NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दिल्ली दंगे: ‘शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों का बेशर्म अपराधीकरण बंद करो’
रविवार के दिन सीपीआई (एम), जिसके महासचिव सीताराम येचुरी को दिल्ली दंगों के मामले में एक पूरक आरोप-पत्र में नामजद किया गया है, एवं प्रोफेसर अपूर्वानन्द की ओर से दिल्ली पुलिस द्वारा की गई “निर्लज्ज” कार्यवाही के प्रति भर्त्सना के साथ बयान आये हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
14 Sep 2020
दिल्ली दंगे

कई सामाजिक कार्यकर्ताओं को दिल्ली दंगों के मामले की पूरक चार्जशीट में सह-साजिशकर्ताओं के तौर पर शामिल किये जाने की रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए भारत की कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (सीपीआई-एम) के पोलित ब्यूरो ने रविवार को जारी अपने बयान में इस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के “निर्लज्ज” अपराधीकरण किये जाने की तीव्र भर्त्सना की है।

दिल्ली पुलिस ने फरवरी दंगों के मामले में सीपीआई-एम महासचिव सीताराम येचुरी, स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव, अर्थशास्त्री जयती घोष और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद पर सीएए विरोधी प्रदर्शनकर्ताओं को “उकसाने और संगठित” करने के आरोप मढ़ते हुए एक पूरक आरोप पत्र में नामजद करने की खबरें प्रकाश में आई हैं। अपूर्वानंद ने भी अपने एक बयान के माध्यम से इस कार्यवाही को सीएए-विरोधी प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने के लिए उन्हें "बदनाम करने वाली कवायद" करार दिया है।

सीपीआई-एम के बयान में कहा गया है “भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की पोलित ब्यूरो दिल्ली पुलिस की बेशर्मी को देखकर हैरान है जोकि गृह मंत्री अमित शाह के अधीन काम करती है, जिसने प्रमुख राजनीतिक नेतृत्वकारी व्यक्तित्वों के साथ शिक्षाविदों, संस्कृति कर्मियों और कार्यकर्ताओं को फरवरी माह के दौरान उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए स्तब्धकारी सांप्रदायिक हिंसा में फंसाने की कोशिश की है। इस प्रकार के घटिया पक्षपातपूर्ण और प्रतिशोध वाले कृत्य की जितनी भी भर्त्सना की जाए वह कम है।”

बयान में कहा गया है कि “इन प्रतिष्ठित हस्तियों के नाम दिल्ली पुलिस की ओर से दर्ज की गई एफआईआर 50/20 की अनुपूरक चार्जशीट में निकलकर आ रहे हैं, जिसमें सीएए-एनआरसी के विरोध में शामिल प्रदर्शनकारियों को उकसाने में उनकी कथित भूमिका को दिखाया गया है। यह कृत्य पुलिस और अन्य केंद्रीय एजेंसियों जैसे कि सीबीआई, एनआईए, ईडी के सरासर दुरुपयोग के बढ़ते पैटर्न के अनुरूप है, जिसमें महत्वपूर्ण विरोधी हस्तियों को फंसाने और बदनाम करने की कोशिशें लगातार की जाती रही हैं। इस पैटर्न के जरिये ऐसे लोगों को खूंखार एनएसए, यूएपीए और देशद्रोह की धाराओं के अंतर्गत उत्पीड़न और बंदी बनाये जाने के उपक्रम को अंजाम दिया जाता है, जो सरकार द्वारा शक्तियों के बलात दुरूपयोग का पुरजोर विरोध करते आये हैं, जैसा कि संविधान द्वारा निर्दिष्ट ठहराया गया है।”

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की ओर से जारी बयान

इसके साथ ही पार्टी ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर दिल्ली दंगों को लेकर अपने खुद के नैरेटिव की पटकथा के अनुसार इसे नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ "गहरी साजिश" के रूप में चित्रित करने का आरोप लगाया है।

