NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
डीबीसी को भुलाकर कैसे होगी डेंगू से लड़ाई? स्थायी नौकरी की मांग को लेकर हड़ताल
लगभग 3500 से अधिक कर्मचारी पिछले लगभग 2 दशकों में दिल्ली के तीनों नगर निगम में अनुबंध के आधार पर काम कर रहे हैं। राजधानी में डेंगू और अन्य ऐसी महामारी की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका के बावजूद इनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है।
मुकुंद झा
16 Sep 2019
protest

दिल्ली में नगर निगम मुख्यालय सिविक सेंटर के सामने , एंटी-मलेरिया एकता कर्मचारी यूनियन के बैनर के तहत घरेलू मच्छर प्रजनन जाँचकर्ताओं (डोमेस्टिक ब्रीडिंग चेकर : डीबीसी) अपनी नौकरी के नियमतिकरण की मांग को लेकर आज, सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए है।

लगभग 3500 से अधिक कर्मचारी पिछले लगभग 2 दशकों में दिल्ली के तीनों नगर निगम में अनुबंध के आधार पर काम कर रहे हैं। राजधानी में डेंगू और अन्य ऐसी महामारी की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका के बावजूद इनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। इससे पहले भी ये कर्मचारी हड़ताल और प्रदर्शन कर चुके हैं, उस दौरान सरकार ने लिखित में वादा किया था,लेकिन बाद में वो उससे मुकर गई।

आजकल आप सब टीवी पर दिल्ली सरकार का डेंगू के ख़िलाफ़ लड़ाई के लिए एक विज्ञापन रोज देख रहे होंगे। इसमें मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल दिल्ली में डेंगू 80% कम होने का दाव कर रहे है। और अंत में कहते हैं हर रविवार, 10 हफ्ते,10 बजे,10 मिनट समय दीजिये, डेंगू की रोकथाम कीजिये। लेकिन वो इस पूरे विज्ञापन में यह कहीं नहीं बताते कि डेंगू जैसी बीमारी के रोकथाम के लिए असल में कौन काम करता है।

DBC.jpg

मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया के खिलाफ ज़मीन पर काम करने वाले घरेलू मच्छर प्रजनन जांचकर्ताओं (डीबीसी) यानी वो लोग जो घर-घर जाकर जाँच करते हैं और पता लगाते हैं कि डेंगू और मलेरिया के मच्छर कहां पनप रहे हैं। अगर कहीं पैदा हो रहे हैं तो वे, उसकी रोकथाम के लिए भी कार्य करते हैं। इन कर्मचारियों की संख्या अभी 3500 है जो कि जरूरत से कम है। जो कर्मचारी काम भी कर रहे हैं, उन्हें कई महीनों तक वेतन नहीं मिलता है। इसके आलावा भी उनको कई तरह की समस्या है। लेकिन वो कर्मचारी किस हालत में काम कर रहे है इसकी सुध कोई नहीं ले रहा है। ये कर्मचारी 23 वर्षों से काम कर रहे लेकिन एमसीडी इन कर्मचारियों न तो कोई पहचान दे पाई है न ही समय से वेतन।
अपनी इन्हीं मांगो को लेकर ये कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल और क्रमिक भूख हड़ताल पर चले गए है।

इसे भी देखे:दिल्ली में डीबीसी श्रमिकों को दिसंबर के बाद से कोई वेतन नहीं मिला, दिल्ली नगर निगम

पिछले साल भी डीबीसी के 3500 कर्मचारियों ने 17 दिनों तक नई दिल्ली स्थित एमसीडी मुख्यालय के बाहर भूख हड़ताल पर बैठे थे। वे सभी अपना वेतन मांग रहे थे, जिसका कई महीनों से भुगतान नहीं किया गया था और मांग कर रहे थे कि उन्हें स्थायी किया जाए। लेकिन उस समय कर्मचारियों को आश्वासन दिया गया था कि उनकी सभी समस्याओं का हल कर दिया जाएगा लेकिन आज यह कर्मचारी उसी हालात में काम करने को मज़बूर हैं।

इसे भी पढ़े:क्या दिल्ली सच में डेंगू से लड़ने के लिए तैयार है ?

कर्मचारी यूनियन ने कहा कि 2 साल पूर्व हुए समझौते में पद बनाने संबंधी सहमति के बावजूद निगम ने इस संबंध में कोई पहल नहीं की। इसी कर्मचारी विरोधी रुख के चलते एंटी मलेरिया एकता कर्मचारी यूनियन ने डीबीसी कर्मचारियों की भावनाओं को देखते हुए आज, 16 सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा अब निर्णायक घड़ी आ गई है और हम अब अपनी एकता व ताकत का परिचय देंगे और जब तक निगम हमारी मांग को नहीं मानता तब तक यह संघर्ष चलेगा।

उनकी मांगों और इस हड़ताल को सीआईटीयू दिल्ली राज्य कमेटी ने समर्थन दिया है।

एंटी मलेरिया एकता कर्मचारी यूनियन के महासचिव मदन पाल ने कहा कि कर्मचारियों को पिछले तीन महीने से सैलरी नहीं मिली थी। ये कोई एकबार की नहीं हर बार की कहानी है तीन महीने बाद जब कर्मचारी आंदोलन की धमकी देते हैं तब जाकर एक महीने की सैलरी दे दी जाती है। जबकि स्थायी कर्मचारियों को हर महीने 31 को ही सैलरी दे दी जाती है लेकिन हमें नहीं क्योंकि हमारा निगम ने कोई पद नहीं दिया है।
इसके साथ ही उन्होंने कहा की डीबीसी कर्मचारियों की सबसे बड़ी समस्या यह है की वो लोग लगभग20-20 साल से काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी कोई पोस्ट(पद) नहीं है।

