NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
दिल्ली की स्कूली शिक्षा में बाधा बन रहा है "आधार कार्ड"
एक परिवार के दो बच्चे जो पहले बिहार में पढ़ते थे, उनके पिता दिल्ली में पिछले कई सालों से रह रहे थे। अब उन्होंने अपने बच्चे को भी दिल्ली बुला लिया है।अब वो अपने बच्चों को दिल्ली में ही पढ़ाना चाहते हैं। लेकिन दिल्ली के स्कूल में उनके बच्चों का आधार, ट्रांसफ़र सर्टिफ़िकेट पर काउंटर साइन आदि जैसे कई बहाने बनाकर दाख़िला देने से मना कर रहे हैं।
मुकुंद झा
22 Apr 2019
दिल्ली की स्कूली शिक्षा में बाधा बन रहा है "आधार कार्ड"

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) यानी सरल भाषा में कहें तो आधार कार्ड न होने के कारण दिल्ली में बच्चों का स्कूल में दाख़िला नहीं हो रहा है। पिछले साल भी यही समस्या थी जिसके बाद सर्वोच्च न्यायलय ने आदेश दिया था कि बच्चों को दाख़िला लेने से मना नहीं कर सकते हैं, लेकिन हम देख रहे हैं कि इसके बावजूद आज भी दिल्ली में हज़ारों बच्चों का आधार न होने के कारण दाख़िला नहीं हो रहा है।

इसको लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य के अधिकार के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और वकील अशोक अग्रवाल ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए सोमवार को मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन ने एक सप्ताह में जवाब दाख़िल करने के लिए कहा और पूछा कि "आधार के आभाव में" दाखिला क्यों नहीं ले सकते हैं? इस मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख़ 09.05.2019 तय की गई। इस दौरान बेंच ने दिल्ली सरकार को एक सप्ताह के भीतर छात्रों को दाख़िला देने या नहीं देने के लिए कारण बताने के लिए कहा है।

एक परिवार के दो बच्चे जो पहले बिहार में पढ़ते थे, उनके पिता दिल्ली में पिछले कई सालों से रह रहे थे। अब उन्होंने अपने बच्चे को भी दिल्ली बुला लिया है।अब वो अपने बच्चों को दिल्ली में ही पढ़ाना चाहते हैं। लेकिन दिल्ली के स्कूल में उनके बच्चों का आधार कार्ड, ट्रांसफ़र सर्टिफ़िकेट पर काउंटर साइन आदि जैसे कई बहाने बनाकर दाख़िला देने से मना कर रहे हैं। ऐसे में अब वो परेशान हैं कि उनके बच्चों के भविष्य का क्या होगा?

ऐसे ही एक छात्र दीपक और उनके पिता राजकुमार जो पूर्वी दिल्ली में रहते हैं, उनका दाखिला इसलिए नहीं हो रहा है क्योंकि उनका बैंक में खाता नहीं है, ग़ौरतलब है कि बैंक बिना आधार के खाता नहीं खोल रहा है।

दिल्ली में इन्हीं की तरह और भी सैकड़ो बच्चें है जो ऐसी ही समस्याओं से जूझ रहे हैंI वो पढ़ना चाहते हैं लेकिन यह व्यवस्था पढ़ने नहीं दे रही।

दिल्ली की एक व्यावहारिक स्थिति है कि दिल्ली में 70% से अधिक लोग बाहर से प्रवास कर दिल्ली में रोज़ी रोटी कमाने के लिए आए हैं। उनमें से कई लोग ऐसे हैं जो दिल्ली में कई वर्षो से रह रहे हैं लेकिन उनके पास यहाँ का कोई स्थाई पता नहीं है, ऐसे में उनके लिए आधार या फिर अन्य दस्तावेज़ बना पाना संभव नहीं है। सरकार जितने दावे कर ले लेकिन सच्चाई यह है कि आज भी स्कूलों में बच्चों को आधार कार्ड, बैंक खाते और दिल्ली के आवासीय प्रमाण पात्र न होने के कारण शिक्षा से बाहर किया जा रहा है।

अशोक अग्रवाल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भी दिल्ली सरकार बच्चों को स्कूलों से बाहर करने पर तुली हुई है। जिन बच्चों को स्कूल से बाहर किया जा रहा है, उनमें से अधिकतर ग़रीब और मज़दूर वर्ग के लोग हैं। जिन्हें ये नहीं पता है कि अब जाना कहाँ है और उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वो अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ा सकें। ऐसे में सरकार ही बच्चों को उनके शिक्षा के अधिकार से वंचित कर रही है। वो आगे कहते हैं कि यह उनके शिक्षा के अधिकार का सीधा–सीधा उल्लंघन है जो उन्हें सविधान से हासिल होता है और सरकार की ये संवैधानिक ज़िम्मेदारी है कि वो सभी बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने का समान व उचित अवसर दें।

