NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
नया मंडी कानून मध्य प्रदेश के किसानों के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है!
कुल 13 किसानों ने मंडी के बाहर उनकी उपज का भुगतान किये बिना ही व्यापारियों के फरार हो जाने के खिलाफ शिकायत दर्ज की है। जबकि कानून के मुताबिक तीन दिनों के भीतर भुगतान किये जाने की बाध्यता के बावजूद इसे नहीं चुकता किया गया है।
काशिफ़ काकवी
23 Dec 2020
mp

भोपाल: “मंडी के बाहर एक व्यापारी को बेचा है तो पिछले पांच महीनों से पैसे के लिए दौड़ रहा हूँ, एफआईआर भी किया, पर पैसे नहीं मिले” यह कहना है 25 वर्षीय मनोज धाकड़ का, जो कि उन 13 किसानों में से एक हैं, जिनका कहना है कि वे मध्यप्रदेश के गुना जिले में एक व्यापारी के हाथों ठगे गए हैं।

इस उम्मीद में कि अपनी फसलों के उन्हें बेहतर दाम मिलेंगे, धाकर जैसे गुना के जामरा गाँव के 13 किसानों ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लागू किये गए नए कृषि कानूनों से समर्थित आधार पर अपनी 20.02 लाख मूल्य की उपज जून में एक व्यापारी के हाथ बेच दी थी। हालाँकि इस बीच पाँच महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन उनका इन्तजार लगता है अब अंतहीन बन चुका है।

बिना भुगतान किये ही गायब हो जाने वाले व्यापारियों के इस प्रकार के मामले जबलपुर, ग्वालियर, बालाघाट, बड़वानी और होशंगाबाद जैसे जिलों से भी निकलकर आ रहे हैं। होशंगाबाद, बड़वानी और जबलपुर में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के ट्वीट के बाद से प्रशासन काश्तकारों के बचाव के लिए हरकत में आया है, लेकिन मामला अभी भी अनसुलझा बना हुआ है। 

धाकड़ पिछले पाँच महीने से भी अधिक समय से जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के कार्यालयों के बीच चक्कर लगा रहे हैं, ताकि व्यापारी देवेन्द्र अग्रवाल, जिसने 9 जून, 2020 के दिन उनकी उपज खरीदी थी, से किसी तरह रकम हासिल करने में मदद मिल सके।

धाकड़ जिन्होंने जून में पहली बार मण्डी परिसर के बाहर नए कृषि कानून के तहत मॉडल मण्डी अधिनियम के अनुसार अपनी उपज बेची थी, जिसे केंद्र सरकार के कृषि कानूनों से कई महीनों पूर्व 1 मई से ही मध्य प्रदेश में लागू कर दिया गया था - जिसके खिलाफ किसानों का व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी है, कहते हैं “मंडी में बेचते थे तो हाथों हाथ पैसा मिल जाता था। अब पैसे नहीं मिलने से 1 लाख रूपये का कर्ज लेकर किसानी कर रहा हूँ।”

एक अन्य कृषक 45 वर्षीय राम कृष्ण धाकड़, जिन्होंने उसी व्यापारी के हाथ अपनी 8 लाख रूपये मूल्य की उपज बेची थी, उन्होंने दावा किया कि सभी 13 किसानों से थोक में 61 कुंतल धनिये की खरीद करने के बाद अग्रवाल ने 3 लाख रूपये नकद और क्रमश: 2 लाख और 1.5 लाख रूपये के चेक दिए थे। लेकिन बैंक ने उन दोनों ही चेकों को निरस्त कर दिया था क्योंकि हस्ताक्षर के मिलान का मसला आ रहा था।

राम कृष्ण, जो लगभग 25 एकड़ खेत के मालिक हैं, ने आरोप लगाया “जब हमारी शिकायत पर पुलिस ने धोखाधड़ी (आईपीसी की धारा 420) का मामला दर्ज किया तो व्यापारी ने मेरे घर पर अगले हफ्ते लाठियों और रॉड के साथ हथियारबंद गुंडों को भिजवा दिया था और धमकाया था कि यदि हमने मामले को वापस नहीं लिया या सुलहनामे के लिए राजी नहीं हुए तो हमें जान से मार देंगे।”

उन्होंने कहा “हमें अलग-अलग नंबरों से धमकी भरे फोन आ रहे हैं। हमें अपनी जान से हाथ धोने का खतरा बना हुआ है”, इसके साथ ही उनका कहना था कि इस हकीकत के बावजूद कि नये कानूनों में मण्डी से बाहर उपज बेचने पर तीन दिनों के भीतर भुगतान को सुनिश्चित किया गया है। लेकिन सभी 13 किसान भुगतान के सिलसिले में दौड़भाग में लगे हुए हैं। 

