NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
देश में गेहूं-चावल का विशाल भंडार, क्या ग़रीब को निवाला मिलेगा?
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरण/ख़रीद में ठहराव है, जबकि करोड़ों लोग हैं जिन्हें भोजन की आवश्यकता है।
सुबोध वर्मा
05 Sep 2019
Translated by महेश कुमार
rice wheat stock

खाद्य एवम सार्वजनिक वितरण विभाग के मासिक बुलेटिन के अनुसार, गेहूं, चावल और मोटे अनाजों  के भंडारण में पिछले साल के मुक़ाबले काफ़ी बढ़ोतरी हुई जो इस साल जुलाई में 742 लाख टन रहा और अगस्त में इससे कुछ ही कम क़रीब 713 लाख टन था।

2015 की तुलना में, अनाज के स्टॉक में आश्चर्यजनक रूप से 36 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है [नीचे चार्ट देखें]। जुलाई और अगस्त ऐसे महीने हैं जब खाद्यान्न स्टॉक हर साल उच्चतम स्तर पर होता है क्योंकि रबी की फसल के बाद ख़रीदे गए गेहूं का भंडारण भी इसी समय होता है, जो मौजूदा चावल के स्टॉक में जमा हो अनाज की बढ़ोतरी को दर्शाता है।

स्टॉक का यह ऊँचा भंडारण, उत्पादन और भंडारण के लिए ख़रीद की वृद्धि से प्रेरित है, यह उस भयंकर विडंबना को धोखा देना ही हैं क्योंकि अनाज की इतनी पैदावार के बावजूद देश भोजन के अभाव में बड़े पैमाने पर पीड़ित है, हज़ारों लाखों लोग इस सीमित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के दायरे से बाहर हैं और उनके भीतर पोषण का स्तर ख़तरनाक रूप से कम है। इसका मौजूदा आर्थिक मंदी से भी संबंध है - खाद्यान्नों के ये बड़े और सुसज्जित भंडार लोगों की अपनी ज़रूरत के राशन की ख़रीद के लिए गिरती हुई क्षमता को भी दर्शाते हैं।

graph 1.PNG

2018 ग्लोबल हंगर इंडेक्स में दुनिया के 119 देशों में भारत 103वें स्थान पर है, जिसमें देश में भूख की स्थिति को "गंभीर" बताया गया है। 'द स्टेट ऑफ़ फ़ूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रीशन इन द वर्ल्ड, 2019' में एफ़एओ के अनुमान के मुताबिक़ 194.4 मिलियन लोग यानी भारत की 14.5 प्रतिशत आबादी कुपोषण का शिकार है,  5 साल से कम उम्र के 20.8 प्रतिशत बच्चे कम वज़न के हैं, 5 साल से कम उम्र के 37.9 प्रतिशत बच्चे अविक्सित हैं। और प्रजनन उम्र (15-49 वर्ष) की 51.4 प्रतिशत महिलाएं एनीमिक हैं या उनमें ख़ून की कमी है जो अपने आप में एक चौंका देने वाली स्थिति है।

खाद्यान्नों के उच्च उत्पादन और सरकारी एजेंसियों द्वारा बढ़ती ख़रीद से किसी के लिए भी यह उम्मीद लगाना जायज़ होगा कि सरकारी गोदामों में जमा होने वाले खाद्यान्नों के विशाल भंडार को ज़रूरतमंदों के बीच तेज़ी से वितरित किया जाएगा। चुंकि पहले से ही उचित दर की दुकानों का एक नेटवर्क मौजूद है जिसके माध्यम से अनाज को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत वितरित किया जाता है। इस अतिरिक्त अनाज को बाँटने के लिए इस नेटवर्क का आसानी से उपयोग किया जा सकता है।

अजीब बात है कि सरकार इस सब से अचिंतित दिखाई देती है। जैसा कि नीचे दिए गए चार्ट से पता चलता है कि इस साल जुलाई तक खाद्यान्न (चावल और गेहूं) का वितरण  मुश्किल से बढ़ा है। जुलाई 2019 तक, पीडीएस के माध्यम से वितरण के लिए 195 लाख टन खाद्यान्न स्टॉक से लिया गया था। इसमें जुलाई 2018 से लगभग 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि इसी अवधि में स्टॉक में लगभग 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

