NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
क्या ‘फ़ेयर एंड लवली’ ब्रैंडनेम में बदलाव 'ब्लैक लाइव्स मैटर' मुहिम का असर है?
45 सालों से भारत में बिकने वाली 'फ़ेयर एंड लवली' क्रीम का नाम आने वाले समय में बदल जाएगा। इसके साथ ही विज्ञापन में इसके ‘गोरा या गोरेपन’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी नहीं होगा। कंपनी का ये फैसला ऐसे समय में आया है जब दुनियाभर में जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत के बाद रंगभेद आंदोलन के दौरान इस क्रीम को लेकर कंपनी की बहुत आलोचना हुई है।
सोनिया यादव
26 Jun 2020
fair and lovely

"अपने स्किन केयर ब्रैंड्स के ग्लोबल पोर्टफोलियो को लेकर हम पूरी तरह से समर्पित हैं। ये सभी रंगों और तरह के स्किन टोन्स का ख्याल रखेगी। हम ये समझते हैं कि 'फ़ेयर', 'व्हाइट' और 'लाइट' जैसे शब्द ख़ूबसूरती के एकतरफ़ा नज़रिये को बयान करते हैं। हमें नहीं लगता कि ये सही है और हम इस पर ध्यान देना चाहते हैं।"

ये बयान हिंदुस्तान यूनीलिवर लिमिटेड कंपनी के ब्यूटी और पर्सनल केयर डिविज़न के प्रेसीडेंट सन्नी जैन का है। यूनीलिवर ने गुरुवार, 25 जून को एक बयान जारी कर कहा कि वो आने वाले समय में 'फ़ेयर एंड लवली' ब्रैंड का नाम बदल देगी। साथ ही गोरा या गोरेपन जैसे शब्दों का इस्तेमाल अपने उत्पादों और विज्ञापनों में नहीं करेगी।

फ़ेयर एंड लवली से क्यों हटाया जा रहा है फ़ेयर?

अमेरिका में जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत के बाद शुरू हुए 'ब्लैक लाइव्स मैटर' मुहिम के दौरान हाल के हफ़्तों में इन कंपनियों को ऐसे उत्पाद बेचने के लिए कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा है जिससे रंगभेद को बढ़ावा मिलता है।

हालांकि, कंपनी का साफतौर पर कहना है कि उसके इस कदम का अभी पश्चिमी देशों में चल रहे नस्लवाद विरोधी आंदोलन से कोई लेना देना नहीं है और कंपनी दो हजार करोड़ रुपये के अपने ब्रांड को बेहतर बनाने के लिए कई सालों से काम कर रही है।

एचयूएल के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक संजीव मेहता ने इस संबंध में पीटीआई-भाषा से कहा, 'यह ऐसा निर्णय नहीं है, जो हमने आज लिया हो। इसकी कहानी कई सालों से चल रही है। फेयर एंड लवली में बदलाव के अलावा एचयूएल के त्वचा देखभाल से जुड़े अन्य उत्पादों में भी सकारात्मक खूबसूरती का नया दृष्टिकोण प्रतिबिंबित होगा।'

संजीव मेहता के मुताबिक कंपनी ने पिछले साल ही नाम बदलने का आवेदन दायर किया था और नकली उत्पादों से बचने के लिए अभी तक इसका खुलासा नहीं किया था।

फेयरनेस क्रीम पर बैन लगाने की उठ रही थी मांग

पिछले दिनों सोशल मीडिया पर ब्लैक लाइव्स मैटर का सपोर्ट करने वाले कई सैलब्स से लेकर निटिजन्स तक ने फ़ेयरनेस क्रीम्स पर बैन लगाने की मांग की थी। इसके साथ ही इसके विज्ञापन के प्रचार-प्रचार के खिलाफ़ भी जोरदार आवाज़ें उठी थी।

टीवी प्रेजेंटेटर और राइटर पद्मा लक्ष्मी ने ट्विटर पर लिखा, “फेयर एंड लवली जैसी कंपनीज पर बैन लगना चाहिए। मैं बचपन से उन गोरी लड़कियों के लिए ये सुनकर थक चुकी हूं जिन्हें देखते ही कहा जाता है देखो कितनी ‘फेयर' एंड ‘लवली' है।”

Capture2_0.JPG

अभिनेता अभय देओल ने भी 'ब्लैक लाइव्स मैटर' का सपोर्ट करते हुए बॉलीवुड सितारों से फेयरनेस क्रीम का विज्ञापन बंद करने की अपील की थी।

बता दें कि फेयरनेस क्रीम पर बैन लगाने को लेकर कई बॉलीवुड सितारे पहले ही फेयरनेस क्रीम का विज्ञापन करने से इंकार कर चुके हैं। इनमें कंगना रनौत सहित रणबीर कपूर, स्वरा भास्कर, रणदीप हुड्डा और तापसी पन्नू का नाम शामिल है।

कानून क्या कहता है?

