NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
दिल्ली: ट्रेड यूनियन के साइकिल अभियान ने कामगारों के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा शुरू करवाई
ट्रेड यूनियनों की मुख्य मांग में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 26000 न्यूनतम भत्ता और चार लेबर कोड की वापसी शामिल हैं।
रौनक छाबड़ा
18 Oct 2021
workers

नई दिल्ली: पूर्वी दिल्ली औद्योगिक क्षेत्र में पटपड़गंज के लाल बाबू टी स्टॉल पर कामगारों की भीड़ लगी है। चिलचिलाती धूप वाले शनिवार को आधी दोपहरी निकल चुकी है। यह वह वक़्त होता है जब आसपास के प्रतिष्ठानों में काम करने वाले लोग अपने खाने के लिए आते हैं। इनमे से ज्यादातर लोग उत्पादों  के निर्माण और उनकी पैकेजिंग में लगे हुए हैं। इनमे से कई लोगों की यह दिन में पहली खुराक होती है। कुछ लोग खाना खाते हैं, तो कुछ सिर्फ चाय नाश्ते से काम चला लेते हैं। 

लेकिन शनिवार को दोपहर की इस छुट्टी में औद्योगिक कामगारों का ध्यान किसी चीज ने खींचा। उपरोक्त उल्लेखित दुकान पर 10 लोग अपनी साईकिलें बगल में टिकाए खड़े थे।

थोड़ी देर बाद इस समूह के एक सदस्य ने स्पीकर से कहा, "केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए 25 नवंबर को होने वाली हड़ताल में शामिल हों।" यह आवाज सेंट्रल ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन के पुष्पेन्द्र सिंह की थी।

राष्ट्रीय राजधानी में मजदूरों को लगातार नजरअंदाज करने के विरोध में CITU की दिल्ली एनसीआर इकाई ने यह हड़ताल शुरू की है, जिसका आह्वान केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने किया था।  संगठन में दिल्ली इकाई में महासचिव अनुराग सक्सेना कहते हैं, "दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कामगारों के मुद्दों को ना तो दिल्ली और ना ही केंद्र सरकार हल कर रही है। इसके चलते ट्रेड यूनियनों को अपने आंदोलन तेज करने पड़े।"

इस कार्यक्रम के तहत ट्रेड यूनियन के सदस्य अगले 15 दिनों तक सायकिल चलाएंगे और दिल्ली के अलग अलग औद्योगिक क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने के लिए जाएंगे। CITU झिलमिल, वजीरपुर, बादली, बवाना, नरेला, ओखला, मंगोलपुरी के अलावा दूसरी जगहों के साथ साथ कुछ झुग्गी झोपडिय़ों वाली कॉलोनी में अपने सदस्य भेजेगी।

पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर डेयरी फार्म से शनिवार को इसकी शुरुआत हुई। इसके तहत कार्यकर्ता अपनी लाल ड्रेस में हाथों में पर्चा लिए हुए त्रिलोकपुरी, कल्याणपुरी, विनोद नगर और पटपड़गंज के आसपास वाली इलाकों में गए।

कोविड 19 से बुरे तरीके से प्रभावित हुई अर्थव्यवस्था अब जब सुधार के संकेत दे रही है, तब कामगारों पर इसके दीर्घकालीन असर दिखने शुरू हो गए हैं। महामारी में उनके भत्ते में जो कटौती हुई थी, उसकी भरपाई अब तक नहीं हुई है। बल्कि कई कामगार बताते हैं कि उनके काम की स्थितियां अब और भी शोषण वाली हो गई हैं। आवश्यक वस्तुओं में हाल में को इज़ाफ़ा हुआ है, उससे भी स्थिति बदतर हुई है।

संगठनों की प्रमुख मांग है कि राजधानी में न्यूनतम भत्ता 26000 रखा जाए और तीनों श्रम संहिताओं को वापिस लिया जाए। संगठनों ने हर महीने असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए 7500 रुपए की नगद सहायता की भी मांग की है।

सक्सेना ने न्यूज़क्लिक को बताया कि सायकिल कैंपेन के ज़रिए यूनियन उन वर्गों के ज्वलंत मुद्दे उठाने कर लक्ष्य रखती है, जिन तक अब तक पहुंच नहीं बन पाई है। शनिवार को तब उसकी झलक मिली , जब पटपड़गंज में औद्योगिक क्षेत्र के मजदूरों में विमर्श शुरू हो गया।

35 साल के सुधीर कुमार सिंह कहते है, "जब यूनियन 26000 रुपए को न्यूनतम भत्ता दर बनाने की बात कहता है, तो वह बिल्कुल सही है। अभी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक अकुशल मजदूर कि भत्ता दर 15908 रुपए है।

