NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
देखिये योगी सरकार को गाय से कितनी मोहब्बत है
इस वर्ष गाय और दूध उत्पादन के कल्याण के लिए 233 करोड़ रुपये की अनुमति देने वाली राज्य, गाय योगी के विकास और शासन के मॉडल के केंद्र में हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
23 Feb 2018
Yogi Adityanath

योगी आदित्यनाथ सरकार उत्तर प्रदेश (यूपी) पर गाय को थोप रही है। जब उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी, तब से लगता है उनके नीतिगत निर्णयों में, गाय विकास और शासन के मॉडल के केंद्र में है। गाय के मूत से तैयार स्वास्थ्य पेय से लेकर भीड़ से भरी जेलों में गौशालाओं का खोलना, भाजपा सरकार अपने गाय के मिशन पर पूरी तरह से अग्रसर।

पिछले हफ्ते राज्य के प्रस्तुत बजट में, राज्य ने गाय और डेयरी विकास के कल्याण के लिए 233 करोड़ रुपए का आवंटन किया, जिसमें पंडित दीनदयाल उपाध्याय मिनी डेयरी योजना के लिए 75 करोड़ रूपये और राज्य में हर एक ब्लॉक में पशु स्वास्थ्य मेला (पशु स्वास्थ्य मेलों) के लिए 15 करोड़ रूपये शामिल हैं।

सरकार ने मवेशी स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रम के लिए 100 करोड़ रुपये और पशु स्वास्थ्य और रोग सुधार सुनिश्चित करने के लिए 700 करोड़ रुपये के मोबाइल मवेशी अस्पतालों के लिए 27 करोड़ रुपये की भी घोषणा की है।

गायों के कल्याण की दिशा में एक समग्र और सूक्ष्म दृष्टिकोण लेते हुए, योगी सरकार ने 15 करोड़ रुपए के डेयरी विकास कोश की घोषणा की।

गाय प्रजनन को लोकप्रिय बनाने और इनाम देने के लिए, "नंदबाबा (बैल) पुरस्कार योजना" शुरू की गई, जो कि भारतीय नस्ल के गायों से अधिकतम दूध का उत्पादन करने वाले किसानों को 52 लाख रूपए का इनाम प्रदान करेगी।

सरकार ने गोशाल चलाने वाले लोगों के लिए 54 लाख रुपये के "गोकुल पुरस्कार" पुरस्कार भी घोषित किये।

गाय न केवल पशु कल्याण के योगी सरकार के विचार पर हावी हैं, बल्कि यह मनुष्यों के बड़े स्वास्थ्य लाभ के लिए भी सरकार की योजनाओं के केन्द्र में बनी हुई है।

शायद यही कारण है गौ सेवा आयोग द्वारा यूपी की जेलों में गौ सेवा शेड बनाने की सिफारिशों का मकसद कैदियों को स्वयं को सुधारने मदद करेगा।

राज्य की 12 जेलों में गौ शाला स्थापित करने में 2 करोड़ रूपए के प्रारंभिक आवंटन के अलावा 233 करोड़ रूपए का बजट आवंटन खर्च किये जाने की उम्मीद है। योगी सरकार के तहत पूर्व आईएएस अधिकारी राजीव गुप्ता की अध्यक्षता में आयोग को नया महत्व मिला है। गौशाळा लखनऊ, बाराबंकी, सुल्तानपुर, सीतापुर, बरेली, उन्नाव, आगरा, नैनी (इलाहाबाद), वाराणसी और फतेहगढ़, बरेली और कानपुर देहट की केंद्रीय जेलों की जेलों में स्थापित की जाएगी।

जबकि जेल राज्य मंत्री जय कुमार सिंह ने आश्वासन दिया है कि जेलों में गायों की देखभाल करने के लिए पर्याप्त जगह है और पर्याप्त लोग हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि उत्तर प्रदेश की जेलों में बहुत अधिक भीड़ हैं और बहुत कम स्टाफ हैं।

इंडिया स्पेंड के अनुसार, जोकि डेटा-आधारित गैर-लाभकारी पत्रकारिता वेबसाइट है, भारत की सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों की जेलों की क्षमता से 69 प्रतिशत से ज्यादा भीड़ है- राष्ट्रीय औसत के 14 प्रतिशत की तुलना में है और उनके पास जरूरत के स्टाफ का केवल दो-तिहाई कर्मचारी ही मौजूद है, 2015 के जेल के आंकड़े के अनुसार, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के साथ नवीनतम उपलब्ध हैं। उत्तर प्रदेश में जेल कर्मचारियों की संख्या में 33 प्रतिशत की कमी भी है।

क्या है, राज्य सरकार ने सात जिलों और 16 शहरी स्थानों में 1000-क्षमता वाली गौशालाओं की स्थापना के एक बड़ा प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है।

बजट में घोषित ग्रामीण इलाकों में स्थापित 100 आयुर्वेदिक अस्पतालों में गोमूत्र से बनाई जाने वाली दवाओं को बढ़ावा देने की उम्मीद है।

राज्य आयुर्वेद विभाग ने गाय के मूत्र से बनाई गई आठ दवाएं तैयार की हैं और सरकार उन्हें यकृत और प्रतिरक्षा की कमी से संबंधित समस्याओं के लिए उन्हें लाभप्रद बनाने के लिए तैयार है।

उत्तर प्रदेश आयुर्वेद विभाग के निदेशक आर.आर. चौधरी के मुताबिक, पीलीभीत और लखनऊ में आधिकारिक फार्मेसी में गोमूत्र, गाय घी और गाय के दूध का उपयोग करके आठ दवाएं तैयार की गई हैं। ये दवाइयां लोगों को जिगर, जोड़ों में दर्द और प्रतिरक्षा की कमी से संबंधित चिकित्सा समस्याओं से निपटने में सहायता करती हैं।