शिकायत दर्ज किये जाने के चार महीने बाद भी जिला प्रशासन उस भगोड़े व्यापारी का पता लगा पाने या पैसे वसूलने में नाकाम रहा है। हालाँकि अग्रवाल ने इस बीच उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ से जमानत हासिल करने में सफलता प्राप्त कर ली है, लेकिन इसके बावजूद वह भागा फिर रहा है।

जब इस बारे में गुना जिलाधिकारी कुमार पुरुषोत्तम से संपर्क साधा गया तो उनका कहना था: “यह सच है कि देवेन्द्र अग्रवाल ने 13 किसानों से 20 लाख रूपये मूल्य की कृषि उपज की खरीद की थी और भाग खड़ा हुआ। यह व्यापारी राजस्थान से है और न उसके पास जिले में कोई सम्पत्ति है और ना ही उसके बैंक खाते में कोई पैसा ही है, क्योंकि इसमें मात्र 400 रूपये का बैलेंस है।”

पुरुषोत्तम ने दावा किया कि किसानों ने अप्रैल में अपनी उपज बेच दी थी और ऐसे में कानून के तहत उस व्यापारी को दण्डित कर पाना मुश्किल है, क्योंकि उनके बीच में कोई लिखित समझौता नहीं हुआ था। उन्होंने कहा “मैं इस मामले की बारीकी से छानबीन में लगा हुआ हूँ और प्रशासन पैसे की वसूली के लिए अपनी ओर से जी-जान से जुटा हुआ है।”

हालाँकि अपनी पुलिस शिकायत में किसानों ने दावा दिया कि उन्होंने अपनी उपज 9 जून को बेची थी।

जबसे मण्डी के बाहर खरीद के नए कानून लागू हुए हैं तबसे कृषकों के साथ धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य मंडी बोर्ड ने 14 दिसंबर को एक सर्कुलर जारी कर मण्डी बोर्डों के संयुक्त निदेशकों को इस प्रकार के मामलों पर अपनी नजर बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने इस सर्कुलर के साथ एक फॉर्म भी जारी किया है।

इस मामले पर टिप्पणी करते हुए राज्य मण्डी बोर्ड के प्रबंध निदेशक संदीप यादव ने कहा: “धोखाधड़ी के शिकार किसानों के मामलों पर निगाह रखे जाने को लेकर फैसला लिया गया है।”

अन्य अनसुलझे मामले 

ग्वालियर में 24 किसानों ने उप-मण्डल अधिकारी (एसडीएम) के समक्ष शिकायत दर्ज की है कि एक व्यापारी जिसने उनसे 10 लाख रूपये मूल्य की उपज खरीदी थी, वह पिछले कुछ महीनों से “लापता” हो रखा है। 

इस संबंध में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी और जिला प्रशासन उस व्यापारी के घर को जब्त करने की प्रकिया में जुटा हुआ है। पुलिस ने उसके अहमदाबाद वाली प्रॉपर्टी की भी छानबीन शुरू कर दी है।

इसी तरह बालाघाट में धान के किसानों के एक समूह ने लांची तहसील में पुलिस से संपर्क साधा था, जिसमें उनका आरोप था कि एक राइस मिल मालिक उन्हें उनकी उपज का भुगतान नहीं कर रहा है। एसडीएम ने इस मुद्दे को हल करने के लिए 13 दिसंबर को एक पैनल का गठन किया था, लेकिन व्यापारी के फरार हो जाने के बाद अब उसकी प्रॉपर्टी जब्त करने की प्रक्रिया चल रही है। 

सुलझाए जा चुके मामले 

इसमें पहला सुलझाया जा चुका मामला वह था, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो प्रसारण में किया था। कार्यक्रम मन की बात में मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के इस मामले का जिक्र किया गया था। 

10 अक्टूबर को आदिवासी बहुल बड़वानी जिले में, महाराष्ट्र के धुले जिले के एक किसान ने पानसेलुम तहसील के एसडीएम से शिकायत की है। उसने अपनी 270 कुंतल मक्के की उपज जुलाई में दो व्यापारियों के हाथ बेची थी, और अपने लगभग 3.30 लाख रूपये की बकाया राशि के इन्तजार में थे। एसडीएम सुमेर सिंह मुजाल्दे ने एक कमेटी का गठन किया और व्यापारियों को इसके समक्ष हाजिर होने के लिए कहा गया था। इसके बाद जाकर इन व्यापारियों ने दो किश्तों में बकाया राशि चुका दी थी और यह इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक इस मामले को 4 नवंबर में जाकर हल कर लिया गया था। 

