NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
डी एन झा: एक ऐसा इतिहासकार, जो धारा के विरुद्ध खड़ा था
उनके लिए इतिहास महज़ एक शैक्षिक विषय नहीं था,बल्कि हमारे अतीत के भगवाकरण के ख़िलाफ़ अभियान का एक साधन था, और अतीत, वर्तमान को समझाने का एक ज़रिया था।
सरबनी चक्रवर्ती
06 Feb 2021
डी एन झा

इतिहासकार द्विजेंद्र नारायण झा (1940-2021) के निधन की दुखद ख़बर ऐसे समय में आयी है, जिस समय राष्ट्र को पहले से कहीं ज़्यादा उनकी ज़रूरत थी। प्राचीन भारत को एक "हिंदू अतीत" के रूप में दर्शाने वाले मिथक की धज्जियां उड़ाने के लिए जाने जाना वाले झा का 81 वर्ष की आयु में 4 फ़रवरी, 2021 को निधन हो गया।

वैज्ञानिक और धर्मनिरपेक्ष इतिहास लेखन के ज़बरदस्त हिमायती और आम लोगों के इतिहासकार, डीएन झा का हमेशा इस बात पर ज़ोर रहा कि वस्तुस्थिति का बताया जाना काफ़ी नहीं होता, बल्कि इतिहासकार को एक रुख़ भी अख़्तियार करना चाहिए। बतौर एक इतिहासकार, संघ परिवार के सांप्रदायिक और बहुसंख्यक दुष्प्रचार से ताज़िंदगी लड़ते रहना उनका काम रहा। मिथकों को तोड़ना और विवाद में फ़ंसना उनके लिए कभी कोई नयी बात नहीं थी, बल्कि इन तमाम आलोचना के बीच भी वह अपने रुख़ पर हमेशा क़ायम रहे।  

उनके लिए इतिहास महज़ एक शैक्षिक विषय नहीं था, बल्कि हमारे अतीत के भगवाकरण के ख़िलाफ़ अभियान का एक साधन था, और अतीत, वर्तमान को समझाने का एक ज़रिया था। अपने करियर की शुरुआत में ही भारतीय उपमहाद्वीप के अतीत को 'स्वर्ण युग' के तौर पर किसी मिथक के तौर पर पेश किये जाने को लेकर झा ने लिखा था, "राष्ट्रवादी इतिहासकारों द्वारा प्राचीन भारत के गौरवगान का मतलब था कि उनके सामने जो कुछ था, उन्हें हिंदू भारत के रूप में गौरवगान करना। इस लिहाज़ से उनका लेखन विवेकानंद, दयानंद और दूसरे पुनरुत्थानवादियों के विचारों से जुड़ा हुआ दिखायी देता है। 1930 और 1940 के दशक में यह जुड़ाव पूरी तरह साफ़-साफ़ नज़र आने लगा था, उन्होंने लिखा था, “राष्ट्रवादी इतिहासलेखन ने हिंदू पुनरुत्थानवाद के सबसे बड़े प्रवक्ता, सावरकर  के विचारों को गति दी।”

वह इतिहासकारों के एक ऐसे समूह का हिस्सा थे, जिसने बाबरी मस्जिद के नीचे राम मंदिर के होने के पक्ष में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दावों और भारतीय जनता पार्टी के अभियान की आलोचना करते हुए देश के लोगों के सामने एक रिपोर्ट पेश की थी। इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के इन समूहों ने भौतिक संस्कृति और शुरुआती ग्रंथों के साक्ष्य के आधार पर अपनी यह रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। उन्होंने कहा था कि स्टेट को इन विशेषज्ञों पर भरोसा करना चाहिए। बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद झा ने टिप्पणी करते हुए कहा था, “यह विवाद, आस्था और चेतना के बीच की लड़ाई है।”

उनकी सबसे मशहूर और महत्वपूर्ण किताब, ‘द मिथ ऑफ द होली काउज़’ उस समय प्रकाशित हुई थी, जब अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार और संघ परिवार के विभिन्न संगठनों के तत्वावधान में एक आक्रामक सांप्रदायिक एजेंडे को आगे बढ़ाया जा रहा था। उस किताब की प्रस्तावना में झा ने लिखा था, “गाय की उपासना को हिंदुओं की सांप्रदायिक पहचान के प्रतीक के रूप में बदल दिया गया है और प्रगतिविरोधी और कट्टरपंथी ताक़तों ने यह मानने से इनकार कर दिया है कि गाय वैदिक और बाद की ब्राह्मणवादी और ग़ैर-ब्राह्मणवादी परंपराओं में हमेशा से पवित्र नहीं थी,या फिर प्राचीन भारत में दूसरे जीवों के मांस के साथ-साथ गोमांस अक्सर घर में बनाये जाने वाले व्यंजनों का एक अहम हिस्सा था।” मनु स्मृति और अन्य धर्मशास्त्रों की एक श्रृंखला से उद्धृत करते हुए झा ने तर्क दिया था कि गोमांस खाने पर कभी कोई मनाही नहीं थी।

