NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
बोल | दानिश हुसैन की आवाज़ में राहत इंदौरी की ग़ज़ल
अपने नायाब लबो लहजे की वजह से राहत साब सामईन के दिलों पर एक अलग छाप छोड़ते थे। उनकी मशहूर ग़ज़ल "अगर ख़िलाफ़ है...." एंटी सीएए-एनआरसी प्रदर्शन के दौरान बेहद दोहराई गई, ख़ास तौर पर उसके आख़िरी शेर को लोगों ने कई-कई बार तमाम नारों-भाषणों में शामिल किया।
इंडियन कल्चरल फ़ोरम
26 Aug 2020

इस हफ़्ते हम साझा कर रहे हैं राहत इंदौरी की एक ग़ज़ल। राहत साब 11 अगस्त को हम सब को अलविदा कह गए मगर उनके लफ़्ज़ आज भी ज़िंदा हैं जिनसे प्रतिरोध की ख़ुशबू आती है। अपने नायाब लबो लहजे की वजह से राहत साब सामईन के दिलों पर एक अलग छाप छोड़ते थे। उनकी मशहूर ग़ज़ल "अगर ख़िलाफ़ है...." एंटी सीएए-एनआरसी प्रदर्शन के दौरान बेहद दोहराई गई, ख़ास तौर पर उसके आख़िरी शेर को लोगों ने कई-कई बार तमाम नारों-भाषणों में शामिल किया। 

सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में
किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है... 

दानिश हुसैन पढ़ रहे हैं राहत इंदौरी की इस ग़ज़ल को और दानिश की भाषा पर मज़बूत पकड़, लबो लहजा और शायरी की शानदार समझ से इस ग़ज़ल में नए नए म'आनी जुड़ गए हैं।


बाकी खबरें

  • तालिबान के काबुल पर नियंत्रण के बाद अफ़ग़ान नागरिकों के मानवाधिकारों को लेकर चिंताएं बढ़ीं
    पीपल्स डिस्पैच
    तालिबान के काबुल पर नियंत्रण के बाद अफ़ग़ान नागरिकों के मानवाधिकारों को लेकर चिंताएं बढ़ीं
    16 Aug 2021
    यूएस सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट ने यहां से जल्दबाज़ी में वापसी का बचाव करने की कोशिश की और 1975 में हार के बाद वियतनाम से अमेरिका की वापसी के साथ इसकी तुलना का खंडन किया।
  • फाइल फोटो। 2 मार्च, 2006 को दिल्ली में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश और भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह।
    प्रबीर पुरकायस्थ
    12 साल में कितना सफल हुआ भारत-अमेरिका नाभिकीय सौदा?
    16 Aug 2021
    भारत-अमेरिका नाभिकीय सौदे को भारतीय जनता के बीच यह कहकर चलाया गया था कि यह जादुई छड़ी है, जिसके हाथ में आने की देर है, भारत की ऊर्जा संबंधी जरूरतें पलक झपकते ही पूरी हो जाएंगी और बार-बार होने वाले…
  • बंपर उत्पादन के बावजूद भुखमरी- आज़ादी के 75 साल बाद भी त्रासदी जारी
    सुबोध वर्मा
    बंपर उत्पादन के बावजूद भुखमरी- आज़ादी के 75 साल बाद भी त्रासदी जारी
    16 Aug 2021
    जब भारत अपने 75वें स्वतंत्रता वर्ष में प्रवेश कर चुका है, तब भी हमारे यहां कई लोग भूखे हैं, जबकि खाद्यान्न अनाजों की हमारे यहाँ बंपर पैदावार होती है।
  • Antonio Guterres
    एपी
    संयुक्त राष्ट्र ने अफ़ग़ानिस्तान में सभी से 'संयम' दिखाने का आग्रह किया
    16 Aug 2021
    तालिबान के एक प्रवक्ता एवं वार्ताकार ने कहा कि चरमपंथी संगठन अफगानिस्तान में ‘‘खुली, समावेशी इस्लामी सरकार” बनाने के मकसद से वार्ता कर रहा है।
  • लोकतंत्र, फ़ासला, असमानता और अनादर
    उपेंद्र बक्सी
    लोकतंत्र, फ़ासला, असमानता और अनादर
    16 Aug 2021
    लोकतंत्र शासन का एकमात्र ऐसा स्वरूप है जो शासन की कला और शिल्प को एक सम्मानजनक फ़ासले पर विकसित करता है और हमेशा उस उपलब्धि को हासिल करना चाहता है जिसे दार्शनिक जॉन रॉल्स ने "ज़िम्मेदार बहुलवाद" के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License