NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
दिल्ली: अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ बढ़ते हमलों के विरोध में सीपीआई(एम) का प्रदर्शन
इस प्रदर्शन को सीपीआई(एम) पोलित ब्यूरो सदस्य बृंदा करात, प्रकाश करात, हन्नान मौल्ला और दिल्ली राज्य कमेटी के नेताओं ने संबोधित किया। इस प्रदर्शन में सांप्रदायिकता का दंश झेल चुके उत्तर पूर्वी दिल्ली के दंगा पीड़ित भी शामिल हुए। 
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
02 Dec 2021
left

कल यानि 1 दिसंबर को देश भर में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को देखते हुए और संविंधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को बनाये रखने के सवाल को लेकर भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई(एम) ने देशव्यापी विरोध दिवस के क्रम में दिल्ली में अपना प्रदर्शन किया। ये विरोध प्रदर्शन संसद से कुछ ही दूरी पर संसद मार्ग पर हुआ, जिसमें सीपीआईएम पोलित ब्यूरो सदस्य बृंदा करात, प्रकाश करात, हन्नान मौल्ला और दिल्ली राज्य कमेटी के नेताओं ने संबोधित किया। 

इस प्रदर्शन में सांप्रदायिकता का दंश झेल चुके उत्तर पूर्वी दिल्ली के दंगा पीड़ित भी शामिल हुए।

सीपीआई(एम) नेताओं ने कहा कि जब से भाजपा की सरकार सत्ता में आई है तब से संघ के इशारे पर मुस्लिम, ईसाइयों सहित अन्य अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े हैं। साथ ही आदिवासियों, महिलाओं, दलितों को संवैधानिक रूप से मिले बुनियादी समान अधिकारों का हनन हो रहा है।

सीपीआई(एम) ने कहा कि पूरे देश में ही इस तरह के हमलें बढे हैं, परंतु राजधानी और उसके आसपास के इलाकों में अल्पांख्यकों के खिलाफ़ बढ़ते संप्रदायिक हमले चिंताजनक हैं।

वृंदा करात ने बुधवार को न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि "देश में अल्पसंख्यक समूहों के सांस्कृतिक मान्यताओँ को खत्म करने का एक मज़बूत प्रयास हो रहा है... हम [भारतीय] संविधान को 'बचाने' के बारे में बात कर रहे हैं। आज के प्रदर्शन का संदेश यही है कि अगर संविधान को बचाना है, तो लोगों को पहले अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आना होगा।”

प्रदर्शन में शामिल हुए पोलित ब्यूरो नेता प्रकाश करात ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस तरह के प्रदर्शन देश भर में वामपंथी दल द्वारा किए जाने चाहिए और होंगे।

हाल की घटनाएं देश में अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से मुसलमानों और ईसाइयों की स्थितिचिंताजनक बन गई हैं। इस साल अगस्त में, मध्य प्रदेश में एक मुस्लिम चूड़ी विक्रेता को एक भीड़ ने बेरहमी से पीटा और कथित रूप से लूट लिया।

इसी तरह, पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) शासित है, जो आज एक सांप्रदायिक राजनीती का केंद्र बन गया है। राज्य भर में आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल सहित हिंदुत्व समूह द्वारा मस्जिदों और मुस्लिम-स्वामित्व वाली दुकानों पर कई हमलों की रिपोर्ट आई है।

पिछले महीने नागरिक समाज समूहों द्वारा जारी एक फैक्ट फाइंडिग रिपोर्ट आई ,जिसके मुताबिक  ईसाई समुदाय को लक्षित करने वाली हिंसा भी बढ़ रही है। इसमें दावा किया गया है कि इस साल अब तक 300 से अधिक ऐसी घटनाएं हुई हैं। इन घटनाओं में उत्तर प्रदेश उक्त कुख्यात सूची में सबसे ऊपर है। इसमें नवीनतम, राष्ट्रीय राजधानी में बीते रविवार को बजरंग दल से होने का दावा करने वाली भीड़ ने पश्चिमी दिल्ली के द्वारका इलाके में मटियाला गांव में एक चर्च के बाहर एकत्रित हो कर 'देश के गद्दारों को, गोलो मारो*** को (देशद्रोहियों को गोली मारो)' के नारे लगाए। भगवा गमछे डालकर उन्होंने अंकुर नरूला मंत्रालय के चर्च/प्रार्थना कक्ष के ढांचे में तोड़फोड़ की। सूत्रों के मुताबिक, यह हमला चर्च के पादरी गौरव अरोड़ा द्वारा रविवार को की गई पूजा के दौरान हुआ।

इसी तरह, 11 नवंबर, 2021 को गाजियाबाद जिले में लोनी पुलिस द्वारा कथित "मुठभेड़" में मुस्लिम युवकों को गोली मारी गई है। ये मुठभेड़ कई सवाल उठाती है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस ‘मुठभेड़’ की घटना में पुलिस ने सात मुसलमान पुरुषों पर फाइरिंग की, जिस कारण सभी के घुटने के नीचे "एक समान चोटें" आईं हैं।  

यह अपने आप में ऐसी कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी अल्पसंख्यकों के पूजा और  प्रथना स्थलों पर हमले या उनको निशाना बनाना आम हो गया है। हाल ही में गुड़गांव में भी दक्षिणपंथी संगठन से जुड़े लोगों ने प्रशासन द्वारा चिन्हित जगहों पर भी मुसलमानों को नमाज़ पढ़ने से रोका था।  हालांकि, वहां के सिख समाज गुरद्वारे में और कुछ हिन्दू व्यपारियों ने अपनी दुकान में नमाज़ अदा करने का ऑफर दिया था। यह हमारे देश की गंगाजमुनी तहजीब को दिखाता है। परंतु दूसरी तरफ बढ़ता धार्मिक उन्माद भी चिंता का सबब बना हुआ है।  

