NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
किसान आंदोलन: हिमाचल प्रदेश में भी गांव, ब्लॉक व जिला मुख्यालयों पर धरने प्रदर्शन
इन धरना प्रदर्शन में हिमाचल किसान सभा, सीटू, जनवादी महिला समिति, डीवाईएफआई, एसएफआई, दलित शोषण मुक्ति मंच ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया और लोगों को संबोधित किया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
14 Dec 2020
किसान आंदोलन

किसान संगठनों के देशव्यापी आह्वान पर हिमाचल प्रदेश में भी गांव, ब्लॉक व जिला मुख्यालयों पर धरने प्रदर्शन हुए। जिसमें प्रदेश भर में हज़ारों लोग शामिल हुए।

शिमला, रामपुर, रोहड़ू, ठियोग, निरमण्ड, करसोग, सोलन, परवाणु, दाड़लाघाट, नाहन, पौंटा साहिब, मंडी, सरकाघाट, जोगिन्दरनगर, जंजैहली, कुल्लू, आनी, सैंज, चम्बा, चुवाड़ी, धर्मशाला, पालमपुर, हमीरपुर, ऊना में प्रमुख रूप से हुए धरना प्रदर्शन में हिमाचल किसान सभा, सीटू, जनवादी महिला समिति, डीवाईएफआई, एसएफआई, दलित शोषण मुक्ति मंच ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया और लोगों को संबोधित किया।

इन संगठनों के नेताओं ने जिनमें हिमाचल किसान सभा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. कुलदीप तंवर, महासचिव डॉ. ओंकार शाद, सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, महिला समिति प्रदेशाध्यक्ष डॉ. रीना सिंह, सचिव फालमा चौहान, डीवाईएफआई प्रदेशाध्यक्ष अनिल मनकोटिया, सचिव चन्द्रकान्त वर्मा, एसएफआई प्रदेशाध्यक्ष रमन थारटा,सचिव अमित ठाकुर, दलित शोषण मुक्ति मंच संयोजक जगत राम,सह संयोजक आशीष कुमार,ऑल इंडिया लॉयरज़ यूनियन प्रदेशाध्यक्ष पुनीत धांटा व सचिव अशोक वर्मा मुख्य रूप से शामिल रहे, ने कहा है कि अगर केंद्र सरकार ने काले किसान कानूनों व बिजली विधेयक 2020 को रद्द न किया तो हिमाचल की जनता भी दिल्ली कूच करेगी।

उन्होंने जनता से अम्बानी व अडानी के उत्पादों का पूर्ण बहिष्कार करने की अपील की है ताकि इन नैगमिक घरानों की इज़ारेदारी व किसानों को तबाह करने की नीति पर रोक लगाई जा सके। उन्होंने कहा कि मोदी की भाजपा सरकार पूंजीपतियों व नैगमिक घरानों के साथ है व उनकी मुनाफाखोरी को बढ़ाना चाहती है। केंद्र सरकार किसान विरोधी नीतियां लाकर किसानों को कुचलना चाहती है। मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीनों नए कृषि कानून पूर्णतः किसान विरोधी हैं। इसके कारण किसानों की फसलों को कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के जरिए विदेशी और देशी कंपनियों और बड़ी पूंजीपतियों के हवाले करने की साज़िश रची जा रही है। इन कानूनों से फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की अवधारणा को समाप्त कर दिया जाएगा। आवश्यक वस्तु अधिनियम के कानून को खत्म करने से जमाखोरी,कालाबाजारी व मुनाफाखोरी को बढ़ावा मिलेगा। इससे बाजार में खाद्य पदार्थों की बनावटी कमी पैदा होगी व खाद्य पदार्थ महंगे हो जाएंगे। कृषि कानूनों के बदलाव से बड़े पूंजीपतियों और देशी - विदेशी कंपनियों का कृषि पर कब्जा हो जाएगा और किसानों की हालत दयनीय हो जाएगी।

उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार के नए कानूनों से एपीएमसी जैसी कृषि संस्थाएं बर्बाद हो जाएंगी, न्यूनतम समर्थन मूल्य की अवधारणा खत्म हो जाएगी, कृषि उत्पादों की कालाबाज़ारी,जमाखोरी व मुनाफाखोरी होगी जिस से न केवल किसानों को नुकसान होगा अपितु आम जनता को भी इसकी मार झेलनी पड़ेगी। यह सब कॉरपोरेट्स को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। आज कृषि भारी संकट में है। किसानों को मदद देने के बजाए केंद्र सरकार किसानों को तबाह करने पर तुली हुई है। न तो कृषि बजट में बढ़ोतरी हो रही है,न ही किसानों की सब्सिडी में बढ़ोतरी हो रही है,न ही किसानी के उपकरण किसानों को सरकार की ओर से मुहैय्या करवाए जा रहे हैं,न ही किसानों के कर्ज़े माफ किये जा रहे हैं और न ही उन्हें लाभकारी मूल्य दिया जा रहा है। स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशें पिछले दो दशकों से केंद्र सरकार के मेजों पर धूल फांक रही हैं व उन्हें लागू नहीं किया जा रहा है।इसलिए बेहद जरूरी हो गया है कि देश के मजदूर, किसान, महिला, युवा, छात्र, सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़े हुए तबके पूर्ण एकता बनाकर इस सरकार की चूलें हिलाएं व इसकी पूंजीपति व कॉर्पोरेट परस्त नीतियों पर रोक लगाएं।

Himachal Pradesh
farmers protest
Protest Against Farm Laws
Himachal Kisan Sabha
CITU
Janwadi Mahila Samiti
DYFI
SFI
Dalit Mukti Mukti Manch

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए

हिमाचल: प्राइवेट स्कूलों में फ़ीस वृद्धि के विरुद्ध अभिभावकों का ज़ोरदार प्रदर्शन, मिला आश्वासन 

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी


बाकी खबरें

  • rakeh tikait
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव: किसान-आंदोलन के गढ़ से चली परिवर्तन की पछुआ बयार
    11 Feb 2022
    पहले चरण के मतदान की रपटों से साफ़ है कि साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण वोटिंग पैटर्न का निर्धारक तत्व नहीं रहा, बल्कि किसान-आंदोलन और मोदी-योगी का दमन, कुशासन, बेरोजगारी, महंगाई ही गेम-चेंजर रहे।
  • BJP
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड चुनाव: भाजपा के घोषणा पत्र में लव-लैंड जिहाद का मुद्दा तो कांग्रेस में सत्ता से दूर रहने की टीस
    11 Feb 2022
    “बीजेपी के घोषणा पत्र का मुख्य आकर्षण कथित लव जिहाद और लैंड जिहाद है। इसी पर उन्हें वोटों का ध्रुवीकरण करना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी घोषणा पत्र पर अपनी प्रतिक्रिया में लव-लैड जिहाद को…
  • LIC
    वी. श्रीधर
    LIC आईपीओ: सोने की मुर्गी कौड़ी के भाव लगाना
    11 Feb 2022
    जैसा कि मोदी सरकार एलआईसी के आईपीओ को लांच करने की तैयारी में लगी है, जो कि भारत में निजीकरण की अब तक की सबसे बड़ी कवायद है। ऐसे में आशंका है कि इस बेशक़ीमती संस्थान की कीमत को इसके वास्तविक मूल्य से…
  • china olampic
    चार्ल्स जू
    कैसे चीन पश्चिम के लिए ओलंपिक दैत्य बना
    11 Feb 2022
    ओलंपिक का इतिहास, चीन और वैश्विक दक्षिण के संघर्ष को बताता है। यह संघर्ष अमेरिका और दूसरे साम्राज्यवादी देशों द्वारा उन्हें और उनके तंत्र को वैक्लपिक तंत्र की मान्यता देने के बारे में था। 
  • Uttarakhand
    मुकुंद झा
    उत्तराखंड चुनाव : जंगली जानवरों से मुश्किल में किसान, सरकार से भारी नाराज़गी
    11 Feb 2022
    पूरे राज्य के किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, मंडी, बढ़ती खेती लागत के साथ ही पहाड़ों में जंगली जानवरों का प्रकोप और लगातार बंजर होती खेती की ज़मीन जैसे तमाम मुद्दे लिए अहम हैं, जिन्हें इस सरकार ने…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License