पॉलीटेक्निक और बीटेक में डिग्रीधारी सिंह कहते हैं कि कोई भी इतना पैसा नहीं देता। यहां तक कि मैं खुद 14000 महीने का कमाता था।" सिंह फिलहाल एक इलेक्ट्रिकल सामानों को सुधारने की दुकान पर काम करते थे। वह कहते हैं, "लॉकडाउन के बाद मेरी नौकरी चली गई, कुछ ना करने से बेहतर यही, जिसमें कम से कम पैसे तो मिलते हैं।

उनके बगल में खड़े अर्पित ने भी अपनी कहानी बताई। वे कहते हैं, "मुझे स्कूल छोड़ना पड़ा, क्योंकि लॉकडाउन के बाद घर चलाना मुश्किल हो रहा था।" 18 साल के अर्पित उत्तरप्रदेश में बदायूं जिले से हैं। वे फिलहाल एक ग्लास निर्माता इकाई में काम करते हैं, जहां उन्हें 8000 रुपए हर महीने के मिलते हैं।

वह नाराजगी के साथ कहते हैं, "वह पैसे भी मुझे तब मिलते हैं,  जब मैं 10 घंटे एक दिन में काम करता हूं। लेकिन इसके बावजूद  मैं घर पर बहुत ज्यादा पैसे नहीं भेज पाता, क्योंकि खाने की चीजों के दाम बहुत बढ़ रहे हैं।" इसे समझाने के लिए वो चाय की कीमत का उदाहरण देते हैं। वह कहते हैं, "एक कप चाय की कीमत अब 5 रुपए से बढ़कर 10 रुपए ही चुकी है।"

रंजीत कुमार राव बिहार में सहरसा से आते हैं। वे भी इस बात से सहमत हैं। दैनिक मजदूरी करने वाले रंजीत कहते हैं की  काम ना होने और मजदूरी कम होने से शहर में रहना मुश्किल होता जा रहा है। रंजीत कहते हैं, "मुझे पहले 500-600 रुपए मिल जाते थे। पर अब 400-500 ही मिल पाते हैं। फिर भी कई बार ऐसा होता है कि किसी दिन मुझे कोई काम ही ना मिले"

इस लेख को मूल अंग्रेजी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

Delhi: Trade Union’s Cycle Campaign Sparks Conversations over ‘Burning Issues’ Among Workers

Delhi
CITU
strike
Patparganj Industrial Area
Industrial Workers
Central Government
delhi government

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

दिल्ली : फ़िलिस्तीनी पत्रकार शिरीन की हत्या के ख़िलाफ़ ऑल इंडिया पीस एंड सॉलिडेरिटी ऑर्गेनाइज़ेशन का प्रदर्शन

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ़ श्रमिकों का संघर्ष जारी, 15 महीने से कर रहे प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?


बाकी खबरें

  • election
    राज वाल्मीकि
    चुनाव 2022: ‘हमारा वोट सबको चाहिए उन्हें भी जो हमसे भेदभाव करते हैं’
    10 Feb 2022
    ‘हमारा वोट मांगने तो हर पार्टी के लोग हमारे पास आते हैं। कथित उच्च जाति के लिए हम दलित और अछूत होते हैं। हम से छूआछूत और भेदभाव करते हैं। पर चुनाव के समय वे यह भूल जाते हैं। क्योंकि हमारे वोट की तो…
  • up elections
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    गुंडागीरी और लोकतंत्रः समाज को कैसे गुंडे चाहिए
    10 Feb 2022
    अगर अपराधी अपनी जाति का है तो वह साधु संत है और अगर दूसरी जाति और धर्म का है तो वह गुंडा है, माफिया है!!
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: यूपी चुनाव और गोदी मीडिया के सवाल
    10 Feb 2022
    गोदी मीडिया शायद पूरी तरह ज़मीन से कट चुका है, तभी तो महंगाई, बेरोज़गारी और खेती-किसानी के संकट के दौर में भी वह यूपी के मतदाता से हिजाब पर सवाल पूछता है।
  • jammu and kashmir
    अनीस ज़रगर
    राइट्स ग्रुप्स ने की पत्रकार फ़हाद शाह की रिहाई और मीडिया पर हमलों को बंद करने की मांग
    10 Feb 2022
    पत्रकार फ़हाद शाह की गिरफ़्तारी को कई लोग कश्मीर में मीडिया पर हमले के रूप में देख रहे हैं, जहां पुलिस अधिकारियों ने हाल के वर्षों में कई मीडिया कर्मियों पर मुकदमा दर्ज कर और उन्हें परेशान किया गया है।
  • ग्राउंड रिपोर्ट
    न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
    ग्राउंड रिपोर्टः जाट-मुस्लिम गठजोड़ बना चुंबक, बिगड़ रहा भाजपा का खेल, मुखर हुईं मुस्लिम आवाज़ें
    10 Feb 2022
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने बागपत के ढिकौली गांव में सपा-रालोद गठबंधन के मुस्लिम उम्मीदवार के पक्ष में बनते माहौल और हापुड़, मुरादाबाद व अलीगढ़ में मुस्लिम आवाजों की राजनीतिक…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License