NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
वैश्विक भुखमरी इंडेक्स में भारत की ‘तरक़्क़ी’: थैंक्यू मोदी जी!
सरकार-जी ने जी तोड़ मेहनत की, अथक प्रयास किया और देश को वैश्विक भुखमरी इंडेक्स में शुभ संख्या 101वें स्थान पर पहुंचा कर ही दम लिया।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
24 Oct 2021
Hunger Index
प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार: रॉयटर्स

अभी थोड़े दिन पहले ही वैश्विक भुखमरी सूचकांक (Global Hunger Index) की घोषणा हुई। हमारे देश का इसमें 101वां स्थान है। जो कि अपने आप में एक रिकॉर्ड है। पिछले वर्ष 94वां स्थान था। सरकार जी ने सोचा, चौरानवे तो कोई शुभ संख्या थी नहीं, शुभ स्थान नहीं है। तो सरकार जी को लगा कि देश को किसी शुभ स्थान पर ही विराजमान होना चाहिए। अब शुभ संख्या तो एक सौ एक है। किसी को शगुन देना हो तो भी एक सौ एक रुपये का देते हैं। तो सरकार जी ने जी तोड़ मेहनत की, अथक प्रयास किया और देश को विश्व भुखमरी इंडेक्स मैं रिकॉर्ड एक सौ एक वें स्थान पर पहुंचा कर ही दम लिया। एक तरह से देखें तो यह स्थान भी पहला ही है। सौ के बाद पहला।

यह तो सरकार जी की एक वर्ष की उपलब्धि है। अगर पिछले सात वर्षों में देखा जाए तो देश ने सरकार जी के कार्यकाल में वैश्विक भुखमरी इंडेक्स में बहुत ही अधिक 'उन्नति' की है। जब सरकार जी की सरकार बनी थी तो देश भुखमरी में सिर्फ 55वें नंबर पर था। कितने शर्म की बात थी। और अब आ गए हैं 101वें नंबर पर। यानी सात ही साल में 46 स्थान का इजाफा। छयालीस नम्बर की बढ़ोतरी। इतनी लम्बी छलांग, वह भी सिर्फ सात वर्षों में। यह सरकार जी के प्रयासों से ही संभव हुआ है। ठीक ही तो है, सरकार जी हैं तो सब कुछ मुमकिन है।

पर असली गलती तो ऐसे सर्वे करने वालों की ही है। ऐसे इंडेक्स निकालने वालों की ही है। सरकार जी भला कहां गलती कर सकते हैं। अब देखो, भारत एक धर्म प्रधान देश है। हमारे देश में लोग बार-बार व्रत रखते हैं, बात-बात पर व्रत रखते हैं। जब मर्जी खाना छोड़ देते हैं। कभी कभार धार्मिक वजह से एक समय खाते हैं पर अधिकतर महंगाई की वजह से ही एक समय ही खा कर गुजारा करते हैं। अब इंडेक्स निकालने वालों ने इस सब को भी भुखमरी की श्रेणी में रख दिया तो सरकार जी का इसमें क्या दोष।

इसके अतिरिक्त देश में डाइटिंग का भी बहुत ही प्रचलन है। बाज लोग अपना स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए डाइटिंग करते हैं, यानी कि खाना छोड़ देते हैं। और उनसे भी कहीं ज्यादा लोग मजबूरी में डाइटिंग करते हैं। यानी कि यह डायटिंग उनकी मजबूरी होती है। जैसे कि आजकल भी बहुत सारे लोगों ने फल और सब्जियां खाना छोडा़ हुआ है, घी-तेल का छोंक लगाने के मोह का भी त्याग किया हुआ है। अब यह डायटिंग करना या न करना, चाहे लोगों की अपनी इच्छा से हो या मजबूरी से, सरकार जी या उनकी सरकार उसमें कोई भी हस्तक्षेप नहीं करती है। सरकार जी तो महंगाई में भी कोई हस्तक्षेप नहीं करते हैं। जितना बढ़े, बढ़ती जाये। किसी भी चीज का बढ़ना क्या रोकना। चाहे महंगाई हो या भुखमरी। बल्कि सरकार जी और उनकी सरकार तो फल और सब्जियां, खाने का तेल और गैस के सिलेंडर को जान बूझ कर महंगा कर लोगों को मजबूरी की डायटिंग करने में सहयोग ही कर रही है। अब इंडेक्स निकालने वाले हमारे देश में इस तरह डायटिंग करने वालों को भी भूखा रहने वालों में गिन देते हैं तो सरकार जी क्या करें।

सरकार जी बहुत ही पढ़े लिखे हैं। सातवीं के बाद सीधा एंटायर पॉलिटिकल साइंस में एमए, बीए दोनों ही किए हुए हैं। पॉलिटिकल साइंस के अलावा उनका ज्ञान अन्य विषयों में भी एंटायर ही है। विज्ञान, गणित, इतिहास, भूगोल सभी में उन्हें सम्पूर्ण ज्ञान है। इसके अतिरिक्त भी आप किसी भी विषय के बारे में सोचो, तो उसमें भी सरकार जी को एंटायर ज्ञान प्राप्त है। आहार विज्ञान के तो सरकार जी पूरे विशेषज्ञ ही हैं। खुद के खाने के लिए खूब खोज बीन कर कर विदेश से मशरूम मंगवाते हैं। इसीलिए यदि आप सरकार जी की अस्सी के दशक‌ की फोटो देखें तो भुखमरी से ग्रस्त लगते हैं, और अब, इतने हट्टे कट्टे हैं, गाल सेब जैसे लाल हो रहे हैं। हे भगवान! कहीं उनको किसी की नजर ही न लग जाए। 