पीलीभीत में आयुर्वेदिक फार्मेसी ने गौ मूत्र की पैक वाली बोतलों को एकत्रित करने, प्रक्रिया और बेचने का प्रस्ताव भी तैयार किया है। फार्मेसी ने दावा किया है कि गोमूत्र से दवाइयां तैयार की हैं, और अब "स्वास्थ्य को फायदा पहंचाने वाले वाले पेय" के रूप में गोमूत्र को बढ़ावा देने की योजना है।

यदि पीलीभीत में सरकारी आयुर्वेद कॉलेज और अस्पताल के प्रिंसिपल और अधीक्षक डॉ. प्रकाश चंद्र सक्सेना के विचार को आगे बढाए तो वह अव्क्त दूर नहीं है जब "स्वस्थ पेय" के रूप में गाय का मूत्र पैकेज के रूप में हर जगह उपलब्ध होगा।

"गाय मूत्र औषधीय प्रयोजनों के लिए न केवल उपयोगी है बल्कि इसके 10 मिलीलीटर से 20 मिलीलीटर पीने से रोज़ाना मौसमी बीमारियों, जैसे बुखार, खाँसी और पेट से जुड़ी बीमारियों से बचाव करता है। इसलिए, हम गोमूत्र को स्वास्थ्य देने वाले पेय के रूप में बढ़ावा देने की एक योजना के साथ आए हैं, जिसे हम लखनऊ में आयुर्वेद विभाग को अनुमोदन के लिए भेज देंगे। गोमूत्र की दैनिक खपत ने मानव प्रतिरक्षा को मजबूत किया, "डॉ सक्सेना ने कहा।

जुलाई 2017 में नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद गाय और गोमूत्र पर ध्यान केंद्रित करने के लिए और उसे प्राथमिकता देने के लिए एक 19 सदसीय पेनल का गठन किया गया, जिसमें आर.एस.एस. और वीएचपी से तीन सदस्य हैं, मूत्र सहित गाय डेरिवेटिव्स पर वैज्ञानिक रूप से मान्य अनुसंधान करने के लिए, और उनके लाभ "के माध्यम से (वैज्ञानिक मान्यकरण और अनुसंधान पर पंचगव्य) कार्यक्रम के लिए।

यूनियन साइंस एंड टेक्नोलॉजी मिनिस्टर, हर्षवर्धन की अगुवाई वाले पैनल की जिम्मेदारी है कि वह उन परियोजनाओं के बारे में योजना तैयार करे जो "विभिन्न वैज्ञानिक क्षेत्रों में गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी के पंखगव्य के लाभों को वैज्ञानिक तरीके से मान्य कर सकते हैं" पोषण, स्वास्थ्य और कृषि के रूप में, "विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक परिपत्र का कहना है।

Yogi Adityanath
Uttar pradesh
Gau Sewa Ayog
BJP Govt
RSS

Related Stories

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही मस्जिद ईदगाह प्रकरण में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

जौनपुर: कालेज प्रबंधक पर प्रोफ़ेसर को जूते से पीटने का आरोप, लीपापोती में जुटी पुलिस

कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी: अयोध्या में चरमराई क़ानून व्यवस्था, कहीं मासूम से बलात्कार तो कहीं युवक की पीट-पीट कर हत्या
    19 Mar 2022
    कुछ दिनों में यूपी की सत्ता पर बीजेपी की योगी सरकार दूसरी बार काबिज़ होगी। ऐसे में बीते कार्यकाल में 'बेहतर कानून व्यवस्था' के नाम पर सबसे ज्यादा नाकामी का आरोप झेल चुकी बीजेपी के लिए इसे लेकर एक बार…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ट्रेड यूनियनों की 28-29 मार्च को देशव्यापी हड़ताल, पंजाब, यूपी, बिहार-झारखंड में प्रचार-प्रसार 
    19 Mar 2022
    दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को सफल बनाने के लिए सभी ट्रेड यूनियन जुट गए हैं। देश भर में इन संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठकों का सिलसिला जारी है।
  • रवि कौशल
    पंजाब: शपथ के बाद की वे चुनौतियाँ जिनसे लड़ना नए मुख्यमंत्री के लिए मुश्किल भी और ज़रूरी भी
    19 Mar 2022
    आप के नए मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने बढ़ते क़र्ज़ से लेकर राजस्व-रिसाव को रोकने, रेत खनन माफ़िया पर लगाम कसने और मादक पदार्थो के ख़तरे से निबटने जैसी कई विकट चुनौतियां हैं।
  • संदीपन तालुकदार
    अल्ज़ाइमर बीमारी : कॉग्निटिव डिक्लाइन लाइफ़ एक्सपेक्टेंसी का प्रमुख संकेतक है
    19 Mar 2022
    आम तौर पर अल्ज़ाइमर बीमारी के मरीज़ों की लाइफ़ एक्सपेक्टेंसी 3-12 सालों तक रहती है।
  • पीपल्स डिस्पैच
    स्लोवेनिया : स्वास्थ्य कर्मचारी वेतन वृद्धि और समान अधिकारों के लिए कर रहे संघर्ष
    19 Mar 2022
    16 फ़रवरी को स्लोवेनिया के क़रीब 50,000 स्वास्थ्य कर्मचारी काम करने की ख़राब स्थिति, कम वेतन, पुराने नियम और समझौते के उल्लंघन के ख़िलाफ़ हड़ताल पर चले गए थे।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License