NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दिल्ली की फैक्ट्रियों में लग रही आग में और मज़दूर हुए ख़ाक
दिल्ली की फैक्ट्रियाँ लगता है आग की भट्टी बन चुकी हैं जो एक के बाद के एक मज़दूर को लीलती जा रही हैंI
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
25 Apr 2018
Delhi Fire

देश की राजधानी में फिर एक फैक्ट्री में लगी आग में जलकर दो मज़दूरों की मौत हो गयीI यह आग दिल्ली के उत्तर-पूर्वी ज़िले शहादरा के गाँधी नगर इलाके में स्थित एक जींस बनाने की फैक्ट्री में लगीI

इस साल में यह आग लगने से मज़दूरों की मौत होने की छठी घटना है और इस महीने की चौथीI

22 अप्रैल की रात को लगी इस आग में उत्तर प्रदेश के मूल-निवासी फैज़ान (22) और सहमत (30) की मौत हुईI उनके शव तीन मंज़िला इमारत के पहले तले से मिलेI पुलिस ने बताया कि वे दोनों उस रात ओवरटाइम कर रहे थे और आग शायद शोर्ट सर्किट की वजह से लगीI इस घटना के सम्बन्ध में अनजान व्यक्तियों के खिलाफ़ IPC की धारा 304ए (लापरवाही से हत्या) सहित विभिन्न धाराओं के तहत केस रजिस्टर किया गया हैI   

साल 2018 में फैक्ट्रियों में लगी आग की वजह से अब तक 28 मज़दूरों की मौत की दर्ज़ की जा चुकी हैंI

20 जनवरी को बवाना उद्योगिक क्षेत्र की एक अनाधिकृत पटाखा फैक्ट्री में लगी आग में 17 मज़दूर आग में जलकर मर गयेI मरने वाले मज़दूरों में सात महिलाएँ थीं जिनमें से एक गर्भवती थीI

10 फ़रवरी को करोल बाग की एक कपड़े बनाने वाली फैक्ट्री में आग लगने से एक मज़दूर की मौत हुईI

7 अप्रैल को उत्तर-पश्चिम दिल्ली के नरेला के भोरगढ़ उद्योगिक क्षेत्र की एक जूते बनाने वाली फैक्ट्री में आग लगी जिसमें दो मज़दूरों की मौत हुईI

9 अप्रैल को दो बच्चों समेत चार मज़दूर उत्तर-पश्चिम दिल्ली के सुल्तानपुरी इलाके की एक जूते बनाने वाली गैरकानूनी फैक्ट्री में लगी आग में जलकर मारे गयेI

17 अप्रैल को नवादा की एक बर्तन की फैक्ट्री में लगी आग में दो मज़दूर मर गयेI 

इनमें से ज़्यादा फैक्ट्रियाँ दिल्ली के अनाधिकृत क्षेत्रों की अनियंत्रित छोटे उद्योगिक क्षेत्रों में स्थित हैंI ज़्यादातर यह क्षेत्र निम्न-मध्य वर्ग या झुग्गी-झोपड़ी के रिहायशी इलाकों में हैंI

चूँकि यह फैक्ट्रियाँ गैरकानूनी तौर से चल रही होती हैं इसलिए यहाँ आग से बचने के कोई प्रबंध नहीं होते, न ही कोई श्रम कानून माने जाते हैं और यहाँ काम करने की परिस्थितियाँ बहुत ही खराब होती हैंI

इन फैक्ट्रियों में भले ही मज़दूर अंदर सो क्यों न रहे हों तब भी इन्हें बाहर से ताला लगाया जाता हैI सुल्तानपुरी और नवादा की फैक्ट्रियों में ऐसा ही हुआ थाI जब सुलतानपुरी स्थित फैक्टरी में आग लगी तो उस समय उसमें 40 मज़दूर सो रहे थेI

ऐसी फैक्ट्रियों में काम करने वाले मज़दूर अमूमन ओवरटाइम करते हैं फिर भी उन्हें न्यूनतम वेतन से काफी कम वेतन दिया जाता हैI मार्च 2017 के आदेश के अनुसार दिल्ली में आधिकारिक तौर पर अकुशल मज़दूर के लिए आठ घंटे की शिफ्ट के लिए 13,350 रु. का न्यूनतम वेतन निर्धारित है, अर्ध-कौशल मज़दूर के लिए 14,698 रु और कौशल प्राप्त मज़दूर के लिए 16,182 रु का न्यूनतम वेतन तय किया हैI

बवाना की फैक्ट्री में मज़दूरों को कथित तौर पर 10 घंटे की शिफ्ट के लिए 200 रु प्रतिदिन तक ही मिलते थेI सुल्तानपुरी की जूते की फैक्ट्री में मज़दूरों से रोज़ 10-12 घंटे की शिफ्ट करवाई जाती थी और उन्हें पीस रेट पर भुगतान किया जाता था यानी एक जूते की जोड़ी के लिए 30 रुI

आख़िरकार ऐसी घटनाएँ क्यों होती जा रही हैं? सरकार इस मामले में कर क्या रही है?

