुमोदन प्राप्त है। यह परीक्षण www.ctri.nic.in (CTRI/2020/11/028976) पर पंजीकृत है। 

कोवाक्सिन परीक्षण में शामिल होने वालों को 28 दिनों के अन्तराल में अंतरापेशी (इंट्रामस्क्युलर) इंजेक्शन की दो खुराक दी जाएँगी। यह एक डबल ब्लाइंड रैंडमाइज्ड परीक्षण होगा, जिसका अर्थ है कि प्रतिभागियों को दो समूहों में वर्गीकृत किया जायेगा, जिसमें से एक को वैक्सीन की खुराक दी जायेगी जबकि दूसरे को प्लेसिबो दिया जाएगा। 

पहले और दूसरे चरण के परीक्षणों में कोवाक्सिन का 1,000 से अधिक प्रतिभागियों के बीच में मूल्याँकन किया गया था, जिसके सुरक्षा और प्रतिरोधात्मकता को लेकर उत्साहजनक नतीजे देखने को मिले थे। इस वैक्सीन को भारत बायोटेक, आईसीएमआर (इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च) और एनआईवी (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलोजी) द्वारा विकसित किया जा रहा है।

फाइजर 

फाइजर और इसके सहयोगी बायोएनटेक ने अपने वैक्सीन के क्लिनिकल परीक्षण की सफलता की कहानी को लेकर काफी सुर्खियाँ बनाई हैं। पिछले हफ्ते इस संयुक्त सहयोग ने घोषणा की थी कि तीसरे चरण के परीक्षण में उन्हें बेहद उत्साहवर्धक नतीजे मिले हैं, क्योंकि इसमें एसएआरएस-सीओवी-2 के खिलाफ 90% से अधिक प्रभावशीलता देखने को मिली है। इस वैक्सीन ने mRNA प्लेटफार्म को इस्तेमाल में लाया था, जिसमें वायरस के स्पाइक प्रोटीन के mRNA को इंजेक्ट किया जाता है। 

हालाँकि जिस मात्रा में इस कहानी को बढ़ा-चढ़ाकर प्रचारित किया गया था, ऐसे में कई सवाल भी खड़े हुए जिन्हें तत्काल उठाया गया था। सबसे पहले यह कि इस वैक्सीन के लिए बेहद परिष्कृत भण्डारण प्रणाली की आवश्यकता होगी, जिसमें तापमान को -70 से -80 डिग्री सेल्सियस पर बनाए रखने की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में यह वैक्सीन निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों के लिए उपलब्ध करा पाना संभव नहीं हो सकेगा। एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने भी इस वैक्सीन के व्यापक पैमाने पर सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए उपलब्ध हो जाने की सूरत में इसके भंडारण और वितरण को लेकर अपनी आशंका व्यक्त की है। इसके अलावा भारत जैसे देश के लिए इस वैक्सीन की लागत का भी मुद्दा कुछ ऐसा है जो उसके लिए काफी मायने रखता है। यह भी सुनने में आ रहा है कि अमेरिका इस वैक्सीन को दिसंबर तक इस्तेमाल करने की इजाजत दे सकता है।

एस्ट्रा ज़ेनेका और ऑक्सफ़ोर्ड वैक्सीन 

इस वैक्सीन कैंडिडेट ने फाइजर और मॉडरना की तुलना में एक अलग प्लेटफार्म को उपयोग में लाया है। यह स्पाइक प्रोटीन को अडेनोवायरस के एक कमजोर संस्करण में पहुँचाने को इस्तेमाल में लाता है, जो चिम्पांजी में जुकाम का कारण बनता है। इस वैक्सीन के तीसरे चरण के परीक्षण के नतीजे अभी आने बाकी हैं। यहाँ यह उल्लेख करना आवश्यक होगा कि इस वैक्सीन का परीक्षण यूके और अमेरिका में बीच में ही स्थगित कर दिया गया था, जब एक मरीज पर इस वैक्सीन की खुराक के कारण गंभीर प्रभाव देखने को मिले थे। बाद में जाकर इस परीक्षण को फिर से शुरू कर दिया गया है।

भारत में एस्ट्राज़ेनेका-ऑक्सफ़ोर्ड वैक्सीन ने अपने सहयोगी के तौर पर सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया (एसआईआई) को चुना है, और इसे कोविशील्ड नाम दिया गया है। एसआईआई भारत में इस वैक्सीन के द्वितीय/तृतीय चरण के परीक्षण को संचालित करने में जुटी हुई है और कथित तौर पर इसके दिसम्बर तक 10 करोड़ डोज तक के उत्पादन करने का लक्ष्य है। 