 

 

दिल्ली में सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में कई बेहतरीन काम किये किए हैं लेकिन आज भी व्यवहारिकता में कई समस्या है जिस कारण जिनको सरकारी व्यवस्था की ज़रूरत है, उन्हीं को ये व्यवस्था बाहर करने पर तुली है। उनको बाहर करने के जो आधार दिए जा रहे हैं वो बहुत ही खोखले हैं। अधिकतर ग़रीब और अति पिछड़े वर्ग बच्चे हैं, जिनका सरकारी स्कूल छोड़ कोई और सहारा नहीं होता है। वो भी उन्हें अलग–अलग कारण बता कर प्रवेश नहीं देते हैं जैसे कभी बच्चों को आधार कार्ड न होने, जन्म प्रमाण पत्र न होने, आवास प्रमाण पत्र न होने या उम्र अधिक होने के कारण दाख़िले देने से मना कर देते हैं। तब ये गंभीर प्रश्न उठता है कि ये बच्चे कहाँ जायें? और समावेशी शिक्षा का लक्ष्य कैसे हासिल किया जाए। 

 

Delhi
education
Education crises
Education Rights
Aadhar card
Delhi High court
delhi govt
RTE

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

कर्नाटक पाठ्यपुस्तक संशोधन और कुवेम्पु के अपमान के विरोध में लेखकों का इस्तीफ़ा

जौनपुर: कालेज प्रबंधक पर प्रोफ़ेसर को जूते से पीटने का आरोप, लीपापोती में जुटी पुलिस

बच्चे नहीं, शिक्षकों का मूल्यांकन करें तो पता चलेगा शिक्षा का स्तर

अलविदा शहीद ए आज़म भगतसिंह! स्वागत डॉ हेडगेवार !

कर्नाटक: स्कूली किताबों में जोड़ा गया हेडगेवार का भाषण, भाजपा पर लगा शिक्षा के भगवाकरण का आरोप

शिक्षा को बचाने की लड़ाई हमारी युवापीढ़ी और लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई का ज़रूरी मोर्चा

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

नई शिक्षा नीति बनाने वालों को शिक्षा की समझ नहीं - अनिता रामपाल

बिहारः प्राइवेट स्कूलों और प्राइवेट आईटीआई में शिक्षा महंगी, अभिभावकों को ख़र्च करने होंगे ज़्यादा पैसे


बाकी खबरें

  • International
    न्यूज़क्लिक टीम
    2021: अफ़ग़ानिस्तान का अमेरिका को सबक़, ईरान और युद्ध की आशंका
    30 Dec 2021
    'पड़ताल दुनिया भर' की के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने न्यूज़क्लिक के मुख्य संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से बात की कि 2021 में अफ़ग़ानिस्तान ने किस तरह एक ध्रुवी अमेरिकी परस्त कूटनीति को…
  • Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University
    सत्येन्द्र सार्थक
    दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति पर गंभीर आरोप, शिक्षक और छात्र कर रहे प्रदर्शन
    30 Dec 2021
    गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति पर कुछ प्रोफेसर और छात्रों ने आरोप लगाया है कि “कुलपति तानाशाही स्वभाव के हैं और मनमाने ढंग से फ़ैसले लेते हैं। आर्थिक अनियमितताओं के संदर्भ में भी उनकी जाँच होनी…
  • MGNREGA
    सुचारिता सेन
    उत्तर प्रदेश में ग्रामीण तनाव और कोविड संकट में सरकार से छूटा मौका, कमज़ोर रही मनरेगा की प्रतिक्रिया
    30 Dec 2021
    उत्तर प्रदेश में देश की तुलना में ग्रामीण आबादी की हिस्सेदारी थोड़ी ज़्यादा है। सबसे अहम, यहां गरीब़ी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों की संख्या देश की तुलना में कहीं ज़्यादा है। इस स्थिति में कोविड…
  • delhi
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना पाबंदियों के कारण मेट्रो में लंबी लाइन बसों में नहीं मिल रही जगह, लोगों ने बसों पर फेंके पत्थर
    30 Dec 2021
    दिल्ली के मेट्रो स्टेशनों के बाहर गुरुवार सुबह लगातार दूसरे दिन यात्रियों की लंबी-लंबी कतारें देखी गईं।
  • AFSHPA
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    नगा संगठनों ने अफस्पा की अवधि बढ़ाये जाने की निंदा की
    30 Dec 2021
    केंद्र ने बृहस्पतिवार को नगालैंड की स्थिति को ‘‘अशांत और खतरनाक’’ करार दिया तथा अफस्पा के तहत 30 दिसंबर से छह और महीने के लिए पूरे राज्य को ‘‘अशांत क्षेत्र’’ घोषित कर दिया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License