बुधवार को, इन घटनाओं की निंदा करते हुए, सीपीआई(एम) सदस्यों ने भाजपा पर विशुद्ध रूप से चुनावी लाभ के लिए, इस तरह के धार्मिक तनावों को भड़काने का आरोप लगाया है। सीपीआई(एम) दिल्ली राज्य सचिवामंडल सदस्य, साहिबा फारूकी ने कहा: “उत्तर प्रदेश को देखें, जहां चुनाव होने वाले हैं। भाजपा नेताओं और राज्य के सीएम योगी [आदित्यनाथ] की भाषा  अपने आप में सब बताती है।  जिसमें वे अब राज्य में मुसलमानों पर हमले करने के लिए कैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

फारूकी ने दोहराया कि धार्मिक तनाव को बढ़ावा देने के ऐसे प्रयासों के खिलाफ लड़ा जाना चाहिए। "यह सिर्फ मुसलमानों या ईसाइयों की लड़ाई नहीं है, बल्कि हम सभी की है जिन्होंने भारत के संविधान में अपना विश्वास रखा है।"

माकपा के पोलित ब्यूरो सदस्य और अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) के एक प्रमुख किसान नेता हन्नान मुल्ला ने न्यूज़क्लिक को बताया कि देश में चल रहे किसान आंदोलन ने "एक नई भाषा और पहचान प्रदान करने" में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आंदोलन ने जाति और धार्मिक पहचान की जगह उनकी पहचान किसान और मज़दूर के रूप में की है ।

उन्होंने आगे कहा कि, “हम देश में सांप्रदायिक एजेंडा को सफल नहीं होने देंगे। हमने उत्तर प्रदेश में मिशन यूपी शुरू किया, जिसमें हमने तय किया है कि बीजेपी हराएंगे क्योंकि उसने ही आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक तौर पर देश का सत्यानाश कर दिया है।”

इस प्रदर्शन में 23 वर्षीय नामरा भी शामिल थीं, जो दिल्ली दंगा पीड़ित इलाके शिव विहार से आई थीं। उन्होंने कहा, "अब तक, मेरे इलाके में ऐसे कई लोग हैं, जो 2020 के दंगों के दौरान अपनी हार से उबर नहीं पाए हैं। जब देश के अन्य हिस्सों में सांप्रदायिक हिंसा की खबरें आती हैं तो दिल दहल जाता है।”

नमरा ने कहा “ऐसी नफरत की राजनीति कब तक चलती रहेगी। ये सब तुरंत बंद होना चाहिए।"

Communist Party of India – Marxist
CPI-M
communal violence
BJP
RSS
Tripura
New Delhi
Prakash karat
Hannan Mollah
Brinda Karat
riots
Tripura Violence

Related Stories

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?

NEP भारत में सार्वजनिक शिक्षा को नष्ट करने के लिए भाजपा का बुलडोजर: वृंदा करात


बाकी खबरें

  • Rajasthan: Rape accused along with friends attacked Dalit girl with knife
    एम.ओबैद
    राजस्थान: रेप के आरोपी ने दोस्तों के साथ मिलकर दलित लड़की पर चाकू से किया हमला
    22 Nov 2021
    अलवर में शुक्रवार की रात रेप करने वाले शख्स और उसके साथियों द्वारा कथित रूप से 20 वर्षीय दलित लड़की पर हमला किया गया। जिसमें उसकी आंख में गंभीर चोटें आईं। पीड़िता को जयपुर रेफर कर दिया गया है जहां…
  • Tribal Pride Week
    रूबी सरकार
    जनजातीय गौरव सप्ताह में करोड़ों खर्च, लेकिन आदिवासियों को क्या मिला!
    22 Nov 2021
    प्रदेश के आदिवासियों के लिए सवाल बरकरार है कि 52 करोड़, कुछ जानकारों के अनुसार 100 करोड़ सरकारी खर्च से इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर जो सम्मेलन किया गया, क्या वह भाजपा के एजेंडे का हिस्सा भर था? क्योंकि…
  • farmers
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    क़ानूनों की वापसी से मृत लोग वापस नहीं आएंगे- लखीमपुर हिंसा के पीड़ित परिवार
    22 Nov 2021
    बीजेपी को क़ानूनों की वापसी से राजनीतिक फ़ायदे का अनुमान है, जबकि मूल बात यह है कि राज्य मंत्री अजय मिश्रा अब भी खुलेआम घूम रहे हैं, जो आने वाले दिनों में सरकार और किसानों के बीच टकराव की वजह बन सकता…
  • South region leader
    पार्थ एस घोष
    अपने क्षेत्र में असफल हुए हैं दक्षिण एशियाई नेता
    22 Nov 2021
    क्षेत्रीय नेताओं के लिए शुरूआती बिंदु होना चाहिए कि, वे इस मूल वास्तविकता को आंतरिक करें कि दक्षिण एशिया दुनिया के सबसे असमान और संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में से एक है।
  • water pump
    शिवम चतुर्वेदी
    हरियाणा: आज़ादी के 75 साल बाद भी दलितों को नलों से पानी भरने की अनुमति नहीं
    22 Nov 2021
    रोहतक के ककराणा गांव के दलित वर्ग के लोगों का कहना है कि ब्राह्मण समाज के खेतों एवं अन्य जगह पर लगे नल से दलित वर्ग के लोगों को पानी भरने की अनुमति नहीं है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License