NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
एक अध्ययन : आख़िर क्यों करते हैं किसान आत्महत्या?
सबसे अधिक आत्महत्याएं उन किसानों ने की, जिनके पास डेढ़ एकड़ से लेकर तीन एकड़ तक ज़मीन थी। यानी जिनके पास खेती के लिए बहुत कम ज़मीन थी।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
24 Aug 2019
farmers suicide

आज के जमाने में खेती-किसानी का जितना अधिक जुड़ाव रोजी-रोटी से नहीं है उससे अधिक जुड़ाव खुदकुशी से है। कोई भी अपनी जिंदगी जीने के लिए खेती-किसानी का चुनाव नहीं करना चाहता। जमाने की व्यवस्थाओं ने किसानी को इस हद तक बर्बाद कर दिया है कि जिनके पास बहुत कम जमीन है, वे मरते हुए जिंदगी जीने के लिए मजबूर होते हैं। और जो मर जाते हैं,उनसे जुड़े आंकड़े पढ़कर जमाना कुछ वक्त ग़मगीन होता है और फिर उसे भूल जाता है। सरकारों से लेकर समाज तक को वह पीड़ा महसूस नहीं होती,जो किसी किसान परिवार में कमाई के एकमात्र स्रोत यानी किसान के मर जाने पर उभरती हैं। इन पीड़ा को व्याख्यायित करने वाली नेशनल ह्यूमन राइट्स से मान्यता प्राप्त Agrarian Crisis and Farmer Suicide के नाम से एक रिपोर्ट आयी है। 

इस रिपोर्ट का अध्ययन खेती-किसानी की वजह से आत्महत्या कर चुके 200 लोगों के परिवारों से किये गए सवाल जवाब पर आधारित है। यह 200 लोगों के परिवार महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना से जुड़े हैं, जहां पर किसानी की वजह से सबसे अधिक आत्महत्या होती है। यह अध्ययन नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ रूरल डेवलपमेंट और पंचायती राज द्वारा करवाया गया है। 

इस रिपोर्ट के तहत तकरीबन 27 फीसदी परिवार साहूकारों से कर्ज़ लेकर जीवन जीने के लिए मजबूर हुए हैं। तकरीबन 21 फीसदी परिवारों ने बैंकों से क़र्ज़ लिया है। तकरीबन 13 फीसदी परिवारों ने दूध और अण्डों जैसी जरूरी खाद्य पदर्थों का सेवन करना बंद कर दिया है। तकरीबन 8 फीसदी परिवारों ने अपनी स्थायी सम्पतियाँ बेच दी और तकरीबन 6 फीसदी परिवार बंधुआ मजदूरी के लिए मजबूर हो गए हैं। यह रिपोर्ट बताती है कि मध्य प्रदेश के रेवा जिले में साहूकारों का कर्ज़ चुकाने के लिए किसान परिवार के बच्चे बंधुआ मजदूरी के लिए मजबूर हुए हैं। जिन्हें दिन भर काम कारने के बाद आटे या चावल की चार से पांच थैलियां दी जाती हैं।  

मौजूदा भाजपा सरकार ने साल 2022 तक किसानों की आमदनी दो गुनी करने की बात हर मंच पर कही है। भले ही उनके पास इस तरफ बढ़ते दिखने के कोई प्रामाणिक आंकड़े न हों। ऐसे में हकीकत यह है कि घर के मुखिया के खुदकुशी करने के बाद इन परिवारों की साल 2016 -17 में मासिक आमदनी केवल 3553 रुपये रही। जो सबसे छोटे जमीन जोतदारों की मासिक आय 4561 रुपये से भी कम है। 

इन परिवारों में से तकरीबन 92 परिवारों का किसान बीमा योजना में बीमा नहीं है। बाढ़ और सूखे के समय फसल बर्बाद और कीमत न मिलने पर और कीटनाशकों से फसल बर्बाद हो जाने पर पिछले तीन सालों में इन्होंने कई तरह की आर्थिक मार झेली है। कुल कर्ज़ में किसानी से जुड़े खर्चे को पूरा करने के लिए इनमें से 32 फीसदी कर्ज़ की हिस्सेदारी है। खाने से जुड़े खर्च के लिए 18 फीसदी, सामाजिक और धार्मिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए 15 फीसदी और घर बनाने और शादी-ब्याह के खर्च के लिए 13 फीसदी क़र्ज़ की हिस्सेदारी है। इन परिवारों से जुड़े लोगों में तकरीबन 70 फीसदी लोग 20 से 50 साल के आयु-वर्ग में आते हैं। 59 फीसदी अशिक्षित हैं। 

