NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
विज्ञान
अंतरराष्ट्रीय
गर्म जलवायु में मिट्टी व वायुमंडलीय शुष्कता में वृद्धि से सूखे की संभावना बढ़ेगी
नए अध्ययन से पता चलता है कि मौजूदा मृदा शुष्कता और वायुमंडलीय शुष्कता भूमि-वायुमंडल प्रक्रियाओं और फ़ीडबैक (प्रतिक्रिया) लूप की श्रृंखलाबद्ध घटना से बढ़ रही है।
संदीपन तालुकदार
04 Sep 2019
गर्म जलवायु

ये विश्व उस दिशा की ओर बढ़ रहा है जहां आने वाले समय में यह पहले की तुलना में निरंतर और सबसे ज़्यादा सूखे और वायुमंडलीय शुष्कता की मार झेलेगा। और यह जलवायु परिवर्तन और गतिकी से और बढ़ेगा जो भूमि तथा वायुमंडल में निहित है। पीएनएएस जर्नल में एक नए अध्ययन के ज़रिए इसके निष्कर्षों को लेकर रिपोर्ट प्रकाशित हुई है।

इस अध्ययन से पता चलता है कि मौजूदा मृदा शुष्कता और वायुमंडलीय शुष्कता भूमि-वायुमंडल प्रक्रियाओं और फ़ीडबैक (प्रतिक्रिया) लूप की श्रृंखलाबद्ध घटना से बढ़ रही है। वास्तव में ये फ़ीडबैक उष्ण जलवायु में मौजूदा मृदा शुष्कता और वायुमंडलीय शुष्कता को पहले से और अधिक तेज़ कर देगी।

मृदा शुष्कता को मृदा में बहुत कम नमी द्वारा दर्शाया जाता है जबकि वायुमंडलीय शुष्कता को वाष्प दबाव में बहुत अधिक गिरावट द्वारा दर्शाया जाता है। उच्च तापमान और निम्न आर्द्रता के संयोजन के दो कारक हैं जो बड़े पैमाने पर वनस्पति के नाश करते है और पृथ्वी संबंधी कार्बन वृद्धि को कम करते है। पहले के अध्ययनों ने वायुमंडलीय और महासागरीय प्रक्रियाओं तथा गहराते जलवायु परिवर्तनों पर उनके प्रभाव पर ध्यान केंद्रित किया है।

इस अध्ययन के सह-लेखक पियरे जेंटाइन कहते हैं, “मौजूद मृदा शुष्कता और वायुमंडलीय शुष्कता का प्राकृतिक वनस्पति, कृषि, उद्योग और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभावशाली प्रभाव पड़ता है। मौजूद मृदा शुष्कता और वायुमंडलीय शुष्कता की भविष्य में प्रचंडता पारिस्थितिकी तंत्र के लिए विनाशकारी होगा और हमारे जीवन के सभी पहलुओं को काफी प्रभावित करेगा।"

अपने विश्लेषण में शोधकर्ताओं ने भूमि-वायुमंडल प्रक्रियाओं का पता लगाने के लिए पुनर्विश्लेषण (रीएनालिसिस) डेटासेट और मॉडल प्रयोगों को मिश्रित किया जो मौजूदा मृदा शुष्कता और वायुमंडलीय शुष्कता का कारण बना। उन्होंने तब जलवायु मॉडल और सांख्यिकीय तरीकों का इस्तेमाल किया ताकि यह अनुमान लगाया जा सके कि भविष्य की जलवायु संबंधी परिस्थितियों में भूमि-वायुमंडल प्रक्रियाएं किस तरह अधिक निरंतर और तीव्र मृदा शुष्कता और वायुमंडलीय शुष्कता को बढ़ाएगी। भविष्य की जलवायु की परिस्थिति कुछ और नहीं बल्कि एक गर्म वातावरण है। और जैसे जलवायु की उष्णता बढ़ेगी वायुमंडलीय शुष्कता में और अधिक उतार-चढ़ाव होगा। भूमि-वायुमंडलीय प्रक्रियाएं प्रक्रियाओं को और तेज करेंगी और निरंतर शुष्कता उत्पन्न करेंगी।

शोधकर्ता सूमह के सामने जो मुख्य चुनौती थी वह ये कि मौजूदा मृदा शुष्कता और वायुमंडलीय शुष्कता को लेकर भूमि-वायुमंडल के फ़ीडबैक के प्रभाव को अलग कैसे किया जाए। काफ़ी माथापच्ची करने के बाद उन्होंने सीएलएसीई-सीएमआईपी5 (CLACE-CMIP5: ग्लोबल लैंड एटमॉस्फियर कपलिंग एक्सपेरिमेंट - कपल़्ड मॉडल इंटरकम्पेरिज़न प्रोजेक्ट) पाया।