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन (CITU), दिल्ली के सचिव अनुराग सक्सेना ने कहा कि, “किस्सा वही पुराना हैI सरकार के ढीले रवैये की वजह से ऐसी दुखद घटनाएँ होना जारी हैI इंस्पेक्शन और [नियमों का] अनुसरण बहुत कम हैI अधिकारी भ्रष्ट हैं और प्राय: [नियमों के] उल्लंघन को नज़रअंदाज़ कर देते हैं”I  

सक्सेना ने बताया कि, “यह गैरकानूनी फैक्ट्रियाँ बहुत ही छोटे-सी जगहों पर चलती हैंI इन जगहों पर कानून द्वारा आवश्यक अग्नि क्षमन उपकरण लगाना असंभव हैI सक्सेना ने बताया कि दिल्ली के 20 लाख मज़दूरों की देख-रेख के लिए सिर्फ 11 लेबर इंस्पेक्टर हैंI उन्होंने कहा कि एक उपाय इन गैरकानूनी इकाइयों को बंद करना हैI

उन्होंने कहा कि, “यह गैरकानूनी फैक्ट्रियाँ या तो बंद कर दी जानी चाहिए या इन्हें कहीं और शिफ्ट कर दिया जाना चाहिएI राज्य सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी फैक्ट्री अधिकृत औद्योगिक क्षेत्र के बाहर नहीं च रही होI क्षेत्र के SDM और DM की ज़िम्मेदारी है कि यह सब देखे”I

मज़दूर संगठनों के सामने चुनौती है कि वे असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों को लामबंद करे और इन मुद्दों को और तीखे तौर पर उठायेI

Delhi
Delhi’s factory Fire
Workers

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

धनशोधन क़ानून के तहत ईडी ने दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन को गिरफ़्तार किया

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

कश्मीर: कम मांग और युवा पीढ़ी में कम रूचि के चलते लकड़ी पर नक्काशी के काम में गिरावट

मुंडका अग्निकांड के लिए क्या भाजपा और आप दोनों ज़िम्मेदार नहीं?

मुंडका अग्निकांड: लापता लोगों के परिजन अनिश्चतता से व्याकुल, अपनों की तलाश में भटक रहे हैं दर-बदर

मुंडका अग्निकांड : 27 लोगों की मौत, लेकिन सवाल यही इसका ज़िम्मेदार कौन?

दिल्ली : फ़िलिस्तीनी पत्रकार शिरीन की हत्या के ख़िलाफ़ ऑल इंडिया पीस एंड सॉलिडेरिटी ऑर्गेनाइज़ेशन का प्रदर्शन

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 12,729 नए मामले, 221 मरीज़ों की मौत
    05 Nov 2021
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 43 लाख 33 हज़ार 754 हो गयी है।
  • Diagnosis and Recovery Long
    दित्सा भट्टाचार्य
    अध्ययन बताता है कि मल्टीड्रग-रेसिस्टेंट ट्यूबरकुलोसिस रोगियों की पहचान और इलाज का सफ़र लंबा और महंगा है
    05 Nov 2021
    इस रिपोर्ट में ज़िक़्र किया गया है कि कैसे एमडीआर-टीबी के 128 (49%) रोगियों में से 62 रोगियों के होने वाले ख़र्च के आकलन से पता चला कि औसत ख़र्च 10,000 रुपये था, और 14 (23%) रोगियों ने बताया कि यह…
  • akhilesh
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    उत्तर प्रदेशः छोटी छोटी पार्टियों की बड़ी बेचैनी
    05 Nov 2021
    ध्यान से देखा जाए तो यह होड़ उत्तर प्रदेश की विभिन्न जातियों की सामाजिक-राजनीतिक हलचल है। यह छोटी जातियों का राजनीतिकरण है जो हिंदुत्व और समाजवाद के बड़े बड़े आख्यानों के बीच अपने लिए सम्मान और सत्ता…
  • kisan diwali
    लाल बहादुर सिंह
    उपचुनाव नतीजों के बाद पैनिक मोड में आई मोदी सरकार क्या किसान-आंदोलन पर भी यू-टर्न लेगी? 
    05 Nov 2021
    अगले 1-2 महीने बेहद निर्णायक हैं आंदोलन के भविष्य के लिए। इस दौरान  एक ओर सरकार किसी न किसी तरह आंदोलन खत्म कराने के अधिकतम दबाव में रहेगी, दूसरी ओर आंदोलन के सामने न सिर्फ अपने को मजबूती से टिकाए…
  • diwali crackers
    शंभूनाथ शुक्ल
    दिवाली, पटाख़े और हमारी हवा
    04 Nov 2021
    दशहरा या दिवाली पर पटाख़े फोड़ने का कोई भी धार्मिक विधि-विधान नहीं है लेकिन जिनके पास अतिरिक्त धन है, उनको दिवाली पर पटाख़ों को फोड़ने में आनंद मिलता है। शायद इस तरह वे अपने वैभव का प्रदर्शन करते हों।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License