NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
देश के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की गुणवत्ता अपने निचले पायदान पर
कक्षा 5 के आधे बच्चे ऐसे हैं जो कक्षा-2 के स्तर का पाठ नहीं पढ़ सकते हैं| कक्षा 8 के आधे से अधिक करीब 56 प्रतिशत आसान सा भाग का सवाल हल नहीं कर सकते हैं| आयुवर्ग 15-16 में 13.5 प्रतिशत लडकियां स्कूल में नहीं जा रही हैं|
पीयूष शर्मा
17 Jan 2019
aser report

भारत के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की स्थिति पर सर्वे करने वाली गैर-सरकारी संस्था ‘प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन’ ने अपनी सालाना रिपोर्ट ‘असर’ (ASER) यानी एनुअल स्टेटस ऑफ़ एजुकेशन रिपोर्ट 2018 जारी की है, जिसमें चौकाने वाले आंकड़े सामने आये हैं | कक्षा 5 के तकरीबन 50 फीसदी  बच्चे कक्षा 2  के पाठ को नहीं पढ़ सकते हैं और कक्षा पांच के 72 फीसदी  बच्चे भाग का सवाल हल नहीं कर सकते हैं| एक बुनयादी जरूरत के रूप में शिक्षा का सवाल हमेशा गुणवत्ता से जुड़ता है, रिपोर्ट बताती है कि गुणवत्ता के लिहाज से स्थिति बहुत खराब है|

“असर” बच्चों की नामांकन स्थिति और बुनियादी पढने और गणित करने की क्षमता का घरों में किया जाने वाला सर्वेक्षण है| 2018 में “असर” 596 जिलों, 17,730 गाँवो में साढ़े तीन लाख से अधिक घरों के करीब 5 लाख 46 हजार बच्चों तथा करीब 16000 स्कूलों को सर्वे में शामिल किया गया हैं|

बच्चों में पढ़ने व गणित का स्तर:

कक्षा 5 के आधे बच्चे ऐसे हैं जो कक्षा-2 के स्तर का पाठ नहीं पढ़ सकते हैं, यह आंकड़ा 2016 में 47.9 प्रतिशत था जो 2018 में बढ़कर 50.3 प्रतिशत पर आ गया है| तथा देश में भाग के सवाल हल कर पाने में सक्षम कक्षा 5 के बच्चो में मामूली बढ़ोतरी हुई है| 2016 में ऐसे बच्चों का हिस्सा जहाँ 26 प्रतिशत था, वहीं 2018 में यह 27.8 प्रतिशत हो गया है यानी  72 प्रतिशत ऐसे बच्चे हैं जो आसान सा भाग का सवाल  नहीं कर सकते हैं|

कक्षा 8 अनिवार्य प्राथमिक स्कूली शिक्षा में अंतिम पडाव है| इस स्तर पर बच्चे से अपेक्षा की जाती है कि पिछली कक्षाओं के स्तर का पाठ्यक्रम व अपनी कक्षा के स्तर की सामान्य जानकारी हासिल करे, परन्तु असर 2018 के आंकड़े बताते हैं कि कक्षा 8 में नामांकित देश के लगभग 27 प्रतिशत ऐसे बच्चे हैं जो कक्षा 2 के स्तर का पाठ भी नहीं पढ़ सकते हैं| यह आंकड़ा 2016 से जस का तस है| गणित के स्तर में पिछले तमाम वर्षों के दौरान कुछ ख़ास बदलाव नहीं हुआ है| इस वर्ष कक्षा 8 के सभी बच्चों में से केवल 44 प्रतिशत ही 3 अंको में एक अंक के भाग के सवालों को सही-सही हल कर पाने में सक्षम है यानी आधे से अधिक करीब 56 प्रतिशत भाग का सवाल हल नहीं कर सकते हैं|

इसके आलावा दैनिक जीवन से जुड़े सवालों पर प्रदर्शन के मामले में 14-16 आयुवर्ग में बच्चों का प्रदर्शन खराब रहा है| जैसे की सर्वे में एक सवाल पूछा गया कि, बाजार में किताबों की 2 दुकानें है जहाँ यह 5 किताबें मिलती हैं, यदि आपको यह पाँचों किताबे खरीदनी हैं, तो आपको कम-से-कम कितने रूपये देने होंगे|  इस सवाल का सही जवाब  केवल 37 प्रतिशत बच्चे ही दे पाए| इसी तरह करीब 70 प्रतिशत बच्चे खरीद-बिक्री में  छूट की गणना से जुड़े सवाल नहीं कर सकते है| ऐसे सवालों में लड़कियों की स्थिति और बदतर थी|

