NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका
अर्थव्यवस्था
ग्रीस संकट : बैंक और शेयर बाज़ार हुए एक सप्ताह के लिए बंद
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
01 Jul 2015

यूरोपियन केन्द्रीय बैंक द्वारा आपातकालीन नकदी सहायता को कैप किये जाने के बाद ग्रीस सरकार के पास इसके अलावा कोई चारा न बचा कि वह ग्रीस की वित्तीय व्यवस्था में पूँजी पर नियंत्रण करे. बिना आपातकालीन सहायता के ग्रीस के बैंकों के पास इतनी नकदी नहीं है कि वे बड़ी मात्रा में संभव धन निकासी को संबोधित कर सके. प्रधानमंत्री त्सिप्रास ने एक प्रेस सम्मलेन में 6 जुलाई तक बैंकों की छुट्टी की घोषणा की, और विदेश में सभी देनदारी के लिए एक समिति की नियुक्ति की भी घोषणा की. पूँजी पर नियंतरण केवल ग्रीस के बैंकों पर ही नहीं बल्कि सभी विदेशी बैंकों की स्थानीय शाखाओं पर भी लागू की गयी है. कुछ समय के लिए ग्रीस की शेयर बाज़ार को भी बंद कर दिया गया है.

                                                                                                                               

ग्रीस का संकट उस वक्त तेज़ी से बढ़ गया जब ग्रीस सरकार और यूरोपियन आयोग, ग्रीस के क़र्ज़ को लेकर आई.एम्.ऍफ़., यूरोपियन कमीशन और ई.सी.बी. की तिकड़ी किसी नतीजे पर नहीं पहुँच सकी. अपनी अर्थव्यवस्था के 25% संकुचन और ग्रीस के युवाओं में बेरोज़गारी के स्तर का 50-60 प्रतिशत पहुँचाने से और तिकड़ी द्वारा "दंडात्मक ओस्त्रिटी” को जारी रखने का दबाव सिरिजा सरकार के राजनैतिक तौर पर सही नहीं था. क्रुगमन लिखते हैं कि “तिकड़ी ने ठीक उलट किया – उन्होंने त्सिप्रास को ऐसा प्रस्ताव दिया जिसे वह स्वीकार नहीं कर सकता था, और उन्होंने ऐसा जान-बूझकर किया. इसलिए प्रभावी तौर पर अल्टीमेटम तो ग्रीस सरकार को बदलने का था.

सिरिजा का फैसला कि वह अब तिकड़ी के “ब्लेकमेल” में नहीं फसेंगी और जनमत संग्रह काराएगी के फैसले से स्थिति और गंभीर हो गयी. इसका साफ़ मतलब है कि ग्रीस आई.एम्.ऍफ़ को 30 जून तक अदा किये जाने वाली राशि 1.6 अरब यूरो नहीं देगी, हालांकि आई.एम्.ऍफ़ इसकी तिथि एक महीना और आगे बढ़ा सकता है.

अगर ग्रीस के लोग तिकड़ी के प्रस्तावों को ठुकरा देते हैं जैसा की इस जनमत संग्रह से उम्मीद की जा रही है तो इसका मतलब साफ़ होगा कि ग्रीस का उन 19 देशों के मौद्रिक संघ (युरोजोन) से बाहर होना तय है. अभी तक जिस तरह से दोनों पक्षों ने अपना-अपना रास्ता अपनाया है उससे तो यही लगता है जल्दी या देर से ग्रीस युरोजोंन से बाहर हो जाएगा. यह अब तिकड़ी (ट्रोइका) और ग्रीक सरकार के बीच टकराव की राह है। यह स्पष्ट है कि यह टकराव इस तिकड़ी ने पैदा किया है क्योंकि उसने जानबूझकर वे शर्तें रखी जिन्हें सिरिजा स्वीकार नहीं कर सकती थी. युरोजोन के नेता समझते हैं कि उन्होंने युरोजोन की अर्थव्यवस्था को और यूरो को ग्रीस से सुरक्षित बना लिया है इसलिए वे ग्रीस के युरोजोन से बाहर जाने के जोखिम को उठा सकते हैं. लेकिन शुरुवाती आंकड़े कुछ और ही कहानी कहते हैं. इसकी वजह से यूरोप के शेयर बाज़ार और यूरो दोनों पर ही भारी असर पड़ रहा है.

गोल्डमन सचे की भविष्यवाणियों पर जाएँ तो उसके मुताबिक़ अगर ग्रीस बाहर जाता है तो यूरो अपना 10 प्रतिशत मूल्य खो देगा. वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी अघात लग सकता है, हालांकि ग्रीस की जी.डी.पी. बहुत छोटी सी है जोकि यूरोपियन अर्थव्यवस्था का मात्र 1.2 प्रतिशत ही है. लेकिन इस उथल-पुथल के चलते एशिया का शेयर बाज़ार पहले से यूरोप में युरोजोन के स्थायित्व के संकट की वजह से मुहं के बल गिर पड़ा है. सिरिजा की रणनीति के कईं आलोचक भी है. कुछ कहते हैं कि ग्रीस का युरोजोन से बाहर होना ख़ास मुद्दा नहीं है बल्कि वे तो अपने दोनों हाथ पीछे बांधकर समझौता होने की उम्मीद में हैं. लेकिन आखरी वक्त में जनमत संग्रह का साफ़ मतलब है कि ग्रीस का युरोजोन से बाहर होना काफी दर्दनाक होगा बजाये इसके की इसे योजनाबद्ध तरीके से किया जाता.

