NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
भारत
राजनीति
कोविड-19 वैक्सीन: टीके तक पहुंच और भेदभाव की समस्याएं
गैर बीजेपी शासित राज्यों का कहना है कि वैक्सीन आपूर्ति में केंद्र सरकार द्वारा उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। 
रवि दुग्गल
26 Jun 2021
कोरोना

गैर-बीजेपी शासित राज्यों ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार द्वारा वैक्सीन आपूर्ति में उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। रवि दुग्गल लिखते हैं कि वैक्सीन को निजी स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए खोल देने के बाद सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों तक वैक्सीन आपूर्ति में अब और भी ज़्यादा मुश्किलें आएंगी। अब हम वित्तीय आधार पर भेदभाव का एक और स्तर देखेंगे।

—–

21 जून, 2021 एक अहम दिन था। इस दिन उत्तरी गोलार्द्ध में ग्रीष्मकालीन संक्रांति और दक्षिणी गोलार्द्ध में शीतकालीन संक्रांति होती है। अब यह अंतरराष्ट्रीय योग दिवस भी होता है। लेकिन इस साल यह दिन और भी ज़्यादा अहम हो गया, क्योंकि 21 जून को भारत ने करीब़ 81 लाख लोगों को वैक्सीन लगाया था। यह किसी भी एक दिन में लगाई गई वैक्सीन की सबसे ज़्यादा संख्या है। मैंने भी इस दिन कोविशील्ड की पहली डोज़ लगवाई। 

प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो ने 21 जून को रात 9 बजे, भारत के लिए एक अहम सफलता बताते हुए टीकाकरण का आंकड़ा जारी किया। निश्चित तौर पर यह एक बड़ी सफलता है। लेकिन क्या यह प्रगति, मौजूदा वैक्सीन उत्पादन दर और आपूर्ति श्रंखला से जुड़ी समस्याओं के बीच बरकरार रखी जा सकेगी। जैसे- 22 जून को कुल लगाई गई वैक्सीन की संख्या 52 लाख से भी कम हो गई, जो एक बहुत बड़ी गिरावट थी। 

गैर-बीजेपी शासित राज्यों के साथ भेदभाव

21 जून के आंकड़ों पर नज़र डालने भर से राज्यों के बीच कोविड-19 वैक्सीन पर हो रहा भेदभाव साफ़ दिखाई दे जाता है। मैंने यह आंकड़ा लिया और हर राज्य में आबादी के अनुपात में लगाई गई वैक्सीन की दर निकाली। इसके बाद मैंने राज्यों की इस जानकारी को घटते क्रम में लगा दिया। हैरान करने वाली बात यह रही कि शुरुआती आधे राज्य बीजेपी या एनडीए शासित हैं (सूची-1 और ग्राफ-1)। इनमें से कई राज्यों में बहुत ज़्यादा आबादी नहीं है, ना ही यह वह राज्य हैं, जिनमें बहुत ज़्यादा कोरोना फैला था। सूची में निचले हिस्से में रहने वाले आधे राज्य प्राथमिक तौर पर गैर-बीजेपी शासित थे। हालांकि इनमें उत्तरप्रदेश और बिहार भी शामिल हैं। इनमें से कई राज्य कोरोना से बुरे तरीके से प्रभावित रहे हैं।

तो क्या यह इस बात का सूचक है कि गैर-बीजेपी शासित राज्यों के साथ भेदभाव किया जा रहा है, उनकी आपूर्ति में कटौती कर दी जाती है, जिससे समय-समय पर यहां वैक्सीन लगने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। 

तालिका 1: राज्यों में 21 जून को लगाए गए टीकाकरण

Source: https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1729199 

21 जून 2021 को राज्य की कुल आबादी में टीकाकृत आबादी का प्रतिशत

Source: https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1729199 

वैक्सीन पहुंच एक मुद्दा

राज्यों तक वैक्सीन पहुंचाने के अनियमित ढंग के चलते आम लोगों, खासकर गरीब़ और डिजिटल स्तर पर ज़्यादा समझ या संसाधन ना रखने वाले लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। 

