NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
देश गंभीर वित्तीय संकट के मुहाने पर!
आर्थिक मामलों के विभाग (DEA) ने कंपनी मामलों के मंत्रालय को पत्र लिखकर मौजूदा आर्थिक परिदृश्य पर गंभीर चिंता जताई है।
गिरीश मालवीय
03 Nov 2018
सांकेतिक तस्वीर

देश एक बेहद गंभीर वित्तीय संकट के मुहाने पर खड़ा है और यह बात अब मोदी सरकार को भी स्वीकार करनी पड़ रही है। कल आर्थिक मामलों के विभाग (DEA) ने कंपनी मामलों के मंत्रालय को पत्र लिखकर मौजूदा आर्थिक परिदृश्य पर गंभीर चिंता जताई है। DEA का कहना है कि यदि आने वाले 6 सप्‍ताह में बाजार में (डेट मार्केट) पर्याप्‍त पैसों की आपूर्ति नहीं की गई तो कई नॉन-बैंकिंग फाइनेंस और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के सामने डिफॉल्‍ट होने का खतरा पैदा हो जाएगा।

जो सबसे गंभीर बात DEA बता रहा है वह यह है कि NBFC और HFC को दिसंबर, 2018 के अं‍त तक तकरीबन 2 लाख करोड़ रुपये का लोन चुकता करना है ओर यदि फंड जुटाने की रफ्तार अक्‍टूबर के पहले हाफ की तरह ही रही तो साल के अंत तक 1 लाख करोड़ रुपये का गैप आ जाएगा।

अब ऐसी स्थिति में जब बढ़ते NPA से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक लगातार घाटा दर्शा रहे हैं और आरबीआई ने लोन देने और उसकी वसूली में कोताही बरतने वाले सरकारी क्षेत्र के कई बैंकों को पीसीए (प्रॉम्‍प्‍ट करेक्टिव मेजर) की श्रेणी में डाल दिया है तो ऐसे में इन बैंकों के लिए इस सेक्टर को कर्ज देना आसान नहीं रह गया है, लिहाजा बाजार में लिक्विडिटी क्रंच की स्थिति उत्‍पन्‍न हो गई है

सरकार इस स्थिति से निबटने के लिए रिजर्व बैंक के रिजर्व फंड को हड़पना चाहती है। आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ पत्रकार एमके वेणु का कहना है कि आरबीआई के पास लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये का कांटिजेंसी फंड है। सरकार इस फंड का इस्तेमाल वित्तीय घाटा कम करने में करना चाहती है

रवीश कुमार ने कल मिहिर शर्मा के हवाले से लिखा है कि रिजर्व बैंक अपने मुनाफे से हर साल सरकार को 50 से 60 हज़ार करोड़ रुपये देती है। उसके पास साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक का रिज़र्व है अब मोदी सरकार उस फंड को हड़प कर जैसे तैसे मई 2019 के चुनाव तक पहुंचना चाहती है।

सरकार ने इस सम्बंध में रिजर्व बैंक को तीन पत्र लिखे हैं। पहले पत्र में रिजर्व बैंक को निर्देश दिया कि वह बिजली कंपनियों के कर्ज में छूट दे। फिर दूसरे पत्र में उसने आरबीआई को राजस्व की कमी को पूरा करने का निर्देश दिया। तीसरे पत्र में छोटे और मझोले उद्यमों को कर्ज देने की शर्त में छूट देने को कहा है और यह सारे पत्र धारा 7 का हवाला देते हुए लिखे गए हैं। धारा 7 के इस्तेमाल से रिजर्व बैंक बहुत नाराज हैं क्योंकि स्वतंत्र भारत के इतिहास में आज तक इस धारा का हवाला नहीं दिया गया है।

रिजर्व बैंक और केन्द्र सरकार के बीच धारा 7 के इस्तेमाल से स्वायत्तता को लेकर एक नयी बहस शुरू हो गई है।
इस विवाद में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) भी कूद पड़ा है। आईएमएफ ने कहा है कि वह भारत में जारी विवाद पर नजर बनाए हुए है। आईएमएफ ने कहा कि उसने दुनियाभर में ऐसी सभी कोशिशों का विरोध किया है जहां केन्द्रीय बैंकों की स्वतंत्रता को सीमित करने की कोशिश की गई है।

