NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
SC ST OBC
भारत
राजनीति
दलित एवं मुस्लिम बच्चों के बौने होने के जोखिम ज्यादा
हालिया किए गए एक अध्ययन से जाहिर हुआ है कि उप-सहारा अफ्रीका के 30 देशों की तुलना में भारत में बच्चों में बौनेपन के औसत मामले की दर काफी ऊंची है। 
दित्सा भट्टाचार्य
05 Sep 2021
दलित एवं मुस्लिम बच्चों के बौने होने के जोखिम ज्यादा

भारत लगभग एक तिहाई बौने बच्चों का घर हो गया है, जिनकी अवस्था पांच वर्षों से भी कम है पर इसकी तुलना में उनकी लंबाई विश्व में मान्य मानकों से भी कम है। हाल में ही किए गए अध्ययन के मुताबिक अनुसूचित जातियों (एससी), अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) एवं मुस्लिम परिवारों के बच्चे सामाजिक भेदभाव के लिहाज से अधिक अरक्षित हैं। इन बच्चों के बौने हो जाने की आशंका अधिक होती है।

अध्ययन के अनुसार, भारत में बच्चों के बौने होने की औसत घटनाएं उप सहारा अफ्रीका में 30 देशों के तुलना में काफी ज्यादा हैं। ‘दि मिसिंग पीस ऑफ पजलः कास्ट डिस्क्रिमिशन एवं स्टन्टिंग’ शीर्षक से किए गए इस अध्ययन के लेखक हैं- अशोका यूनिवर्सिटी के इकोनामिक डेटा एंड एनालिसिस सेंटर अश्विनी देशपांडे एवं हाइडेलबर्ग यूनिवर्सिटी के राजेश रामचंद्रन। 

लेखक-द्वय के इस अध्ययन का लक्ष्य भारत में जाति एवं सामाजिक-आर्थिक कारकों का बच्चों की ऊंचाई पर पड़ने वाले अच्छे-बुरे प्रभावों का आकलन करना था। इस अध्ययन ने एक पद्धति का खुलासा किया-जिस पर पहले कभी चर्चा नहीं की गई थी-वह यह कि ऊंची जाति (यूसी) के हिन्दुओं के अलावा, भारत में सभी सामाजिक समूहों में बच्चों की ऊंचाई का नुकसान एसएसए में बच्चों की तुलना में काफी अधिक है। 
ऊंची जाति के हिन्दू बच्चों में बौनेपन की दर एसएसए में 31 फीसदी की तुलना में 26 फीसदी के साथ कमतर थी। लेकिन एससी-एसटी, ओबीसी एवं मुस्लिम बच्चों में बौनेपन की दरें काफी ऊंची क्रमशः 40 फीसदी, 36 फीसदी और 35 फीसदी थीं। इस प्रकार, एससी-एसटी, ओबीसी एवं ऊंची जाति के हिंदुओं-मुस्लिम परिवार के बच्चों में ये प्रतिशत बिंदु ऊंची जातियों के हिन्दुओं के बच्चों की तुलना में क्रमशः 14, 10 और 9 हैं, या उनके अविकसित होने की आशंका 35 फीसदी से लेकर 50 फीसदी तक है। 

“दूसरे शब्दों में, भारत में विभिन्न सामाजिक समूहों के बच्चों की ऊंचाई में अंतर भारत-एसएसए के बच्चों की ऊंचाई के अंतर की तुलना में दो से तीन गुना अधिक है। संपूर्ण भारत-एसएसए बच्चे की ऊंचाई का अंतर वंचित समूहों के बच्चों की कम ऊंचाई के कारण होता है,” अध्ययन में कहा गया है। 

अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है,“यह सवाल कि ‘भारतीय बच्चे अफ्रीकी बच्चों की तुलना में क्यों नाटे या बौने होते हैं’ की बजाए यह पूछने की जरूरत है कि ‘भारत में विभिन्न सामाजिक समूहों के बच्चों में ऊंचाई के इतने अधिक अंतर क्यों होते हैं?’” 

