NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
कृषि
मज़दूर-किसान
किसान आंदोलन के 11 महीने पूरे, एसकेएम ने कहा- जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, किसान घर नहीं लौटेंगे
“दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन ने देश के करोड़ों अन्नदाताओं के लिए, गंभीर कठिनाइयों से जूझते हुए, इस मांग के साथ कि उनकी आजीविका को अनियमित बाजारों में कॉर्पोरेट लूट से बचाया जाए, ग्यारह महीने पूरे किए”।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
27 Oct 2021
SKM

देश में 26 नवंबर 2020 से दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे ऐतिहासिक किसान आंदोलन ने देश के करोड़ों अन्नदाताओं के मुद्दों को लेकर गंभीर कठिनाइयों से गुज़रते हुए ग्यारह महीने पूरे कर लिए हैं। इस मौके पर इस आंदोलन का नेतृत्व करे रहे संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) जिसमें देशभर के 500 से अधिक किसान संगठन शामिल हैं, ने अपने बयान में कहा है कि “दुनिया के इस तरह के सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन में, किसान मांग कर रहे हैं कि उनकी आजीविका को अनियमित बाजारों के कॉर्पोरेट लूट से बचाया जाए। किसान अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक रूप से उन पर थोपे गए तीन किसान-विरोधी कॉर्पोरेट कानूनों को निरस्त करने और सभी किसानों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी देने वाले कानून की मांग कर रहे हैं। मोदी सरकार न केवल किसानों की जीवन और मृत्यु और उनकी आने वाली पीढ़ियों से संबंधित जायज़ मांगों को ठुकरा रही है, बल्कि विरोध कर रहे किसानों पर हमला और उनकी अनदेखी भी कर रही है। लेकिन हर अलोकतांत्रिक और हताश हमले के साथ, आंदोलन न केवल मजबूत होता गया है, बल्कि और व्यापक होता जा रहा है”।

एसकेएम ने एक बार फिर जोर देकर कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती तब तक किसान घर वापस नहीं लौटेंगे।

किसान आंदोलन के 11 माह पूरे होने और लखीमपुर खीरी हत्याकांड के आरोपी सूत्रधार और षड्यंत्रकर्ता गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी की तत्काल गिरफ्तारी और बर्खास्तगी की मांग को लेकर एसकेएम के आह्वान पर पूरे देश में सैकड़ों जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए। विरोध प्रदर्शन मार्च, मोटरसाइकिल रैलियों, धरना आदि सहित विभिन्न रूप से आयोजित किए गए। अजय मिश्रा की गिरफ्तारी और बर्खास्तगी को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपे गए। किसान विरोध के लिए ट्रैक्टरों के साथ मेरठ कलेक्ट्रेट गए। साथ ही हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, ओडिशा, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल,राजस्थान और आंध्र प्रदेश से रिपोर्टें आई हैं।

इस बीच, लखीमपुर खीरी हत्याकांड पर तीसरी सुनवाई में उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार की एक बार फिर खिंचाई की। मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली बेंच ने इस तथ्य पर आश्चर्य व्यक्त किया कि इस मामले में केवल 23 चश्मदीद गवाह दर्ज किए गए है, जबकि रैली में सैकड़ों मौजूद थे। यूपी सरकार को और अधिक चश्मदीद गवाहों की पहचान करने, उन्हें सुरक्षा प्रदान करने, और उनके बयान दर्ज करने के लिए कहा गया। यूपी सरकार ने अपने बयान दर्ज करने के लिए 68 गवाहों को सूचीबद्ध किया है, जिनमें से 23 चश्मदीदों सहित अब तक केवल 30 बयान दर्ज किए गए हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार से फोरेंसिक जांच में तेजी लाने को कहा, नहीं तो वह इसके लिए प्रयोगशालाओं को निर्देश जारी करेगी। अगली सुनवाई 8 नवंबर 2021 के लिए निर्धारित की गई है।