आईएमएफ के कम्युनिकेशन डायरेक्टर गेरी राइस कह रही हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर केन्द्रीय बैंकों के काम में किसी तरह का दखल न देना सबसे आदर्श स्थिति है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो यह एक अभूतपूर्व स्थिति है, जिससे अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत की किरकिरी हो रही है। अगर सरकार ने धारा 7 का जबर्दस्ती उपयोग किया तो रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल इस्तीफा दे देंगे, अगर ऐसा हुआ तो यह और गलत होगा, क्योंकि आज तक दुनिया में कहीं ऐसा नहीं हुआ कि सर्वोच्च बैंक के मुखिया को कार्यकाल समाप्त होने से पहले ऐसी स्थिति में अपना पद छोड़ना पड़ा हो।

 

(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं। यह लेख उनके फेसबुक पेज से साभार लिया गया है।)

digital economy
dea
rbi and government tussle
rbi cash reserve
Finance Ministry
urjit patel
Arun Jatley

Related Stories

एलआईसी की आईपीओ: बड़े पैमाने का घोटाला

RBI, वित्तीय नीतियों ने अनियंत्रित मुद्रास्फीति से असमानता को बढ़ाया

केंद्रीय बजट 2022-23 में पूंजीगत खर्च बढ़ाने के पीछे का सच

महामारी से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच 2022-23 का बजट फीका और दिशाहीन

बजट 2022: शिक्षा, रेल, रक्षा क्षेत्र के लिए क्या है ख़ास, किसे क्या मिला

सरकार ने CEL को बेचने की कोशिशों पर लगाया ब्रेक, लेकिन कर्मचारियों का संघर्ष जारी

अक्टूबर में आये जीएसटी में उछाल को अर्थव्यवस्था में सुधार के तौर पर देखना अभी जल्दबाज़ी होगी

जीएसटी परिषद उपाध्यक्ष की नियुक्ति न करने के पीछे की राजनीति

अडानी की हवाईअड्डों के निजीकरण की योजना कहीं खटाई में तो नहीं

आरटीआई में ख़ुलासा : पिछले 2 साल में छापे गये क़रीब 19,000 करोड़ रुपये के चुनावी  बॉन्ड


बाकी खबरें

  • Jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : ‘भाषाई अतिक्रमण’ के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब, मगही-भोजपुरी-अंगिका को स्थानीय भाषा का दर्जा देने का किया विरोध
    02 Feb 2022
    पिछले दिनों झारखंड सरकार के कर्मचारी चयन आयोग द्वारा प्रदेश के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों की नियुक्तियों के लिए भोजपुरी, मगही व अंगिका भाषा को धनबाद और बोकारो जिला की स्थानीय भाषा का दर्जा…
  • ukraine
    पीपल्स डिस्पैच
    युद्धोन्माद फैलाना बंद करो कि यूक्रेन बारूद के ढेर पर बैठा है
    02 Feb 2022
    मॉर्निंग स्टार के संपादक बेन चाकों लिखते हैं सैन्य अस्थिरता बेहद जोखिम भरी होती है। डोंबास में नव-नाजियों, भाड़े के लड़ाकों और बंदूक का मनोरंजन पसंद करने वाले युद्ध पर्यटकों का जमावड़ा लगा हुआ है।…
  • left candidates
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड चुनाव: मज़बूत विपक्ष के उद्देश्य से चुनावी रण में डटे हैं वामदल
    02 Feb 2022
    “…वामदलों ने ये चुनौती ली है कि लूट-खसोट और उन्माद की राजनीति के खिलाफ एक ध्रुव बनना चाहिए। ये ध्रुव भले ही छोटा ही क्यों न हो, लेकिन इस राजनीतिक शून्यता को खत्म करना चाहिए। इस लिहाज से वामदलों का…
  • health budget
    विकास भदौरिया
    महामारी से नहीं ली सीख, दावों के विपरीत स्वास्थ्य बजट में कटौती नज़र आ रही है
    02 Feb 2022
    कल से पूरे देश में लोकसभा में पेश हुए 2022-2023 बजट की चर्चा हो रही है। एक ओर बेरोज़गारी और गरीबी से त्रस्त देश की आम जनता की सारी उम्मीदें धराशायी हो गईं हैं, तो
  • 5 election state
    रवि शंकर दुबे
    बजट 2022: क्या मिला चुनावी राज्यों को, क्यों खुश नहीं हैं आम जन
    02 Feb 2022
    पूरा देश भारत सरकार के आम बजट पर ध्यान लगाए बैठा था, खास कर चुनावी राज्यों के लोग। लेकिन सरकार का ये बजट कल्पना मात्र से ज्यादा नहीं दिखता।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License