इस घटना को अलग करके दिखाने वाला और प्रभावशाली निष्कर्षों को पाने वाला जेंटाइन समूह अपने-आप में पहला समूह है।

इस अध्ययन के अग्रणी लेखक शा ज़ोऊ कहते हैं, “ज़्यादातर समूहों ने मौजूद शुष्कता और उष्ण तरंगों का आकलन करने पर ध्यान केंद्रित किया है लेकिन हम शुष्कता और उष्ण तरंगों के बीच की तुलना में मृदा शुष्कता और वायुमंडलीय शुष्कता के बीच मज़बूत कपलिंग का निष्कर्ष निकाल रहे हैं। मौजूदा मृदा शुष्कता और वायुमंडलीय शुष्कता का भी कार्बन चक्र पर अधिक प्रभाव पड़ता है और इसलिए हमें लगा कि यह अध्ययन का महत्वपूर्ण बिंदु है।”

इस टीम ने पाया कि वायुमंडल में मृदा की शुष्कता का फीडबैक वायुमंडलीय शुष्कता की निरंतरता और तीव्रता में वृद्धि के लिए काफ़ी हद तक ज़िम्मेदार है। इसके अलावा उनके निष्कर्षों से पता चला कि कई क्षेत्रों में मृदा की नमी और वर्षा का फीडबैक उच्च आवृत्ति वाली कम वर्षा और मिट्टी की नमी की स्थिति में योगदान करती है। बदले में इन फ़ीडबैक प्रक्रियाओं से मौजूदा मृदा शु्ष्कता और अत्यधिक वायुमंडलीय शुष्कता की संभावना बढ़ जाएगी।

जेंटाइन कहते हैं, "यह महत्वपूर्ण है कि हम अपने जलवायु मॉडल में इन प्रक्रियाओं का बेहतर परिमाण निर्धारित करें और मूल्यांकन करें। अगर हम आवृत्ति, अवधि और मृदा शुष्कता तथा वायुमंडलीय शुष्कता की समस्त घटनाओं की तीव्रता और उष्ण जलवायु में उनके परिवर्तनों की विश्वसनीय अनुरूपता प्रदान करते हैं तो मृदा नमी परिवर्तनशीलता और इससे संबंधित फीडबैक दोनों का सटीक मॉडल महत्वपूर्ण है। अंतत: यह हमें इन घटनाओं से जुड़े भविष्य के जोखिमों को कम करने में मदद करेगा।”

Soil Drought
Atmospheric Aridity
Climatic Warming
Increased Drought and Decreased Aridity.

Related Stories


बाकी खबरें

  • indian freedom struggle
    आईसीएफ़
    'व्यापक आज़ादी का यह संघर्ष आज से ज़्यादा ज़रूरी कभी नहीं रहा'
    28 Jan 2022
    जानी-मानी इतिहासकार तनिका सरकार अपनी इस साक्षात्कार में उन राष्ट्रवादी नायकों की नियमित रूप से जय-जयकार किये जाने की जश्न को विडंबना बताती हैं, जो "औपनिवेशिक नीतियों की लगातार सार्वजनिक आलोचना" करते…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2.5 लाख नए मामले, 627 मरीज़ों की मौत
    28 Jan 2022
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 6 लाख 22 हज़ार 709 हो गयी है।
  • Tata
    अमिताभ रॉय चौधरी
    एक कंगाल कंपनी की मालिक बनी है टाटा
    28 Jan 2022
    एयर इंडिया की पूर्ण बिक्री, सरकार की उदारीकरण की अपनी विफल नीतियों के कारण ही हुई है।
  • yogi adityanath
    अजय कुमार
    योगी सरकार का रिपोर्ट कार्ड: अर्थव्यवस्था की लुटिया डुबोने के पाँच साल और हिंदुत्व की ब्रांडिंग पर खर्चा करती सरकार
    28 Jan 2022
    आर्थिक मामलों के जानकार संतोष मेहरोत्रा कहते हैं कि साल 2012 से लेकर 2017 के बीच उत्तर प्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर हर साल तकरीबन 6 फ़ीसदी के आसपास थी। लेकिन साल 2017 से लेकर 2021 तक की कंपाउंड आर्थिक…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    रेलवे भर्ती: अध्यापकों पर FIR, समर्थन में उतरे छात्र!
    28 Jan 2022
    आज के एपिसोड में अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं रेलवे परीक्षा में हुई धांधली पर चल रहे आंदोलन की। क्या हैं छात्रों के मुद्दे और क्यों चल रहा है ये आंदोलन, आइये जानते हैं अभिसार से
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License