रिपोर्ट के दोनों लेखकों ने बच्चों की ऊंचाई पर असर डालने वाले पांच महत्त्वपूर्ण कारकों की पहचान की है: (i) स्वच्छता तक पहुंच की कमी। इसकी दो वजहें हैं: एक तो परिवार में शौचालय की सुविधा नहीं है और घर-परिवार के सदस्य झाड़ियों में / खुले में शौच करते हैं। और दूसरा, प्राथमिक नमूना इकाई स्तर पर खुले में शौच करने के परिवार का जोखिम; (ii) एक मां की मानवीय पूंजी, दो संकेतकों के जरिए मापी जाती है: उनकी स्कूली शिक्षा के वर्ष एवं एक वास्तविक परीक्षा द्वारा मापी गई बच्चों के पढ़ने की क्षमता; (iii) अवस्था लायक ऊंचाई (एचएफए)-जेड स्कोर और वजन के मुताबिक ऊंचाई (डब्ल्यूएफएच)-जेड स्कोर और उम्र के आधार पर मां की मानवशास्त्रीय स्थिति; (iv) समृद्धि सूचकांक कारक स्कोर द्वारा ग्रहित परिसंपत्तियों में अंतर; और (v) अंतर-घरेलू आवंटन एवं प्रजनन निर्णयों, जन्म-अनुक्रमों एवं भाई-बहन के आकार के आधार पर।

अध्ययन में आगे कहा गया है, “हम सहसंयोजकों में बड़े अंतर-समूह भेद पाते हैं, जो बच्चे की ऊंचाई को प्रभावित करते हैं, विशेष रूप से ऊंची जाति के हिंदुओं और एससी-एसटी समुदाय के बच्चों के बीच। इनमें से कुछ पर रोशनी डाली जा सकती है, जैसे कि 58 फीसदी एससी-एसटी के घरबारों में शौचालय की सुविधा नहीं है। उनके लोग ऊंची जातियों के 23 फीसदी हिन्दुओं की तुलना में झाड़ियों एवं खुले में शौच करते हैं;  ऊंची जाति के हिन्दुओं के बीच 83 फीसदी मातृत्व साक्षरता दर की तुलना में एससी-एसटी समुदायों में 51 फीसद ही साक्षरता दर है। ऊंची जाति के हिन्दुओं की माताएं कमोबेश जहां 9.47 वर्ष तक स्कूली शिक्षा ली हुई होती हैं, वहीं एससी-एसटी समुदाय के बच्चों की माताएं महज 5.26 वर्ष तक ही स्कूली शिक्षा ली हुई होती हैं।; और ऊंची जाति के हिन्दुओं की माताओं का औसत एचएफए जेड स्कोर एससीएसटी की माताओं की 2.15 की तुलना में-1.82 होती है।” 

रिपोर्ट में दोनों लेखकों ने एक अहम सवाल उठाया है। उनका कहना है कि “यह तो स्पष्ट है कि ऊंची जातियों एवं दलित बच्चों के पलने-बढ़ने के परिवेश-पर्यावरण में बहुत बड़ा एवं एक महत्त्वपूर्ण अंतर है। दलित एवं आदिवासी (एससी-एसटी) बच्चों के लिए तो पालन-पोषण एवं संवर्धन की परिस्थितियां उनकी तुलना में सबसे ज्यादा विपरीत हैं। तो क्या सामाजिक-आर्थिक विशेषताओं में ये अंतर विभिन्न सामाजिक समूहों में पैदा हुए बच्चों की ऊंचाई के अंतर को व्याख्यायित करते हैं?”

लेखक-द्वय बताते हैं कि ऊंची जातियों के हिन्दुओं एवं दलित (एससी) के बच्चों में ऊंचाई का अंतर सामाजिक भेदभाव से प्रभावित होता है, जो अस्पृश्यता या छुआछूत के अवैध किंतु व्यापक चलन में दृष्टिगोचर होता है। इसलिए दलित बच्चों के मामले में उनकी ऊंचाई का नुकसान उन देश के उन जिलों में बढ़ गया है, जहां छुआछूत का चलन बहुत ज्यादा है। इन लेखकों ने भारतीय मानवीय विकास सर्वेक्षण (आइएचडीएस 2012) के डेटा का इस्तेमाल कर छुआछूत के चलन एवं बच्चों की ऊंचाई में संबंध का अनुमान लगाया है। 

लेखकों के इस महत्त्वपूर्ण अध्ययन के निष्कर्ष है कि बच्चों की लंबाई में जाति का अंतर पूरी तरह से वर्ग या सामाजिक-आर्थिक स्थिति के अंतर का प्रतिबिंब नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है, “विशेषकर, छुआछूत के व्यवहार में अंतर ऊंची जातियों के बच्चों के कद की ऊंचाई को नहीं प्रभावित करता है, किंतु छुआछूत से संबंधित व्यवहारों का व्यापक प्रसार का संबंध दलित बच्चों के बौने या नाटे होने से है। इसके अलावा, अध्ययन के निष्कर्ष, अस्पृश्य समूहों से आने वाली गर्भवती और दुग्धपान कराने वाली माताओं को सेवा मुहैया कराने में भेदभावपूर्ण तौर-तरीकों को दोषी ठहराते हैं, जिसके फलस्वरूप निचली जाति के बच्चों के खराब स्वास्थ्य-परिणाम मिलते हैं,” लेखकों ने कहा। 