दिल्ली पुलिस से सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों के अपराधीकरण को बंद करने का अनुरोध करते हुए अपूर्वानंद ने इसे "नागरिकता के लिए पूरी तरह से वैध कार्य" बताया है। वे कहते हैं "पूरक सीएस कानूनी मामले में सुधार नहीं लाता है, बल्कि इसका उद्येश्य सिर्फ राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने, प्रदर्शनकारियों को बदनाम करने, और हम सभी के नामों को इस बदनाम करने वाले एजेंडे के तहत इस्तेमाल में लाया जा रहा है। उनके द्वारा विरोध प्रदर्शन की योजना बनाने के उनके कृत्य को हिंसा की साजिश के तौर पर देखने की कोशिश की जा रही है, जिसमें अन्य लोगों के साथ मुझे बिना किसी कानून या तथ्यों के आधार पर उस उद्येश्य को उकसाने वालों के तौर पर पेश किया जा रहा है।

हाल ही के पूरक आरोप पत्र पर जारी वक्तव्य

Statement on the recent supplementary chargesheet pic.twitter.com/jV9chT78sy

— Apoorvanand अपूर्वानंद (@Apoorvanand__) September 13, 2020

“फरवरी की हिंसा के वास्तविक कृत्य के पीछे की सच्चाई का पता लगाने के लिए हम अभी भी दिल्ली पुलिस द्वारा जांच आरंभ करने की प्रतीक्षा में हैं।”

Delhi riots
delhi police
Sitaram yechury
yogendra yadav
Jayati Ghosh
Julio Ribeiro
Delhi Police Commissioner
BJP
kapil MIshra
anurag thakur
Parvesh Verma
Pinjra Tod

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • tourism sector
    भाषा
    कोरोना के बाद से पर्यटन क्षेत्र में 2.15 करोड़ लोगों को रोज़गार का नुकसान हुआ : सरकार
    15 Mar 2022
    पर्यटन मंत्री ने बताया कि सरकार ने पर्यटन पर महामारी के प्रभावों को लेकर एक अध्ययन कराया है और इस अध्ययन के अनुसार, पहली लहर में 1.45 करोड़ लोगों को रोजगार का नुकसान उठाना पड़ा जबकि दूसरी लहर में 52…
  • election commission of India
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली नगर निगम चुनाव टाले जाने पर विपक्ष ने बीजेपी और चुनाव आयोग से किया सवाल
    15 Mar 2022
    दिल्ली चुनाव आयोग ने दिल्ली नगर निगम चुनावो को टालने का मन बना लिया है। दिल्ली चुनावो की घोषणा उत्तर प्रदेश और बाकी अन्य राज्यों के चुनावी नतीजों से पहले 9 मार्च को होनी थी लेकिन आयोग ने इसे बिल्कुल…
  • hijab
    सीमा आज़ाद
    त्वरित टिप्पणी: हिजाब पर कर्नाटक हाईकोर्ट का फ़ैसला सभी धर्मों की औरतों के ख़िलाफ़ है
    15 Mar 2022
    इस बात को दरअसल इस तरीके से पढ़ना चाहिए कि "हर धार्मिक रीति का पालन करना औरतों का अनिवार्य धर्म है। यदि वह नहीं है तभी उस रीति से औरतों को आज़ादी मिल सकती है, वरना नहीं। "
  • skm
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    एमएसपी पर फिर से राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेगा संयुक्त किसान मोर्चा
    15 Mar 2022
    एसकेएम ने फ़ैसला लिया है कि अगले महीने 11 से 17 अप्रैल के बीच एमएसपी की क़ानूनी गारंटी सप्ताह मना कर राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरूआत की जाएगी। 
  • Karnataka High Court
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हिजाब  मामला: हिजाब इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने खारिज की याचिका
    15 Mar 2022
    अदालत ने अपना फ़ैसला सुनते हुए यह भी कहा कि शिक्षण संस्थानों में यूनिफ़ॉर्म की व्यवस्था क़ानूनी तौर पर जायज़ है और इसे संविधान के तहत दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन नहीं कहा जा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License