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क्यूबाई गुटनिरपेक्षता: शांति और समाजवाद की विदेश नीति
क्यूबा में ‘गुट-निरपेक्षता’ का अर्थ कभी भी तटस्थता का नहीं रहा है और हमेशा से इसका आशय मानवता को विभाजित करने की कुचेष्टाओं के विरोध में खड़े होने को माना गया है।
मनोलो डी लॉस सैंटॉस
03 Jun 2022
cuba
चित्र साभार: काउंटरकरंट्स

इंडोनेशिया के बांडुंग और क्यूबा के हवाना शहर एक-दूसरे से तकरीबन 17 हजार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इतनी अधिक दूरी होने बावजूद भी ये स्थान ग्लोबल साउथ के कई लोगों की कल्पनाओं में बेहद गहरी वैचारिक साम्यता रखते हैं। तीसरी वैश्विक परियोजना जो कि नई-नई स्वतंत्रता हासिल करने वाले मुल्कों के द्वारा राष्ट्रीय मुक्ति के लिए किये गये उनके संघर्षों और शांति एवं गुटनिरपेक्षता के लिए चलाये जा रहे आंदोलनों के इतिहास में निरंतर सहयोग का परिणाम है, जिसे इसने परिभाषित किया है और आज भी इस काम को जारी रखा है।

18 अप्रैल 1955 को जब बांडुंग सम्मेलन शुरू हो रहा था तो उस समय भी फिदेल कास्त्रो हवाना के दक्षिण में आइल ऑफ़ पाइंस नामक जेल में राजनैतिक बंदी का जीवन बिता रहे थे। इससे ठीक दो साल पहले मोंकाडा बैरक पर विफल हमले का आयोजन करने के आरोप में उन्हें 15 वर्ष की सजा सुनाई गई थी। उन कारावास के वर्षों के दौरान युवा फिदेल ने जमकर अध्ययन किया। वहां पर रहते हुए उन्होंने संप्रभुता और आजादी को लेकर अपनी अवधारणाओं को सुदृढ़ करना शुरू किया और जाना कि किस प्रकार से शीत युद्ध के दौरान उन्हें कैसे पुनर्परिभाषित किया जा रहा था। इस दौर में साम्राज्यवाद सारे महाद्वीपों को कैसे अपने अधीन किया जा सकता है, के बारे में नए-नए दृष्टिकोणों को विकसित करने में जुटा हुआ था।

जैसा कि फिदेल और जेल में रह रहे उनके साथियों के द्वारा क्यूबा के लिए एक नए मार्ग को प्रशस्त किया जा रहा था, उनके सामने यह बात पूरी तरह से स्पष्ट हो गई थी कि राष्ट्रीय मुक्ति के लिए उनके ध्येय को तीसरी दुनिया के लोगों के लिए विकास एवं कार्यों की वृहत्तर परियोजना हेतु सक्रिय रूप से गुटनिरपेक्षता की दिशा के साथ सम्बद्ध करना होगा।  

इंडोनेशिया में बांडुंग में संपन्न हुई गोलमेज वार्ता से तीसरी दुनिया के नेताओं ने उस समय की प्रचलित विश्व व्यवस्था के पुनर्गठन के लिए एक वैश्विक संघर्ष को छेड़ने का संकल्प लिया था। सम्मेलन ने समाजवादी देशों और तीसरी दुनिया के देशों के बीच में मेल के बिंदुओं को देखा और पाया कि इन राष्ट्रों के बीच में गैर-औपनिवेशिककरण की प्रक्रिया को तेज करने के संघर्षों को लेकर एकता लगातार मजबूत हो रही है।

जबकि बांडुंग सम्मेलन में एशिया और अफ्रीका की स्वतंत्र सरकारों ने साम्राज्यवाद एवं उपनिवेशवाद-विरोधी संघर्ष को फिर से शुरू करने की आवश्यकता पर बल दिया और अपने लोगों के हितों और आकांक्षाओं को उत्तरोतर मजबूत करने के लिए आपस में ज्यादा एकजुट रहने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं दूसरी ओर, लातिनी अमेरिका की अधिकांश सरकारें अपने नागरिकों के साझा हितों और आकांक्षाओं के विरुद्ध खड़े हो गये, और ऑर्गेनाइजेशन ऑफ़ अमेरिकन स्टेट्स (ओएएस) की आड़ में उन्होंने अमेरिकी साम्राज्यवाद के तहत खुद को पहले से अधिक समर्पित कर दिया, जो कि पहले से ही अमेरिकी विदेश विभाग के उपनिवेश मंत्रालय के तौर पर अपना कामकाज कर रहा था, जैसा कि बाद के दिनों में फिदेल ने इसे नाम दिया था।