इस सर्वे से एक बात और निकलकर सामने आयी है कि परिवार के किसी सदस्य की फसल कटने के बाद आत्महत्याएं की घटनाएं सबसे अधिक हैं। तकरीबन 47 फीसदी  लोगों की आत्महत्या के पहले की स्थिति यह बताती है कि उन्हें फसल कटाई के बाद कर्जा चुकाने के लिए मजबूर किया गया था। यह आंकड़ें उन नेताओं की बोलती बंद करते हैं जो किसानों की खुदकुशी की बेतुकी वजह बतातें हैं। किसी परिवार के किसी सदस्य की आत्महत्या के बाद मध्य प्रदेश राज्य में ऐसे परिवार में से किसी भी परिवार को सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिली। 

इनमें सबसे अधिक आत्महत्याएं उन किसानों ने की, जिनके पास डेढ़ एकड़ से लेकर तीन एकड़ तक की ज़मीन थी। यानी जिनके पास खेती के लिए बहुत कम ज़मीन थी। तेलंगाना में तो इसलिए भी किसानों ने आत्महत्या की उनके पास कर्ज़ लेने का साधन नहीं था। 
कुल मिलाकर यह पूरी स्थिति बताती है कि किसान या तो आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो रहा है या ऐसी जिंदगी जी रहा है,जिससे जूझते हुए उसे हर रोज मरना पड़ता है।

farmer suicide
Vidharbha
drought
Jalyukt Shivar Abhiyan
Devendra Fadnavis
BJP
Kisan Long March
AIKS
PARI

Related Stories

छोटे-मझोले किसानों पर लू की मार, प्रति क्विंटल गेंहू के लिए यूनियनों ने मांगा 500 रुपये बोनस

तमिलनाडु: छोटे बागानों के श्रमिकों को न्यूनतम मज़दूरी और कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रखा जा रहा है

आख़िर किसानों की जायज़ मांगों के आगे झुकी शिवराज सरकार

किसान-आंदोलन के पुनर्जीवन की तैयारियां तेज़

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन

यूपी चुनाव: पूर्वी क्षेत्र में विकल्पों की तलाश में दलित

बनारस की जंग—चिरईगांव का रंज : चुनाव में कहां गुम हो गया किसानों-बाग़बानों की आय दोगुना करने का भाजपाई एजेंडा!


बाकी खबरें

  • language
    न्यूज़क्लिक टीम
    बहुभाषी भारत में केवल एक राष्ट्र भाषा नहीं हो सकती
    05 May 2022
    क्या हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा देना चाहिए? भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष से लेकर अब तक हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की जद्दोजहद कैसी रही है? अगर हिंदी राष्ट्रभाषा के तौर पर नहीं बनेगी तो अंग्रेजी का…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    "राजनीतिक रोटी" सेकने के लिए लाउडस्पीकर को बनाया जा रहा मुद्दा?
    05 May 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस एपिसोड में अभिसार सवाल उठा रहे हैं कि देश में बढ़ते साम्प्रदायिकता से आखिर फ़ायदा किसका हो रहा है।
  • चमन लाल
    भगत सिंह पर लिखी नई पुस्तक औपनिवेशिक भारत में बर्तानवी कानून के शासन को झूठा करार देती है 
    05 May 2022
    द एग्ज़िक्युशन ऑफ़ भगत सिंह: लीगल हेरेसीज़ ऑफ़ द राज में महान स्वतंत्रता सेनानी के झूठे मुकदमे का पर्दाफ़ाश किया गया है। 
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    गर्भपात प्रतिबंध पर सुप्रीम कोर्ट के लीक हुए ड्राफ़्ट से अमेरिका में आया भूचाल
    05 May 2022
    राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि अगर गर्भपात पर प्रतिबंध लगाने वाला फ़ैसला आता है, तो एक ही जेंडर में शादी करने जैसे दूसरे अधिकार भी ख़तरे में पड़ सकते हैं।
  • संदीपन तालुकदार
    अंकुश के बावजूद ओजोन-नष्ट करने वाले हाइड्रो क्लोरोफ्लोरोकार्बन की वायुमंडल में वृद्धि
    05 May 2022
    हाल के एक आकलन में कहा गया है कि 2017 और 2021 की अवधि के बीच हर साल एचसीएफसी-141बी का उत्सर्जन बढ़ा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License