NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
स्वामी प्रसाद मौर्य का जाना: ...फ़र्क़ साफ़ है
यह केवल दल-बदल या अवसरवाद का मामला नहीं है, यह एक मंत्री ने इस्तीफ़ा दिया है, वो भी श्रम मंत्री ने। यह योगी सरकार की विफलता ही दिखाता है। इसका जवाब योगी जी से लिया ही जाना चाहिए।
मुकुल सरल
12 Jan 2022
Maurya
तस्वीर: स्वामी प्रसाद मोर्य के ट्विटर हैंडल से साभार

अब आप स्वामी प्रसाद मौर्य को भले ही मौसम विज्ञानी कहें या अवसरवादी, या दल-बदलू। लेकिन यह केवल दल-बदल या अवसरवाद का मामला नहीं है, यह एक मंत्री ने इस्तीफ़ा दिया है, वो भी श्रम मंत्री ने। यह योगी सरकार की विफलता ही दिखाता है। इसका जवाब योगी जी से लिया ही जाना चाहिए।

मौर्य जी ने जो वजह या जो सवाल अपने त्यागपत्र में उठाए हैं वे गंभीर हैं। हालांकि सौ सवाल उनसे भी पूछे जा सकते हैं कि जब योगी सरकार ने दलितों, पिछड़ों, किसानों, बेरोज़गार नौजवानों की इतनी उपेक्षा की, छोटे-लघु एवं मध्यम श्रेणी के व्यापारियों का भी ख़्याल नहीं रखा तो वे पांच साल से बीजेपी में क्या कर रहे थे। एक श्रम मंत्री के तौर पर क्यों बने हुए थे। इन पांच सालों में इस सबके ख़िलाफ़ उनकी आवाज़ पुरज़ोर तरीके से क्यों नहीं निकली। जब साल भर से किसान यूपी गेट समेत दिल्ली की सीमाओं पर जमे थे, तब उन्होंने एक बार भी उनके पक्ष या तीन कृषि क़ानूनों के विरोध में क्यों नहीं एक बार भी बयान दिया। यूपी में बेरोज़गार नौजवान लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं, शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी लाठियां खा रहे हैं, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं बोला। कोविड काल में दिल्ली-मुंबई से जब बड़ी संख्या में कामगार यूपी लौटे तो उन्होंने श्रम, सेवायोजन एवं समन्वय मंत्री होने के नाते उनके लिए क्या किया।

दलितों, पिछड़ों, किसानों, बेरोजगार नौजवानों एवं छोटे-लघु एवं मध्यम श्रेणी के व्यापारियों की घोर उपेक्षात्मक रवैये के कारण उत्तर प्रदेश के योगी मंत्रिमंडल से इस्तीफा देता हूं। pic.twitter.com/ubw4oKMK7t

— Swami Prasad Maurya (@SwamiPMaurya) January 11, 2022

ख़ैर, सवाल बहुत हैं, जिनमें से एक का भी जवाब शायद वह नहीं देंगे। सबका एक ही जवाब होगा, उन्होंने कोशिश की लेकिन उनकी सुनी नहीं गई।

लेकिन फिर भी उनके इस्तीफ़े को इसी वजह से हल्के में नहीं लिया जा सकता। वजह...? वजह या फ़र्क़ साफ़ है-

आप नोट कीजिए कि वे एक सत्तारूढ़ पार्टी छोड़कर जा रहे हैं। उस दल को जिसकी अभी केंद्र में सरकार है और कम से कम दो साल और रहने वाली है। यूपी में भी अभी यह तय नहीं हो गया कि भाजपा वापस नहीं आएगी। यानी मोर्य जी ने एक रिस्क लिया है। मंत्री पद छोड़ा है। और अभी भी उनकी इतनी हैसियत है कि बीजेपी में नंबर दो की हैसियत रखने वाले और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उन्हें मनाने को कहते हैं। यानी यह भी नहीं कहा जा सकता कि उनका टिकट कट रहा था। अगर ऐसा होता तो उन्हें मनाने की बात अमित शाह या केशव प्रसाद मोर्य न कहते।

आदरणीय स्वामी प्रसाद मौर्य जी ने किन कारणों से इस्तीफा दिया है मैं नहीं जानता हूँ उनसे अपील है कि बैठकर बात करें जल्दबाजी में लिये हुये फैसले अक्सर गलत साबित होते हैं

— Keshav Prasad Maurya (@kpmaurya1) January 11, 2022

कल को हो सकता है मौर्य जी मान भी जाएं। कोई सौदा पट जाए। कोई और बड़ी हैसियत मिल जाए, या मिलने का वादा हो जाए, क्योंकि अभी उन्होंने मंत्री पद छोड़ा है, पार्टी नहीं। समाजवादी पार्टी में उनके जाने की पूरी संभावना है, लेकिन उन्होंने अभी इसका ऐलान नहीं किया है। हालांकि अखिलेश यादव ने उनका स्वागत कर दिया है। और बाइस में इंकलाब का दावा भी।

सामाजिक न्याय और समता-समानता की लड़ाई लड़ने वाले लोकप्रिय नेता श्री स्वामी प्रसाद मौर्या जी एवं उनके साथ आने वाले अन्य सभी नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का सपा में ससम्मान हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन!