DBC2.jpg

यानी जैसे आप किसी भी विभाग में कार्य करते हैं तो आपकी एक पोस्ट होती है, आप फील्ड वर्कर हैं या क्लर्क हैं या और कुछ लेकिन हमारे साथ ऐसा नहीं है। इसके अलावा एमसीडी कहती है कि हम उसके कर्मचारी नहीं है, जबकि हम सारे काम करते हैं, अपने काम के अलावा भी हमसे अन्य काम लिया जाता है जैसे अवैध होर्डिंग हटाना, हाउस टैक्स वसूलना आदि। इसके बाबजूद हमें कोई पद नहीं दिया गया है, इसके साथ ही हमें हमारे कर्मचारी होने के मौलिक अधिकार भी नहीं है।

मदन पाल कहते है कि हमें मात्र 13 हज़ार रुपये सैलरी मिलती वो भी समय पर नहीं मिलती है। ऐसे में हमारे लिए अपना परिवार चलाना बहुत मुश्किल हो गया है। अब हमारी मज़बूरी है की हम कोई और काम कर नहीं सकते हमारी उम्र 40-50  साल हो गई। हमने पूरी जिंदगी दे दी निगम को लेकिन अब भी हमें यह अपना कर्मचारी नहीं मानते। हमारी सीधी मांग है कि हमारा पद बनाया जाए और हमें पक्का किया जाए।
इसके अलावा इन कर्मचारियों की दूसरी मांग है कि काम के दौरान कर्मचारियों के मौत के बाद उनके परिवार में किसी को उनके स्थान पर नौकरी दी जाए। क्योंकि कई बार जब कर्मचारी मच्छर की जाँच के लिए घरों में जाते हैं तो उन्हें भी वो काट लेता है, जिससे उनकी मौत हो जाती है, ऐसे में उनके परिवार को नौकरी दी जाए।

DBC
dengue
dengue in delhi
delhi government
fight with dengue
employee unions
mcd in dengue
employees protest
Non-permanent employee
mosquito breeding workers

Related Stories

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?

दिल्ली: डीबीसी कर्मचारियों की हड़ताल 16वें दिन भी जारी, कहा- आश्वासन नहीं, निर्णय चाहिए

दिल्ली : स्थाई पद की मांग को लेकर डीबीसी कर्मचारियों ने शुरू की अनिश्चितकालीन हड़ताल

दिल्ली: डीबीसी कर्मचारियों का स्थायी नौकरी की मांग को लेकर प्रदर्शन, हड़ताल की चेतावनी दी

दिल्ली: ट्रेड यूनियन के साइकिल अभियान ने कामगारों के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा शुरू करवाई

दिल्ली पुलिस की 2020 दंगों की जांच: बद से बदतर होती भ्रांतियां

युवाओं ने दिल्ली सरकार पर बोला हल्ला, पूछा- 'कहां है हमारा रोज़गार?'

यूपी : 5,000 से अधिक जल निगमकर्मियों को नौकरी एवं पेंशन से महरूम होने का डर


बाकी खबरें

  • sever
    रवि शंकर दुबे
    यूपी: सफ़ाईकर्मियों की मौत का ज़िम्मेदार कौन? पिछले तीन साल में 54 मौतें
    06 Apr 2022
    आधुनिकता के इस दौर में, सख़्त क़ानून के बावजूद आज भी सीवर सफ़ाई के लिए एक मज़दूर ही सीवर में उतरता है। कई बार इसका ख़ामियाज़ा उसे अपनी मौत से चुकाना पड़ता है।
  • सोनिया यादव
    इतनी औरतों की जान लेने वाला दहेज, नर्सिंग की किताब में फायदेमंद कैसे हो सकता है?
    06 Apr 2022
    हमारे देश में दहेज लेना या देना कानूनन अपराध है, बावजूद इसके दहेज के लिए हिंसा के मामले हमारे देश में कम नहीं हैं। लालच में अंधे लोग कई बार शोषण-उत्पीड़न से आगे बढ़कर लड़की की जान तक ले लेते हैं।
  • पटनाः डीजल-पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ ऑटो चालकों की हड़ताल
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पटनाः डीजल-पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ ऑटो चालकों की हड़ताल
    06 Apr 2022
    डीजल और पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के बाद ऑटो चालकों ने दो दिनों की हड़ताल शुरु कर दी है। वे बिहार सरकार से फिलहाल प्रतिबंध हटाने की मांग कर रहे हैं।
  • medicine
    ऋचा चिंतन
    दवा के दामों में वृद्धि लोगों को बुरी तरह आहत करेगी – दवा मूल्य निर्धारण एवं उत्पादन नीति को पुनर्निर्देशित करने की आवश्यता है
    06 Apr 2022
    आवश्यक दवाओं के अधिकतम मूल्य में 10.8% की वृद्धि आम लोगों पर प्रतिकूल असर डालेगी। कार्यकर्ताओं ने इन बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेने और सार्वजनिक क्षेत्र के दवा उद्योग को सुदृढ़ बनाने और एक तर्कसंगत मूल्य…
  • wildfire
    स्टुअर्ट ब्राउन
    आईपीसीसी: 2030 तक दुनिया को उत्सर्जन को कम करना होगा
    06 Apr 2022
    संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम जलवायु रिपोर्ट कहती है कि यदि​ ​हम​​ विनाशकारी ग्लोबल वार्मिंग को टालना चाहते हैं, तो हमें स्थायी रूप से कम कार्बन का उत्सर्जन करने वाले ऊर्जा-विकल्पों की तरफ तेजी से बढ़ना…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License