स्पुतनिक वी 

रुसी वैक्सीन को गामालेया नेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ़ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी द्वारा विकसित किया जा रहा है। कथित तौर पर, अगले हफ्ते तक इसके भारत में द्वितीय/तृतीय चरण के क्लिनिकल परीक्षणों के संचालन के लिए पहुँचने की संभावना बताई जा रही है।

यह फैसला डॉ. रेड्डी द्वारा डीजीसीआई से परीक्षण संचालित करने के लिए अनुमोदन हासिल करने के बाद सामने निकलकर आया है। इस वैक्सीन के पहले बैच की खेप के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज, कानपुर में पहुँचने की उम्मीद है।

कुछ अन्य वैक्सीन कैंडिडेट, जिनके तृतीय चरण के परिणाम अभी भी प्रतीक्षा सूची में हैं, उनमें सिनोवेक, सिनोफार्म/वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ़ बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स, सिनोफार्म/बीजिंग इंस्टीट्यूट ऑफ़ बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स, कैनसिनो बायोलॉजिकल (सभी चीन में), नोवावाक्स, जानसेन फर्मास्यूटिकल कंपनी (जॉनसन एंड जॉनसन) इत्यादि प्रमुख हैं। 

https://www.newsclick.in/COVID-19-vaccines-moderna-declares-successful-…

vaccines
Coronavirus
fizer
Moderna Inc
covaccines

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के घटते मामलों के बीच बढ़ रहा ओमिक्रॉन के सब स्ट्रेन BA.4, BA.5 का ख़तरा 

कोरोना अपडेट: देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट के सब स्ट्रेन BA.4 और BA.5 का एक-एक मामला सामने आया

कोरोना अपडेट: देश में फिर से हो रही कोरोना के मामले बढ़ोतरी 

कोविड-19 महामारी स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में दुनिया का नज़रिया नहीं बदल पाई

कोरोना अपडेट: अभी नहीं चौथी लहर की संभावना, फिर भी सावधानी बरतने की ज़रूरत

कोरोना अपडेट: दुनियाभर के कई देशों में अब भी क़हर बरपा रहा कोरोना 

कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की संख्या 20 हज़ार के क़रीब पहुंची 

देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, PM मोदी आज मुख्यमंत्रियों संग लेंगे बैठक


बाकी खबरें

  • श्याम मीरा सिंह
    यूक्रेन में फंसे बच्चों के नाम पर PM कर रहे चुनावी प्रचार, वरुण गांधी बोले- हर आपदा में ‘अवसर’ नहीं खोजना चाहिए
    28 Feb 2022
    एक तरफ़ प्रधानमंत्री चुनावी रैलियों में यूक्रेन में फंसे कुछ सौ बच्चों को रेस्क्यू करने के नाम पर वोट मांग रहे हैं। दूसरी तरफ़ यूक्रेन में अभी हज़ारों बच्चे फंसे हैं और सरकार से मदद की गुहार लगा रहे…
  • karnataka
    शुभम शर्मा
    हिजाब को गलत क्यों मानते हैं हिंदुत्व और पितृसत्ता? 
    28 Feb 2022
    यह विडम्बना ही है कि हिजाब का विरोध हिंदुत्ववादी ताकतों की ओर से होता है, जो खुद हर तरह की सामाजिक रूढ़ियों और संकीर्णता से चिपकी रहती हैं।
  • Chiraigaon
    विजय विनीत
    बनारस की जंग—चिरईगांव का रंज : चुनाव में कहां गुम हो गया किसानों-बाग़बानों की आय दोगुना करने का भाजपाई एजेंडा!
    28 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के बनारस में चिरईगांव के बाग़बानों का जो रंज पांच दशक पहले था, वही आज भी है। सिर्फ चुनाव के समय ही इनका हाल-चाल लेने नेता आते हैं या फिर आम-अमरूद से लकदक बगीचों में फल खाने। आमदनी दोगुना…
  • pop and putin
    एम. के. भद्रकुमार
    पोप, पुतिन और संकटग्रस्त यूक्रेन
    28 Feb 2022
    भू-राजनीति को लेकर फ़्रांसिस की दिलचस्पी, रूसी विदेश नीति के प्रति उनकी सहानुभूति और पश्चिम की उनकी आलोचना को देखते हुए रूसी दूतावास का उनका यह दौरा एक ग़ैरमामूली प्रतीक बन जाता है।
  • MANIPUR
    शशि शेखर
    मुद्दा: महिला सशक्तिकरण मॉडल की पोल खोलता मणिपुर विधानसभा चुनाव
    28 Feb 2022
    मणिपुर की महिलाएं अपने परिवार के सामाजिक-आर्थिक शक्ति की धुरी रही हैं। खेती-किसानी से ले कर अन्य आर्थिक गतिविधियों तक में वे अपने परिवार के पुरुष सदस्य से कहीं आगे नज़र आती हैं, लेकिन राजनीति में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License