NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
फ़ैक्ट चेकः योगी ने कहा मुज़फ़्फ़रनगर दंगों में 60 हिंदू मारे गये थे, दावा ग़लत है
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दावों की सच्चाई क्या है? दंगे में कितने लोगों की हत्या हुई? मृतकों में हिंदुओ की संख्या कितनी है, मुस्लिमों की संख्या कितनी है? यह पता लगाने के लिए आइए करते हैं पड़ताल—
ज़ाकिर अली त्यागी
02 Feb 2022
kairana

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के दौरान लगातार मुज़फ़्फ़रनगर दंगे की बात हो रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दंगे के बहाने विपक्ष पर लगातार हमलावर हो रहे हैं। योगी आदित्यनाथ समाजवादी सरकार पर 2013 के दंगे में हिंदुओं को मारने और गिरफ्तार करने का आरोप लगा रहे हैं।

 योगी आदित्यनाथ के दावों की सच्चाई क्या है? दंगे में कितने लोगों की हत्या हुई? मृतकों में हिंदुओ की संख्या कितनी है, मुस्लिमों की संख्या कितनी है? यह पता लगाने के लिए फ़ैक्ट चैक कर पड़ताल की। आइये जानते है-

यूपी के वर्तमान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 29 जनवरी को अपने एक ट्वीट में लिखा कि "मुजफ्फरनगर दंगे में हिंदुओं को बंदूकों से भूना गया था, 60 से अधिक हिंदू मारे गए थे और 1,500 से अधिक जेल में बंद किए गए थे, गांव के गांव खाली हो गए थे,सपा की यही 'पहचान' है"!

मुजफ्फरनगर दंगे में हिंदुओं को बंदूकों से भूना गया था।

60 से अधिक हिंदू मारे गए थे और 1,500 से अधिक जेल में बंद किए गए थे।

गांव के गांव खाली हो गए थे।

सपा की यही 'पहचान' है।

— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) January 29, 2022

यही बात उन्होंने अपने भाषणों में भी दोहराई है।

सपा सरकार के समय मुजफ्फरनगर दंगों में 60 से अधिक हिंदू मारे गए थे और 1500 हिंदुओं को जेल में बंद कर दिया था

राम भक्तों के ख़ून से इनकी टोपी रँगी हुई है : CM @myogiadityanath#UPElections2022 pic.twitter.com/oS8WOYzfHQ

— News24 (@news24tvchannel) January 29, 2022

लेखक ने इस दावे का फ़ैक्ट चेक करने के लिए मुज़फ्फरनगर दंगे में कितने हिन्दू और मुस्लिम मारे गये,कितने मुक़दमे दर्ज और कितनी गिरफ्तारी हुई यह पता लगाने की कोशिश की है!

मुज़फ़्फ़रनगर दंगे में 60 हिंदुओं की मौत का दावा ग़लत है!

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ मुज़फ़्फ़रनगर में 27 अगस्त 2013 से 17 सितंबर 2013 (21 दिन ) तक चले इस दंगे में कुल 62 लोगों की मौत दर्ज हुई थी।

इनमें से 42 मृतक मुस्लिम और 20 हिन्दू वर्ग से थे।

मुज़फ़्फ़रनगर एवं उसके आसपास के क्षेत्रों में हुए दंगों में लूट,आगजनी और बलात्कार के कुल 510 केस दर्ज किए गए थे।

4500 से ज़्यादा लोग नामज़द और 1480 लोग गिरफ्तार हुए थे।

इस बारे में सरकारी दस्तावेज़ हासिल नहीं हो पाए, हालांकि सभी मीडिया रिपोर्ट सरकारी आंकड़ों के आधार पर ही लिखी गई हैं। यदि आप गूगल पर भी मुज़फ़्फ़रनगर दंगे के बारे में सर्च करते है तो यही आंकड़ा मिलता है। वीकिपीडिया के अनुसार भी दंगे में 62 लोगों की जान गई जिसमें 42 मृतक मुस्लिम तो 20 हिन्दू है!