1959 में, क्यूबाई क्रांति की जीत हुई।  इसने लातिनी अमेरिका और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ इसके रिश्ते में कभी भी वापसी न होने के परिवर्तनकारी बिंदु को चिह्नित किया। अमेरिकी सरकार को बाद में जाकर इस द्वीप पर हुई क्रांतिकारी प्रक्रिया को मान्यता न देने का फैसला करना पड़ा। 1961 तक, क्यूबा इस क्षेत्र में अमेरिकी आक्रमण का प्रमुख केंद्र बिंदु बन चुका था, जिसका परिणाम प्रतिबंधों में देखने को मिला जो अब छह दशक पुरानी बात हो चुकी है। इतिहास में यह पहली बार था, जब एक गुरिल्ला आंदोलन ने एक क्रांति को संभव बनाया था, और अमेरिकी साम्राज्यवाद का मुकाबला ठीक उसकी नाक के नीचे किया था। इसके साथ ही इसने सामाजिक-आर्थिक ढाँचे में दूरगामी बदलावों को शुरू कर दिया था, जो अमेरिकी वर्चस्व के नव-औपनिवेशिक हितों के विरोध में थे।

जल्द ही, क्यूबा लातिनी अमेरिका में ऐसा इकलौता देश बन गया जो 1961 में युगोस्लाविया में बनाये गये गुटनिरपेक्ष आंदोलन (एनएएम) में भाग लिया था। इसके साथ ही फिदेल कास्त्रो और क्यूबाई क्रांति ने तीसरी दुनिया के देशों के साम्राज्यवाद विरोधी और उपनिवेश-विरोधी मुक्ति आंदोलनों के साथ अपनी अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता में एक रणनीतिक भूमिका निभानी शुरू कर दी थी।  

क्यूबाई क्रांति इस बात से भलीभांति परिचित थी कि उसकी नियति लातिनी अमेरिका, एशिया और अफ्रीका के लोगों की नियति के साथ पूरी तरह से गुंथी हुई है। जैसा कि 1962 में फिदेल ने कहा था: “यदि लातिनी अमेरिका का इतिहास नहीं है तो क्यूबा के इतिहास का क्या अर्थ है? और यदि एशिया, अफ्रीका और ओशिनिया का इतिहास नहीं है तो लातिनी अमेरिका के इतिहास का क्या अर्थ है? और यदि समूचे विश्व भर में साम्राज्यवाद के सबसे निर्मम एवं क्रूर शोषण का इतिहास नहीं है तो इन सभी लोगों के इतिहास का क्या अर्थ रह जाता है?  

1961 में जब क्यूबा गुट निरपेक्ष आंदोलन की सदस्यता ग्रहण की, तब उसकी विदेश नीति अपने रणनीतिक परिभाषा के चरण पर थी। तीसरी दुनिया के लिए क्यूबा की प्रतिबद्धता उसकी अंतर्राष्ट्रीयतावादी रणनीति का प्रमुख स्तंभ बन चुकी थी, वो चाहे गुट-निरपेक्ष आंदोलन के कारण बनी हो या ट्राईकॉन्टिनेंटल कांफ्रेंस, या बाद के ऑर्गेनाइजेशन ऑफ़ सॉलिडेरिटी ऑफ़ द पीपुल ऑफ़ एशिया, अफीका एंड लैटिन अमेरिका (ओएसपीएएएएल) के माध्यम से बनी हो।  आने वाले दशकों में, जनवरी 1966 में हवाना में हुए ओएसपीएएएएल के पहले सम्मेलन के दौरान आपस में मिलने वाले कई राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन, जो कि वे नए देश थे जिन्होंने गुट-निरपेक्ष आंदोलन में शामिल होना शुरू कर दिया था, जो कि तीसरी दुनिया का नया प्रतिमान बन गया था।

गुटनिरपेक्षता के अपने स्वंय के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता

1961 में समाजवादी बेलग्रेड (उस दौरान युगोस्लाविया की राजधानी) में गुट-निरपेक्ष आंदोलन की स्थापना बैठक में, उस समय के क्यूबा के राष्ट्रपति ओसवाल्डो डोर्तिकोस तोराडो ने कहा था कि गुट-निरपेक्ष होने का आशय यह नहीं है कि हम प्रतिबद्ध देश नहीं हैं। हम अपने स्वंय के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध हैं। और हममें से जो शांतिप्रिय लोग हैं, जो अपनी संप्रभुता का दावा करने के लिए संघर्षरत हैं, और राष्ट्रीय विकास की पूर्णता को हासिल करना चाहते हैं, वे अंततः उन उत्कृष्ट आकांक्षाओं पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, और उन सिद्धांतों के साथ विश्वासघात नहीं कर रहे हैं।” एक ऐसे समय जब कई देशों ने सोवियत संघ के साथ क्यूबा के स्पष्ट “जुड़ाव” की आलोचना की थी, और एक समाजवादी परियोजना से जुड़ी राष्ट्रीय मुक्ति की प्रस्थापना पर हमला किया था, उस समय डोर्टीकोस ने एनएएम के उद्घाटन सम्मेलन के दौरान, अपने शुरूआती भाषण में गुटनिरपेक्षता को और अधिक परिभाषित किये जाने की मांग की, जिसमें कहा गया था कि यह क्षण “सामान्य सूत्रीकरणों से कहीं बढ़कर [और वह] ठोस समस्याओं पर विचार किये जाने की मांग करता है।”

गुटनिरपेक्षता की यह सक्रिय परिभाषा क्यूबा की विदेश नीति में इसके तीसरी दुनिया के सबसे प्रगतिशील शक्तियों के साथ अपने संबंधों को लेकर काफी महत्वपूर्ण रही है। ऐसा जान पड़ता है कि 1973 से आरंभ हुए गुटनिरपेक्ष आंदोलन की सोच ने “तटस्थता” के बारे में अपने विचारों का परित्याग कर दिया है। तटस्थता की नीति इसके निर्माण के बाद से आंदोलन में व्याप्त थी, जिसे अब स्थगित कर दिया है, और अपनी गतिविधियों को अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक रिश्तों में अपनी पिछली अवधि की तुलना में एक नई अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की आवश्यकता के बचाव में कहीं अधिक बल के इस्तेमाल के साथ विस्तारित किया है।

यूएसएसआर के पतन के बाद से और संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के लगभग सरगना बन जाने की स्थिति के उदय ने, एनएएम को नई वास्तविकताओं के साथ अनुकूलित होने में संघर्ष करना पड़ा, और इसके चलते यह अस्थिर हो चुका है। हालाँकि हाल के वर्षों में, लातिनी अमेरिका में क्षेत्रवाद के एक बार फिर से उभार के साथ-साथ यूरेशियाई एकीकरण की स्थिति के उद्भव के साथ, गुटनिरपेक्षता और गुट निरपेक्ष आंदोलन के महत्व पर एक बार फिर से धीरे-धीरे विचार किया जा रहा है।

संयुक्त राज्य अमेरिका के द्वारा अपनाई जाने वाली जोर-जबरदस्ती की रणनीति पर दुनियाभर के लोगों का प्रतिरोध रहा है, जो उन देशों को अलग-थलग करने के प्रयास में लगा रहता है जो वाशिंगटन की मर्जी के आगे खुद को प्रस्तुत करने से इंकार कर देते हैं। यह विशेष रूप से जून 2022 में अमेरिकियों के शिखर सम्मेलन, ऑर्गेनाइजेशन ऑफ़ अमेरिकन स्टेट्स के साथ स्पष्ट हो गया है, जिसमें बोलीविया और मेक्सिको जैसे देशों ने लॉस एंजेल्स में होने जा रहे शिखर सम्मेलन का बहिष्कार करने की धमकी दी है, यदि क्यूबा, निकारागुआ और वेनेजुएला को इसमें भाग लेने से प्रतिबंधित किया जा रहा है। इसके विकल्प के तौर पर, पीपुल्स समिट फॉर डेमोक्रेसी को बांडुंग और हवाना की विरासत के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है, जो बहिष्कृतों की आवाज को एक जगह पर लाने का काम करेगा।

मनोलो डी लॉस सैंटोस पीपुल्स फोरम के सह-कार्यकारी निदेशक हैं और ट्राईकॉन्टिनेंटल: इंस्टीट्यूट फॉर सोशल रिसर्च में शोधार्थी हैं। आपने हाल ही में, विविरेमोस: वेनेजुएला वर्सेस हाइब्रिड वॉर (लेफ्टवर्ड बुक्स/1804 बुक्स, 2020) एवं कामरेड ऑफ़ द रेवोल्यूशन: सिलेक्टेड स्पीचेज ऑफ़ फिदेल कास्त्रो (लेफ्टवर्ड बुक्स/1804 बुक्स, 2021) का सह-संपादन किया है। इसके साथ ही आप पीपुल्स समिट फॉर डेमोक्रेसी के सह-आयोजक हैं।  

स्रोत: इस लेख को मॉर्निंग स्टार एवं ग्लोबट्रॉटर के द्वारा तैयार किया गया था।

अंग्रेजी में मूल रूप से लिखे लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें

Cuba’s Non-Alignment: A Foreign Policy of Peace and Socialism

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