सामाजिक न्याय का इंक़लाब होगा ~ बाइस में बदलाव होगा#बाइसमेंबाइसिकल pic.twitter.com/BPvSK3GEDQ

— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) January 11, 2022

मौर्य जी ने अभी पूरे पत्ते नहीं खोले हैं। उनकी बेटी डॉ. संघमित्रा मौर्य भी यूपी के बदायूं से ही बीजेपी से सांसद हैं। उनका बयान आया है कि वे बीजेपी में ही बनी रहेंगी। अभी कुछ और दबाव भी आ सकते हैं। आरोप भी। कुछ भी संभव है, वैसे भी राजनीति में किसी भी संभावना को लेकर पुख़्ता तौर पर कोई दावा नहीं किया जा सकता, नहीं करना चाहिए। ताज़ा मिसाल तो पश्चिम बंगाल की ही दी जा सकती है। वहां चुनाव से पहले और चुनाव के बाद कैसे लोग इधर से उधर हुए। कैसा खेला हुआ!, हां यह बात अलग है कि दूसरी पार्टियों से बीजेपी में आने पर किसी नेता को दल बदलू या अवसरवादी नहीं कहा जाता। आप गोदी मीडिया और अन्य की भाषा देख सकते हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य जी जब 2017 के चुनाव से पहले बीएसपी से बीजेपी में आए तो उनका काफी गुणगान ही हुआ था। वैसे दलबदल के अलावा उनकी अपनी बड़ी हैसियत है। वे अपने क्षेत्र और समाज के कद्दावर नेता माने जाते हैं। वे किसी भी दल में रहे लेकिन उन्होंने अपने क्षेत्र पडरौना से लगातार तीन बार जीत हासिल कर हैट्रिक बनाई है। यही वजह है कि स्वामी प्रसाद मौर्य के इस्तीफ़े ने न सिर्फ़ यूपी की राजनीति में हलचल मचा दी है, बल्कि बीजेपी और योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सरकार पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं और उस धारणा को बल दिया है कि यूपी में इस बार बीजेपी सरकार नहीं लौट रही है। चुनाव के दौरान सारी लड़ाई परसेप्शन की होती है। धारणाएं और संदेश बाज़ी पलट देते हैं और मौर्य जी अकेले बाहर नहीं आ रहे हैं, बल्कि उनके साथ तीन विधायकों रोशनलाल वर्मा, भगवती सागर, ब्रजेश प्रजापति ने भी इस्तीफ़ा दिया है। ख़बरें हैं कि अभी और दलित-पिछड़े नेता पार्टी छोड़ेंगे। इतना ही नहीं कुछ ब्राह्मण नेता या चेहरे भी योगी जी का साथ छोड़कर जा सकते हैं। बीजेपी के बड़े सहयोगी और योगी सरकार में ही पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रहे ओमप्रकाश राजभर पहले ही बीजेपी का साथ छोड़ चुके हैं। यानी इस बार बीजेपी की हालत कतई अच्छी नहीं है। 2017 से पहले वाली तो बिल्कुल नहीं। फ़र्क साफ़ है... खदेड़ा नहीं तो भगदड़ तो मच ही गई है।

Swami Prasad Maurya
BJP
UP

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • जितेन्द्र कुमार
    मुद्दा: बिखरती हुई सामाजिक न्याय की राजनीति
    11 Apr 2022
    कई टिप्पणीकारों के अनुसार राजनीति का यह ऐसा दौर है जिसमें राष्ट्रवाद, आर्थिकी और देश-समाज की बदहाली पर राज करेगा। लेकिन विभिन्न तरह की टिप्पणियों के बीच इतना तो तय है कि वर्तमान दौर की राजनीति ने…
  • एम.ओबैद
    नक्शे का पेचः भागलपुर कैंसर अस्पताल का सपना अब भी अधूरा, दूर जाने को मजबूर 13 ज़िलों के लोग
    11 Apr 2022
    बिहार के भागलपुर समेत पूर्वी बिहार और कोसी-सीमांचल के 13 ज़िलों के लोग आज भी कैंसर के इलाज के लिए मुज़फ़्फ़रपुर और प्रदेश की राजधानी पटना या देश की राजधानी दिल्ली समेत अन्य बड़े शहरों का चक्कर काट…
  • रवि शंकर दुबे
    दुर्भाग्य! रामनवमी और रमज़ान भी सियासत की ज़द में आ गए
    11 Apr 2022
    रामनवमी और रमज़ान जैसे पर्व को बदनाम करने के लिए अराजक तत्व अपनी पूरी ताक़त झोंक रहे हैं, सियासत के शह में पल रहे कुछ लोग गंगा-जमुनी तहज़ीब को पूरी तरह से ध्वस्त करने में लगे हैं।
  • सुबोध वर्मा
    अमृत काल: बेरोज़गारी और कम भत्ते से परेशान जनता
    11 Apr 2022
    सीएमआईए के मुताबिक़, श्रम भागीदारी में तेज़ गिरावट आई है, बेरोज़गारी दर भी 7 फ़ीसदी या इससे ज़्यादा ही बनी हुई है। साथ ही 2020-21 में औसत वार्षिक आय भी एक लाख सत्तर हजार रुपये के बेहद निचले स्तर पर…
  • JNU
    न्यूज़क्लिक टीम
    JNU: मांस परोसने को लेकर बवाल, ABVP कठघरे में !
    11 Apr 2022
    जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में दो साल बाद फिर हिंसा देखने को मिली जब कथित तौर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से संबद्ध छात्रों ने राम नवमी के अवसर कैम्पस में मांसाहार परोसे जाने का विरोध किया. जब…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License