अंग्रेजी में मूल रूप से प्रकाशित लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें 
Dalit and Muslim Children More Vulnerable to Stunting, Shows Study

stunting
stunted children
Muslims
SC
ST
OBC
Scheduled Castes
scheduled tribes
Other Backward Classes
Hindus
Caste
socioeconomic
untouchablity
Discrimination
dalit
Adivasi

Related Stories

गुजरात: पार-नर्मदा-तापी लिंक प्रोजेक्ट के नाम पर आदिवासियों को उजाड़ने की तैयारी!

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

कमज़ोर वर्गों के लिए बनाई गईं योजनाएं क्यों भारी कटौती की शिकार हो जाती हैं

बिहार: "मुख्यमंत्री के गृह जिले में दलित-अतिपिछड़ों पर पुलिस-सामंती अपराधियों का बर्बर हमला शर्मनाक"

झारखंड: नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज विरोधी जन सत्याग्रह जारी, संकल्प दिवस में शामिल हुए राकेश टिकैत

राजस्थान : दलितों पर बढ़ते अत्याचार के ख़िलाफ़ DSMM का राज्यव्यापी विरोध-प्रदर्शन

भेदभाव का सवाल व्यक्ति की पढ़ाई-लिखाई, धन और पद से नहीं बल्कि जाति से जुड़ा है : कंवल भारती 

बिहारः भूमिहीनों को ज़मीन देने का मुद्दा सदन में उठा 

यूपी चुनाव परिणाम: क्षेत्रीय OBC नेताओं पर भारी पड़ता केंद्रीय ओबीसी नेता? 

चुनाव 2022: उत्तराखंड में दलितों के मुद्दे हाशिये पर क्यों रहते हैं?


बाकी खबरें

  • ganguli and kohli
    लेस्ली ज़ेवियर
    कोहली बनाम गांगुली: दक्षिण अफ्रीका के जोख़िम भरे दौरे के पहले बीसीसीआई के लिए अनुकूल भटकाव
    19 Dec 2021
    दक्षिण अफ्रीका जाने के ठीक पहले सौरव गांगुली बनाम विराट कोहली की टसल हमारी टीवी पर तैर रही है। यह टसल जितनी वास्तविक है, यह इस तथ्य पर पर्दा डालने के लिए भी मुफ़ीद है कि भारतीय टीम ऐसे देश का दौरा कर…
  • modi
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू
    19 Dec 2021
    सरकार जी उतनी गंभीरता, उतना दिमाग सरकार चलाने में नहीं लगाते हैं जितना पूजा-पाठ करने में लगाते हैं। यह पूजा-पाठ चुनाव से पहले तो और भी अधिक बढ़ जाता है। बिल्कुल ठीक उसी तरह, जिस तरह से किसी ऐसे छात्र…
  • teni
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे : जयपुर में मौका चूके राहुल, टेनी को कब तक बचाएगी भाजपा और अन्य ख़बरें
    19 Dec 2021
    सवाल है कि अजय मिश्र को कैसे बचाया जाएगा? क्या एसआईटी की रिपोर्ट के बाद भी उनका इस्तीफा नहीं होगा और उन पर मुकदमा नहीं चलेगा?
  • amit shah
    अजय कुमार
    अमित शाह का एक और जुमला: पिछले 7 सालों में नहीं हुआ कोई भ्रष्टाचार!
    19 Dec 2021
    यह भ्रष्टाचार ही भारत के नसों में इतनी गहराई से समा चुका है जिसकी वजह से देश का गृह मंत्री मीडिया के सामने खुल्लम-खुल्ला कह सकता है कि पिछले 7 सालों में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ।
  • A Critique of Capitalism’s Obscene Wealth
    रिचर्ड डी. वोल्फ़
    पूंजीवाद की अश्लील-अमीरी : एक आलोचना
    19 Dec 2021
    पूंजीवादी दुनिया में लगभग हर जगह ग़ैर-अमीर ही सबसे ज़्यादा कर चुकाते हैं और अश्लील-अमीरों की कर चोरी के कारण सार्वजनिक सेवाओं में होने वाली कटौतियों की मार बर्दाश्त करते रहते हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License