शिक्षा पाना असल में बच्चों के स्कूल में दाखिला लेने भर का मामला नहीं है, इसमें कोई शक नही है की स्कूलों में प्रवेश से वंचित बच्चों की संख्या में भारी कमी आयी है परन्तु आंकड़े बताते है कि आयुवर्ग 15-16 में ड्रॉपआउट ज्यादा है और यह संख्या लड़कियों में और ज्यादा है| इस और ध्यान दिए जाने की जरूरत है ताकि इस आयुवर्ग के बच्चे स्कूल में रहें और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करें| यदि इनको सही शिक्षा नहीं मिलेगी तो समस्या बड़ी होती जाएगी, इसके पीछे दो कारण हैं, पहला 14-18 आयुवर्ग के बच्चे कामगारों की श्रेणी में आने को तैयार हैं, जिसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है और दूसरा यह प्रतिस्पर्धा के दौर में सही रोजगार प्राप्त नहीं कर पाएंगे|  

शिक्षा की गुणवत्ता काफी हद तक पढ़ाई के जरूरी संसाधनों जैसे कि किताबे, लाइब्रेरी, कंप्यूटर, पर्याप्त संख्या में योग्य शिक्षक, शौचालय, पेयजल आदि की उपलब्धता पर निर्भर करती है|

रिपोर्ट में नामांकन और स्कूल न जाने वाले बच्चो के बारें में बताया गया है कि 6-14 आयुवर्ग में विद्यालय नहीं जा रहे बच्चों का प्रतिशत 2.8 है परन्तु आयुवर्ग 7-16 में यह 4.4 प्रतिशत है| असर रिपोर्ट के आंकड़े लड़कियों के विद्यालय  में नामांकन की एक अलग ही तस्वीर पेश करते है, राष्ट्रीय स्तर पर आयुवर्ग 11-14 में 4 प्रतिशत से अधिक लड़कियां  विद्यालय नही जा रही हैं और आयुवर्ग 15-16 में 13.5 प्रतिशत लड़कियां स्कूल नहीं जा रही है या वह इस आयु में स्कूल जाना छोड़ दे रही हैं| इसी आयुवर्ग में बीजेपी शासित रहे राज्यों के आंकड़े “बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ” के हवाई दावों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं, छत्तीसगढ़ में 21.2 प्रतिशत, गुजरात में 24.9 प्रतिशत, मध्यप्रदेश में 26.8 प्रतिशत, राजस्थान 20.1 प्रतिशत तथा उत्तर प्रदेश में 22.2 प्रतिशत लड़कियां विधालय में नामांकित नहीं हैं| इन राज्यों में यह आंकड़े राष्ट्रीय स्तर से कहीं ज्यादा है|

निजी स्कूलों में नामांकन लगातार बढ़ता हुआ जा रहा है, इस वर्ष निजी स्कूलों में कुल नामांकन 30.9 प्रतिशत है, और देश में 11 ऐसे राज्य हैं जिनमें निजी स्कूलों में नामांकन 40 प्रतिशत से अधिक है| इसके साथ ही लड़कियों की तुलना में लड़के निजी स्कूलों में ज्यादा जा रहे हैं|

शिक्षा का अधिकार अधिनियम  (RTE एक्ट) 2010 में लागू हुआ था जिसको 2018 में 8 वर्ष पूरे हो गये हैं परन्तु इस कानून के तहत मिलने वाली सुविधाओं की उपलब्धता अभी भी काफी कम है| सितम्बर 2014 में शुरू किये गये “स्वच्छ भारत स्वच्छ विद्यालय(SBSV) यह बताता है कि बच्चों के लिए सुरक्षित पेयजल और हाथ धोने के लिए जरूरी पानी हो और इसके साथ ही, स्कूल की सफाई और भोजन तैयार करने और खाना पकाने के लिए भी पानी हो| परन्तु रिपोर्ट में 596 जिलों के करीब 16000 स्कूलों के आंकड़े बताते है कि 75 प्रतिशत स्कूलों में ही पेयजल सुविधा प्रयोग करने योग्य है, और 11 प्रतिशत ऐसे स्कूल है जिनमें पानी के लिए नल या अन्य व्यवस्था है परन्तु पानी उपलब्ध नहीं है इसके साथ ही करीब 14 प्रतिशत स्कूलों में पानी के लिए व्यवस्था ही नहीं है|

ग्रामीण स्कूलों में लड़कियों के लिए बने शौचालयों में से केवल 66 प्रतिशत ही प्रयोग करने योग्य है जबकि करीब 11 प्रतिशत स्कूलों में तो लड़कियों के लिए शौचालय ही नहीं हैं| 10 प्रतिशत ऐसे स्कूल है जिनमें लड़कियों का शौचालय ताला लगाकर बंद रखा गया है| शौचालय का स्कूल में न होना लड़कियों के स्कूल में नहीं आने का एक बड़ा कारण है, यह बहुत जरूरी है कि सभी स्कूलों में प्रयोग करने योग्य शौचालय हों|

