NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
पर्यावरण
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
पर्यावरण: चरम मौसमी घटनाओं में तेज़ी के मद्देनज़र विशेषज्ञों ने दी खतरे की चेतावनी 
2021 में, चरम मौसमी घटनाओं के चलते महाराष्ट्र, ओडिशा और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में सबसे अधिक मौतें हुई हैं। 
मो. इमरान खान
04 Mar 2022
Environment

निमली (राजस्थान): चरम मौसम की घटनाओं ने समूचे देश भर में लोगों की जानें ली हैं और कई लोगों, मुख्य रूप से गरीबों की आजीविका को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों के द्वारा इस बात का खुलासा किया गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले दिनों में चरम मौसमी घटनाओं में और भी अधिक वृद्धि की संभावना है। 

भारत मौसम विभाग (आईएमडी) के मौसम विज्ञान महानिदेशक, मृत्युंजय महापात्रा ने कहा है कि 2021 में, चरम मौसम की घटनाओं के चलते महाराष्ट्र, ओडिशा और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में सबसे अधिक संख्या में मौतें हुई हैं; जबकि मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तरप्रदेश में सबसे अधिक जिले इससे प्रभावित हुए हैं।

महापात्रा ने सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) द्वारा आयोजित चार दिवसीय अनिल अग्रवाल डायलॉग 2022 में अपनी यह बात रखी।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान गर्मी और शीतलहर और बारिश में उत्तरोतर वृद्धि की प्रवृत्ति देखने को मिल रही है। भारी बारिश और बाढ़ से संबधित घटनाओं में कथित तौर पर 750 से अधिक मौतों का दावा किया गया है। इसी प्रकार, पिछले वर्ष आंधी और आसमानी बिजली गिरने की घटनाओं से 700 से अधिक मौतों का दावा किया गया था।

वक्ताओं में से एक दिल्ली के जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में पर्यावरण विज्ञान मामलों के प्रोफेसर एपी डिमरी ने इसके भयानक चेतावनियों को प्रतिध्वनित किया।

उन्होंने कहा, “ग्लेशियर लगातार खत्म होते जा रहे हैं और उत्तर भारत में नदियों के प्रवाह को लगातार तेज कर रहे हैं। देश के पूर्वी हिस्से की तुलना में उत्तरी हिस्से में ज्यादा बारिश होने की संभावना है। बादल फटने की घटनाएं अब आम होती जा रही हैं, और हमने पाया है कि हिमालय की तलहटी वाले हिस्से में बादल फटने की स्थिति में तेजी 14% बढ़ जाती है।” 

पुणे स्थित भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के एक मौसम विज्ञानी, रॉक्सी मैथ्यू कोल ने इसी सत्र में बोलते हुए अपेक्षाकृत कम ज्ञात समुद्री हीटवेव की परिघटना पर अपना ध्यान केंद्रित किया। उनके अनुसार, वैश्विक स्तर पर देखें तो हिन्द महासागर सबसे तेजी से गर्म होने वाला महासागर है, जो दक्षिण एशियाई क्षेत्र को गंभीर तौर पर प्रभावित करता है। समुद्री हीटवेव के कारण पादपप्लवक की आबादी में लगातार गिरावट हो रही है और समुद्री मत्स्य जीवन को प्रभावित कर रही हैं।

कोल ने कहा, “ग्लोबल वार्मिंग की वजह से तापमान वृद्धि का तकरीबन 93% हिस्सा महासागरों में चला जाता है। गर्म पानी असल में चक्रवातों के लिए एक उर्जा स्रोत का काम करते हैं - और इसकी आवृति, तीव्रता, वेग कुल अवधि को निर्धारित करता है। हमारे शोध से पता चलता है कि हिन्द महासागर में जैसे जैसे गर्मी बढ़ेगी चक्रवातों के लिए यह अधिकाधिक अनुकूल होता चला जायगा। समुद्री हीटवेव की वजह से मूंगा ब्लीचिंग, समुद्री घास के विनाश और सिवार के वनों के नुकसान से समुद्री आवास के विनाश का कारण बनती हैं, जिससे मत्स्य पालन क्षेत्र पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।”