एक अन्य मामला होशंगाबाद जिले का सुलझाया जा चुका है।

दिल्ली की एक फर्म, जिसकी पहचान फार्च्यून कंपनी के तौर पर है, ने पिपरिया जिले के चावल उत्पादक किसानों के साथ मंडी में प्रस्तावित भाव से 50 रूपये अधिक पर उपज की खरीद का समझौता किया था। लेकिन जैसे-जैसे कीमतें उपर चढ़ने लगीं और भाव 2,950 रूपये प्रति कुंतल तक पहुँच गईं, तो ऐसे में खरीद की तारीख नजदीक देख फर्म के एजेंटों ने अपने फोन स्विच ऑफ कर दिए थे। बाद में पिपरिया के एसडीएम नितिन ताले द्वारा एक संयुक्त समिति के गठन के बाद जाकर इस मुद्दे को सुलझाया जा सका था। 

तीसरा मामला जिसे सुलझाया गया था वह एक ऐसे व्यापारी से संबंधित था जो काश्तकारों का 22 लाख रुपयों का बकाया चुकाए बिना ही फसल के साथ चम्पत हो गया था।

 

 

Madhya Pradesh
mp and new agriculture law
farmer
MSP
apmc mandi vs market

Related Stories

सिवनी मॉब लिंचिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरे आदिवासी, गरमाई राजनीति, दाहोद में गरजे राहुल

मध्यप्रदेश: गौकशी के नाम पर आदिवासियों की हत्या का विरोध, पूरी तरह बंद रहा सिवनी

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

एमपी : ओबीसी चयनित शिक्षक कोटे के आधार पर नियुक्ति पत्र की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे

क्यों है 28-29 मार्च को पूरे देश में हड़ताल?

28-29 मार्च को आम हड़ताल क्यों करने जा रहा है पूरा भारत ?

मोदी सरकार की वादाख़िलाफ़ी पर आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुटे पूर्वांचल के किसान

ग़ौरतलब: किसानों को आंदोलन और परिवर्तनकामी राजनीति दोनों को ही साधना होगा

एमएसपी पर फिर से राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेगा संयुक्त किसान मोर्चा

मध्य प्रदेश : आशा ऊषा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन से पहले पुलिस ने किया यूनियन नेताओं को गिरफ़्तार


बाकी खबरें

  • spain
    डीडब्ल्यू
    स्पेन : 'कंप्यूटर एरर' की वजह से पास हुआ श्रम सुधार बिल
    08 Feb 2022
    स्पेन की संसद ने सरकार के श्रम सुधार बिल को सिर्फ़ 1 वोट के फ़ासले से पारित कर दिया- विपक्ष ने कहा कि यह एक वोट उनके सदस्य ने ग़लती से दे दिया था।
  • Uttarakhand
    मुकुंद झा
    उत्तराखंड चुनाव 2022 : बदहाल अस्पताल, इलाज के लिए भटकते मरीज़!
    08 Feb 2022
    भारतीय रिजर्व बैंक की स्टेट फाइनेंस एंड स्टडी ऑफ़ बजट 2020-21 रिपोर्ट के मुताबिक, हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड सरकार के द्वारा जन स्वास्थ्य पर सबसे कम खर्च किया गया है।
  • uttarakhand
    न्यूज़क्लिक टीम
    चमोली जिले का थराली विधानसभा: आखिर क्या चाहती है जनता?
    07 Feb 2022
    उत्तराखंड चुनाव से पहले न्यूज़क्लिक की टीम ने चमोली जिले के थराली विधानसभा का दौरा किया और लोगों से बातचीत करके समझने का प्रयास किया की क्या है उनके मुद्दे ? देखिए हमारी ग्राउंड रिपोर्ट
  • election
    न्यूज़क्लिक टीम
    धर्म का कार्ड नाजी दौर में ढकेलेगा देश को, बस आंदोलन देते हैं राहत : इरफ़ान हबीब
    07 Feb 2022
    Exclusive इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने देश के Living Legend, विश्व विख्यात इतिहासकार इरफ़ान हबीब से उनके घर अलीगढ़ में बातचीत की और जानना चाहा कि चुनावी समर में वह कैसे देख रहे हैं…
  • Punjab
    न्यूज़क्लिक टीम
    पंजाबः बदहाल विश्वविद्यालयों पर क्यों नहीं बात करती राजनैतिक पार्टियाँ !
    07 Feb 2022
    पंजाब में सभी राजनैतिक पार्टियाँ राज्य पर 3 लाख करोड़ के कर्ज़े की दुहाई दे रही है. इस वित्तीय संकट का एक असर इसके विश्वविद्यालयों पर भी पड़ रहा है. अच्छे रीसर्च के बावजूद विश्वविद्यालय पैसे की भारी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License