ऑनलाइन पोर्टल नवजीवन के मुताबिक़ कुल दर्ज 510 मामलों में से 175 मामलों में आरोप पत्र दाखिल किया गया है, 165 मामलों में अंतिम रिपोर्ट जमा की गई और 170 मामलों को खारिज कर दिया गया है।

अब यूपी की योगी सरकार सीआरपीसी की धारा 321 के तहत यूपी सरकार में गन्ना मंत्री सुरेश राणा व सरधना से बीजेपी विधायक संगीत सोम समेत 77 मुकदमे बिना कोई ठोस कारण बताये वापस ले चुकी है। यूपी सरकार ने 24 अगस्त 2021 को सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर केस वापस लेने की जानकारी दी थी।

जनसत्ता की रिपोर्ट के मुताबिक़ इस दंगे के कारण 40 हज़ार से ज़्यादा लोगों को अपने घर छोड़कर पलायन कर गए थे। बड़ी संख्या में लोगों ने राहत कैंपों में शरण ली थी, जिन्हें बाद में कालोनी बनाकर बसाया गया व कुछ पीड़ित परिवार आज भी मुज़फ़्फरनगर के शाहपुर व शामली में विस्थापित हैं। दंगे के बाद गठित जांच आयोग ने कुछ भाजपा नेताओं की भूमिका को कठघरे में खड़ा किया था।

क्या मुज़फ़्फ़नगर दंगे के बाद हिंदुओ ने पलायन किया?

मुज़फ़्फ़रनगर में कवाल कांड के बाद पूरा क्षेत्र आगज़नी की चपेट में आ गया तो ख़ौफ़ज़दा मुस्लिम समुदाय ने रातों रात पलायन करना शुरू कर दिया। सरकार की तरफ़ से 10 राहत शिविर बनाये गए जिसमें 40 हज़ार से अधिक पीड़ितों ने शरण ली और इनमें पीड़ितों में सभी मुसलमान थे। मुज़फ़्फ़रनगर के कुटबी गांव में दंगे के दौरान एक ही रात में मुस्लिम समुदायों के आठ लोगों की हत्या हुई। इलाके के मुसलमान ख़ौफ़ज़दा होकर गांव को छोड़ने लगे और शाहपुर के राहत शिविर में शरण लेने लगे।

अपना गांव छोड़कर शाहपुर राहत शिविर में रहे दिलशाद ने न्यूज़क्लिक के लिए बात करने पर कहा कि" पलायन करने वालों में सभी मुसलमान थे। हम शाहपुर के राहत शिविर में रहे कुटबी से पलायन कर शाहपुर में शरण लेने वालों की संख्या 3 हज़ार के आस पास थी। रातों रात हमने गांव खाली कर दिया था। हम आज भी अपने गांव नही गये अब शाहपुर के पास ही पलड़ा गांव में रहते हैं।"

 पलायन करने वाले पीड़ित मेहंदी हसन ने कहा कि "आप ख़ुद ही देख सकते है हम आज भी अपने गांव नही लौटे हैं। किसी भी हिन्दू ने पलायन नहीं किया। पलायन एक तरफ़ा मुसलमानों ने किया क्योंकि उनका घर बार लूटकर आगज़नी की गई थी। सरकार झूठ बोल रही है कि हिंदुओं के गांव खाली हो गये। गांव तो खाली हमारे हुए हैं, हम आज भी अपने गांव नही लौटे हैं और शाहपुर के पास पलड़ा गांव में रहते है"!

मुज़फ़्फ़रनगर दंगों के दौरान बहुत से मुस्लिमों ने कैराना में भी शरण ली थी। आइए आपको दिखाते हैं कि वे आज भी किस हालात में जी रहे हैं। यह वीडियो कैराना की नाहिद कॉलोनी का है और अभी बीती 24 जनवरी, 2022 को ही लिया गया है। इसे देखकर ही आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि विस्थापितों का आज भी क्या हाल है-

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दावे को लेकर हमने रिटायर्ड आईजी एसआर दारापुरी से बात की तो उन्होंने कहा, "कोई भी दंगा होता है तो उसमें दोनों समुदायों का नुक़सान होता है, लेकिन योगी जी सिर्फ़ हिंदुओं की बात कर नफ़रत फ़ैलाने की कोशिश कर रहे हैं जो कि इनकी पुरानी राजनीति का हिस्सा है। इस विधानसभा चुनाव को देखते हुए इनकी हताशा बढ़ गई है जिसकी वजह से योगी जी ग़लत आंकड़े पेश कर बेबुनियाद बाते कर रहे हैं। ग़लत भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, योगी जी के दावों में सिर्फ़ सिर्फ़ झूठ और हताशा है।"