और जनता के लिए, आम जनता के लिए तो अपनी बड़ी बड़ी फोटो लगे बड़े-बड़े थैलों में थोड़ा थोड़ा सा सड़ा गला अनाज ही बहुत है। गेहूं देना है, चावल देना है, और उसके अलावा थोड़ी बहुत दाल भी दे देनी है। वह तो इसी से स्वस्थ रहेगी और भूख से भी नहीं मरेगी। और अगर कोई भूख से मर भी गया तो मौतों का आंकड़ा छुपाने में तो हमारा रिकार्ड गजब है।

यह मत सोचो कि सरकार जी को समझ नहीं है। सरकार जी को समझ सब है। सबसे ज्यादा समझ है। उन्हें भी पता है कि भुखमरी इस तरह मुफ्त अनाज बांटने से कम नहीं होती है। भुखमरी तो कम होती है लोगों को रोजगार देने से, लोगों की आय बढ़ाने से। लोग अपना अपना मन पसंद पोष्टिक आहार अपने आप खरीद सकें, इससे। पर लोग अपना आहार अपने आप खरीदने लग जाएंगे तो अपने थैले में ही तो डाल कर लायेंगे न। सरकार जी की फोटो छपे थैले में थोड़ी न लायेंगे। तो सरकार जी ने निश्चय किया कि सबकी नौकरी ले लो, सबसे पैसे झटक लो। और फिर सबको अपनी फोटो छपा झोला पकड़ा दो। लोग सरकार जी के अहसान के बोझ तले तो दबेंगे ही, वोट भी देंगे और भूखे भी रहेंगे। अगले वर्ष तक देश को भुखमरी में एक सौ आठवें नम्बर पर जो पहुंचाना है। आखिर देश को और आगे भी तो ले जाना है।

(‘तिरछी नज़र’ एक व्यंग्य स्तंभ है। इसके लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
World Hunger Index
Global Hunger Index
Narendra modi
modi sarkar

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

बना रहे रस: वे बनारस से उसकी आत्मा छीनना चाहते हैं

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...

तिरछी नज़र: ...चुनाव आला रे

चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू

कटाक्ष: इंडिया वालो शर्म करो, मोदी जी का सम्मान करो!


बाकी खबरें

  • यमन पर सऊदी अत्याचार के सात साल
    पीपल्स डिस्पैच
    यमन पर सऊदी अत्याचार के सात साल
    30 Mar 2022
    यमन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाला युद्ध अब आधिकारिक तौर पर आठवें साल में पहुंच चुका है। सऊदी नेतृत्व वाले हमले को विफल करने की प्रतिबद्धता को मजबूत करने के लिए हज़ारों यमन लोगों ने 26 मार्
  • imran khan
    भाषा
    पाकिस्तान में संकटग्रस्त प्रधानमंत्री इमरान ने कैबिनेट का विशेष सत्र बुलाया
    30 Mar 2022
    यह सत्र इस तरह की रिपोर्ट मिलने के बीच बुलाया गया कि सत्ताधारी गठबंधन के सदस्य दल एमक्यूएम-पी के दो मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है। 
  • national tribunal
    राज वाल्मीकि
    न्याय के लिए दलित महिलाओं ने खटखटाया राजधानी का दरवाज़ा
    30 Mar 2022
    “नेशनल ट्रिब्यूनल ऑन कास्ट एंड जेंडर बेस्ड वायोंलेंस अगेंस्ट दलित वीमेन एंड माइनर गर्ल्स” जनसुनवाई के दौरान यौन हिंसा व बर्बर हिंसा के शिकार 6 राज्यों के 17 परिवारों ने साझा किया अपना दर्द व संघर्ष।
  • fracked gas
    स्टुअर्ट ब्राउन
    अमेरिकी फ्रैक्ड ‘फ्रीडम गैस’ की वास्तविक लागत
    30 Mar 2022
    यूरोप के अधिकांश हिस्सों में हाइड्रोलिक फ्रैक्चरिंग का कार्य प्रतिबंधित है, लेकिन जैसा कि अब यूरोपीय संघ ने वैकल्पिक गैस की आपूर्ति के लिए अमेरिका की ओर रुख कर लिया है, ऐसे में पिछले दरवाजे से कितनी…
  • lakhimpur kheri
    भाषा
    लखीमपुर हिंसा:आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने के लिए एसआईटी की रिपोर्ट पर न्यायालय ने उप्र सरकार से मांगा जवाब
    30 Mar 2022
    पीठ ने कहा, ‘‘ एसआईटी ने उत्तर प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को जांच की निगरानी कर रहे न्यायाधीश के दो पत्र भेजे हैं, जिन्होंने मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने के वास्ते राज्य…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License