फेयरेनेस क्रीम को बढ़ावा देने वाले विज्ञापन करने को ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) (संशोधन) विधेयक, 2020 के नए मसौदे के तहत अपराध घोषित किया गया है। इस तरह के विज्ञापनों में शामिल लोगों को 20 लाख रुपये तक का जुर्माना और 2 साल तक की जेल की सजा का भी प्रस्ताव है।

इस संबंध में वकील आर्षी जैन ने न्यूज़क्लिक को बताया कि फेयर एंड लवली जैसी फेयरनेस क्रीम्स को लेकर लंबे समय से बैन लगाने का मांग उठती रही है। इसी महीने चेंजडॉटओआरजी पर दर्जनों याचिकाएं दाख़िल की गईं जिन्हें हज़ारों लोगों ने समर्थन भी किया था।

आर्षी कहती हैं, “फेयरनेस क्रीम के जरिये फेयरनेस लाने वाली बातें हमारे दिमाग में नकारात्मकता लाती है, इसलिए तमाम संगठन समय-समय पर इसका विरोध करते रहे हैं। सरकार ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट 1954 में संशोधन कर 2020 में नए प्रावधान किए हैं। जिसके तहत ऐसी कंपनिया जो किसी व्यक्ति को गोरा बनाने, गंजेपन दूर करने, लंबाई बढ़ाने जैसी चीजों के लिए अपने प्रोडक्ट या दवा का विज्ञापन करती हैं, उन्हें पहली बार अपराध का दोषी पाए जाने पर 10 लाख का जुर्माना और दो साल की जेल की सजा का प्रस्ताव किया गया है। तो वहीं अगर इसके बाद भी कोई इसे जारी रखता है तो सजा बढ़ाकर 5 साल जेल और 50 लाख का जुर्माना भी हो सकता है। जबकि इससे पहले 1954 के अधिनियम में पहली बार दोषी पाए जाने पर छह महीने की सजा का प्रावधान था।”

क्या है फेयर एंड लवली का इतिहास

भारत में यूनिलीवर ने 45 साल पहले 1975 में गोरा बनाने के दावे के साथ फेयर एंड लवली क्रीम लांच की थी। देश के फेयरनेस क्रीम बाजार में इसका 70 फीसदी से अधिक का कब्जा है। एक आकलन के मुताबिक़ पिछले साल यूनिलीवर ने केवल भारतीय बाज़ार में 50 करोड़ डॉलर की फ़ेयर एंड लवली बेची थी।

हालांकि इतने सालों में फेयर एंड लवली को कई बार महिला संगठनों द्वारा आलोचना का शिकार भी होना पड़ा है। संसद में भी इस क्रीम को लेकर विरोध के स्वर सुनाई दिए थे। जिसके बाद कंपनी ने अपने एयरहोस्टेस वाले विज्ञापन को हटा भी लिया था, लेकिन तमाम विरोध के बावजूद प्रॉडक्ट लगातार बाजार में बिकता रहा।

रंगभेद के खिलाफ लंबे समय से चल रहा है संघर्ष

सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार ऋचा सिंह ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, “ये सच है कि जॉर्ज फ़्लॉयड की हत्या के बाद एक नया आंदोलन शुरू हो गया है लेकिन हम सदियों से रंगभेद के खिलाफ लंबा संघर्ष कर रहे हैं। हमें ये समझना होगा कि आखिर ये गोरेपन की चाह लोगों के मन और मस्तिष्क में इतनी हावी कैसे हो गई। इसका जवाब हमारा समाज ही है, जहां गोरे रंग के लोगों को ज्यादा तरजीह दी जाती है।

ऋचा आगे बताती हैं कि भारत में रंगभेद के खिलाफ 2009 में डार्क इज ब्यूटीफुल नाम से एक कैंपेन चला। फिल्म अभिनेत्री नंदिता दास ने इस अभियान के जरिए यह बहस खड़ी करने की शुरुआत की कि गहरे रंग की त्वचा वाले लोगों को किस तरह बॉलीवुड में भेदभाव सहना पड़ता है। उनके अनुसार अगर आप काले या ब्राउन हैं, तो आपको गांव और गरीब परिवार की लड़की दिखाया जाएगा, लेकिन अमीर, शहरी और प्रभावशाली लड़की फिल्म में गोरी ही होनी चाहिए। इसके बाद कई सेलब्स भी इसके सपोर्ट में आए थे।

fair and lovely.png

शादी डॉटकॉम ने स्किन कलर फिल्टर का ऑप्शन हटाया

मालूम हो कि फेयर एंड लवली के बाद अब मैट्रीमोनियल साइट शादी डॉटकॉम ने भी अपनी वेबसाइट से स्किन कलर फिल्टर का ऑप्शन हटा लिया है। फिछले कुछ समय से साइट अपने एक विवादित फिल्टर की वजह से आलोचनाओं में घिरी हुई थी। इसके खिलाफ चेंज़डॉटओआरजी के माध्यम से ऑनलाइन याचिका दायर हुई थी। जिसे मात्र 14 घंटे में 1500 लोगों ने साइन किया था।

इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता शबनम कहती हैं, “अगर हम वैवाहिक विज्ञापनों को गौर से देखें तो इसमें स्किन टोन क्या है इसको खास वरीयता दी जाती है क्योंकि हमारी मानसिकता में ही गोरी है तो अच्छी और सुंदर वाली धारणा पैठ जमाए है। लड़कियों को अक्सर इसके लिए अपने घरवालों या ससुराल वालों से ताने भी सुनने पड़ते हैं। क्योंकि समाज में गोरा होना सुंदरता का एक पैमाना हो गया है। ऐसे गोरेपन और भेदवाव को बढ़ावा देने वाले इन सभी उत्पादों पर बैन लगाना चाहिए। क्योंकि किसी को गोरा होना या सुंदर दिखना क्यों जरूरी है। हम ऐसी बातों को बढ़ावा ही क्यों दें, जिसके चलते समाज में कुछ लोग हीन भावना का शिकार हों।”

गौरतलब है कि भारत के अलावा 'फ़ेयर एंड लवली' बांग्लादेश, इंडोनेशिया, थाईलैंड, पाकिस्तान और एशिया के दूसरे देशों में भी बेची जाती है। फेयर एंड लवली ब्रांड का दक्षिण एशिया के बाज़ार में दबदबा रहा है। समाज में गोरेपन को लेकर दीवानगी की वजह से दक्षिण एशिया के बाज़ारों में ऐसे उत्पादों के लिए बड़ी माँग रही है। 

Fair and lovely
Racism
Black People and White People
George Floyd
Black Lives Matter
Black and White
Fairness Cream

Related Stories

प्रधानमंत्री ने गलत समझा : गांधी पर बनी किसी बायोपिक से ज़्यादा शानदार है उनका जीवन 

स्वच्छ होता भारत बनाम मैला ढोता भारत

कलरिज़्म के विरोध में उठी है सशक्त आवाज़

शिक्षित बनें, आंदोलन करें और संवाद करें: माइकल होल्डिंग और सूचना युग पर फिर से पुनर्विचार की ज़रूरत

काले लोगों की लड़ाई से भारत को सीख

इन पहरेदारों की पहरेदारी कौन करेगा ?

मुखर और निरंतर: IPL और क्रिकेट में नस्लभेदी व्यवहार की हक़ीक़त (5.75 Ounces S-2, Episode 31)

धर्म के कारण भेदभाव भी नस्लवाद का हिस्सा: इरफ़ान पठान

भारत एक मौज: मोदी जी का पत्र, बॉलीवुड का 'ब्लैक लाइव्स मैटर' और एलिफैंट पॉलिटिक्स

#Blacklivesmatters की गूंज में शामिल है #dalitlivesmatters की आवाज़


बाकी खबरें

  • musahar
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव: पूर्वी क्षेत्र में विकल्पों की तलाश में दलित
    02 Mar 2022
    दलित आम तौर पर ऐसे मूक मतदाता माने जाते हैं, जो अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं का आसानी से इज़हार नहीं करते। हालांकि, इस चुनाव को नज़दीक से देखने पर इस बात के साफ़ संकेत मिल जाते हैं कि उनका झुकाव बसपा…
  • कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 7,554 नए मामले, 223 मरीज़ों की मौत
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 7,554 नए मामले, 223 मरीज़ों की मौत
    02 Mar 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.20 फ़ीसदी यानी 85 हज़ार 680 हो गयी है।
  • एम. के. भद्रकुमार
    यूक्रेन युद्ध ने यूरोपियन यूनियन और अमेरिका को ईरान सौदे पर सोचने को मजबूर किया
    02 Mar 2022
    क्या नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) के विस्तार पर अमेरिका-रूस टकराव और यूक्रेन के आसपास बने हालात वियना में चल रही ईरान परमाणु वार्ता को पटरी से उतार देगी?
  • ukraine
    एपी/भाषा
    रूस-यूक्रेन युद्ध अपडेट: कीव के मुख्य टीवी टावर पर बमबारी; सोवियत संघ का हिस्सा रहे राष्ट्रों से दूर रहे पश्चिम, रूस की चेतावनी
    02 Mar 2022
    रूसी बलों ने मंगलवार को यूक्रेन के घनी आबादी वाले शहरी इलाकों पर हमले तेज करते हुए यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर के मध्य स्थित एक मुख्य चौराहे और कीव के मुख्य टीवी टावर पर बमबारी की। वहीं भारत ने…
  • बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन
    02 Mar 2022
    पालीगंज विधानसभा क्षेत्र से सीपीआई माले विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि वह सीटेट और बीटेटट उत्तीर्ण सभी अभ्यर्तियों के लिए सातवें चरण की बहाली के लिए 2014-21 तक सभी रिक्तियों को जोड़कर मार्च महीने में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License