वहीं दूसरी ओर, रिपोर्टों से पता चलता है कि आशीष मिश्रा टेनी के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है जैसे किसी भी अन्य हत्या-आरोपी के साथ नहीं किया जाता है। उसे शुरू में 'संदिग्ध' डेंगू होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, और केवल बाद के नमूने में डेंगू संक्रमण की पुष्टि हुई। साथ ही उनके साथ रहने के लिए एक अटेंडेंट भी उपलब्ध कराया गया है। जबकि एसकेएम चाहता है कि भारत के सभी कैदियों को ऐसी व्यवस्था मिले, वह यह मांग करता है कि आशीष मिश्रा को केवल गृह राज्यमंत्री का बेटा होने के कारण कोई विशेष सुविधा नहीं मिलनी चाहिए।

दूसरी तरफ भाजपा नेताओं का गांवों में विरोध जारी है, इसी क्रम में बागपत जिले के बड़ौत के पास पुसर गांव में यूपी भाजपा सांसद डॉ सत्यपाल सिंह के खिलाफ काले झंडे का विरोध प्रदर्शन किया गया। इस मौके पर भाजपा के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी हुई। हरियाणा के सिरसा के ग्राम मल्लेकान में हरियाणा के खेल मंत्री संदीप सिंह और कृषि मंत्री जेपी दलाल के दौरे के विरोध में भारी संख्या में किसान जमा हो गए। किसानों ने गांव के मुख्य प्रवेश द्वार को बंद कर दिया और सुनिश्चित किया कि कोई भी राजनीतिक नेता इसमें प्रवेश न कर सके। भाजपा नेताओं को कार्यक्रम रद्द करना पड़ा और उसके बाद किसान वापस हुए।

हरियाणा के रेवाड़ी जिले में एक अनोखा विरोध में किसानों ने बाजरे की बोरियों को विधायक लक्ष्मण सिंह यादव के आवास के सामने फेंक दिया और इसके लिए एमएसपी की मांग की। प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कहा कि एमएसपी होने का दावा गलत है और अगर यह सच है तो विधायक को एमएसपी पर किसानों का बाजरा खरीदना होगा। विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने किसानों को आश्वस्त किया कि वह इस मामले में मुख्यमंत्री से बात करेंगे।

मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा तहसील में 28 अक्टूबर को किसान महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है जिसमें कई एसकेएम नेताओं के भाग लेने की संभावना है। इसी दिन हरियाणा के सिरसा जिले के नाथूसारी चौपटा की अनाज मंडी में एक और किसान महापंचायत है। जींद जिले के खटकर टोल प्लाजा में 31 अक्टूबर को क्षेत्र के युवाओं के नेतृत्व में किसान महापंचायत का भी आयोजन किया जा रहा है।

शहीद किसान अस्थि कलश यात्राएं विभिन्न मार्गों से निकाली जा रही हैं जैसा कि एसकेएम द्वारा प्रतिदिन सूचित किया जा रहा है। ऐसी यात्राएं उत्तर प्रदेश के सीतापुर, कौशांबी और अलीगढ़ जिलों से होकर निकलीं। मध्य प्रदेश के ग्वालियर से मुरैना और अन्य जिलों के लिए अस्थि कलश यात्रा निकाली। तमिलनाडु में आज यात्रा का आखिरी दिन है और अस्थियां वेदारण्यम में समुद्र में विसर्जित की जाएंगी। शहीद कलश यात्रा ओडिशा में दया नदी में विसर्जित होने के बाद समाप्त हो गई, जिसे ऐतिहासिक रूप से उस नदी के रूप में प्रलेखित किया जाता है जिसने सम्राट अशोक के हृदय को बदल दिया था। यात्रा में शामिल हुए नेताओं ने प्रार्थना की कि आज की अहंकारी सरकार का भी हृदय परिवर्तन हो।

आंध्र प्रदेश में, एक अस्थिकलश यात्रा विजयवाड़ा के पास कृष्णा नदी में अस्थि विसर्जन के साथ समाप्त हुई।