देश में शिक्षा के गुणवत्ता स्तर की स्थिति बहुत ही चिंताजनक है इसके बारे सरकार को गंभीरता से सोचने की जरूरत है | केवल कानून बनाने मात्र से स्थितियों में सुधार नहीं हो सकता है| स्कूलों में बच्चो की संख्या बढ़ने के बावजूद शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ है, छात्र अपने स्तर के मुताबिक योग्यता हासिल करने के मामले में काफी पीछे हैं| प्रत्येक साल असर रिपोर्ट एक निराशाजनक तस्वीर पेश करती है| सर्वे में शामिल आयुवर्ग के छात्र-छात्राएं आर्थिक मुख्यधारा में शामिल होने से कुछ ही दूरी पर खड़े है, ऐसे में उनमे शैक्षिक गुणवत्ता की कमी देश में कुशल मानव संसाधनों के अभाव में बदल रही है और इसकी वजह से अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँच रहा है|

ASER Report
education
Education Rights
Free Education
privatization of education
Government schools
school children
school teachers
schools
Shiksha Bachao Andolan
RTE

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

कर्नाटक पाठ्यपुस्तक संशोधन और कुवेम्पु के अपमान के विरोध में लेखकों का इस्तीफ़ा

जौनपुर: कालेज प्रबंधक पर प्रोफ़ेसर को जूते से पीटने का आरोप, लीपापोती में जुटी पुलिस

बच्चे नहीं, शिक्षकों का मूल्यांकन करें तो पता चलेगा शिक्षा का स्तर

विशेष: क्यों प्रासंगिक हैं आज राजा राममोहन रॉय

'KG से लेकर PG तक फ़्री पढ़ाई' : विद्यार्थियों और शिक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं की सभा में उठी मांग

अलविदा शहीद ए आज़म भगतसिंह! स्वागत डॉ हेडगेवार !

लोगों की बदहाली को दबाने का हथियार मंदिर-मस्जिद मुद्दा

कर्नाटक: स्कूली किताबों में जोड़ा गया हेडगेवार का भाषण, भाजपा पर लगा शिक्षा के भगवाकरण का आरोप

शिक्षा को बचाने की लड़ाई हमारी युवापीढ़ी और लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई का ज़रूरी मोर्चा


बाकी खबरें

  • सोनिया यादव
    भारत के लगभग आधे शहर वायु प्रदूषण की चपेट में, दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित कैपिटल सिटी: रिपोर्ट
    23 Mar 2022
    देश के 48 फीसदी शहरों में डब्लूएचओ द्वारा तय मानकों से 10 गुना ज्यादा वायु प्रदूषण का स्तर पाया गया। वहीं दुनिया के 100 सबसे प्रदूषित स्थानों की सूची में 63 भारतीय शहर शामिल रहे।
  • journalist
    कुमुदिनी पति
    रूस और यूक्रेन: हर मोर्चे पर डटीं महिलाएं युद्ध के विरोध में
    23 Mar 2022
    युद्ध हर देश के लिए बुरा है। इस लेख में हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि इस युद्ध की वजह से यूक्रेन और रूस की महिलाओं को क्या कुछ झेलना पड़ रहा है और युद्ध लम्बा खिंचा तो उनपर और उनके बच्चों पर क्या…
  • china
    कैथरीन शायर
    सऊदी अरब और चीन: अब सबसे अच्छे नए दोस्त?
    23 Mar 2022
    मध्य पूर्व का यह देश चीन की तरफ झुक रहा है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ उसके लंबे समय से चले रहे मजबूत संबंधों को खत्म करने की एक धमकी है। अब देखना है कि दोनों के बीच यह अनबन कितनी गंभीर है?
  • agriculture
    श्रुति एमडी
    तमिलनाडु राज्य और कृषि का बजट ‘संतोषजनक नहीं’ है
    23 Mar 2022
    राज्य एवं कृषि दोनों ही बजट में कई चुनावी वादे अछूते ही बने रहे। इसके अलावा, मुद्रास्फीति और महंगाई को देखते हुए वित्तीय आवंटन कम था।
  • Fire
    भाषा
    हैदराबाद: कबाड़ गोदाम में आग लगने से बिहार के 11 प्रवासी मज़दूरों की दर्दनाक मौत
    23 Mar 2022
    दमकल और पुलिस अधिकारियों ने बताया कि श्रमिक खुद को नहीं बचा सके क्योंकि वहां केवल एक ही सीढ़ी थी। हालांकि एक व्यक्ति कमरे से कूदकर बचने में सफल रहा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License