इस मशहूर इतिहासकार को दक्षिणपंथी ताक़तों की तरफ़ से बार-बार हमलों का सामना करना पड़ा। वाजपेयी सरकार के एक मंत्री-अरुण शौरी ने आरोप लगाया था कि वह यह कहकर इतिहास को विकृत कर रहे हैं कि नालंदा विश्वविद्यालय के बौद्ध परिसर को ब्राह्मणवादी धर्म के अनुयायियों ने नष्ट कर दिया था। हालांकि, इस तरह के होने वाले हमले और की जाने वाली आलोचनाओं के बीच भी वे अडिग रहे।

अपनी आख़िरी किताब, “अगेंस्ट द ग्रेन: नोट्स ऑन आइडेंटिटी, इनटॉलरेंस एंड हिस्ट्री” में झा ने 'प्राचीन भारत में ब्राह्मणवादी असहिष्णुता', 'गाय की पहेली', और 'देवता जो कुछ पीते थे!' जैसे मुद्दों पर चर्चा की है। इस खंड के ज़्यादातर निबंध हिंदुत्व के उभार के समय ही लिखे गये थे।

इन दिनों, जिस समय हमारा देश मौजूदा दक्षिणपंथी राजनीतिक व्यवस्था के तहत लोकतांत्रिक स्वभाव और धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने पर ज़्यादा से ज़्यादा हो रहे हमले का गवाह बन रहा है,ऐसे समय में डी एन झा जैसे इतिहासकार बहुत याद आयेंगे, लेकिन इतिहास लेखन के उनका सिद्धांत की ही आख़िरकार जीत होगी।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

D N Jha: The Historian Who Stood Against the Grain

D N Jha
The Myth of the Holy Cow
Hindutva Politics
RSS
Ancient Indian History

Related Stories

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?

अलविदा शहीद ए आज़म भगतसिंह! स्वागत डॉ हेडगेवार !

कांग्रेस का संकट लोगों से जुड़ाव का नुक़सान भर नहीं, संगठनात्मक भी है

कार्टून क्लिक: पर उपदेस कुसल बहुतेरे...

पीएम मोदी को नेहरू से इतनी दिक़्क़त क्यों है?

कर्नाटक: स्कूली किताबों में जोड़ा गया हेडगेवार का भाषण, भाजपा पर लगा शिक्षा के भगवाकरण का आरोप

ज्ञानवापी मस्जिद विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने कथित शिवलिंग के क्षेत्र को सुरक्षित रखने को कहा, नई याचिकाओं से गहराया विवाद


बाकी खबरें

  • indian freedom struggle
    आईसीएफ़
    'व्यापक आज़ादी का यह संघर्ष आज से ज़्यादा ज़रूरी कभी नहीं रहा'
    28 Jan 2022
    जानी-मानी इतिहासकार तनिका सरकार अपनी इस साक्षात्कार में उन राष्ट्रवादी नायकों की नियमित रूप से जय-जयकार किये जाने की जश्न को विडंबना बताती हैं, जो "औपनिवेशिक नीतियों की लगातार सार्वजनिक आलोचना" करते…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2.5 लाख नए मामले, 627 मरीज़ों की मौत
    28 Jan 2022
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 6 लाख 22 हज़ार 709 हो गयी है।
  • Tata
    अमिताभ रॉय चौधरी
    एक कंगाल कंपनी की मालिक बनी है टाटा
    28 Jan 2022
    एयर इंडिया की पूर्ण बिक्री, सरकार की उदारीकरण की अपनी विफल नीतियों के कारण ही हुई है।
  • yogi adityanath
    अजय कुमार
    योगी सरकार का रिपोर्ट कार्ड: अर्थव्यवस्था की लुटिया डुबोने के पाँच साल और हिंदुत्व की ब्रांडिंग पर खर्चा करती सरकार
    28 Jan 2022
    आर्थिक मामलों के जानकार संतोष मेहरोत्रा कहते हैं कि साल 2012 से लेकर 2017 के बीच उत्तर प्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर हर साल तकरीबन 6 फ़ीसदी के आसपास थी। लेकिन साल 2017 से लेकर 2021 तक की कंपाउंड आर्थिक…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    रेलवे भर्ती: अध्यापकों पर FIR, समर्थन में उतरे छात्र!
    28 Jan 2022
    आज के एपिसोड में अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं रेलवे परीक्षा में हुई धांधली पर चल रहे आंदोलन की। क्या हैं छात्रों के मुद्दे और क्यों चल रहा है ये आंदोलन, आइये जानते हैं अभिसार से
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License