ग्रीस के पास पांच साल से ज्यादा की रणनीति थी जो प्रकट रूप से काम नहीं कर पा रही है. और तिकड़ी की लिए यह उच्च दांव का खेल है जोकि ओस्त्रिती के असफल होने को स्वीकार नहीं कर रहा है फिर चाहे अर्थव्यवस्था चाहे कितने भी बड़े संकट में फंस गयी हो. ग्रीक की पौराणिक कथाओं का भी प्रोकरसटस के पास कम से कम दो रणनीतियां थी, उसने अपने मेहमानों को कहा या तो वे अपने पैरों को काटकर या उन्हें खींच कर बिस्तर 'फिट' करे. पॉल क्रुगमैन, स्तिग्लित्ज़, पिकेत्टी  और अन्य अर्थशास्त्री ने वूडू अर्थव्यवस्था के बारे में कहा है जिसका कि मौजूदा वित्तीय शक्तियां अनुसरण कर रही हैं.

यूरोप की सभी सरकारों को ऐसी राजनैतिक पार्टियां चला रही हैं जिन्होंने कभी न हिलने वाला अपना सारा विश्वास उड़ाऊ मधुप की ईसप की दंतकथाओं और उद्यमी चींटी के हवाले कर दिया है. उनकी योजना के मुताबिक़ ऑस्ट्रिटी वह कड़वी दवाई है जो अकर्मण्य ग्रीस और अन्य "दक्षिणी" यूरोप को ठीक करने के लिए है. उनके लिए ग्रीस में सिरिजा, स्पेन में पोडेमास और अन्य कोई शक्ति जो ऑस्ट्रिटी पर सवालिया निशान लगाती है, तिकड़ी को बर्दास्त नहीं है. इसीलिए ग्रीस को सबक सिखाना जरूरी है चाहे इससे युरोजोन को कितना भी नुकसान पहुंचे. अगर ग्रीस को रियायत दे दी गयी तो तो वे सभी देश खड़े हो जायेंगे जिन्होंने ऑस्ट्रिटी को लागू करने के समझौते पर दस्तखत करे हैं. यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है यहाँ तक की सोशल- डेमोक्रेट पार्टियां पूरे यूरोप में ग्रीस के खिलाफ दक्षिणपंथी पार्टियों के साथ जुड़ गयी हैं ताकि ग्रीस को कोई रास्ता न मिल सके.

(अनुवाद:महेश कुमार)

डिस्क्लेमर:- उपर्युक्त लेख में वक्त किए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं, और आवश्यक तौर पर न्यूज़क्लिक के विचारों को नहीं दर्शाते ।

 

ग्रीस
यूरोज़ोन
आई.एम.एफ
ई.सी.बी
सिरिजा
जर्मनी

Related Stories

दिल्ली मेट्रो को लाभ कमाने वाले साधन के तौर पर क्यों नहीं देखा जाना चाहिए


बाकी खबरें

  • cartoon
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ख़बर भी-नज़र भी: …लीजिए छापेमारी के साथ यूपी चुनाव बाक़ायदा शुरू!
    18 Dec 2021
    आयकर विभाग की टीम ने आज सपा नेताओं के घर और कैंप कार्यालयों पर छापेमारी की है। इसपर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है कि “भाजपा का हार का डर जितना बढ़ता जायेगा, विपक्षियों पर छापों का दौर भी उतना…
  • sudan
    पवन कुलकर्णी
    सूडान के दारफुर क्षेत्र में हिंसा के चलते 83,000 से अधिक विस्थापित: ओसीएचए 
    18 Dec 2021
    सूडान की राजधानी खार्तूम, खार्तूम नार्थ, ओम्डुरमैन सहित देशभर के कई राज्यों के कई अन्य शहरों में गुरूवार 16 दिसंबर को विरोध प्रदर्शनों के दौरान “दारफुर का खून बहाना बंद करो” और “सभी शहर दारफुर हैं”…
  • air india
    भाषा
    पायलटों की सेवाएं समाप्त करने का निर्णय खारिज किये जाने के खिलाफ एअर इंडिया की अर्जी अदालत ने ठुकराई
    18 Dec 2021
    अदालत ने कहा, ‘‘सरकार और उसकी इकाई एक आदर्श नियोक्ता के रूप में कार्य करने के लिए बाध्य हैं और इसलिए, उसे पायलटों को ऐसे समय संगठन (एअर इंडिया) की सेवा करने के अधिकार से वंचित करते नहीं देखा जा सकता…
  • Goa Legislative Assembly
    राज कुमार
    गोवा चुनाव 2022: राजनीतिक हलचल पर एक नज़र
    18 Dec 2021
    स्मरण रहे कि भाजपा ने जिन दो पार्टियों के बल पर सरकार बनाई थी वो दोनों ही पार्टियां भाजपा का साथ छोड़ चुकी है। गोवा फॉरवर्ड पार्टी कांग्रेस का समर्थन कर रही है तो महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी तृणमूल…
  • Nuh
    सबरंग इंडिया
    नूंह के रोहिंग्या कैंप में लगी भीषण आग का क्या कारण है?
    18 Dec 2021
    हरियाणा के नूंह में लगी आग में रोहिंग्याओं की 32 झुग्गियां जलकर खाक हो गईं। उत्तर भारत के रोहिंग्या शरणार्थी शिविर में इस साल इस तरह की यह तीसरी आग है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License