मुज़फ़्फ़रनगर की ही तरह कैराना पलायन को लेकर भी इसी तरह की बेबुनियाद बातें कही जा रही हैं। गृहमंत्री अमित शाह भी इसी तरह की बातें दोहरा रहे हैं, जबकि इस मुद्दे को सबसे पहले उठाने वाले बीजेपी के ही सांसद (दिवंगत) हुकुम सिंह ही कैराना में सांप्रदायिक आधार पर पलायन से इंकार कर चुके थे।

मुज़फ़्फ़रनगर हो या कैराना, योगी जी या शाह जी इस सबके बारे में कोई आधिकारिक रिपोर्ट जनता के सामने नहीं रखते हैं। उन्हें लगता है कि चुनावों में केवल बयानों से काम चलाया जा सकता है। लेकिन एक मुख्यमंत्री या केंद्रीय गृहमंत्री के लिए बिना किसी तथ्य के इस तरह की बातें कहना समाज ही नहीं कानून की दृष्टि से भी बेहद घातक है। इसे तो अफवाह और समाज में विद्वेष फैलाने की श्रेणी में ही रखा जाना चाहिए और चुनाव आयोग को इसपर संज्ञान लेना चाहिए।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार है)

Kairana Lok Sabha Lok Sabha constituency
Yogi Adityanath
fact check
communal polarisation
Uttar pradesh

Related Stories

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही मस्जिद ईदगाह प्रकरण में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

जौनपुर: कालेज प्रबंधक पर प्रोफ़ेसर को जूते से पीटने का आरोप, लीपापोती में जुटी पुलिस

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

उपचुनाव:  6 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में 23 जून को मतदान

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश


बाकी खबरें

  • पीपल्स डिस्पैच
    मानवाधिकार समूहों ने ईजिप्ट में मानवाधिकारों के उल्लंघन की निंदा की
    02 Jun 2021
    हस्ताक्षर करने वाले 63 संगठनों ने एक बयान में यूएनएचआरसी से देश में निगरानी और रिपोर्टिंग तंत्र स्थापित करने का आग्रह किया।
  • पीपल्स डिस्पैच
    स्पेन की शीर्ष अदालत का कथित युद्ध अपराधों की शिकायतों में पोलिसारियो फ्रंट के प्रमुख की हिरासत से इनकार
    02 Jun 2021
    मोरक्को से पश्चिमी सहारा की स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे पोलिसारियो फ्रंट ने दावा किया है कि युद्ध अपराधों का आरोप इस आंदोलन को बदनाम करने का मोरक्को का प्रयास है।
  • masterstroke
    एजाज़ अशरफ़
    मास्टरस्ट्रोक: 56 खाली पन्नों की 1200 शब्दों में समीक्षा 
    02 Jun 2021
    समकालीन भारत अदृश्य स्याही से अपनी असफल कहानियों को लिख रहा है। उन खाली पन्नों को गौर से देखेंगे तो आपको इसके असली मायने समझ में आ जायेंगे। 
  • p
    काशिफ़ काकवी
    मध्य प्रदेश : डॉक्टरों के 4900 पद खाली पर कोई दावेदार नहीं, तीसरी लहर से कैसे लड़ेगा राज्य?
    02 Jun 2021
    पिछले एक साल में 50 से अधिक डॉक्टरों ने इस्तीफ़ा दिया है क्योंकि वे सरकार की पुरानी नीतियों से नाखुश थे, डॉक्टरों की एसोसिएशन का दावा है कि अभी बहुत से डॉक्टर इस्तीफ़ा देने वाले हैं। 
  • ayush 64
    पी.रमन
    केंद्र ने आयुष-64 के वितरण के लिए आरएसएस से जुड़े संगठन सेवा भारती को नोडल एजेंसी बनाया
    02 Jun 2021
    आरएसएस के सेवा भारती जैसे संगठन को कोविड-19 दवा के वितरण का काम सौंपे जाने को लेकर जो सबसे गंभीर आपत्ति है, वह यह कि इससे अल्पसंख्यक आबादी के बड़े हिस्से के साथ-साथ आरएसएस के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License