सीएसई की महानिदेशक, सुनीता नारायण खतरे की घंटी बजाते हुए कहती हैं: 

“आईपीसीसी की नवीनतम रिपोर्ट ने इस बात को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है कि विश्व के पास इस नुकसान की भरपाई पर कार्यवाही करने के लिए एक छोटी सी खिड़की मौजूद है—जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पूर्णतया विनाशकारी हैं; विश्व की आधी आबादी इन विनाशकारी परिवर्तनों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील स्थिति में हैं; और यह और भी बदतर, बेहद भयानक होने जा रहा है। रिपोर्ट ने इस बात को स्वीकार किया है कि दुनिया में गरीब इससे सबसे अधिक प्रभावित हैं - वे इसके शिकार हैं, जबकि उन्होंने वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों के भंडार में अपना योगदान नहीं दिया है। और इस रिपोर्ट ने पहली बार बढ़ते जलवायु परिवर्तन से होने वाले विस्थापन के बारे में बात की है। इससे हमारे विश्व में असुरक्षा में वृद्धि होने जा रही है।”

डाउन टू अर्थ के अक्षित संगोमला ने कहा, “2021 एक बेहद महत्वपूर्ण वर्ष था, यह चरम सीमा का वर्ष था। यह अब तक के इतिहास में दर्ज किये गए सात सबसे गर्म वर्षों में से एक था। भारत जलवायु परिवर्तन से होने वाली आपदाओं का अनुभव करने के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर था। और जलवायु परिवर्तन से संबंधित सर्वाधिक संख्या में मौतों के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार बिजली गिरने और आंधी-तूफ़ान से होने वाली घटनाएं रही हैं।”

आईपीसीसी की छठी मूल्यांकन रिपोर्ट के मुताबिक, यदि जीएचजी उत्सर्जन में कोई भारी कटौती नहीं की गई तो अगले 20 वर्षों में पृथ्वी की औसत सतह के तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि और सदी के मध्य तक इसके 2 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाने की संभावना है। यहाँ तक कि यदि उत्सर्जन को 21वीं सदी के मध्य तक नेट जीरो तक भी ले आया जाता है तो, इसके बावजूद 1.5 डिग्री सेल्सियस सीमा में 0.1 डिग्री सेल्सियस का “ओवरशूट” होगा। यदि उत्सर्जन में “आने वाले दशकों में” गहरी कटौती नहीं की गई तो 2 डिग्री सेल्सियस की दहलीज “21वीं सदी के दौरान ही पार” कर जायेगी।

संगोलमा ने कहा, “एक डरावनी भविष्यवाणी यह है कि सितंबर में आर्कटिक के समुद्री-बर्फ से मुक्त हो जाने की संभावना है- जो कि चरम गर्मी का महिना होता है— 2050 से पहले कम से कम एक बार।” 

अनिल अग्रवाल डायलॉग 2022, जैसा कि इस कॉन्क्लेव को कहा जाता है, एक वार्षिक समारोह है। इस वर्ष इसने भारत के कुछ गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए देश भर से करीब 70 पत्रकारों को एक जगह पर एकत्र करने का काम किया है। इस संवाद का उद्घाटन 1 मार्च को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मामलों के मंत्री, भूपेंद्र यादव के द्वारा किया गया, जिन्होंने इस अवसर पर सीएसई और डाउन टू अर्थ पत्रिका की भारतीय पर्यावरण 2022 की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट को भी जारी किया।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें   

Environment: Experts Ring Alarm Bells as Extreme Weather Events Rapidly Increasing in India