महाराष्ट्र की लखीमपुर खीरी शहीद कलश यात्रा कल पुणे में महात्मा ज्योतिराव फुले के घर से शुरू होगी, जिसका समापन 18 नवंबर 2021 को हुतात्मा चौक पर मुंबई में एक विशाल किसान मजदूर महापंचायत में होगा। इस महापंचायत को एसकेएम नेताओं द्वारा संबोधित किया जाएगा। यह यात्रा 36 जिलों से होते हुए पूरे राज्य का भ्रमण कर मुंबई पहुंचेगी। पूरे राज्य में सैकड़ों जनसभाएं आयोजित करने की योजना है।

SKM
farmers protest
Farm Laws
Singhu Border
agricultural crisis

Related Stories

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

क्यों मिला मजदूरों की हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा का समर्थन

पूर्वांचल में ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बीच सड़कों पर उतरे मज़दूर

देशव्यापी हड़ताल के पहले दिन दिल्ली-एनसीआर में दिखा व्यापक असर

बिहार में आम हड़ताल का दिखा असर, किसान-मज़दूर-कर्मचारियों ने दिखाई एकजुटता

"जनता और देश को बचाने" के संकल्प के साथ मज़दूर-वर्ग का यह लड़ाकू तेवर हमारे लोकतंत्र के लिए शुभ है

मोदी सरकार की वादाख़िलाफ़ी पर आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुटे पूर्वांचल के किसान

ग़ौरतलब: किसानों को आंदोलन और परिवर्तनकामी राजनीति दोनों को ही साधना होगा

एमएसपी पर फिर से राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेगा संयुक्त किसान मोर्चा

बंगाल: बीरभूम के किसानों की ज़मीन हड़पने के ख़िलाफ़ साथ आया SKM, कहा- आजीविका छोड़ने के लिए मजबूर न किया जाए


बाकी खबरें

  • punjab
    भाषा सिंह
    पंजाब चुनावः परदे के पीछे के खेल पर चर्चा
    19 Feb 2022
    पंजाब में जिस तरह से चुनावी लड़ाई फंसी है वह अपने-आप में कई ज़ाहिर और गुप्त समझौतों की आशंका को बलवती कर रही है। पंजाब विधानसभा चुनावों में इतने दांव चले जाएंगे, इसका अंदाजा—कॉरपोरेट मीडिया घरानों…
  • Biden and Boris
    जॉन पिलगर
    युद्ध के प्रचारक क्यों बनते रहे हैं पश्चिमी लोकतांत्रिक देश?
    19 Feb 2022
    हाल के हफ्तों और महीनों में युद्ध उन्माद का ज्वार जिस तरह से उठा है वह इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण है
  • youth
    असद रिज़वी
    भाजपा से क्यों नाराज़ हैं छात्र-नौजवान? क्या चाहते हैं उत्तर प्रदेश के युवा
    19 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के नौजवान संगठनों का कहना है कि भाजपा ने उनसे नौकरियों के वादे पर वोट लिया और सरकार बनने के बाद, उनको रोज़गार का सवाल करने पर लाठियों से मारा गया। 
  • Bahubali in UP politics
    विजय विनीत
    यूपी चुनाव: सियासी दलों के लिए क्यों ज़रूरी हो गए हैं बाहुबली और माफ़िया?
    19 Feb 2022
    चुनाव में माफ़िया और बाहुबलियों की अहमियत इसलिए ज्यादा होती है कि वो वोट देने और वोट न देने,  दोनों चीज़ों के लिए पैसा बंटवाते हैं। इनका सीधा सा फंडा होता है कि आप घर पर ही उनसे पैसे ले लीजिए और…
  • Lingering Colonial Legacies
    क्लेयर रॉथ
    साम्राज्यवादी विरासत अब भी मौजूद: त्वचा के अध्ययन का श्वेतवादी चरित्र बरकरार
    19 Feb 2022
    त्वचा रोग विज्ञान की किताबों में नस्लीय प्रतिनिधित्व की ऐतिहासिक कमी ना केवल श्वेत बहुल देशों में है, बल्कि यह पूरी दुनिया में मौजूद है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License