मैं आपको अपना उदाहरण देता हूं। मैं मुंबई के बाहरी इलाके में रहता हूं। मैंने कोविन की वेबसाइट पर अप्रैल की शुरुआत में पंजीकरण करवा लिया था। मैं तभी से टीकाकरण में एक स्लॉट लेने की कोशिश कर रहा हूं। लेकिन मेरे राज्य में वैक्सीन की उपलब्धता की कमी के चलते स्लॉट का खुलना अनियमित है। इसके चलते 21 जून तक ही मुझे स्लॉट हासिल करने में कामयाबी नहीं मिली। 

अचानक मीरा-भयंदर नगरपालिका इलाके में, जहां मै रहता हूं, वहां वैक्सीन की बहुत उपलब्धता हो गई। यहां की आबादी 18 लाख है। स्लॉट हासिल करना तेजी से ऊंगली चलाने का खेल बन गया है। यह भी साफ़ हो गया कि मेरे जैसे इंसान को भी स्लॉट हासिल करने में दिक्कत हो रही है, जबकि मेरे पास अच्छी डिजिटल पहुंच है। गरीब़ और डिजिटल स्तर पर सशक्त ना रहने वाले लोगों का क्या?

मेरा टीकाकरण केंद्र एक स्कूल था। जो टीम टीकाकरण कर रही थी, वह स्थानीय नगर निगम से थी। खुली जगह वाला स्कूल होने के चलते यहां शारीरिक दूरी का बखूबी पालन किया जा रहा था। हमें टीका लगवाने में डेढ़ घंटा लगा, जिसमें परीक्षण के 30 मिनट भी शामिल थे। 

प्रतीक्षा क्षेत्र और पंजीकरण करने वाली डेस्क पर कई लोग सीधे वैक्सीन लगवाने के लिए आ रहे थे, क्योंकि उन्हें डिजिटल माध्यमों की उतनी जानकारी नहीं है। इन लोगों को वैक्सीन नहीं दी गई, लेकिन उनसे पास के स्वास्थ्य केंद्र जाकर पंजीकरण में मदद लेने और किसी और दिन आने को कहा गया।

जहां तक टीकाकरण प्रक्रिया की बात है, तो स्टॉफ योग्य दिखाई पड़ रहा था। लेकिन उन्हें कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था, सबसे ज़्यादा मुश्किल रजिस्ट्रेशन डेस्क पर हुई थी। वहां कर्मचारियों को उनके ऐप में हमारे रजिस्ट्रेशन की पुष्टि करने में दिक्कत हो रही थी- पुष्टि करने वाला SMS नहीं आ रहा था, जिसके चलते पूरी प्रक्रिया में देरी हो रही थी। 

डेस्क पर बैठे व्यक्ति ने बताया कि वह लोग खुद का फोन उपयोग कर रहे हैं, जिसके चलते कनेक्टिविटी में दिक्कत हो रही है। यह बहुत हैरान करने वाला था। आखिर क्यों LAN कनेक्शन के साथ डेस्कटॉप या लैपटॉप उपलब्ध नहीं कराए गए, ताकि कनेक्टिविटी बेहतर रह सके।

बल्कि वैक्सीन की पुष्टि करने वाला SMS आया ही नहीं और हमें टीकाकरण कक्ष में जाने के लिए कह दिया गया। वहां तेजी से काम हुआ, क्योंकि नर्स पहले ही टीके के साथ तैयार थीं। उनके सिरिंज भरे हुए थे, यह मुझे दिक्कत भरा लगा। जब मैंने इसकी वज़ह पूछी, तो उन्होंने कहा कि टीकाकरण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए ऐसा किया गया है, ताकि लोगों को इंतज़ार ना करना पड़े। क्या यहां कोल्ड चेन के साथ समझौता किया जा रहा है और वैक्सीन की कुशलता को कम किया जा रहा है?