Anil Agarwal Dialogue 2022
Environment
climate change
Extreme Weather Events
Climate Change Related Deaths
Environment Challenges in India
Down To Earth
CSE

Related Stories

गर्म लहर से भारत में जच्चा-बच्चा की सेहत पर खतरा

मज़दूर वर्ग को सनस्ट्रोक से बचाएं

लू का कहर: विशेषज्ञों ने कहा झुलसाती गर्मी से निबटने की योजनाओं पर अमल करे सरकार

जलवायु परिवर्तन : हम मुनाफ़े के लिए ज़िंदगी कुर्बान कर रहे हैं

उत्तराखंड: क्षमता से अधिक पर्यटक, हिमालयी पारिस्थितकीय के लिए ख़तरा!

मध्यप्रदेशः सागर की एग्रो प्रोडक्ट कंपनी से कई गांव प्रभावित, बीमारी और ज़मीन बंजर होने की शिकायत

लगातार गर्म होते ग्रह में, हथियारों पर पैसा ख़र्च किया जा रहा है: 18वाँ न्यूज़लेटर  (2022)

‘जलवायु परिवर्तन’ के चलते दुनियाभर में बढ़ रही प्रचंड गर्मी, भारत में भी बढ़ेगा तापमान

दुनिया भर की: गर्मी व सूखे से मचेगा हाहाकार

बनारस में गंगा के बीचो-बीच अप्रैल में ही दिखने लगा रेत का टीला, सरकार बेख़बर


बाकी खबरें

  • Udupi Ground Report
    शिवम चतुर्वेदी
    उडुपी ग्राउंड रिपोर्ट : हिजाब के समर्थन में हैं कॉलेज की हिंदू लड़कियां, पर उन्हें मीडिया से बात करने की इजाज़त नहीं
    18 Feb 2022
    कुसुम ने कहा, "हिंदू लड़के कभी भी भगवा गमछा पहन कर पहले नहीं आया करते थे शायद वह किसी के उकसावे में आकर भगवा गमछा पहन कर आ रहे हैं।"
  • narendra modi
    पार्थ एस घोष
    क्या यह मोदी लहर के ख़ात्मे की शुरूआत है?
    18 Feb 2022
    अब राजनीतिक प्रतिद्वंदी बीजेपी से खौफ़ नहीं खाते हैं, ना ही वह धारणा रही है कि बीजेपी को हराया नहीं जा सकता। अब बीजेपी को समझ आ रहा है कि लोग अच्छे प्रशासन की अपेक्षा रखते हैं।
  • Modi channi kejriwal
    रवीश कुमार
    चन्नी का बयान ग़लत है लेकिन निंदा करने वाले उससे भी ज़्यादा ग़लत हैं
    18 Feb 2022
    प्रधानमंत्री मोदी बताएं कि तालाबंदी के समय यूपी और बिहार के मज़दूर जब दर-दर भटक रहे थे तब वे क्या कर रहे थे? पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह ने तो बयान दिया है लेकिन हरियाणा की खट्टर सरकार ने तो…
  • yogi
    भाषा
    सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध जारी 274 भरपाई नोटिस वापस लिए गए: उप्र सरकार
    18 Feb 2022
    न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्यकान्त की पीठ ने कहा कि राज्य सरकार करोड़ों रुपये की पूरी राशि वापस करेगी जो 2019 शुरू की गई कार्रवाई के तहत कथित प्रदर्शनकारियों से वसूली गई थी।
  • Budget 2022
    भरत डोगरा
    जलवायु बजट में उतार-चढ़ाव बना रहता है, फिर भी हमेशा कम पड़ता है 
    18 Feb 2022
    2022-23 के केंद्रीय बजट में जलवायु परिवर्तन, उर्जा नवीनीकरण एवं पर्यावरणीय संरक्षण के लिए जिस मात्रा में समर्थन किये जाने की आवश्यकता है, वैसा कर पाने में यह विफल है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License