graph 2.PNG

मोदी सरकार की इस लापरवाही के कई मोर्चों पर बहुत गंभीर परिणाम हो सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह कि बहुत से ज़रूरतमंद लोग खाद्यान्न से वंचित रह जाएंगे जबकि खादान्न आज आसानी से उपलब्ध हैं। इसके अलावा, सरकार को भारतीय खाद्य निगम (FCI) और विभिन्न राज्य एजेंसियों को इस अनाज को ज़्यादा समय तक रखने के लिए लागत को बढ़ाना होगा। गोदामों में खाद्यान्न सड़ने का भी ख़तरा है क्योंकि स्टॉक के लगभग 15 प्रतिशत को "कवर और प्लिंथ" (सीएपी) प्रकार के भंडारण के तहत संग्रहीत किया जाता है, अर्थात, जो कच्चा भंडार होता है।

सरकार खुली बाज़ार बिक्री की योजना के माध्यम से स्टॉक को आगे बेचने या इसे निर्यात करने का निर्णय भी ले सकती है, हालांकि दोनों विकल्प अतीत में बहुत सफ़ल नहीं रहे हैं। अगर ऐसा किया जाता है तो वह सरकार द्वारा सस्ता भोजन उपलब्ध कराने के जनादेश को धोखा देना होगा।

अनाज के इस विशाल भंडारण से यह भी पता चलता है कि मांग में काफ़ी कमी है क्योंकि सख़्त ज़रूरत के बावजूद लोगों के पास खाद्यान्न जैसी आवश्यक वस्तुएं ख़रीदने का साधन नहीं है। जिस तरह लोग कार,  ट्रैक्टर, बिस्कुट और साबुन नहीं ख़रीद पा रहे हैं, ठीक उसी तरह खाद्यान्न ख़रीदने में भी उन्हें दिक़्क़त पेश आ रही है। दूसरे शब्दों में, विशाल खाद्यान्न भंडार एक और लक्षण है – जो अधिक ख़तरनाक लक्षण है – उस आर्थिक मंदी का जिसे वर्तमान सरकार की नीतियां भारत में लाई हैं।

Department of food and public distribution
Cereal
Wheat
rice
agrarian crisis
Inflation
Foodgrain Crisis
BJP
Narendra modi

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट


बाकी खबरें

  • The Indian Agricultural Situation Must Not Be Misread
    प्रभात पटनायक
    खेती के संबंध में कुछ बड़ी भ्रांतियां और किसान आंदोलन पर उनका प्रभाव
    15 Nov 2021
    इनमें पहली भ्रांति तो इस धारणा में ही है कि खेती किसानी पर कॉर्पोरेट अतिक्रमण तो ऐसा मामला है जो बस कॉर्पोरेट और किसानों से ही संबंध रखता है। यह ग़लत है। 
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 10,229 नए मामले, 125 मरीज़ों की मौत
    15 Nov 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.39 फ़ीसदी यानी 1 लाख 34 हज़ार 96 हो गयी है।
  • Facebook
    परंजॉय गुहा ठाकुरता
    फ़ेसबुक/मेटा के भीतर गहरी सड़न: क्या कुछ किया जा सकता है?
    15 Nov 2021
    क्या सांप्रदायिक नफ़रत फैलाने के सिलसिले में सक्रिय रूप से उकसाने को लेकर फ़ेसबुक के ख़िलाफ़ क़ानूनी और नियामक कार्रवाई की जा सकती है? हालांकि, अमेरिका में इसकी एक मिसाल मौजूद है, लेकिन भारत में इसे…
  • tax
    सुबोध वर्मा
    सरकार का टैक्स कलेक्शन तो बढ़ा है, लेकिन फिर भी ख़र्च में कटौती जारी
    15 Nov 2021
    मोदी सरकार ने शिक्षा, सामाजिक न्याय, पर्यावरण समेत कई मंत्रालयों के ख़र्च पर रोक लगा दी है। 
  • Gurgaon Panchayat
    मुकुंद झा
    गुड़गांव पंचायत : औद्योगिक मज़दूर, किसान आए एक साथ, कहा दुश्मन सांझा तो संघर्ष भी होगा सांझा!
    15 Nov 2021
    रविवार को गुड़गांव में बेलसोनिका ऑटो कंपोनेंट इंडिया इंप्लॉयीज यूनियन, मानेसर द्वारा मजदूर-किसान पंचायत का आयोजन किया गया। इसमें  कृषि बिलों को वापस लेने और श्रम संहिताओं को समाप्त करने की संयुक्त…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License