हमें खुराक दी गई और हमसे परीक्षण कक्ष में 20 मिनट इंतज़ार करने के लिए कहा गया। वहां हम सभी लोगों को दो-दो पैरासेटामॉल दी गईं, जिन्हें रात में खाना था। 

हमारे वहां से जाने के बाद भी पुष्टि करने वाला SMS नहीं आया और कोविन पर मेरी पंजीकरण स्थिति "नॉट वैक्शीनेटेड" दिखा रहा है। जब मैंने रजिस्ट्रेशन डेस्क पर इसकी चर्चा की, तो उन्होंने मुझसे पास में स्वास्थ्य केंद्र जाने के लिए कहा, ताकि इसे सही किया जा सके। स्वास्थ्य केंद्र बाबू का व्यवहार अच्छा था, लेकिन इस समस्या को हल करने में उसे भी 20 मिनट लगे। इसके बाद हमें तात्कालिक प्रमाणपत्र दे दिया गया। मतलब वैक्सीन लगवाने की पूरी प्रक्रिया में काफ़ी कोशिश करनी पड़ी। 

केरल में रहने वाले मेरे दोस्त ने बताया कि एक बार कोविन वेबसाइट पर पंजीकरण के बाद स्थानीय स्वास्थ्यकर्मी आपको फोन करता है और एक तारीख़ और समय देता है। उस वक़्त पर जाकर आप टीका लगवा सकते हैं। जब दुनिया में डिजिटल चीजों का इतना चलन नहीं था, तब चेचक, पोलियो या फिर कोई और वैक्सीन हो, हमें वह अपने स्कूलों या स्वास्थ्य केंद्र या घरों में ही लग जाती थी। फिर कोविड-19 टीकाकरण की प्रक्रिया को इतना कठिन क्यों बना दिया गया?

(रवि दुग्गल एक स्वतंत्र शोधार्थी और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वह सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति, तंत्र और वित्त; बजट, प्रशासन और सामाजिक जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर काम करते हैं। यह उनके निजी विचार हैं।)

यह लेख मूलत: द लीफलेट में प्रकाशित हुआ था।

इस लेख को मूल अंग्रेजी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

Getting vaccinated against Covid-19 – Access Issues and Discrimination

COVID-19
Discrimination
BJP
vaccination centre
Union Government
public health facilities
Covishield Vaccine

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

महामारी में लोग झेल रहे थे दर्द, बंपर कमाई करती रहीं- फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां


बाकी खबरें

  • punjab
    रवि कौशल
    पंजाब चुनाव: पार्टियां दलित वोट तो चाहती हैं, लेकिन उनके मुद्दों पर चर्चा करने से बचती हैं
    12 Feb 2022
    दलित, राज्य की आबादी का 32 प्रतिशत है, जो जट्ट (25 प्रतिशत) आबादी से अधिक है। फिर भी, राजनीतिक दल उनके मुद्दों पर ठीक से चर्चा नहीं करते हैं क्योंकि वे आर्थिक रूप से कमज़ोर, सामाजिक रूप से उत्पीड़ित…
  • union budget
    बी. सिवरामन
    केंद्रीय बजट 2022-23 में पूंजीगत खर्च बढ़ाने के पीछे का सच
    12 Feb 2022
    क्या पूंजीगत खर्च बढ़ने से मांग और रोजगार में वृद्धि होती है?
  • Rana Ayyub
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    जनता के पैसे का इस्तेमाल ख़ुद के लिए नहीं किया : राना अय्यूब
    12 Feb 2022
    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक बयान जारी करते हुए अय्यूब ने कहा कि उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग के अधिकारियों को ‘‘स्पष्ट रूप से दिखाया’’ है कि ‘‘राहत अभियान के धन का कोई भी हिस्सा…
  • sc and yogi
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    सुप्रीम कोर्ट की यूपी सरकार को चेतावनी; सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ वसूली नोटिस वापस लें या हम इसे रद्द कर देंगे
    12 Feb 2022
    शीर्ष अदालत ने कहा कि दिसंबर 2019 में शुरू की गई यह कार्यवाही उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित कानून के खिलाफ है और इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 50 हज़ार नए मामले सामने आए 
    12 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 50,407 नए मामले सामने आए हैं। देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 25 लाख 86 हज़ार 544 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License